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पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने के लिए हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा 21वीं सदी में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का हनन निरंतर जारी है जिससे कि पर्यावरण हमारे जीवन में इसका दुष्प्रभाव दे रहा है विभिन्न सामाजिक संस्थाएं सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर वृक्ष रोपण पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए कार्यशाला आयोजित करती है एवं स्कूली विद्यार्थी को भी उसकी जानकारी देती है हम सभी नागरिकों का मूल कर्तव्य है कि पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने के लिए मिलजुलकर प्रयास करें आने वाली जनरेशन के लिए पर्यावरण का संतुलन होना बहुत जरूरी है
Ranjeet Dehariya
पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने के लिए हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा 21वीं सदी में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का हनन निरंतर जारी है जिससे कि पर्यावरण हमारे जीवन में इसका दुष्प्रभाव दे रहा है विभिन्न सामाजिक संस्थाएं सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर वृक्ष रोपण पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए कार्यशाला आयोजित करती है एवं स्कूली विद्यार्थी को भी उसकी जानकारी देती है हम सभी नागरिकों का मूल कर्तव्य है कि पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने के लिए मिलजुलकर प्रयास करें आने वाली जनरेशन के लिए पर्यावरण का संतुलन होना बहुत जरूरी है
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- पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने के लिए हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा 21वीं सदी में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का हनन निरंतर जारी है जिससे कि पर्यावरण हमारे जीवन में इसका दुष्प्रभाव दे रहा है विभिन्न सामाजिक संस्थाएं सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर वृक्ष रोपण पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए कार्यशाला आयोजित करती है एवं स्कूली विद्यार्थी को भी उसकी जानकारी देती है हम सभी नागरिकों का मूल कर्तव्य है कि पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने के लिए मिलजुलकर प्रयास करें आने वाली जनरेशन के लिए पर्यावरण का संतुलन होना बहुत जरूरी है1
- भारत देश का प्रिय खेल कुश्ती प्रेमी कुश्ती देखना बड़ी संख्या में एकत्रित ऐसी भीड़ आपने कहीं नहीं देखी होगी छिंदवाड़ा के इमली खेड़ा ग्राम में कुश्ती का आयोजन किया गया जिसमें देश भर के पहलवान ने जोर राजमाइश की कुश्ती के प्रेमी ग्रामीणों की भीड़ देखकर मानो ऐसा लग रहा हो जैसे लगान फिल्म का सीन हो इतनी बड़ी तादाद में लोग कुश्ती देखना दूर-दूर के ग्रामीण क्षेत्र से वहां पहुंचे थे बड़ी बात यह थी कि यह कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया था4
- छिंदवाड़ा जिले की जनपद पंचायत चौरई अंतर्गत ग्राम पंचायत धनोरा बारेवर के ग्रामीणों ने माचागोरा बांध से जुड़ी अपनी समस्याओं को लेकर जनसुनवाई में प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। बांध बनने के बाद पिछले करीब 10 से 12 वर्षों से डूब क्षेत्र से प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास के बावजूद उनके सामने आजीविका और भरण-पोषण का संकट बना हुआ है। वहीं स्थानीय मछुआरों ने भी जलाशय में मछली पकड़ने के लिए रोजगार और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। दरअसल, चौरई क्षेत्र के ग्राम पंचायत धनोरा बारेवर में माचागोरा बांध के निर्माण के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बांध बनने के बाद उन्हें अपने पुराने गांव और पारंपरिक जीवन से विस्थापित होना पड़ा। करीब एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रभावित परिवारों की आजीविका का स्थाई समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की ओर से उन्हें जिस स्थान पर पुनर्वासित किया गया, वहां भी कई तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पुनर्वास स्थल पर मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार और भरण-पोषण के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनसुनवाई में ग्राम पंचायत धनोरा के सरपंच परसराम वर्मा ने ग्रामीणों और स्थानीय मछुआरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कई परिवारों का पारंपरिक और पैतृक व्यवसाय मछली पकड़ना रहा है। ऐसे परिवारों के लिए माचागोरा जलाशय रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है, लेकिन स्थानीय मछुआरों को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलाशय में पानी भरने के बाद मछली पकड़ने का काम तो संभव है, लेकिन स्थानीय लोगों के पास इसके लिए जरूरी साधन ही उपलब्ध नहीं हैं। कई परिवारों के पास नाव और मछली पकड़ने के लिए जाल तक नहीं है। ऐसे में वे अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। वहीं मछुआरों के संगठन और समिति से जुड़े लोगों की संख्या को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा करीब 862 लोगों के समिति से जुड़े होने की बात कही जाती है, लेकिन इनमें ऐसे लोगों के नाम भी शामिल होने की बात सामने आ रही है जो स्थानीय निवासी नहीं हैं या वास्तव में मछली पकड़ने के काम से जुड़े नहीं हैं। स्थानीय मछुआरों की मांग है कि वास्तविक रूप से मछली पकड़ने का काम करने वाले स्थानीय परिवारों का अलग से सर्वे और पंजीकरण कराया जाए। इसके बाद पात्र मछुआरों को नाव, जाल और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे जलाशय में अपने पारंपरिक व्यवसाय के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर सकें। ग्रामीणों का कहना है कि बांध निर्माण से प्रभावित होने के बाद उन्होंने विकास के लिए अपना क्षेत्र और अपनी जमीन छोड़ी है। ऐसे में शासन की जिम्मेदारी है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के साथ-साथ उनकी आजीविका का भी स्थाई इंतजाम किया जाए। ग्रामीणों की मांग है कि पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का दोबारा परीक्षण किया जाए और जहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही प्रभावित परिवारों को रोजगार के स्थाई साधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों की ओर से मांग रखी गई है कि स्थानीय मछुआरों की वास्तविक स्थिति की जांच कर पात्र लोगों का अलग से पंजीकरण किया जाए। जिन परिवारों का पुश्तैनी काम मछली पकड़ना है, उन्हें नाव और जाल उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। जनसुनवाई में ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि माचागोरा बांध से प्रभावित परिवारों और स्थानीय मछुआरों की समस्याओं को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मौके पर वास्तविक स्थिति का सर्वे कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से समस्या झेल रहे परिवारों को रोजगार से जोड़ना जरूरी है। खासकर उन मछुआरा परिवारों को, जिनका पारंपरिक व्यवसाय मछली पकड़ना रहा है, जलाशय से रोजगार का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए स्थानीय मछुआरों की पहचान, पंजीकरण और उन्हें नाव-जाल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जनसुनवाई में रखी गई उनकी समस्याओं पर प्रशासन गंभीरता से विचार करेगा और प्रभावित परिवारों की आजीविका से जुड़े मुद्दों का स्थाई समाधान निकाला जाएगा। माचागोरा बांध से प्रभावित धनोरा बारेवर के ग्रामीणों ने जनसुनवाई के माध्यम से पुनर्वास, भरण-पोषण और रोजगार से जुड़े मुद्दे प्रशासन के सामने रखे हैं। अब देखना होगा कि स्थानीय मछुआरों के पंजीकरण, नाव-जाल उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों की आजीविका से जुड़ी इन मांगों पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।4
- सड़क बनी जलभराव का शिकार! खैरीतायगांव में गंदे पानी से ग्रामीण परेशान, पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल *सरपंच-सचिव पर लापरवाही के आरोप, जलभराव से बीमारी फैलने की आशंका; स्वच्छ भारत अभियान के बीच पंचायत की व्यवस्थाओं पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी* पांढुर्णा:-पांढुर्णा जिले के सौंसर विकासखंड के ग्राम पंचायत खैरीतायगांव में सड़क मार्ग पर लंबे समय से पानी जमा होने की समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश और गंदा पानी मार्ग पर जमा हो रहा है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क पर लगातार पानी जमा रहने से आसपास गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। इससे डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने पंचायत से तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एक ओर शासन स्तर पर स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता और साफ-सफाई को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की सड़क पर जमा पानी और गंदगी इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों ने पंचायत में आने वाली शासकीय योजनाओं और निधियों के उपयोग को लेकर भी जांच की मांग उठाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विकास और जलनिकासी से संबंधित कार्यों के लिए शासकीय राशि का उपयोग किया गया है, तो मौके पर उसका प्रभाव दिखाई देना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर जलभराव की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने, जलनिकासी की व्यवस्था कराने तथा पंचायत द्वारा पूर्व में कराए गए संबंधित विकास कार्यों और शासकीय निधि के उपयोग की जांच कराने की मांग की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन और ग्राम पंचायत इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।2
- अवैध शराब के विरुद्ध सिवनी पुलिस का विशेष अभियान - बड़ी सफलता 752 लीटर शराब जब्त, 117 क्विंटल से अधिक महुआ लहान नष्ट सिवनी। जिले में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में पुलिस ने 22 कार्रवाई करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 752 लीटर देशी-विदेशी व कच्ची शराब जब्त की गई और 117 क्विंटल से अधिक महुआ लहान नष्ट किया गया। कोतवाली, डूंडासिवनी, कुरई, बंडोल, घंसौर, केवलारी और कान्हीवाड़ा क्षेत्रों में हुई कार्रवाई के दौरान दो बोलेरो और एक स्कूटी भी जब्त की गई। कान्हीवाड़ा के जवाना-अलीनगर में 15 क्विंटल तथा गंज क्षेत्र में 75 क्विंटल लहान नष्ट किया गया। पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।1
- तेज आंधी ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, खेतों में बिछी मक्के की खड़ी फसल तेज आंधी ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, खेतों में बिछी मक्के की खड़ी फसल नमस्कार आप देख रहे मध्य भारत कुचावाड़ा, तहसील केवलारी, जिला सिवनी कुचावाड़ा क्षेत्र में तेज आंधी-हवा के चलते किसानों की मक्के की खड़ी फसल खेतों में पूरी तरह बिछ गई। अचानक आई तेज हवाओं से कई किसानों की तैयार होती फसल जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। किसानों ने बताया कि उन्होंने बड़ी मेहनत और लागत लगाकर मक्के की फसल तैयार की थी, लेकिन तेज आंधी के कारण खेतों में खड़ी फसल गिर जाने से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। फसल के नुकसान से किसानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन गई है। प्रभावित किसानों में इन्दलाल राय, बिनोद कुमार राय, आदेश राय और संदेश राय सहित अन्य किसान शामिल हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित खेतों का शीघ्र सर्वे कराया जाए, नुकसान का उचित आकलन किया जाए तथा नियमानुसार राहत एवं मुआवजा राशि दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि समय पर सर्वे और राहत मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान से उबरने में मदद मिल सकेगी। इस खबर में दिखाई गई खबर ग्रामीणों के द्वारा दी गई है वास्तविक स्थिति मौके पर जाने के बाद सामने आएंगे1
- Seoni News: पानी और पहाड़ों का ऐसा संगम, देखते रह जाएंगे आप! दिखा अद्भुत नजारा1
- कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डूण्डासिवनी का कुख्यात गुण्डा बदमाश युवराज उर्फ बहादुर तेकाम गिरफ्तार 17 आपराधिक प्रकरणों वाला बदमाश प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के तहत भेजा गया जेल सिवनी। कोतवाली पुलिस ने डूण्डासिवनी निवासी युवराज उर्फ बहादुर तेकाम \(22\) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और हत्या के प्रयास सहित पहले से 17 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। 8 सितंबर को ग्राम बींझावाड़ा निवासी शिवा कौशिक ने आरोपी के खिलाफ मारपीट और जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज कराई थी। 29 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया। प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।1