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मोक्ष धाम की जमीन पर बसी अवैध बस्ती, सुविधाएं भी मिलीं — जिम्मेदार कौन? मंडावरी (दौसा) मंडावरी नगर में मोक्ष धाम के लिए आरक्षित 19 बीघा 9 बिस्वा सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर बस्ती बसाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन का उपयोग अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए होना था, वह आज कब्जों और अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, इस भूमि पर अवैध रूप से बस्ती बसाई गई और स्थिति यहां तक पहुंच गई कि मोक्ष धाम विकास समिति को ₹3 लाख खर्च कर अलग से जमीन खरीदनी पड़ी। सवाल यह उठता है कि जब जमीन पहले से उपलब्ध थी तो समिति को अतिरिक्त खर्च क्यों करना पड़ा? बस्ती में रहने वाले लोगों को सीमेंट सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं, जबकि नियमानुसार बिना वैध पट्टे के इस प्रकार की सुविधाएं देना संभव नहीं है। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि किनके आदेश पर और किसके संरक्षण में यह सुविधाएं दी गईं? इतना ही नहीं, नगर पालिका और पुलिस प्रशासन के पास इस बस्ती में रहने वाले लोगों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं है। बाहरी लोगों के यहां बसने और जमीन की खरीद-फरोख्त जारी रहने की बात भी सामने आ रही है। 👉 ऐसे में सवाल उठता है कि जब रिकॉर्ड ही नहीं, तो फिर यह बसावट किस आधार पर मान्य मानी जा रही है? स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बस्ती में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां होती हैं, लेकिन निगरानी के अभाव में कोई कार्रवाई नहीं हो रही। 👉 क्या प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर जानकर भी अनदेखी की जा रही है? मामले को और गंभीर बनाता है अवैध निर्माण का मुद्दा, जहां बिना अनुमति धार्मिक ढांचा खड़ा किए जाने की शिकायत सामने आई है। 👉 ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि क्या सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण बिना अनुमति संभव है? ❗ जवाब मांगते सवाल: मोक्ष धाम की आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण कैसे हुआ? अवैध बस्ती को मूलभूत सुविधाएं किसके आदेश पर दी गईं? बिना रिकॉर्ड के लोग यहां कैसे बस गए? जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक क्यों नहीं लगी? संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं? 🔍 निष्कर्ष: यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह अनदेखा कर दिया जाएगा। रिपोर्टर : खेमराज जोशी

4 hrs ago
user_Khemraj Joshi
Khemraj Joshi
Yoga instructor राहुवास, दौसा, राजस्थान•
4 hrs ago

मोक्ष धाम की जमीन पर बसी अवैध बस्ती, सुविधाएं भी मिलीं — जिम्मेदार कौन? मंडावरी (दौसा) मंडावरी नगर में मोक्ष धाम के लिए आरक्षित 19 बीघा 9 बिस्वा सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर बस्ती बसाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन का उपयोग अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए होना था, वह आज कब्जों और अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, इस भूमि पर अवैध रूप से बस्ती बसाई गई और स्थिति यहां तक पहुंच गई कि मोक्ष धाम विकास समिति को ₹3 लाख खर्च कर अलग से जमीन खरीदनी पड़ी। सवाल यह उठता है कि जब जमीन पहले से उपलब्ध थी तो समिति को अतिरिक्त खर्च क्यों करना पड़ा? बस्ती में रहने वाले लोगों को सीमेंट सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं

भी उपलब्ध कराई गईं, जबकि नियमानुसार बिना वैध पट्टे के इस प्रकार की सुविधाएं देना संभव नहीं है। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि किनके आदेश पर और किसके संरक्षण में यह सुविधाएं दी गईं? इतना ही नहीं, नगर पालिका और पुलिस प्रशासन के पास इस बस्ती में रहने वाले लोगों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं है। बाहरी लोगों के यहां बसने और जमीन की खरीद-फरोख्त जारी रहने की बात भी सामने आ रही है। 👉 ऐसे में सवाल उठता है कि जब रिकॉर्ड ही नहीं, तो फिर यह बसावट किस आधार पर मान्य मानी जा रही है? स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बस्ती में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां होती हैं, लेकिन निगरानी के अभाव में कोई कार्रवाई नहीं हो रही। 👉 क्या प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर

जानकर भी अनदेखी की जा रही है? मामले को और गंभीर बनाता है अवैध निर्माण का मुद्दा, जहां बिना अनुमति धार्मिक ढांचा खड़ा किए जाने की शिकायत सामने आई है। 👉 ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि क्या सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण बिना अनुमति संभव है? ❗ जवाब मांगते सवाल: मोक्ष धाम की आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण कैसे हुआ? अवैध बस्ती को मूलभूत सुविधाएं किसके आदेश पर दी गईं? बिना रिकॉर्ड के लोग यहां कैसे बस गए? जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक क्यों नहीं लगी? संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं? 🔍 निष्कर्ष: यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह अनदेखा कर दिया जाएगा। रिपोर्टर : खेमराज जोशी

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  • मंडावरी (दौसा) मंडावरी नगर में मोक्ष धाम के लिए आरक्षित 19 बीघा 9 बिस्वा सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर बस्ती बसाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन का उपयोग अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए होना था, वह आज कब्जों और अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, इस भूमि पर अवैध रूप से बस्ती बसाई गई और स्थिति यहां तक पहुंच गई कि मोक्ष धाम विकास समिति को ₹3 लाख खर्च कर अलग से जमीन खरीदनी पड़ी। सवाल यह उठता है कि जब जमीन पहले से उपलब्ध थी तो समिति को अतिरिक्त खर्च क्यों करना पड़ा? बस्ती में रहने वाले लोगों को सीमेंट सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं, जबकि नियमानुसार बिना वैध पट्टे के इस प्रकार की सुविधाएं देना संभव नहीं है। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि किनके आदेश पर और किसके संरक्षण में यह सुविधाएं दी गईं? इतना ही नहीं, नगर पालिका और पुलिस प्रशासन के पास इस बस्ती में रहने वाले लोगों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं है। बाहरी लोगों के यहां बसने और जमीन की खरीद-फरोख्त जारी रहने की बात भी सामने आ रही है। 👉 ऐसे में सवाल उठता है कि जब रिकॉर्ड ही नहीं, तो फिर यह बसावट किस आधार पर मान्य मानी जा रही है? स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बस्ती में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां होती हैं, लेकिन निगरानी के अभाव में कोई कार्रवाई नहीं हो रही। 👉 क्या प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर जानकर भी अनदेखी की जा रही है? मामले को और गंभीर बनाता है अवैध निर्माण का मुद्दा, जहां बिना अनुमति धार्मिक ढांचा खड़ा किए जाने की शिकायत सामने आई है। 👉 ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि क्या सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण बिना अनुमति संभव है? ❗ जवाब मांगते सवाल: मोक्ष धाम की आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण कैसे हुआ? अवैध बस्ती को मूलभूत सुविधाएं किसके आदेश पर दी गईं? बिना रिकॉर्ड के लोग यहां कैसे बस गए? जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक क्यों नहीं लगी? संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं? 🔍 निष्कर्ष: यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह अनदेखा कर दिया जाएगा। रिपोर्टर : खेमराज जोशी
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    मंडावरी (दौसा)
मंडावरी नगर में मोक्ष धाम के लिए आरक्षित 19 बीघा 9 बिस्वा सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर बस्ती बसाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन का उपयोग अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए होना था, वह आज कब्जों और अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
जानकारी के अनुसार, इस भूमि पर अवैध रूप से बस्ती बसाई गई और स्थिति यहां तक पहुंच गई कि मोक्ष धाम विकास समिति को ₹3 लाख खर्च कर अलग से जमीन खरीदनी पड़ी। सवाल यह उठता है कि जब जमीन पहले से उपलब्ध थी तो समिति को अतिरिक्त खर्च क्यों करना पड़ा?
बस्ती में रहने वाले लोगों को सीमेंट सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं, जबकि नियमानुसार बिना वैध पट्टे के इस प्रकार की सुविधाएं देना संभव नहीं है। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि किनके आदेश पर और किसके संरक्षण में यह सुविधाएं दी गईं?
इतना ही नहीं, नगर पालिका और पुलिस प्रशासन के पास इस बस्ती में रहने वाले लोगों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं है। बाहरी लोगों के यहां बसने और जमीन की खरीद-फरोख्त जारी रहने की बात भी सामने आ रही है।
👉 ऐसे में सवाल उठता है कि
जब रिकॉर्ड ही नहीं, तो फिर यह बसावट किस आधार पर मान्य मानी जा रही है?
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बस्ती में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां होती हैं, लेकिन निगरानी के अभाव में कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
👉 क्या प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर जानकर भी अनदेखी की जा रही है?
मामले को और गंभीर बनाता है अवैध निर्माण का मुद्दा, जहां बिना अनुमति धार्मिक ढांचा खड़ा किए जाने की शिकायत सामने आई है।
👉 ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि
क्या सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण बिना अनुमति संभव है?
❗ जवाब मांगते सवाल:
मोक्ष धाम की आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण कैसे हुआ?
अवैध बस्ती को मूलभूत सुविधाएं किसके आदेश पर दी गईं?
बिना रिकॉर्ड के लोग यहां कैसे बस गए?
जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक क्यों नहीं लगी?
संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं?
🔍 निष्कर्ष:
यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह अनदेखा कर दिया जाएगा।
रिपोर्टर : खेमराज जोशी
    user_Khemraj Joshi
    Khemraj Joshi
    Yoga instructor राहुवास, दौसा, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • लालसोट में पेंशनर्स ने मनाया काला दिवस लालसोट। राजस्थान पेंशन समाज उप शाखा के अध्यक्ष सुरेश त्रिवेदी के नेतृत्व में 25 मार्च को पेंशनर्स ने वैधता अधिनियम 2025 के विरोध में काला दिवस मनाया। इस दौरान उपखंड अधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सभा में मंत्री विमलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि पेंशन सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है और इसे समाप्त करना पेंशनर्स के हितों के खिलाफ है। उन्होंने अधिनियम को वापस लेने की मांग की।
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    लालसोट में पेंशनर्स ने मनाया काला दिवस
लालसोट। राजस्थान पेंशन समाज उप शाखा के अध्यक्ष सुरेश त्रिवेदी के नेतृत्व में 25 मार्च को पेंशनर्स ने वैधता अधिनियम 2025 के विरोध में काला दिवस मनाया। इस दौरान उपखंड अधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
सभा में मंत्री विमलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि पेंशन सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है और इसे समाप्त करना पेंशनर्स के हितों के खिलाफ है। उन्होंने अधिनियम को वापस लेने की मांग की।
    user_Girdhari lal Sahu
    Girdhari lal Sahu
    Lalsot, Dausa•
    5 hrs ago
  • कुण्डल CHC हॉस्पिटल मैं लगी मरीजों की लगी लम्बी कतार लेकिन एक भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं नर्सिंग कर्मियों द्वारा किया जा रहा है। रोगियों का ईलाज। नर्सिंग ऑफिसर अमित तिवारी का कहना है कि उच्च अधिकारियों के दबाव में करवाया जा रहा है हमसे इलाज बीसीएमओ द्वारा दिया गया हमारे ऊपर बनाया दबाव जब की अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर की ड्यूटी रहती हैं
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    कुण्डल CHC हॉस्पिटल मैं लगी मरीजों की लगी लम्बी कतार  लेकिन एक भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं नर्सिंग कर्मियों द्वारा किया जा रहा है। रोगियों का ईलाज।
नर्सिंग ऑफिसर अमित तिवारी का कहना है कि उच्च अधिकारियों के दबाव में करवाया जा रहा है हमसे इलाज  बीसीएमओ द्वारा दिया गया हमारे ऊपर बनाया दबाव जब की अस्पताल में 24 घंटे  डॉक्टर की ड्यूटी रहती हैं
    user_RIVENDRA KUMAR SHARMA
    RIVENDRA KUMAR SHARMA
    Local News Reporter Dausa, Rajasthan•
    3 hrs ago
  • Post by Ganesh Yogi
    1
    Post by Ganesh Yogi
    user_Ganesh Yogi
    Ganesh Yogi
    Local News Reporter दौसा, दौसा, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • फोटो स्टोरी एलपीजी भरवाने के लिए ऑटो की लंबी कतार कानोता. आगरा रोड स्थित कानोता में पेट्रोल पंप पर मंगलवार को एलपीजी भरवाने के लिए ऑटो चालकों की भारी भीड़ उमड़ी। ऑटो चालक अपने वाहनों में एलपीजी भरवाने पहुंचे, जिससे पंप पर एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतार लग गई। भीड़ अधिक होने से कई चालकों को लंबा इंतजार करना पड़ा। अचानक बढ़ी भीड़ के कारण कुछ समय के लिए अव्यवस्था भी बनी। स्थानीय ऑटो चालकों ने बताया कि आसपास सीमित पंप होने के कारण इसी एक पंप पर भारी दबाव रहता है।
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    फोटो स्टोरी
एलपीजी भरवाने के लिए ऑटो की लंबी कतार
कानोता. आगरा रोड स्थित कानोता में पेट्रोल पंप पर मंगलवार को
एलपीजी भरवाने के लिए ऑटो चालकों की भारी भीड़ उमड़ी। ऑटो चालक अपने वाहनों में एलपीजी भरवाने पहुंचे, जिससे पंप पर एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतार लग गई। भीड़ अधिक होने से कई चालकों को लंबा इंतजार करना पड़ा। अचानक बढ़ी भीड़ के कारण कुछ समय के लिए अव्यवस्था भी बनी। स्थानीय ऑटो चालकों ने बताया कि आसपास सीमित पंप होने के कारण इसी एक पंप पर भारी दबाव रहता है।
    user_Yogesh Kumar Gupta
    Yogesh Kumar Gupta
    पत्रकार बस्सी, जयपुर, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • गंगापुर सिटी। गंगापुर सिटी में मंगलवार रात एक दर्दनाक हादसे में 26 वर्षीय युवक की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। मृतक की पहचान अकील पुत्र शकील निवासी बड़ी उदई के रूप में हुई है। घटना लोको फाटक के पास पुलिया के नजदीक रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार अकील अपनी ससुराल लोको क्षेत्र में आया हुआ था। इसी दौरान वह किसी कारणवश रेलवे ट्रैक के पास पहुंच गया, जहां तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। जीआरपी पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया यह हादसा राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से हुआ है। हालांकि, मृतक के परिजनों ने इस घटना को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर गंगापुर सिटी के जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।
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    गंगापुर सिटी।
गंगापुर सिटी में मंगलवार रात एक दर्दनाक हादसे में 26 वर्षीय युवक की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। मृतक की पहचान अकील पुत्र शकील निवासी बड़ी उदई के रूप में हुई है। घटना लोको फाटक के पास पुलिया के नजदीक रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अकील अपनी ससुराल लोको क्षेत्र में आया हुआ था। इसी दौरान वह किसी कारणवश रेलवे ट्रैक के पास पहुंच गया, जहां तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया।
जीआरपी पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया यह हादसा राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से हुआ है। हालांकि, मृतक के परिजनों ने इस घटना को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर गंगापुर सिटी के जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।
    user_Uttam Kumar Meena
    Uttam Kumar Meena
    Media and information sciences faculty गंगापुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • सवाई माधोपुर। जिले के गंगापुर सिटी स्थित रिद्धि सिद्धि हॉस्पिटल में एक प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया और परिजनों ने जमकर हंगामा किया। जानकारी के अनुसार परिता गांव निवासी एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन गंगापुर सिटी के रिद्धि सिद्धि हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया और महिला का उपचार सही तरीके से नहीं किया गया। परिजनों का कहना है कि काफी देर तक महिला को समय पर उचित ईलाज नहीं मिला, जिससे उसकी हालात बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने परिजनों से समझाइश कर मामला शांत कराया। वहीं परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इधर, अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस संबंध में जब उदेई मोड थाना अधिकारी से मामले के बारे में जानकारी ली गई तो बताया कि मृतक महिला प्रसूता नहीं थी एक महीने पहले मृतक महिला की डीएनसी हो गई थी इसके बाद आज इलाज के लिए आए थे।
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    सवाई माधोपुर। जिले के गंगापुर सिटी स्थित रिद्धि सिद्धि हॉस्पिटल में एक प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया और परिजनों ने जमकर हंगामा किया। जानकारी के अनुसार परिता गांव निवासी एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन गंगापुर सिटी के रिद्धि सिद्धि हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया और महिला का उपचार सही तरीके से नहीं किया गया। परिजनों का कहना है कि काफी देर तक महिला को समय पर उचित ईलाज नहीं मिला, जिससे उसकी हालात बिगड़ती
चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने परिजनों से समझाइश कर मामला शांत कराया। वहीं परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इधर, अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस संबंध में जब उदेई मोड थाना अधिकारी से मामले के बारे में जानकारी ली गई तो बताया कि मृतक महिला प्रसूता नहीं थी एक महीने पहले मृतक महिला की डीएनसी हो गई थी इसके बाद आज इलाज के लिए आए थे।
    user_Rakhi g News
    Rakhi g News
    सम्पादक , राखी गरिमा समाचार पत्र गंगापुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • करोड़ों का अस्पताल, मरीज बेहाल करोड़ों रुपये से बने जिला अस्पताल में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा। डॉक्टर व स्टाफ की कमी के कारण घंटों इंतजार के बाद भी उपचार नहीं हो पा रहा है। मंगलवार रात 8.30 बजे सड़क हादसे में घायल किशन कंडोला अस्पताल पहुंचा, लेकिन डॉक्टर ने इलाज करने के बजाय एक्स-रे की सलाह दे दी। एक्स-रे कक्ष बंद मिला और 2 घंटे इंतजार के बाद भी कोई नहीं आया। दर्द से परेशान मरीज को आखिर निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। यह हालात जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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    करोड़ों का अस्पताल, मरीज बेहाल
करोड़ों रुपये से बने जिला अस्पताल में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा। डॉक्टर व स्टाफ की कमी के कारण घंटों इंतजार के बाद भी उपचार नहीं हो पा रहा है।
मंगलवार रात 8.30 बजे सड़क हादसे में घायल किशन कंडोला अस्पताल पहुंचा, लेकिन डॉक्टर ने इलाज करने के बजाय एक्स-रे की सलाह दे दी। एक्स-रे कक्ष बंद मिला और 2 घंटे इंतजार के बाद भी कोई नहीं आया। दर्द से परेशान मरीज को आखिर निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
यह हालात जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
    user_Girdhari lal Sahu
    Girdhari lal Sahu
    Lalsot, Dausa•
    20 hrs ago
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