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झारखंड के खटोरी पंचायत की जमीनी रिपोर्ट से एक कड़वा सच सामने आया है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। बताया गया है कि सांसद द्वारा गोद ली जाने के बावजूद इस पंचायत में न तो सड़कें हैं और न ही पीने का पानी उपलब्ध है। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि क्या आदिवासी सरकार होने के बावजूद राज्य में आदिवासी समुदाय अभी भी विकास से पीछे छूट रहा है।
Satya sahitya news
झारखंड के खटोरी पंचायत की जमीनी रिपोर्ट से एक कड़वा सच सामने आया है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। बताया गया है कि सांसद द्वारा गोद ली जाने के बावजूद इस पंचायत में न तो सड़कें हैं और न ही पीने का पानी उपलब्ध है। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि क्या आदिवासी सरकार होने के बावजूद राज्य में आदिवासी समुदाय अभी भी विकास से पीछे छूट रहा है।
More news from झारखंड and nearby areas
- डुमरी विधायक जयराम महतो ने सोमवार को डुमरी प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय के सभागार में जनता दरबार का आयोजन किया, जहाँ उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना। डुमरी सहित विभिन्न प्रखंडों से आए लोगों ने विधायक के समक्ष अपनी निजी और सार्वजनिक समस्याओं के संबंध में आवेदन देकर समाधान की गुहार लगाई। इस दौरान, विधायक ने कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया, जबकि अन्य मामलों में उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों और दूसरे पक्ष से फोन पर बात कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जनता दरबार में, भावनंद से आईं देवंती देवी ने बताया कि 2019 में जमीन खरीदने के बावजूद उनका दाखिल-खारिज अब तक नहीं हुआ है, जबकि उसी जमीन के अन्य प्लॉटों का दाखिल-खारिज हो चुका है। करमा टोंगरी के वीरेंद्र प्रसाद ने शिकायत की कि चार बार आवेदन देने के बाद भी उनकी जमीन ऑनलाइन नहीं की गई है। इन दोनों मामलों में विधायक ने तत्काल संबंधित कर्मचारियों को फोन कर आवश्यक निर्देश दिए। चंद्रपुरा प्रखंड के करमा टांड़ से आईं विमली देवी ने जानकारी दी कि उनके पति की पहली पत्नी की पुत्री के बेटे ने गलत वंशावली बनाकर जमीन के आधार पर नौकरी हासिल कर ली है, और इस संबंध में कई बार विभाग को पत्र लिखने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ है। वहीं, हजारीबाग के बड़कागांव से आईं सीता देवी ने आरोप लगाया कि भूमाफिया और थाना प्रभारी की साजिश के तहत सावित्री देवी के आवेदन पर उनके पति और भैंसुर को जेल भेज दिया गया है, जिस पर उन्होंने विधायक से जांच कमेटी गठित कर मामले की जाँच कराने की मांग की। प्रखंड के धनहरा गांव से आईं झरिया देवी और यशोदा देवी सहित अन्य महिलाओं ने विधायक को चापाकल लगवाने के लिए आवेदन दिया। इस अवसर पर रामेश्वर महतो, मुखिया सुबोध यादव, रविंद्र पांडेय, रोहित चौधरी, जितेंद्र मोहली, मुकेश मंडल, नकुल महतो, भोला महतो और संजय महतो सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।1
- बगोदर के औंरा स्थित मस्जिद और मदरसा से जुड़ी जमीन तथा अनुदान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद, अंजुमन कमेटी और मुस्लिम समुदाय खुलकर सामने आया है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए दस्तावेज़ पेश किए हैं और इन्हें मस्जिद-मदरसा की छवि धूमिल करने तथा समाज को बांटने की एक साजिश करार दिया है। अंजुमन कमेटी औंरा के सदर सरफराज अहमद ने मीडिया को बताया कि मस्जिद और मदरसा की 37 डिसमिल जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं। उन्होंने संबंधित दस्तावेज दिखाते हुए स्पष्ट किया कि करीब 45 वर्ष पूर्व यह जमीन मौलाना मो. युनूस रसीदी के नाम रजिस्ट्री हुई थी, लेकिन दस्तावेजों में यह साफ लिखा है कि जमीन का उपयोग मस्जिद और मदरसा के लिए ही होगा। इसलिए, मौलाना युनूस रसीदी या उनके वारिसों का इस जमीन पर कोई व्यक्तिगत स्वामित्व या अधिकार नहीं है। मदरसा अनुदान राशि के कथित गबन के आरोपों पर कमेटी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि मौलाना मो. युनूस रसीदी लगभग 10 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि जिस अनुदान राशि को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह तीन वर्ष पहले प्राप्त हुई थी। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मिली राशि के गबन का सवाल ही नहीं उठता। अंजुमन कमेटी और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरोप लगाने वालों पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन लोगों द्वारा यह मुद्दा उठाया जा रहा है, उनका मस्जिद और मदरसा के संचालन से कोई संबंध नहीं है। समुदाय का आरोप है कि पहले भी इसी तरह के प्रयास कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और लोगों को बांटने की कोशिश की गई थी, जिसका समुदाय ने एकजुट होकर जवाब दिया था। कमेटी सदस्यों ने मौलाना मो. युनूस रसीदी को एक सम्मानित और नेकदिल व्यक्ति बताया, जिन्होंने पूर्व में भी उन्हें बदनाम कर मदरसा से अलग करने के प्रयास के बावजूद समुदाय के आग्रह पर दोबारा जिम्मेदारी संभाली थी। समुदाय ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद और मदरसा से जुड़े मामलों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और आरोपों का जवाब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाएगा और किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।1
- भोजपुर, बिहार के बिलौटी गांव निवासी भारत भूषण तिवारी, जिन्हें 'आज का भगत सिंह' और अच्छे सोच-विचार वाले व्यक्ति के तौर पर दर्शाया गया है, का बिहार पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। यह दावा किया गया है कि बिहार सरकार ने ही भारत भूषण तिवारी का यह एनकाउंटर करवाया है।1
- कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित बैंक ऑफ इंडिया की फुलवरिया शाखा में एक गार्ड और एक युवक के बीच ईंट से हमला हुआ है। इस घटना में हमले के दौरान दोनों के सिर में चोटें आई हैं।1
- बिहार के बांका जिले में नए जिलाधिकारी (डीएम) ने अपना पहला आधिकारिक संबोधन दिया है।1
- डुमरी विधानसभा क्षेत्र में अधिकारी पदों को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ विधायक जयराम महतो के निर्वाचित होने के बाद से डुमरी प्रखंड में अधिकांश पदाधिकारी प्रभार के भरोसे ही कार्य कर रहे हैं। एसडीओ और बीडीओ सहित कई महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े हैं, जिससे स्थानीय जनता में यह संदेश जा रहा है कि विकास कार्यों को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है। जेएलकेएम सुप्रीमो सह विधायक जयराम महतो ने इस संबंध में संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर और दूरभाष पर बातचीत करके ध्यान दिलाया, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इस स्थिति का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता, गरीबों, किसानों, बुजुर्गों और जरूरतमंदों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें सरकारी योजनाओं और सेवाओं का समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर विधायक जयराम महतो ने सोमवार को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि एक पखवाड़े के भीतर रिक्त पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की जाती और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तो प्रखंड परिसर में एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। विधायक ने जोर देकर कहा कि डुमरी की जनता ने अपने प्रतिनिधि को विकास और जनसेवा के लिए चुना है, और जनता के अधिकारों तथा क्षेत्र के विकास में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सरकार से अविलंब इस विषय पर संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।1
- अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर.... अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर1
- पाकुड़ में फर्जी सर्टिफिकेट बनाने का एक मामला सामने आया है। इस घटना में, फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले एक आरोपी को ग्रामीणों ने पकड़ लिया है।1
- एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति को, जो कभी मुखिया का चुनाव हार गए थे, आज देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक, पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। यह पूरी कहानी संघर्ष, समर्पण और समाज सेवा का प्रतीक है, जो यह संदेश देती है कि हार कभी अंत नहीं होती, बल्कि यह वास्तव में एक नई शुरुआत का रास्ता बनाती है।1