मधेपुरा में दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरों से विवाद, ‘गंदगी रोकने’ के प्रयोग पर उठा सवाल बिहार के मधेपुरा में नगर परिषद का एक प्रयोग अब विवाद का कारण बन गया है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें बनाई गईं, लेकिन इस पहल ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर दिया है। स्थानीय लोग इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे स्वच्छता अभियान का हिस्सा बता रहा है। दरअसल मधेपुरा में इन दिनों दीवारों पर बनी पेंटिंग चर्चा का विषय बन गई है। नगर परिषद ने शहर में गंदगी और खुले में पेशाब की समस्या को रोकने के लिए सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें बनवाई हैं। बाइट-1 सुधीर भगत, बीजेपी नेता बाइट -2- सौरभ यादव, स्थानीय लेकिन इस पहल का विरोध भी शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देवी-देवताओं का स्थान मंदिरों में होता है, न कि उन जगहों पर जहां गंदगी होती है। उनका आरोप है कि इस तरह की तस्वीरें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही हैं। बाइट-विशाल राय, पेंटर वहीं, मौके पर काम कर रहे पेंटर का कहना है कि उन्हें नगर परिषद की ओर से निर्देश मिला था कि ऐसी जगहों पर पेंटिंग बनाई जाए, जहां लोग अक्सर गंदगी करते हैं, ताकि इस पर रोक लग सके। बाइट- तान्या कुमारी, ईओ, नगर परिषद मधेपुरा नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी तान्या कुमारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह कदम स्वच्छता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस पर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। अब सवाल यह है कि क्या स्वच्छता के नाम पर धार्मिक प्रतीकों का इस तरह इस्तेमाल उचित है? या फिर प्रशासन को कोई दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए था। फिलहाल, मधेपुरा में यह मुद्दा आस्था और प्रशासनिक फैसलों के बीच टकराव का रूप ले चुका है।
मधेपुरा में दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरों से विवाद, ‘गंदगी रोकने’ के प्रयोग पर उठा सवाल बिहार के मधेपुरा में नगर परिषद का एक प्रयोग अब विवाद का कारण बन गया है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें बनाई गईं, लेकिन इस पहल ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर दिया है। स्थानीय लोग इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे स्वच्छता अभियान
का हिस्सा बता रहा है। दरअसल मधेपुरा में इन दिनों दीवारों पर बनी पेंटिंग चर्चा का विषय बन गई है। नगर परिषद ने शहर में गंदगी और खुले में पेशाब की समस्या को रोकने के लिए सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें बनवाई हैं। बाइट-1 सुधीर भगत, बीजेपी नेता बाइट -2- सौरभ यादव, स्थानीय लेकिन इस पहल का विरोध भी शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देवी-देवताओं का स्थान मंदिरों में होता है,
न कि उन जगहों पर जहां गंदगी होती है। उनका आरोप है कि इस तरह की तस्वीरें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही हैं। बाइट-विशाल राय, पेंटर वहीं, मौके पर काम कर रहे पेंटर का कहना है कि उन्हें नगर परिषद की ओर से निर्देश मिला था कि ऐसी जगहों पर पेंटिंग बनाई जाए, जहां लोग अक्सर गंदगी करते हैं, ताकि इस पर रोक लग सके। बाइट- तान्या कुमारी, ईओ, नगर परिषद मधेपुरा नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी तान्या
कुमारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह कदम स्वच्छता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस पर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। अब सवाल यह है कि क्या स्वच्छता के नाम पर धार्मिक प्रतीकों का इस तरह इस्तेमाल उचित है? या फिर प्रशासन को कोई दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए था। फिलहाल, मधेपुरा में यह मुद्दा आस्था और प्रशासनिक फैसलों के बीच टकराव का रूप ले चुका है।
- मधेपुरा से इस वक्त की बड़ी खबर है, जहां चौसा थाना क्षेत्र में हुए गोलीकांड ने अब गंभीर रूप ले लिया है। गोली लगने से घायल युवक दिलखुश कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जिसके बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि चौसा और घोषई के बीच नहर के पास तीन अज्ञात अपराधियों ने दिलखुश कुमार को गोली मार दी थी। गोली युवक की पीठ में लगी और पेट को चीरते हुए बाहर निकल गई। गंभीर हालत में उसे पहले चौसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां देर रात उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की खबर फैलते ही गुस्साए ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और उदाकिशुनगंज-भटगामा एसएच-58 को जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक सड़क जाम रहा, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर पहुंचे उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ अविनाश कुमार और एसडीओ पंकज घोष ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया। वहीं पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए एक नामजद आरोपी ललन कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बाइट ---अविनाश कुमार एसडीपीओ उदाकिशुनगंज मधेपुरा4
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- सुपौल। जिलाधिकारी, सुपौल की अध्यक्षता एवं उप विकास आयुक्त, सुपौल की उपस्थिति में शिक्षा विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक की गई। जिसमें विभिन्न संभाग जैसे निजी विद्यालय में नामांकन, निजी विद्यालय का प्रस्वीकृक्ति एवं नवीनीकरण, विद्यालय को विभिन्न मद में दी गई राशि के व्यय, शिक्षा विभाग के नशामुक्ति, गर्ल्स एडोलेसेंट (माहवारी की जानकारी) कस्तुरबा विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति, छात्रावास में हो रहे असैनिक निर्माण कार्य, आंगनबाड़ी विद्यालय में बालमेला, ट्यूनिंग ऑफ स्कूल, असैनिक निर्माण कार्य इत्यादि की समीक्षा की गई। समीक्षा में निम्न निदेश दिये गये :- 1. कस्तुरबा आवासीय विद्यालय में नामांकन की तुलना में कम उपस्थिति के लिए विशेष अभियान चलाने का निदेश दिया गया। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी रिक्त सीट को भरने का निदेश दिया गया। कस्तुरबा छात्रावास में मरम्मति कार्य की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी द्वारा निदेश दिया गया कि अविलंब गुणवत्तापूर्ण कार्य करवाते हुए राशि का सदुपयोग किया जाय। कस्तुरबा आवासीय विद्यालय में व्यय 72.5 प्रतिशत है। सुपौल, राघोपुर का व्यय कम है इस पर चिंता व्यक्त की गई तथा आवश्यक निदेश दिया गया। 2. निजी विद्यालय द्वारा ज्ञानदीप पोर्टल पर 121 बच्चे का नामांकन नहीं लिया गया है जबकि 13 बच्च्चे को रिजेक्ट कर दिया गया है इस पर जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। राधेश्याम पब्लिक स्कूल, सुपौल के द्वारा बच्च्चे के नामांकन में मौखिक परीक्षा लेने की सूचना प्राप्त होने पर जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा निदेश दिया गया कि ऐसे विद्यालय को चिन्हित कर उसकी प्रस्वीकृति को रदद कर दिया जाय। 45 निजी विद्यालय के अपनी इन्टेक कैपेसिटि नहीं भरने के कारण इन सभी विद्यालय के मान्यता को रद्द करने का निदेश दिया गया। 3. 190 विद्यालय को ट्यूनिंग ऑफ स्कूल के तहत दस हजार की राशि प्रति विद्यालय दी गई है। अब तक मात्र 68 विद्यालय के द्वारा राशि का व्यय किया गया है। जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा उप विकास आयुक्त, सुपौल एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल को विद्यालय के व्यय का जांच करने कार्यक्रम के संबंध में बच्चों का फीडबैक लेने का निदेश दिया गया। 4. समग्र विद्यालय अनुदान, खेल मद में दी गई राशि, सी०आर०सी० को दी गई राशि के व्यय की स्थिति असंतोषजनक है, खेल मद में मात्र 07 प्रतिशत की निकासी की गई। जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा सभी विद्यालय के खेल सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने का निदेश दिया गया। जो भी विद्यालय अब तक व्यय नहीं किये हैं। वे अविलंब गुणवत्तापूर्ण सामग्री का क्रय करेंगे। 5. असैनिक निर्माण कार्य की समीक्षा के क्रम में जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा 12 के भवन के निर्माण इसकी गुणवत्ता की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा कई विद्यालयों में लाल ईंट, फलाईएश ईंट की गुणवत्ता को अच्छे तरीके से जांच करने, निर्माण स्थल पर पानी का छिड़काव करने, कोटा स्टोन की पॉलिसिंग, छत की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निदेश दिया गया। यदि किसी निर्माण स्थल पर गैर गुणवत्तापूर्ण की सामग्री का उपयोग को देखा गया तो संबंधित संवेदक से दण्डसवरूप राशि की कटौती कर दी जायेगी। 6. जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा सभी निर्माण स्थल पर बार्ड लगाते हुए जिले का एक सम्पर्क संख्या भी आम लोगों के लिए उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया जिससे कि कोई भी व्यक्ति गलत कार्य की शिकायत जिला से कर सके। 7. जिलाधिकारी, सुपौल के द्वारा समीक्षा बैठक में बच्चों के पठन पाठन, लर्निंग आउट कम, का पी०पी०टी० नहीं रहने पर नाराजगी व्यक्त की गई तथा निदेश दिया गया कि अगले बैठक में इस विषय पर पी०पी०टी० तैयार कर शमिल किया जाय।1
- बिहार के मधेपुरा में नगर परिषद का एक प्रयोग अब विवाद का कारण बन गया है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें बनाई गईं, लेकिन इस पहल ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर दिया है। स्थानीय लोग इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे स्वच्छता अभियान का हिस्सा बता रहा है। दरअसल मधेपुरा में इन दिनों दीवारों पर बनी पेंटिंग चर्चा का विषय बन गई है। नगर परिषद ने शहर में गंदगी और खुले में पेशाब की समस्या को रोकने के लिए सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें बनवाई हैं। बाइट-1 सुधीर भगत, बीजेपी नेता बाइट -2- सौरभ यादव, स्थानीय लेकिन इस पहल का विरोध भी शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देवी-देवताओं का स्थान मंदिरों में होता है, न कि उन जगहों पर जहां गंदगी होती है। उनका आरोप है कि इस तरह की तस्वीरें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही हैं। बाइट-विशाल राय, पेंटर वहीं, मौके पर काम कर रहे पेंटर का कहना है कि उन्हें नगर परिषद की ओर से निर्देश मिला था कि ऐसी जगहों पर पेंटिंग बनाई जाए, जहां लोग अक्सर गंदगी करते हैं, ताकि इस पर रोक लग सके। बाइट- तान्या कुमारी, ईओ, नगर परिषद मधेपुरा नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी तान्या कुमारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह कदम स्वच्छता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस पर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। अब सवाल यह है कि क्या स्वच्छता के नाम पर धार्मिक प्रतीकों का इस तरह इस्तेमाल उचित है? या फिर प्रशासन को कोई दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए था। फिलहाल, मधेपुरा में यह मुद्दा आस्था और प्रशासनिक फैसलों के बीच टकराव का रूप ले चुका है।4