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राजस्थान के डूंगरपुर जिले में गनोड़ा के पास स्थित बेणेश्वर धाम, जिसे वागड़ का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल और 'वागड़ का महामोक्षधाम' माना जाता है, वहां पवित्र त्रिवेणी (सोम, माही, जाखम) नदी में विभिन्न शुभ कार्य किए जाते हैं। यहाँ पूरे भारत के आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते हैं, जिसे वे गंगा जी के समान पवित्र मानते हैं। माघ पूर्णिमा के मेले के दौरान त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर पापों से मुक्ति पाने का विशेष महत्व है। इसके अतिरिक्त, भक्त रातभर भगवान विष्णु और संत मावजी महाराज के भजन-कीर्तन करते हैं, बड़े धार्मिक अनुष्ठान और शांति यज्ञ आयोजित किए जाते हैं, तथा खंडित शिवलिंग और राधा-कृष्ण के स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस स्थान को 'वागड़ का महामोक्षधाम' इसलिए कहा जाता है क्योंकि मुख्य मंदिर परिसर से दूर नदी का एक खाली और सूखा स्थान स्थानीय स्तर पर श्मशान घाट के रूप में मान्य है। हिंदू धर्म में त्रिवेणी संगम को महातीर्थ माना जाता है, और वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) के आदिवासी और स्थानीय निवासी दृढ़ता से मानते हैं कि यदि मृत देह का दाह संस्कार सीधे इसी पवित्र त्रिवेणी के किनारे किया जाए, तो आत्मा को तत्काल मोक्ष मिलता है और वह सीधे भगवान विष्णु के चरणों में पहुँचती है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल पर आज भी श्रद्धालुओं को घाट पर चेंजिंग रूम और पानी की पाइपलाइन जैसी मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है। इन समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना महिलाओं की सुरक्षा और उनके स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ है, जिस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।

9 hrs ago
user_Pandit Repotar
Pandit Repotar
Advertising agency गनोड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
9 hrs ago

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में गनोड़ा के पास स्थित बेणेश्वर धाम, जिसे वागड़ का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल और 'वागड़ का महामोक्षधाम' माना जाता है, वहां पवित्र त्रिवेणी (सोम, माही, जाखम) नदी में विभिन्न शुभ कार्य किए जाते हैं। यहाँ पूरे भारत के आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते हैं, जिसे वे गंगा जी के समान पवित्र मानते हैं। माघ पूर्णिमा के मेले के दौरान त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर पापों से मुक्ति पाने का विशेष महत्व है। इसके अतिरिक्त, भक्त रातभर भगवान विष्णु और संत मावजी महाराज के भजन-कीर्तन करते हैं, बड़े धार्मिक अनुष्ठान और शांति यज्ञ आयोजित किए जाते हैं, तथा खंडित शिवलिंग और राधा-कृष्ण के स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस स्थान को 'वागड़ का महामोक्षधाम' इसलिए कहा जाता है क्योंकि मुख्य मंदिर परिसर से दूर नदी का एक खाली और सूखा स्थान स्थानीय स्तर पर श्मशान घाट के रूप में मान्य है। हिंदू धर्म में त्रिवेणी संगम को महातीर्थ माना जाता है, और वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) के आदिवासी और स्थानीय निवासी दृढ़ता से मानते हैं कि यदि मृत देह का दाह संस्कार सीधे इसी पवित्र त्रिवेणी के किनारे किया जाए, तो आत्मा को तत्काल मोक्ष मिलता है और वह सीधे भगवान विष्णु के चरणों में पहुँचती है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल पर आज भी श्रद्धालुओं को घाट पर चेंजिंग रूम और पानी की पाइपलाइन जैसी मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है। इन समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना महिलाओं की सुरक्षा और उनके स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ है, जिस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।

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  • राजस्थान के डूंगरपुर जिले में गनोड़ा के पास स्थित बेणेश्वर धाम, जिसे वागड़ का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल और 'वागड़ का महामोक्षधाम' माना जाता है, वहां पवित्र त्रिवेणी (सोम, माही, जाखम) नदी में विभिन्न शुभ कार्य किए जाते हैं। यहाँ पूरे भारत के आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते हैं, जिसे वे गंगा जी के समान पवित्र मानते हैं। माघ पूर्णिमा के मेले के दौरान त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर पापों से मुक्ति पाने का विशेष महत्व है। इसके अतिरिक्त, भक्त रातभर भगवान विष्णु और संत मावजी महाराज के भजन-कीर्तन करते हैं, बड़े धार्मिक अनुष्ठान और शांति यज्ञ आयोजित किए जाते हैं, तथा खंडित शिवलिंग और राधा-कृष्ण के स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस स्थान को 'वागड़ का महामोक्षधाम' इसलिए कहा जाता है क्योंकि मुख्य मंदिर परिसर से दूर नदी का एक खाली और सूखा स्थान स्थानीय स्तर पर श्मशान घाट के रूप में मान्य है। हिंदू धर्म में त्रिवेणी संगम को महातीर्थ माना जाता है, और वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) के आदिवासी और स्थानीय निवासी दृढ़ता से मानते हैं कि यदि मृत देह का दाह संस्कार सीधे इसी पवित्र त्रिवेणी के किनारे किया जाए, तो आत्मा को तत्काल मोक्ष मिलता है और वह सीधे भगवान विष्णु के चरणों में पहुँचती है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल पर आज भी श्रद्धालुओं को घाट पर चेंजिंग रूम और पानी की पाइपलाइन जैसी मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है। इन समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना महिलाओं की सुरक्षा और उनके स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ है, जिस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
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    राजस्थान के डूंगरपुर जिले में गनोड़ा के पास स्थित बेणेश्वर धाम, जिसे वागड़ का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल और 'वागड़ का महामोक्षधाम' माना जाता है, वहां पवित्र त्रिवेणी (सोम, माही, जाखम) नदी में विभिन्न शुभ कार्य किए जाते हैं। यहाँ पूरे भारत के आदिवासी समुदाय के लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते हैं, जिसे वे गंगा जी के समान पवित्र मानते हैं। माघ पूर्णिमा के मेले के दौरान त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर पापों से मुक्ति पाने का विशेष महत्व है। इसके अतिरिक्त, भक्त रातभर भगवान विष्णु और संत मावजी महाराज के भजन-कीर्तन करते हैं, बड़े धार्मिक अनुष्ठान और शांति यज्ञ आयोजित किए जाते हैं, तथा खंडित शिवलिंग और राधा-कृष्ण के स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

इस स्थान को 'वागड़ का महामोक्षधाम' इसलिए कहा जाता है क्योंकि मुख्य मंदिर परिसर से दूर नदी का एक खाली और सूखा स्थान स्थानीय स्तर पर श्मशान घाट के रूप में मान्य है। हिंदू धर्म में त्रिवेणी संगम को महातीर्थ माना जाता है, और वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) के आदिवासी और स्थानीय निवासी दृढ़ता से मानते हैं कि यदि मृत देह का दाह संस्कार सीधे इसी पवित्र त्रिवेणी के किनारे किया जाए, तो आत्मा को तत्काल मोक्ष मिलता है और वह सीधे भगवान विष्णु के चरणों में पहुँचती है।

हालांकि, इस महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल पर आज भी श्रद्धालुओं को घाट पर चेंजिंग रूम और पानी की पाइपलाइन जैसी मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है। इन समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना महिलाओं की सुरक्षा और उनके स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ है, जिस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
    user_Pandit Repotar
    Pandit Repotar
    Advertising agency गनोड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र बेणेश्वरधाम के चहुंमुखी विकास के लिए शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बोर्ड के अध्यक्ष व पीठाधीश्वर अच्युतानंद महाराज की अध्यक्षता में संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी ने जिला कलक्टर देशलदान के साथ बोर्ड के पदाधिकारियों, सदस्यों और अधिकारियों के साथ यह बैठक की। इस दौरान संभागीय आयुक्त ने धाम पर पूर्व में हुए विकास कार्यों की समीक्षा की और उपस्थित सदस्यों से नए कार्यों के लिए प्रस्ताव लिए। बैठक में शिवालय ट्रस्ट के अध्यक्ष बलवंत सिंह ने सुझाव दिया कि धाम पर केवल मेले से पहले ही साफ-सफाई और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं, जबकि इसके बाद न तो नियमित साफ-सफाई होती है और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था रहती है। उन्होंने एक अस्थायी पुलिस चौकी में पुलिस जवानों की तैनाती का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गौशाला के लिए जमीन आवंटन, घाटों और मिट्टी कटाव की रिंगवाल, हाई-लेवल पुल के तीसरे पिलर की ऊंचाई चौक के लेवल तक आने से पार्किंग जाम होने की आशंका को लेकर चिंता व्यक्त की। अन्य सुझावों में वाल्मीकि मंदिर के लिए सीढ़ियों के साथ कैमरे, पेयजल के लिए अलग टंकी, वन विभाग द्वारा छायादार पौधरोपण, बिना टेंडर के करोड़ों के कार्य को नए सिरे से करने और वालाई मार्ग पर बाईपास बनाने की बात शामिल थी। वहीं, दौलपुरा प्रशासक के प्रतिनिधि देवीलाल मीणा ने धाम पर बढ़ते अतिक्रमण को हटाने की मांग की। प्रदेश सरकार ने अपने वित्तीय बजट में बेणेश्वरधाम के विकास के लिए ₹130 करोड़ का बजट जारी किया है, जिससे धाम पर व्यापक विकास कार्य होंगे। इस बजट के तहत धर्मशाला, वाहन पार्किंग, भोजनशाला (जिसमें 10 रसोई घर होंगे), ₹2 लाख की लागत से 21 फीट ऊंची संत मावजी की प्रतिमा, और संत मावजी महाराज की जीवनशैली से जुड़ी 15 से 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाएगी। इसके अलावा, बेणेश्वर प्रवेशद्वार (बांसवाड़ा मार्ग पर), कॉबन स्टोन की सड़क, फ़ूड कोर्ट, शिवजी का व्यू पॉइंट, शॉपिंग एरिया, विश्राम स्थल और सुविधा घर जैसी तमाम सुविधाएं आने वाले श्रद्धालुओं और मेलार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। बैठक के बाद संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी, जिला कलक्टर देशलदान, सीईओ हनुमान सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने महंत अच्युतानंद महाराज के सानिध्य में व्यू पॉइंट का निरीक्षण किया। इस दौरान पीठाधीश्वर अच्युतानंद महाराज ने बेणेश्वरधाम के आबर्दरा घाट की महिमा के साथ-साथ सोम, माही और जाखम नदियों तथा भगवान निष्कलंक के अवतार को लेकर जानकारी दी।
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    श्रद्धालुओं के आस्था के केंद्र बेणेश्वरधाम के चहुंमुखी विकास के लिए शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बोर्ड के अध्यक्ष व पीठाधीश्वर अच्युतानंद महाराज की अध्यक्षता में संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी ने जिला कलक्टर देशलदान के साथ बोर्ड के पदाधिकारियों, सदस्यों और अधिकारियों के साथ यह बैठक की। इस दौरान संभागीय आयुक्त ने धाम पर पूर्व में हुए विकास कार्यों की समीक्षा की और उपस्थित सदस्यों से नए कार्यों के लिए प्रस्ताव लिए।

बैठक में शिवालय ट्रस्ट के अध्यक्ष बलवंत सिंह ने सुझाव दिया कि धाम पर केवल मेले से पहले ही साफ-सफाई और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं, जबकि इसके बाद न तो नियमित साफ-सफाई होती है और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था रहती है। उन्होंने एक अस्थायी पुलिस चौकी में पुलिस जवानों की तैनाती का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गौशाला के लिए जमीन आवंटन, घाटों और मिट्टी कटाव की रिंगवाल, हाई-लेवल पुल के तीसरे पिलर की ऊंचाई चौक के लेवल तक आने से पार्किंग जाम होने की आशंका को लेकर चिंता व्यक्त की। अन्य सुझावों में वाल्मीकि मंदिर के लिए सीढ़ियों के साथ कैमरे, पेयजल के लिए अलग टंकी, वन विभाग द्वारा छायादार पौधरोपण, बिना टेंडर के करोड़ों के कार्य को नए सिरे से करने और वालाई मार्ग पर बाईपास बनाने की बात शामिल थी। वहीं, दौलपुरा प्रशासक के प्रतिनिधि देवीलाल मीणा ने धाम पर बढ़ते अतिक्रमण को हटाने की मांग की।

प्रदेश सरकार ने अपने वित्तीय बजट में बेणेश्वरधाम के विकास के लिए ₹130 करोड़ का बजट जारी किया है, जिससे धाम पर व्यापक विकास कार्य होंगे। इस बजट के तहत धर्मशाला, वाहन पार्किंग, भोजनशाला (जिसमें 10 रसोई घर होंगे), ₹2 लाख की लागत से 21 फीट ऊंची संत मावजी की प्रतिमा, और संत मावजी महाराज की जीवनशैली से जुड़ी 15 से 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाएगी। इसके अलावा, बेणेश्वर प्रवेशद्वार (बांसवाड़ा मार्ग पर), कॉबन स्टोन की सड़क, फ़ूड कोर्ट, शिवजी का व्यू पॉइंट, शॉपिंग एरिया, विश्राम स्थल और सुविधा घर जैसी तमाम सुविधाएं आने वाले श्रद्धालुओं और मेलार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी।

बैठक के बाद संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी, जिला कलक्टर देशलदान, सीईओ हनुमान सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने महंत अच्युतानंद महाराज के सानिध्य में व्यू पॉइंट का निरीक्षण किया। इस दौरान पीठाधीश्वर अच्युतानंद महाराज ने बेणेश्वरधाम के आबर्दरा घाट की महिमा के साथ-साथ सोम, माही और जाखम नदियों तथा भगवान निष्कलंक के अवतार को लेकर जानकारी दी।
    user_Pravin Kothari
    Pravin Kothari
    पत्रकार आसपुर-विधानसभा आसपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • सलूम्बर जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसमें गरीबों की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाया गया है। इस आवाज़ के माध्यम से यह मांग की गई है कि सरकार गरीब और जरूरतमंद लोगों को आवश्यक मदद और सहायता सुनिश्चित करे।
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    सलूम्बर जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसमें गरीबों की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाया गया है। इस आवाज़ के माध्यम से यह मांग की गई है कि सरकार गरीब और जरूरतमंद लोगों को आवश्यक मदद और सहायता सुनिश्चित करे।
    user_Suraj. sadana. toda
    Suraj. sadana. toda
    Farmer सलूंबर, उदयपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • डूंगरपुर में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींव सिंह के निर्देशन में जिला विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस दौरान, टीम ने लगभग ₹2.5 लाख की अनुमानित कीमत की 31 कार्टन अंग्रेजी शराब जब्त की, जिसे एक ईको गाड़ी से अवैध रूप से गुजरात तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था। जिला विशेष टीम को पुलिस थाना बिछीवाड़ा क्षेत्र से गुजरात में अवैध शराब तस्करी की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही, टीम तुरंत पालीसोडा रोड पर रवाना हुई और नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान, सूचना के अनुसार एक ईको गाड़ी (नंबर जीजे 01 आरएन 2906) आती हुई दिखी। गाड़ी के चालक ने नाकाबंदी देख तुरंत गाड़ी मोड़ी और भागने लगा। इस पर, बैकअप टीम ने टायर ब्रेकर का उपयोग कर गाड़ी के टायर पंचर कर दिए। बावजूद इसके, चालक ने पंचर गाड़ी को लगभग 1 किलोमीटर तक भगाया और मुख्य मार्ग से अंदर ले जाकर एक मकान के पास छोड़कर फरार हो गया। बाद में टीम ने गाड़ी की तलाशी ली, जिसमें विभिन्न ब्रांड की कुल 31 कार्टन अंग्रेजी शराब पाई गई। पुलिस अब इस मामले में आगे की जांच में जुटी हुई है।
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    डूंगरपुर में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींव सिंह के निर्देशन में जिला विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस दौरान, टीम ने लगभग ₹2.5 लाख की अनुमानित कीमत की 31 कार्टन अंग्रेजी शराब जब्त की, जिसे एक ईको गाड़ी से अवैध रूप से गुजरात तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था।

जिला विशेष टीम को पुलिस थाना बिछीवाड़ा क्षेत्र से गुजरात में अवैध शराब तस्करी की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही, टीम तुरंत पालीसोडा रोड पर रवाना हुई और नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान, सूचना के अनुसार एक ईको गाड़ी (नंबर जीजे 01 आरएन 2906) आती हुई दिखी। गाड़ी के चालक ने नाकाबंदी देख तुरंत गाड़ी मोड़ी और भागने लगा। इस पर, बैकअप टीम ने टायर ब्रेकर का उपयोग कर गाड़ी के टायर पंचर कर दिए। बावजूद इसके, चालक ने पंचर गाड़ी को लगभग 1 किलोमीटर तक भगाया और मुख्य मार्ग से अंदर ले जाकर एक मकान के पास छोड़कर फरार हो गया। बाद में टीम ने गाड़ी की तलाशी ली, जिसमें विभिन्न ब्रांड की कुल 31 कार्टन अंग्रेजी शराब पाई गई। पुलिस अब इस मामले में आगे की जांच में जुटी हुई है।
    user_Maheshwar choubisa
    Maheshwar choubisa
    Graphic designer डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा में बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा के पास निर्माणाधीन पुलिया का कार्य 30 जून तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन 2 जुलाई तक भी यह काम पूरा नहीं हो सका है। इस लेटलतीफी के कारण क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है, क्योंकि निर्माण कार्य के लंबा खिंचने से न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि वर्तमान में बनाए गए वैकल्पिक मार्ग के उपयोग से आमजन को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कस्बेवासियों के अनुसार, वर्तमान में बीएसएनएल टावर के पास से बनाया गया बाईपास निजी बस स्टैंड से लगभग एक किलोमीटर दूर पड़ता है, जिससे लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। यह वैकल्पिक मार्ग कच्चा और उबड़-खाबड़ होने के साथ-साथ कंटीली झाड़ियों से भरा है, जिससे सफर मुश्किल हो गया है; रात के समय इस जंगलनुमा क्षेत्र से गुजरने में लोगों को डर भी लगता है। नागरिकों का सुझाव है कि निजी बस स्टैंड, जो पुल निर्माण स्थल से लगभग 600 मीटर पहले स्थित है, वहां तक छोटे वाहनों जैसे रिक्शा, ऑटो, मोटरसाइकिल और कारों को सीधे सिमलवाड़ा बाजार तक आने-जाने की अनुमति दी जाए। वहीं, केवल भारी वाहनों को ही बाईपास मार्ग से निकाला जाए, जिससे आमजन को बड़ी राहत मिल सकेगी। क्षेत्रवासियों ने यह भी बताया कि बाईपास मार्ग से कुछ दूरी पर स्थित विद्या निकेतन स्कूल में बड़ी संख्या में छात्र प्रतिदिन आते-जाते हैं, और छोटे वाहनों को निजी बस स्टैंड तक अनुमति देने से छात्रों और अभिभावकों को भी सुविधा होगी। लोगों की मांग है कि यदि निर्माण कार्य में अभी तीन-चार दिन और लगने हैं, तो प्रशासन को तुरंत यातायात व्यवस्था में संशोधन करना चाहिए। इसके तहत छोटे वाहनों के लिए निजी बस स्टैंड तक का मार्ग खोल देना चाहिए, जबकि भारी वाहनों को बाईपास से ही निकाला जाए। साथ ही, दिन और रात दोनों समय पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करके यातायात को सुचारु बनाने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की भी अपील की गई है। उनका मानना है कि इन कदमों से दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और सीमलवाड़ा के आमजन को काफी राहत मिल सकेगी।
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    डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा में बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा के पास निर्माणाधीन पुलिया का कार्य 30 जून तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन 2 जुलाई तक भी यह काम पूरा नहीं हो सका है। इस लेटलतीफी के कारण क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है, क्योंकि निर्माण कार्य के लंबा खिंचने से न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि वर्तमान में बनाए गए वैकल्पिक मार्ग के उपयोग से आमजन को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कस्बेवासियों के अनुसार, वर्तमान में बीएसएनएल टावर के पास से बनाया गया बाईपास निजी बस स्टैंड से लगभग एक किलोमीटर दूर पड़ता है, जिससे लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। यह वैकल्पिक मार्ग कच्चा और उबड़-खाबड़ होने के साथ-साथ कंटीली झाड़ियों से भरा है, जिससे सफर मुश्किल हो गया है; रात के समय इस जंगलनुमा क्षेत्र से गुजरने में लोगों को डर भी लगता है। नागरिकों का सुझाव है कि निजी बस स्टैंड, जो पुल निर्माण स्थल से लगभग 600 मीटर पहले स्थित है, वहां तक छोटे वाहनों जैसे रिक्शा, ऑटो, मोटरसाइकिल और कारों को सीधे सिमलवाड़ा बाजार तक आने-जाने की अनुमति दी जाए। वहीं, केवल भारी वाहनों को ही बाईपास मार्ग से निकाला जाए, जिससे आमजन को बड़ी राहत मिल सकेगी। क्षेत्रवासियों ने यह भी बताया कि बाईपास मार्ग से कुछ दूरी पर स्थित विद्या निकेतन स्कूल में बड़ी संख्या में छात्र प्रतिदिन आते-जाते हैं, और छोटे वाहनों को निजी बस स्टैंड तक अनुमति देने से छात्रों और अभिभावकों को भी सुविधा होगी।

लोगों की मांग है कि यदि निर्माण कार्य में अभी तीन-चार दिन और लगने हैं, तो प्रशासन को तुरंत यातायात व्यवस्था में संशोधन करना चाहिए। इसके तहत छोटे वाहनों के लिए निजी बस स्टैंड तक का मार्ग खोल देना चाहिए, जबकि भारी वाहनों को बाईपास से ही निकाला जाए। साथ ही, दिन और रात दोनों समय पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करके यातायात को सुचारु बनाने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की भी अपील की गई है। उनका मानना है कि इन कदमों से दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और सीमलवाड़ा के आमजन को काफी राहत मिल सकेगी।
    user_मुकेश कुमार आर. पंड्या
    मुकेश कुमार आर. पंड्या
    Local News Reporter सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • कुशलगढ़ नगर पालिका द्वारा आयोजित शहरी सेवा शिविर पिछले 20 दिनों से लगातार संचालित हो रहा है। इस शिविर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में नागरिक विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिसके तहत अब तक 147 जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, नामांतरण और भूमि रूपांतरण सहित कई अन्य जनकल्याणकारी कार्यों का भी तुरंत समाधान किया जा रहा है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मुकेश मधु ने बताया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को काफी राहत मिल रही है। शिविर में माया, रेखा मीणा सक्सेना, हरेंद्र भाटी, जय पांचाल, गुलाब देवी, विजयश्री पारगी, महेश पारगी, विकेश वड़किया, गौरव जैन, मयंक बैरागी, अलका राठौर, सुनीता डामोर, कल्याण सिंह शक्तावत, हिम्मत सिंह पत्ता, दीपेश्वर शक्तावत, वर्षा पंचोली और कविता डिंडोर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक विभाग के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण इन सेवाओं को लेने पहुंचे लोगों को निराशा हुई। नगर पालिका प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस शिविर का लाभ उठाएं।
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    कुशलगढ़ नगर पालिका द्वारा आयोजित शहरी सेवा शिविर पिछले 20 दिनों से लगातार संचालित हो रहा है। इस शिविर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में नागरिक विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिसके तहत अब तक 147 जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, नामांतरण और भूमि रूपांतरण सहित कई अन्य जनकल्याणकारी कार्यों का भी तुरंत समाधान किया जा रहा है।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मुकेश मधु ने बताया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को काफी राहत मिल रही है। शिविर में माया, रेखा मीणा सक्सेना, हरेंद्र भाटी, जय पांचाल, गुलाब देवी, विजयश्री पारगी, महेश पारगी, विकेश वड़किया, गौरव जैन, मयंक बैरागी, अलका राठौर, सुनीता डामोर, कल्याण सिंह शक्तावत, हिम्मत सिंह पत्ता, दीपेश्वर शक्तावत, वर्षा पंचोली और कविता डिंडोर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

हालांकि, होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक विभाग के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण इन सेवाओं को लेने पहुंचे लोगों को निराशा हुई। नगर पालिका प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस शिविर का लाभ उठाएं।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • नौगामा पंचायत के गुलाबपुरा गांव में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां घर के आंगन में अचानक करंट फैलने से 52 वर्षीय कचरा पुत्र डूंगर की मौके पर ही मौत हो गई। पति को बचाने दौड़ी उनकी पत्नी सूकी सहित परिवार की रोशनी और ललि गंभीर रूप से झुलस गईं, जिसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। मिली जानकारी के अनुसार, कचरा नहाने के बाद आंगन में तौलिये से शरीर पोंछ रहे थे, तभी अचानक करंट फैल गया और वे जमीन पर गिर पड़े। उन्हें बचाने पहुंची पत्नी सूकी भी करंट की चपेट में आ गईं। इसके बाद सहायता के लिए दौड़ी रोशनी और ललि भी झुलस गईं। चीख-पुकार सुनकर इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने तुरंत बिजली विभाग को सूचित कर विद्युत आपूर्ति बंद करवाई और सभी घायलों को तत्काल उप जिला चिकित्सालय बागीदौरा पहुंचाया। चिकित्सकों ने कचरा को मृत घोषित कर दिया। वहीं, तीनों घायल महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद महात्मा गांधी चिकित्सालय, बांसवाड़ा रेफर किया गया। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। पोस्टमार्टम के उपरांत मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने विद्युत विभाग की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण बताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
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    नौगामा पंचायत के गुलाबपुरा गांव में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां घर के आंगन में अचानक करंट फैलने से 52 वर्षीय कचरा पुत्र डूंगर की मौके पर ही मौत हो गई। पति को बचाने दौड़ी उनकी पत्नी सूकी सहित परिवार की रोशनी और ललि गंभीर रूप से झुलस गईं, जिसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई।

मिली जानकारी के अनुसार, कचरा नहाने के बाद आंगन में तौलिये से शरीर पोंछ रहे थे, तभी अचानक करंट फैल गया और वे जमीन पर गिर पड़े। उन्हें बचाने पहुंची पत्नी सूकी भी करंट की चपेट में आ गईं। इसके बाद सहायता के लिए दौड़ी रोशनी और ललि भी झुलस गईं। चीख-पुकार सुनकर इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने तुरंत बिजली विभाग को सूचित कर विद्युत आपूर्ति बंद करवाई और सभी घायलों को तत्काल उप जिला चिकित्सालय बागीदौरा पहुंचाया।

चिकित्सकों ने कचरा को मृत घोषित कर दिया। वहीं, तीनों घायल महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद महात्मा गांधी चिकित्सालय, बांसवाड़ा रेफर किया गया। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। पोस्टमार्टम के उपरांत मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया गया।

इस घटना के बाद ग्रामीणों ने विद्युत विभाग की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण बताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    6 hrs ago
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