गुरु: अंधकार से प्रकाश तक का सफर गुरु बिना ज्ञान कहां, गुरु बिना मुक्ति कहां। गुरु पूर्णिमा सिर्फ एक तिथि नहीं है।ये उस रिश्ते का जश्न है जो हमें इंसान से देवता बना देता है।गुरु वो दीपक हैं जो खुद जलकर हमें रास्ता दिखाते हैं।वो माँ-बाप के बाद भगवान का दूसरा रूप हैं।उन्होंने हमें अक्षर ज्ञान दिया, संस्कार दिए और गिरकर उठना सिखाया। गुरु गोविंद दोऊ खड़े,काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने,गोविंद दियो बताय। आज के दिन हम उन सभी गुरुओं को नमन करते हैं जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के हमें जीवन की राह दिखाई।जिनका एक शब्द हमारी जिंदगी बदल देता है,जिनका एक आशीर्वाद हमें हर मुश्किल से लड़ा देता है। गुरुजी,आपका ऋण हम 7 जन्मों में भी नहीं चुका सकते।बस इतना ही कहना हैआपका आशीर्वाद हमेशा हम पर बना रहे।गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 ।।ॐ गुरु देवाय नमः।। > गुरु बिना ज्ञान कहां, गुरु बिना मुक्ति कहां। > आप ही मेरे ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं गुरुजी। > गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🙏
गुरु: अंधकार से प्रकाश तक का सफर गुरु बिना ज्ञान कहां, गुरु बिना मुक्ति कहां। गुरु पूर्णिमा सिर्फ एक तिथि नहीं है।ये उस रिश्ते का जश्न है जो हमें इंसान से देवता बना देता है।गुरु वो दीपक हैं जो खुद जलकर हमें रास्ता दिखाते हैं।वो माँ-बाप के बाद भगवान का दूसरा रूप हैं।उन्होंने हमें अक्षर ज्ञान दिया, संस्कार दिए और गिरकर उठना सिखाया। गुरु गोविंद दोऊ खड़े,काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने,गोविंद दियो बताय। आज के दिन हम उन सभी गुरुओं को नमन करते हैं जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के हमें जीवन की राह दिखाई।जिनका एक शब्द हमारी जिंदगी बदल देता है,जिनका एक आशीर्वाद हमें हर मुश्किल से लड़ा देता है। गुरुजी,आपका ऋण हम 7 जन्मों में भी नहीं चुका सकते।बस इतना ही कहना हैआपका आशीर्वाद हमेशा हम पर बना रहे।गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 ।।ॐ गुरु देवाय नमः।। > गुरु बिना ज्ञान कहां, गुरु बिना मुक्ति कहां। > आप ही मेरे ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं गुरुजी। > गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🙏
- जाति धर्म के ऊपर कोई भाषण नहीं होना चाहिए जाति धर्म के ऊपर विरोध करने वाले व्यक्ति बहुत बड़े राजनीतिक नहीं होते जो जाति धर्म के ऊपर भाषण करें उसको जल्दी से जल्दी बदल दिया जाए1
- गुरु पूर्णिमा पर बाबा कीनाराम धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किया दर्शन-पूजन जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली चहनिया/चंदौली। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाकापालिक अघोरेश्वर बाबा कीनाराम की जन्मस्थली एवं तपोस्थली रामगढ़ धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज़ के जिलों से पहुंचे हजारों भक्तों ने बाबा की आरती, हवन-पूजन कर मत्था टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया। धाम में महाप्रसाद का वितरण किया गया तथा भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। मठ प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की, जबकि सुरक्षा के मद्देनज़र बलुआ थाना पुलिस पूरे समय तैनात रही।1
- गुरु: अंधकार से प्रकाश तक का सफर गुरु बिना ज्ञान कहां, गुरु बिना मुक्ति कहां। गुरु पूर्णिमा सिर्फ एक तिथि नहीं है।ये उस रिश्ते का जश्न है जो हमें इंसान से देवता बना देता है।गुरु वो दीपक हैं जो खुद जलकर हमें रास्ता दिखाते हैं।वो माँ-बाप के बाद भगवान का दूसरा रूप हैं।उन्होंने हमें अक्षर ज्ञान दिया, संस्कार दिए और गिरकर उठना सिखाया। गुरु गोविंद दोऊ खड़े,काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने,गोविंद दियो बताय। आज के दिन हम उन सभी गुरुओं को नमन करते हैं जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के हमें जीवन की राह दिखाई।जिनका एक शब्द हमारी जिंदगी बदल देता है,जिनका एक आशीर्वाद हमें हर मुश्किल से लड़ा देता है। गुरुजी,आपका ऋण हम 7 जन्मों में भी नहीं चुका सकते।बस इतना ही कहना हैआपका आशीर्वाद हमेशा हम पर बना रहे।गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 ।।ॐ गुरु देवाय नमः।। > गुरु बिना ज्ञान कहां, गुरु बिना मुक्ति कहां। > आप ही मेरे ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं गुरुजी। > गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं 🙏1
- ब्रेकिंग न्यूज़ वाराणसी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉक्टर सतीश कुमार कसेरा अपने ग्रुरु जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मालीनं स्वामी स्वरूपानंदसरस्वती जी का पूजन अर्चन करते हुए तत्पश्चा वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वर आनंद जी का स्मरण पूजन आदि कियानाम जप करते हुए श्री क कसेरा ने इस अवसर पर संदेश देते हुए कहा कि गुरु की कृपा के बिना कुछ नहीं हो सकता सभी को चाहिए अगर हिंदू धर्म में है सनातन धर्म में है तो जनेऊ धारण करने के साथ-साथ वह गुरमुख गुरु मंत्र अवश्य लें जिससे उनके काम स्वत ही बनने लगेंगे और किसी प्रकार का तंत्र मंत्र क्रिया आदि सफल नहीं होगा4
- गंगा की गोद में बसी है एक ऐसी मां जिसके दरबार में बीमारी भी हार मान लेती है अदलपुरा बड़ी शीतला माता धाम आप देख रहे हैं न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट मिर्ज़ापुर,चुनार।गंगा की शीतल लहरों के किनारे,चुनार से लगभग 10 किमी दूर अदलपुरा गांव में एक ऐसी शक्ति विराजमान है जहां दर्द भी दवा मांगने आता है,और आंसू भी आशीर्वाद बनकर लौटते है।बड़ी शीतला माता मंदिर एक ऐसा पावन धाम,जिसकी स्थापना की तारीख इतिहास के पन्नों में नहीं,बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा में दर्ज है।अनादि काल से चली आ रही आस्था कहते हैं ये मंदिर सदियों पुराना है।विद्वान इसे मध्यकाल से भी पहले का मानते हैं।लोक मान्यता है कि यहां माता की प्रतिमा स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थी। उसी दिन से पूजा शुरू हुई और धीरे-धीरे ये आस्था का महातीर्थ बन गया।इस धाम की सबसे अनोखी विशेषता यहां निषाद/मल्लाह समुदाय के लोग पीढ़ियों से माता की सेवा करते आ रहे हैं।गंगा पुत्रों के हाथों से हुई पूजा में एक अलग ही अपनापन और पवित्रता है।जहां बीमारी भी माथा टेकती है शीतला माता को संतानों की रक्षक कहा जाता है।मान्यता है कि चेचक,खसरा और फोड़े-फुंसी जैसी बीमारियों में माता बासी भोग से तुरंत कृपा करती हैं।इसीलिए यहां गर्म भोग वर्जित है।भक्त माता को पूड़ी-हलवा,लापसी और बाटी-चोखा का शीतल प्रसाद चढ़ाते हैं।मन्नत पूरी होने पर लोग गंगा किनारे भंडारा करते हैं और नीम के पेड़ पर मौली बांधकर आभार जताते हैं।दर्शन का समय और खास दिन समय प्रातः06:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक आरती:सुबह-शाम की विशेष आरती मन को असीम शांति देती है मंगलवार:आस्था का मेला लगता है वाराणसी मिर्जापुर से हजारों श्रद्धालु आते हैं नवरात्रि:चैत्र और अश्विन नवरात्रि में 9 दिन मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। पूरा घाट लाखों दीपों से जगमगाता है शांति से दर्शन के लिए बुधवार से शुक्रवार, सुबह 6 से 8 बजे के बीच जाएं।कैसे पहुंचे,वाराणसी कैंट से मात्र 28 किमी,50 मिनट मार्ग लहरतारा,DLW,SH-74अदलपुरा रास्ते में विंध्याचल की तरह सजा बाजार मिलता है,जहां से चुनरी,नारियल और कलावा ले सकते हैं।यहां दवा नहीं,दुआ काम करती है।यहां प्रसाद नहीं,ममता मिलती है।एक बार दिल से लिखिए "जय शीतला माता"माता सभी की झोली भरती है1
- आशा लाइब्रेरी की दो और छात्राओं का पुणे के स्कूल ऑफ प्रोग्रामिंग में चयन, ₹4 लाख की स्कॉलरशिप मिली1
- गंगा के किनारे अदलपुरा में सदियों पुराना शीतला माता मंदिर, बीमारियां भी मांगती हैं आशीर्वाद आप देख रहे हैं न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट मिर्ज़ापुर, चुनार। गंगा की शीतल लहरों के किनारे, चुनार से लगभग 10 किमी दूर अदलपुरा गांव में एक ऐसी शक्ति विराजमान है जहां दर्द भी दवा मांगने आता है, और आंसू भी आशीर्वाद बनकर लौटते है। बड़ी शीतला माता मंदिर एक ऐसा पावन धाम, जिसकी स्थापना की तारीख इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा में दर्ज है। अनादि काल से चली आ रही आस्था कहते हैं ये मंदिर सदियों पुराना है। विद्वान इसे मध्यकाल से भी पहले का मानते हैं। लोक मान्यता है कि यहां माता की प्रतिमा स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थी। उसी दिन से पूजा शुरू हुई और धीरे-धीरे ये आस्था का महातीर्थ बन गया। इस धाम की सबसे अनोखी विशेषता यहां निषाद/मल्लाह समुदाय के लोग पीढ़ियों से माता की सेवा करते आ रहे हैं। गंगा पुत्रों के हाथों से हुई पूजा में एक अलग ही अपनापन और पवित्रता है। जहां बीमारी भी माथा टेकती है शीतला माता को संतानों की रक्षक कहा जाता है। मान्यता है कि चेचक, खसरा और फोड़े- फुंसी जैसी बीमारियों में माता बासी भोग से तुरंत कृपा करती हैं। इसीलिए यहां गर्म भोग वर्जित है। भक्त माता को पूड़ी-हलवा, लापसी और बाटी-चोखा का शीतल प्रसाद चढ़ाते हैं। मन्नत पूरी होने पर लोग गंगा किनारे भंडारा करते हैं और नीम के पेड़ पर मौली बांधकर आभार जताते हैं। दर्शन का समय और खास दिन समय प्रातः 06:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक आरती: सुबह-शाम की विशेष आरती मन को असीम शांति देती है।मंगलवार: आस्था का मेला लगता है। वाराणसी मिर्जापुर से हजारों श्रद्धालु आते हैं नवरात्रिः चैत्र और अश्विन नवरात्रि में 9 दिन मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। पूरा घाट लाखों दीपों से जगमगाता है शांति से दर्शन के लिए बुधवार से शुक्रवार, सुबह 6 से 8 बजे के बीच जाएं। कैसे पहुंचे, वाराणसी कैंट से मात्र 28 किमी, 50 मिनट मार्ग लहरतारा, DLW,SH-74 अदलपुरा रास्ते में विंध्याचल की तरह सजा बाजार मिलता है, जहां से चुनरी, नारियल और कलावा ले सकते हैं। यहां दवा नहीं, दुआ काम करती है। यहां प्रसाद नहीं, ममता मिलती है। एक बार दिल से लिखिए "जय शीतला माता" माता सभी की झोली भरती है।1
- रामनगर, वाराणसी में सड़क या सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी दुकानों को हटाने के लिए नगर निगम और पुलिस प्रशासन कार्रवाई करे, तो इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है: वाराणसी रामनगर में नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियानवाराणसी के रामनगर क्षेत्र में सड़क और सरकारी भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए नगर निगम की टीम पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में अभियान चलाए। इस कार्रवाई का उद्देश्य यातायात को सुचारु बनाना, आम नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करना तथा सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है। ऐसे अभियानों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाती है।1