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स्थानीय सड़कों पर लगातार बारिश के कारण हुए जलजमाव ने लोगों की परेशानी काफी बढ़ा दी है। बारिश का यह पानी अब आम लोगों के लिए आफत बन गया है, जिससे आवागमन और दैनिक जीवन में कठिनाइयां आ रही हैं। इस स्थिति से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दुकानदारों में भी गहरा आक्रोश है, क्योंकि उनकी शिकायत है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर समस्या पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया है।
Reporter: Nitish Kumar
स्थानीय सड़कों पर लगातार बारिश के कारण हुए जलजमाव ने लोगों की परेशानी काफी बढ़ा दी है। बारिश का यह पानी अब आम लोगों के लिए आफत बन गया है, जिससे आवागमन और दैनिक जीवन में कठिनाइयां आ रही हैं। इस स्थिति से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दुकानदारों में भी गहरा आक्रोश है, क्योंकि उनकी शिकायत है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर समस्या पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया है।
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- पुरैनी प्रखंड की नरदह पंचायत में वार्ड संख्या 1 से 4 तक जाने वाली कच्ची सड़क इन दिनों लोगों के लिए बड़ी आफत बन चुकी है। रेहनगाह चौक से कब्रगाह होते हुए बड़ी नरदह को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह से बदहाल हो गया है, जहाँ जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में घुटने भर पानी जमा है। बारिश के बाद तो यह सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है, जिससे पानी के नीचे छिपे गड्ढे राहगीरों और बाइक सवारों के लिए हर दिन जानलेवा खतरा बन रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस सड़क पर कई लोग फिसलकर गिर चुके हैं, जिससे छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। शाम ढलते ही यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से इस महत्वपूर्ण सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है और जल निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण हल्की बारिश में भी यह पूरा रास्ता जलमग्न हो जाता है। रेहनगाह चौक के समीप सप्ताह में तीन दिन लगने वाले बाजार तक पहुँचने के लिए भी आसपास के ग्रामीण रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर इस जलभराव वाली कच्ची सड़क को पार करते हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और ग्रामीणों में प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि समस्या से कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया है, लेकिन हर बार सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला। विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले जनप्रतिनिधि इस बदहाल सड़क की ओर देखने तक नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत, गड्ढों की भराई और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन करेंगे। लोगों का आरोप है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं।1
- Post by BikramKumar1
- बिहार के धमदाहा उत्तर में एक गली की हालत को 'कुछ ऐसी' बताया गया है, जो कंचन यादव से संबंधित किसी पूर्व अवधि की है।1
- आज पूरे देश में ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, का त्योहार बड़े उत्साह और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में बिहार के भागलपुर जिले के सनोखर थाना क्षेत्र में स्थित चखमजा डोमासी ईदगाह में भी मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठे हुए और बकरीद की नमाज़ अदा की। इस पावन अवसर पर ईदगाह में भारी भीड़ उमड़ी, जहां अमन और भाईचारे के लिए खास दुआएं मांगी गईं।1
- एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें एक शराबी युवक ने एक पिता के सामने ही उनकी बेटी का हाथ पकड़ लिया। इस आपत्तिजनक हरकत के बाद उस शराबी युवक का जो 'हाल' हुआ है, वह पूरा घटनाक्रम इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है।1
- बीती रात आए तेज आंधी और चक्रवाती तूफान ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे मक्का की फसल को पहले ही हुए नुकसान के बाद अब केले की खेती भी पूरी तरह तबाह हो गई है। किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं, जिससे उनकी कमर टूट गई है। तेज हवा और बारिश के कारण कई गांवों में केले के पेड़ जमीन पर गिर गए, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई। किसान अभिषेक कुमार महतो ने बताया कि उन्हें अकेले करीब 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “पहले मक्का की फसल खराब हुई थी, अब केला भी पूरी तरह गिर गया। बहुत नुकसान हुआ है। सरकार से मदद की उम्मीद है।” स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे मौसम बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती करना अत्यंत मुश्किल होता जा रहा है। कई किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल, प्रभावित किसान सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, और अब देखना होगा कि उन्हें कब तक सहायता मिल पाती है।1
- मधेपुरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और इंडियन डेंटल एसोसिएशन (IDA) की एक संयुक्त बैठक उस समय गरमा गई, जब जिले के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार के खिलाफ डॉक्टरों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया। आईएमए भवन में आयोजित इस बैठक में जिले भर से लगभग 50 डॉक्टर शामिल हुए, जिसकी अध्यक्षता आईएमए जिलाध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने की। बैठक में डॉक्टरों ने सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी क्लीनिक और अस्पताल संचालकों को लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बिना किसी ठोस कारण के निजी अस्पतालों पर जाकर अभद्र व्यवहार किया जाता है और चिकित्सकों को मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार यादव ने सिविल सर्जन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके व्यवहार को बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं बताया, यहां तक कि उन्होंने इसे मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति का व्यवहार बताया। आईएमए सचिव डॉ. अमित आनंद ने भी सिविल सर्जन के व्यवहार को अशोभनीय बताते हुए उनकी 'मानसिक गरीबी' का जिक्र किया। डॉक्टरों ने एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से मांग की कि राज्य स्तर पर एक समिति गठित कर सिविल सर्जन की मानसिक जांच कराई जाए और उचित कार्रवाई की जाए। आईडीए के डॉ. प्रमोद कुमार ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का हवाला देते हुए बताया कि 40 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों के लिए रजिस्ट्रेशन का कोई स्पष्ट नियम नहीं है, फिर भी सिविल सर्जन नियमों की आड़ में डॉक्टरों के साथ बदतमीजी करते हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि सिविल सर्जन ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो आगे आंदोलन और सख्त कार्रवाई की रणनीति बनाई जाएगी। इस बैठक में डॉ. नायडू कुमारी, डॉ. गंगेश गुंजन, डॉ. बीएन भारती सहित कई अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।4
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