अयोध्या में देश के प्रमुख एवं अतिसंवेदनशील हनुमानगढ़ी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सोमवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए। सुबह करीब 10 बजे से 10:15 बजे के बीच मंदिर परिसर और मुख्य प्रवेश द्वार के पास तैनात कई सुरक्षाकर्मी मोबाइल फोन पर रील्स देखने और सोशल मीडिया का उपयोग करने में व्यस्त पाए गए, जबकि इस दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर के भीतर और बाहर तैनात अधिकांश सुरक्षाकर्मियों का ध्यान सुरक्षा निगरानी के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर अधिक था। वहीं कुछ पुलिसकर्मी समूह में बातचीत और हंसी-मजाक करते भी देखे गए, जिसने सुरक्षा की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। गौरतलब है कि हनुमानगढ़ी अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस क्षेत्र में उच्च सतर्कता अपेक्षित होती है। हालांकि, मंदिर परिसर के उस हिस्से में जहां श्रद्धालु हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाते हैं, वहां दो पुलिसकर्मी पूरी सतर्कता से अपनी ड्यूटी निभाते दिखे। बावजूद इसके, अन्य स्थानों पर दिखी कथित लापरवाही ने सुरक्षा प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि संवेदनशील स्थलों पर ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में ध्यान केंद्रित होने से किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया बाधित हो सकती है। स्थानीय लोगों ने अयोध्या की सुरक्षा को राष्ट्रीय महत्व का विषय बताते हुए, मामले की जांच, जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। इस स्थिति में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कर्मी ही ड्यूटी पर मोबाइल में व्यस्त हों, तो किसी संभावित सुरक्षा चूक की स्थिति में जवाबदेही किसकी तय होगी?
अयोध्या में देश के प्रमुख एवं अतिसंवेदनशील हनुमानगढ़ी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सोमवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए। सुबह करीब 10 बजे से 10:15 बजे के बीच मंदिर परिसर और मुख्य प्रवेश द्वार के पास तैनात कई सुरक्षाकर्मी मोबाइल फोन पर रील्स देखने और सोशल मीडिया का उपयोग करने में व्यस्त पाए गए, जबकि इस दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर के भीतर और बाहर तैनात अधिकांश सुरक्षाकर्मियों का ध्यान सुरक्षा निगरानी के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर अधिक था। वहीं कुछ पुलिसकर्मी समूह में बातचीत और हंसी-मजाक करते भी देखे गए, जिसने सुरक्षा की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। गौरतलब है कि हनुमानगढ़ी अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस क्षेत्र में उच्च सतर्कता अपेक्षित होती है। हालांकि, मंदिर परिसर के उस हिस्से में जहां श्रद्धालु हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाते हैं, वहां दो पुलिसकर्मी पूरी सतर्कता से अपनी ड्यूटी निभाते दिखे। बावजूद इसके, अन्य स्थानों पर दिखी कथित लापरवाही ने सुरक्षा प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि संवेदनशील स्थलों पर ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में ध्यान केंद्रित होने से किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया बाधित हो सकती है। स्थानीय लोगों ने अयोध्या की सुरक्षा को राष्ट्रीय महत्व का विषय बताते हुए, मामले की जांच, जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। इस स्थिति में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कर्मी ही ड्यूटी पर मोबाइल में व्यस्त हों, तो किसी संभावित सुरक्षा चूक की स्थिति में जवाबदेही किसकी तय होगी?
- अयोध्या में देश के प्रमुख एवं अतिसंवेदनशील हनुमानगढ़ी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सोमवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए। सुबह करीब 10 बजे से 10:15 बजे के बीच मंदिर परिसर और मुख्य प्रवेश द्वार के पास तैनात कई सुरक्षाकर्मी मोबाइल फोन पर रील्स देखने और सोशल मीडिया का उपयोग करने में व्यस्त पाए गए, जबकि इस दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर के भीतर और बाहर तैनात अधिकांश सुरक्षाकर्मियों का ध्यान सुरक्षा निगरानी के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर अधिक था। वहीं कुछ पुलिसकर्मी समूह में बातचीत और हंसी-मजाक करते भी देखे गए, जिसने सुरक्षा की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। गौरतलब है कि हनुमानगढ़ी अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस क्षेत्र में उच्च सतर्कता अपेक्षित होती है। हालांकि, मंदिर परिसर के उस हिस्से में जहां श्रद्धालु हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाते हैं, वहां दो पुलिसकर्मी पूरी सतर्कता से अपनी ड्यूटी निभाते दिखे। बावजूद इसके, अन्य स्थानों पर दिखी कथित लापरवाही ने सुरक्षा प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि संवेदनशील स्थलों पर ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में ध्यान केंद्रित होने से किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया बाधित हो सकती है। स्थानीय लोगों ने अयोध्या की सुरक्षा को राष्ट्रीय महत्व का विषय बताते हुए, मामले की जांच, जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। इस स्थिति में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कर्मी ही ड्यूटी पर मोबाइल में व्यस्त हों, तो किसी संभावित सुरक्षा चूक की स्थिति में जवाबदेही किसकी तय होगी?1
- एक पुराने हमले के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी अजय प्रताप सिंह को 23 जून को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में लगभग सभी तहसील क्षेत्रों में इन दिनों जमीनी विवादों को लेकर हाहाकार की स्थिति देखी जा रही है, जिसके चलते जगह-जगह खूनी संघर्ष हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच, आरोप है कि राजस्व कर्मचारी दोनों पक्षों से 'सुविधा शुल्क' वसूल कर 'मलाई काट' रहे हैं, जबकि अधिकारी इस पूरे मामले पर मौन साधे हुए हैं। अधिकारियों की इस निष्क्रियता और कर्मचारियों के कथित भ्रष्टाचार के कारण आम आदमी बेहद हैरान और परेशान है, और गरीब लोग न्याय के लिए तरस रहे हैं। बताया गया है कि अधिकारी फाइलों में उलझे हुए हैं, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर यह 'कब्जे का खेल' कब रुकेगा और लोगों को इंसाफ कब मिलेगा। मौजूदा हालात में, कर्मचारियों को 'जोंक' की तरह बताया जा रहा है।1
- अम्बेडकर नगर जिले की आलापुर विधानसभा क्षेत्र के बहिंगवा जोगीपुर गाँव में बंदरों का आतंक फैल गया है, जिससे ग्रामीण बेहद परेशान हैं। इन बंदरों के डर से लोग अपनी छतों पर कपड़े नहीं फैला पा रहे हैं, क्योंकि ऐसा करना मुश्किल हो गया है। स्थिति यह है कि जब बच्चे बाहर निकलते हैं तो बंदर उन्हें काटने के लिए दौड़ाते हैं, और रात में सोना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीण इस समस्या से बहुत त्रस्त हैं।1
- आज के दौर में जहां लोग अपनी सेहत के लिए जिम और डाइट पर हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं मेडिकल साइंस और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक बेहतरीन और बिल्कुल मुफ्त उपाय बता रहे हैं: खुलकर हंसना। उनके मुताबिक, "हंसना ही सबसे बेहतरीन दवा है" और मुस्कुराहट व ठहाके सबसे प्रभावी इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में उभरे हैं, जिससे सुबह-शाम गोलियां खाने की ज़रूरत कम हो सकती है। हंसने के कई वैज्ञानिक लाभ बताए गए हैं। यह तनाव को दूर करने में मदद करता है, क्योंकि खुलकर हंसने से शरीर में कोर्टिसोल (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) का स्तर तेजी से गिरता है और एंडोर्फिन (हैप्पी हार्मोन) का स्राव होता है। दिल की सेहत के लिए भी यह एक सुरक्षा कवच है, क्योंकि हंसने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। इसके अलावा, हंसी एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में भी काम करती है; एक जोरदार ठहाका शरीर के प्राकृतिक दर्द निवारक तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे हल्के-फुल्के बदन दर्द में तत्काल राहत मिल सकती है। हंसने से चेहरे की मांसपेशियों का भी अच्छा व्यायाम होता है, जिससे बिना किसी महंगी क्रीम के चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। देशभर के पार्कों में अब लाफ्टर क्लब का क्रेज बढ़ रहा है, जहां लोग योग के साथ-साथ ग्रुप बनाकर बिना किसी खास वजह के भी हंसने का अभ्यास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बनावटी हंसी भी शरीर को असली हंसी जैसे ही फायदे पहुंचाती है, क्योंकि दिमाग दोनों में फर्क नहीं कर पाता। एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है कि "जिंदगी में मुश्किलें चाहे जितनी हों, उनके मुंह पर एक करारा ठहाका मारिए। हंसने से मुश्किलें आसान तो नहीं होंगी, लेकिन उन्हें झेलने की ताकत दोगुनी जरूर हो जाएगी।" यह संदेश लोगों को कंजूसी छोड़कर खुद भी हंसने और दूसरों को भी हंसाने के लिए प्रेरित करता है, यह याद दिलाते हुए कि तंदुरुस्ती का रास्ता महंगी जिम मशीनों से नहीं, बल्कि होंठों की मुस्कान से होकर गुजरता है। इस पर एक व्यंगात्मक टिप्पणी भी है कि हंसने पर कोई जीएसटी नहीं लगता, इसलिए बेझिझक मुस्कुराएं और दवाइयां घटाएं।1
- सुलतानपुर शहर के घंटाघर चौकी क्षेत्र स्थित लक्ष्मी होटल में खाना खाने पहुंचे चार युवकों और होटल संचालकों के बीच बिल भुगतान को लेकर विवाद हो गया। यह कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में बदल गई, जिसमें धर्मात्मा सिंह, विपिन पांडे और राजन नामक तीन युवक घायल हो गए। तीनों युवकों के सिर में चोटें आई हैं, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और होटल मालिक हर्षित पोपटानी तथा पूरन पोपटानी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। सीओ सिटी सौरभ सामंत ने बताया कि घटना के बाद क्षेत्र में शांति व्यवस्था सामान्य है और मामले की जांच की जा रही है, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- अम्बेडकर नगर के राजेसुल्तानपुर क्षेत्र में एक कथित भूमि विवाद के कारण गरीब परिवारों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में ही जमीन पर कब्जा दिलाने की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे प्रभावित परिवार खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जिस भूमि पर वे वर्षों से काबिज और निवासी हैं, उसे लेकर अब विवाद खड़ा कर दिया गया है। उनकी प्रमुख मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और गरीब परिवारों के अधिकारों की हर हाल में रक्षा सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस से स्पष्ट अपेक्षा व्यक्त की है कि वे कानून के दायरे में रहते हुए निष्पक्ष कार्रवाई करें, ताकि किसी भी निर्दोष परिवार के साथ कोई अन्याय न हो और उनके बीच व्याप्त दहशत खत्म हो।1