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लातेहार जिला के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत गढ़बुढ़नी पंचायत के चुटिया टोला के चुरखाड़ में इन दिनों भीषण जल संकट गहरा गया है। 48 घंटे पहले हुई तेज बारिश के कारण नदी का गंदा पानी ग्रामीणों के एकमात्र सहारा रहे चुआड़ी में घुस गया है, जिससे पूरा टोला शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के सभी जलमीनार सालों से खराब पड़े हैं और नल-जल योजना का लाभ भी आज तक उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में नदी किनारे खुद से बनाया गया चुआड़ी ही उनकी प्यास बुझाने, खाना बनाने और बच्चों को पानी पिलाने का एकमात्र स्रोत था। हालांकि, दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी में उफान आ गया और बाढ़ का कीचड़, कचरा व गंदगी से भरा पानी सीधे चुआड़ी में भर गया, जिससे वह पानी अब पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही है और इसके इस्तेमाल से बीमारी का खतरा है। चुआड़ी के खराब होने के बाद से लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक दूर-दराज के झरनों और डोभा की तलाश में भटक रहे हैं। कई परिवारों के पास तो आज खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं है। एक ग्रामीण महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 48 घंटे से उनके बच्चे प्यासे हैं और नहाने-धोने तो दूर, पीने को एक लोटा साफ पानी भी नहीं मिल रहा। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी नल खराब हैं और अब नदी ने भी धोखा दे दिया है, ऐसे में गरीब लोग कहाँ जाएं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने एक वीडियो जारी कर सांसद, विधायक, उपायुक्त लातेहार और प्रखंड प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी प्रमुख मांग है कि खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत करके गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

1 hr ago
user_Manoj dutt dev
Manoj dutt dev
Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
1 hr ago

लातेहार जिला के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत गढ़बुढ़नी पंचायत के चुटिया टोला के चुरखाड़ में इन दिनों भीषण जल संकट गहरा गया है। 48 घंटे पहले हुई तेज बारिश के कारण नदी का गंदा पानी ग्रामीणों के एकमात्र सहारा रहे चुआड़ी में घुस गया है, जिससे पूरा टोला शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के सभी जलमीनार सालों से खराब पड़े हैं और नल-जल योजना का लाभ भी आज तक उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में नदी किनारे खुद से बनाया गया चुआड़ी ही उनकी प्यास बुझाने, खाना बनाने और बच्चों को पानी पिलाने का एकमात्र स्रोत था। हालांकि, दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी में उफान आ गया और बाढ़ का कीचड़, कचरा व गंदगी से भरा पानी सीधे चुआड़ी में भर गया, जिससे वह पानी अब पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही है और इसके इस्तेमाल से बीमारी का खतरा है। चुआड़ी के खराब होने के बाद से लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक दूर-दराज के झरनों और डोभा की तलाश में भटक रहे हैं। कई परिवारों के पास तो आज खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं है। एक ग्रामीण महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 48 घंटे से उनके बच्चे प्यासे हैं और नहाने-धोने तो दूर, पीने को एक लोटा साफ पानी भी नहीं मिल रहा। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी नल खराब हैं और अब नदी ने भी धोखा दे दिया है, ऐसे में गरीब लोग कहाँ जाएं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने एक वीडियो जारी कर सांसद, विधायक, उपायुक्त लातेहार और प्रखंड प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी प्रमुख मांग है कि खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत करके गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

More news from Jharkhand and nearby areas
  • झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है। यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।
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    झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है।

यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।
    user_Yuva team jharkhand
    Yuva team jharkhand
    Latehar, Jharkhand•
    16 hrs ago
  • झारखंड में सड़कों की बदहाल स्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है, जहाँ यह दावा किया गया है कि राज्य में सड़कें बनाने के बजाय केवल तालाब ही बनते हैं। पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड की सड़कें गड्ढों से इतनी भरी हुई हैं कि वे किसी तालाब से कम नहीं दिखतीं। इसके साथ ही, नेताओं पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जहाँ नेताओं की जेबें भरती रहती हैं, वहीं राज्य की सड़कों के गड्ढे कभी नहीं भरते।
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    झारखंड में सड़कों की बदहाल स्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है, जहाँ यह दावा किया गया है कि राज्य में सड़कें बनाने के बजाय केवल तालाब ही बनते हैं। पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड की सड़कें गड्ढों से इतनी भरी हुई हैं कि वे किसी तालाब से कम नहीं दिखतीं। इसके साथ ही, नेताओं पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जहाँ नेताओं की जेबें भरती रहती हैं, वहीं राज्य की सड़कों के गड्ढे कभी नहीं भरते।
    user_Sirf such
    Sirf such
    Local News Reporter लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • एक मुस्लिम महिला को गांव के लोगों ने उसके घर से निकाल दिया है। महिला ने दावा किया है कि वह पिछले 30 सालों से उसी घर में रह रही थी, जिससे उसे बेदखल किया गया है।
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    एक मुस्लिम महिला को गांव के लोगों ने उसके घर से निकाल दिया है। महिला ने दावा किया है कि वह पिछले 30 सालों से उसी घर में रह रही थी, जिससे उसे बेदखल किया गया है।
    user_Badri Narayan Sahu
    Badri Narayan Sahu
    किसको, लोहरदगा, झारखंड•
    15 hrs ago
  • एक सोशल मीडिया पोस्ट में घर के भीतर उपयोग के लिए लकड़ी के बजाय पत्थर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। यह पोस्ट घर में पत्थर के उपयोग को प्राथमिकता देने के अनोखे सुझाव पर आश्चर्य व्यक्त करता है।
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    एक सोशल मीडिया पोस्ट में घर के भीतर उपयोग के लिए लकड़ी के बजाय पत्थर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। यह पोस्ट घर में पत्थर के उपयोग को प्राथमिकता देने के अनोखे सुझाव पर आश्चर्य व्यक्त करता है।
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    15 hrs ago
  • प्रस्तुत जानकारी अपने क्षेत्र की सभी खबरें देखने और उन खबरों को साझा करके कमाई करने की सुविधा से संबंधित है।
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    प्रस्तुत जानकारी अपने क्षेत्र की सभी खबरें देखने और उन खबरों को साझा करके कमाई करने की सुविधा से संबंधित है।
    user_News,hamr lawalong
    News,hamr lawalong
    Local Politician लवालांग, चतरा, झारखंड•
    8 hrs ago
  • लातेहार जिला के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत गढ़बुढ़नी पंचायत के चुटिया टोला के चुरखाड़ में इन दिनों भीषण जल संकट गहरा गया है। 48 घंटे पहले हुई तेज बारिश के कारण नदी का गंदा पानी ग्रामीणों के एकमात्र सहारा रहे चुआड़ी में घुस गया है, जिससे पूरा टोला शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के सभी जलमीनार सालों से खराब पड़े हैं और नल-जल योजना का लाभ भी आज तक उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में नदी किनारे खुद से बनाया गया चुआड़ी ही उनकी प्यास बुझाने, खाना बनाने और बच्चों को पानी पिलाने का एकमात्र स्रोत था। हालांकि, दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी में उफान आ गया और बाढ़ का कीचड़, कचरा व गंदगी से भरा पानी सीधे चुआड़ी में भर गया, जिससे वह पानी अब पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही है और इसके इस्तेमाल से बीमारी का खतरा है। चुआड़ी के खराब होने के बाद से लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक दूर-दराज के झरनों और डोभा की तलाश में भटक रहे हैं। कई परिवारों के पास तो आज खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं है। एक ग्रामीण महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 48 घंटे से उनके बच्चे प्यासे हैं और नहाने-धोने तो दूर, पीने को एक लोटा साफ पानी भी नहीं मिल रहा। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी नल खराब हैं और अब नदी ने भी धोखा दे दिया है, ऐसे में गरीब लोग कहाँ जाएं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने एक वीडियो जारी कर सांसद, विधायक, उपायुक्त लातेहार और प्रखंड प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी प्रमुख मांग है कि खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत करके गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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    लातेहार जिला के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत गढ़बुढ़नी पंचायत के चुटिया टोला के चुरखाड़ में इन दिनों भीषण जल संकट गहरा गया है। 48 घंटे पहले हुई तेज बारिश के कारण नदी का गंदा पानी ग्रामीणों के एकमात्र सहारा रहे चुआड़ी में घुस गया है, जिससे पूरा टोला शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव के सभी जलमीनार सालों से खराब पड़े हैं और नल-जल योजना का लाभ भी आज तक उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में नदी किनारे खुद से बनाया गया चुआड़ी ही उनकी प्यास बुझाने, खाना बनाने और बच्चों को पानी पिलाने का एकमात्र स्रोत था। हालांकि, दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी में उफान आ गया और बाढ़ का कीचड़, कचरा व गंदगी से भरा पानी सीधे चुआड़ी में भर गया, जिससे वह पानी अब पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही है और इसके इस्तेमाल से बीमारी का खतरा है।

चुआड़ी के खराब होने के बाद से लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक दूर-दराज के झरनों और डोभा की तलाश में भटक रहे हैं। कई परिवारों के पास तो आज खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं है। एक ग्रामीण महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 48 घंटे से उनके बच्चे प्यासे हैं और नहाने-धोने तो दूर, पीने को एक लोटा साफ पानी भी नहीं मिल रहा। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी नल खराब हैं और अब नदी ने भी धोखा दे दिया है, ऐसे में गरीब लोग कहाँ जाएं।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने एक वीडियो जारी कर सांसद, विधायक, उपायुक्त लातेहार और प्रखंड प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी प्रमुख मांग है कि खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत करके गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    1 hr ago
  • लोहरदगा जिले के सेन्हा अंचल के उगरा पंचायत स्थित टेंगरिया ग्राम में एक विवादित मामला सामने आया है। वर्ष 2025 से आदिवासी समाज का एक परिवार समाज के अगुआ की अगुआई में धार्मिक स्थल पर बिना पहान पुजार की पूजा-अर्चना के बाद भी झंडा लगा रहा था। इस कार्रवाई को लेकर समस्त आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई। समाज ने उस परिवार के प्रति रोष प्रकट करते हुए धार्मिक स्थल से झंडा हटा दिया। समस्त आदिवासी समाज द्वारा उस परिवार को कड़ी चेतावनी भी दी गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि धार्मिक स्थल पर झंडा लगाने को लेकर समाज को आपत्ति है।
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    लोहरदगा जिले के सेन्हा अंचल के उगरा पंचायत स्थित टेंगरिया ग्राम में एक विवादित मामला सामने आया है। वर्ष 2025 से आदिवासी समाज का एक परिवार समाज के अगुआ की अगुआई में धार्मिक स्थल पर बिना पहान पुजार की पूजा-अर्चना के बाद भी झंडा लगा रहा था। इस कार्रवाई को लेकर समस्त आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई।

समाज ने उस परिवार के प्रति रोष प्रकट करते हुए धार्मिक स्थल से झंडा हटा दिया। समस्त आदिवासी समाज द्वारा उस परिवार को कड़ी चेतावनी भी दी गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि धार्मिक स्थल पर झंडा लगाने को लेकर समाज को आपत्ति है।
    user_आलोक कुमार
    आलोक कुमार
    पत्रकार सेन्हा, लोहरदगा, झारखंड•
    6 hrs ago
  • हाजीपुर में एक महिला BPSC टीचर बनने के तुरंत बाद, अपने पति को छोड़कर एक प्रेमी के साथ चली गई। जब इस मामले पर बबीता मिश्रा ने सवाल पूछे, तो कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति के पसीने छूट गए। एक बच्चे ने खुलासा किया कि उसने अपनी माँ को नेपाल में एक 'अंकल' के साथ देखा था।
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    हाजीपुर में एक महिला BPSC टीचर बनने के तुरंत बाद, अपने पति को छोड़कर एक प्रेमी के साथ चली गई।

जब इस मामले पर बबीता मिश्रा ने सवाल पूछे, तो कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति के पसीने छूट गए। एक बच्चे ने खुलासा किया कि उसने अपनी माँ को नेपाल में एक 'अंकल' के साथ देखा था।
    user_Aakash Kumar paswan
    Aakash Kumar paswan
    Artist तांडवा, चतरा, झारखंड•
    1 hr ago
  • लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के भड़गांव में सोमवार को आम तोड़ने के दौरान एक बच्चा पेड़ से गिरकर घायल हो गया। इस घटना के बाद एक व्यक्ति ने मानवता का परिचय देते हुए अपने निजी वाहन से घायल बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया।
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    लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के भड़गांव में सोमवार को आम तोड़ने के दौरान एक बच्चा पेड़ से गिरकर घायल हो गया। इस घटना के बाद एक व्यक्ति ने मानवता का परिचय देते हुए अपने निजी वाहन से घायल बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया।
    user_आलोक कुमार
    आलोक कुमार
    पत्रकार सेन्हा, लोहरदगा, झारखंड•
    2 hrs ago
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