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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, “एक्सप्रेस” की एक रिपोर्ट का “ग्लोबल” असर सियासत में “गज़ब है भैया!” वाली स्थिति पैदा कर चुका है। मुख्यमंत्री पर सवाल उठने के बाद, आरोपों से बचने के लिए “सनातन” को ढाल बना लिया गया है।
KHABAR WITH KK
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, “एक्सप्रेस” की एक रिपोर्ट का “ग्लोबल” असर सियासत में “गज़ब है भैया!” वाली स्थिति पैदा कर चुका है। मुख्यमंत्री पर सवाल उठने के बाद, आरोपों से बचने के लिए “सनातन” को ढाल बना लिया गया है।
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- मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, “एक्सप्रेस” की एक रिपोर्ट का “ग्लोबल” असर सियासत में “गज़ब है भैया!” वाली स्थिति पैदा कर चुका है। मुख्यमंत्री पर सवाल उठने के बाद, आरोपों से बचने के लिए “सनातन” को ढाल बना लिया गया है।1
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के सांई खेड़ा नगर में सीएम राइज विद्यालय बनकर तैयार हो गया है। यह विद्यालय पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक बड़ी सौगात थी, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगे बढ़ाया। क्षेत्रीय विधायक मंत्री राव उदयप्रताप सिंह के प्रयासों से यह विद्यालय जल्द ही बनकर तैयार हो गया है, जिसमें करोड़ों रुपये की लागत आई है। शासकीय विद्यालय सांदीपनि नाम से तैयार हुए इस संस्थान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इसके माध्यम से गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा फायदा मिलेगा।1
- उपयोगकर्ता ने अपनी एक नई पोस्ट साझा की है और अपने सभी दोस्तों से अपील की है कि वे इसे लाइक करें और उन्हें फॉलो करें। पोस्ट में इस अनुरोध को बार-बार दोहराया गया है।1
- Post by User32131
- विदिशा में मोहर्रम की दसवीं तारीख पर शुक्रवार को बाबड़ी वाले बाबा सहित विभिन्न सवारियाँ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कर्बला के लिए रवाना होंगी। इस अवसर पर, बाबड़ी वाले बाबा की सवारी सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल पेश करेगी, क्योंकि वर्षों से एक हिंदू कुशवाहा परिवार इसकी सेवा करता आ रहा है। बड़े बाजार स्थित बाबड़ी वाले बाबा की मजार लोगों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है, जिसके ठीक सामने बजरंगबली मंदिर है। यहाँ दोनों धर्मों के लोग बिना किसी भेदभाव के अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं, जो विदिशा की गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। कुशवाहा परिवार के अनुसार, उनके पूर्वजों ने बाबा की सेवा शुरू की थी और अब परिवार की पाँचवीं पीढ़ी इस परंपरा को निभा रही है। हर साल परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य के सिर पर बाबा की सवारी उठाई जाती है, और फूलों तथा पारंपरिक सजावट से सजी इस सवारी को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचते हैं। परिवार का कहना है कि इस आयोजन के लिए किसी भी तरह का चंदा नहीं लिया जाता है, बल्कि पूरी व्यवस्था परिवार द्वारा स्वयं की जाती है। श्रद्धालु अपनी इच्छा से सेवा और भंडारे में सहयोग करते हैं। इस साल भी सवारी के लिए मुंबई से पारंपरिक ढोल और दिल्ली से सेहरा मंगवाया गया है। परिवार के सदस्य रोहित कुशवाहा ने बताया कि यह सवारी अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विदिशा की पहचान बन चुकी है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय समान रूप से भाग लेते हैं। स्थानीय निवासी विनोद कुमार सोनी के अनुसार, यह परंपरा दशकों से बिना किसी रुकावट के चली आ रही है और आज भी सामाजिक एकता व भाईचारे का संदेश देती है।4
- Sagar tu udsha rod and light pink color mein background photo Sagar tu udsha4
- मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सिलवानी में कथित तौर पर मूंग का एक बड़ा खेल सामने आया है, जिसमें 'डबल मुनाफे के कथित मास्टर प्लान' और करोड़ों के गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मामले में अर्पित जैन को जेल भेजा जा चुका है, जबकि नामजद अवधेश गौर और एकता जैन अब तक कानून की पकड़ से फरार बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा गोरखधंधा सरकार का माल चुराकर उसे वापस सरकार को ही बेचने के कथित फार्मूले पर आधारित है। इस कथित खेल के तहत, सिलवानी स्थित सर्वोदय वेयरहाउस से 1760 बोरी मूंग का हेरफेर किया गया है। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ये बड़े चेहरे कब तक कानून की पकड़ से बचते रहेंगे।1
- सागर जिले की सबसे बड़ी पंचायत, गौरझामर, का विकास मुश्किलों से घिरा है, खासकर स्वच्छता और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर। ग्राम की आबादी की जल निकासी पूरी तरह से नालियों पर निर्भर करती है, लेकिन उनमें सालों का कचरा जमा होने के कारण बरसात के मौसम में पानी ठीक से नहीं निकल पाता। इससे जल प्रवाह की जगह जमाव होता है और सड़कों पर तालाब जैसी स्थिति बन जाती है। यह गंभीर समस्या मुख्य बस स्टैंड के नजदीक, सरस्वती शिशु मंदिर प्राथमिक शाला के पास और ग्राम की आधी आबादी के पेयजल सप्लाई केंद्र 'टंकी' के नजदीक के मोहल्ले को प्रभावित करती है। यही मार्ग शासकीय अस्पताल तक भी पहुँचता है। जल निकासी के लिए नालियों पर बनी लगभग 2 फीट चौड़ी पुलियाएँ, जिनसे तेज बहाव का पानी निकलना पहले ही कठिन होता है, वे भी आधी कचरे से जमी हुई हैं। इस अवरोध के कारण गौरझामर की आधी आबादी का पानी निकलने की जगह जाम हो जाती है और बारिश के पानी के साथ सड़क पर तालाब जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।1