अनूपपुर के नेशनल हाईवे-43 पर स्थित सांडा मोड़ पर एक आइसक्रीम विक्रेता अपनी व्यस्तताओं के बावजूद मानवता और जीव प्रेम की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यह युवक भीषण गर्मी में प्रतिदिन बंदरों की प्यास बुझाने का काम कर रहा है, जिसकी स्थानीय लोग भी सराहना कर रहे हैं। सांडा मोड़ के पास सरई के घने पेड़ों में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी के स्रोत कम होने लगते हैं, जिससे इन वन्य जीवों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे मुश्किल समय में यह आइसक्रीम विक्रेता अपनी आजीविका चलाने के साथ-साथ बेजुबान जीवों की सेवा को भी अपना दायित्व मान रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह अपनी दुकान पर ग्राहकों को आइसक्रीम बेचने के बीच-बीच में पास के हैंडपंप तक जाता है, उसे चलाकर पानी निकालता है, और जैसे ही पानी बहता है, पेड़ों पर बैठे बंदरों का झुंड अपनी प्यास बुझाने के लिए वहां पहुंच जाता है। बंदरों के पानी पी लेने के बाद युवक अपनी दुकान पर लौट आता है और दिन भर कई बार इस प्रक्रिया को दोहराता है ताकि कोई भी जीव प्यासा न रहे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब लोग अपने स्वार्थ में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में एक सामान्य आइसक्रीम विक्रेता द्वारा वन्य जीवों के प्रति दिखाई जा रही यह संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि गर्मी में पक्षियों और वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ा पुण्य का कार्य है, क्योंकि पानी की कमी से जीव गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। इस आइसक्रीम विक्रेता का सेवा कार्य किसी प्रचार के लिए नहीं, बल्कि जीवों के प्रति उसकी सहज संवेदना का परिणाम है। उसका यह प्रयास यह संदेश देता है कि मानवता केवल इंसानों की सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति और उसमें रहने वाले प्रत्येक जीव के प्रति दया और जिम्मेदारी निभाने में भी है। उसका यह निस्वार्थ कार्य साबित करता है कि दूसरों के लिए किया गया छोटा सा प्रयास भी किसी बड़े पुण्य और तीर्थ यात्रा से कम नहीं होता।
अनूपपुर के नेशनल हाईवे-43 पर स्थित सांडा मोड़ पर एक आइसक्रीम विक्रेता अपनी व्यस्तताओं के बावजूद मानवता और जीव प्रेम की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यह युवक भीषण गर्मी में प्रतिदिन बंदरों की प्यास बुझाने का काम कर रहा है, जिसकी स्थानीय लोग भी सराहना कर रहे हैं। सांडा मोड़ के पास सरई के घने पेड़ों में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी के स्रोत कम होने लगते हैं, जिससे इन वन्य जीवों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे मुश्किल समय में यह आइसक्रीम विक्रेता अपनी आजीविका चलाने के साथ-साथ बेजुबान जीवों की सेवा को भी अपना दायित्व मान रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह अपनी दुकान पर ग्राहकों को आइसक्रीम बेचने के बीच-बीच में पास के हैंडपंप तक जाता है, उसे चलाकर पानी निकालता है, और जैसे ही पानी बहता है, पेड़ों पर बैठे बंदरों का झुंड अपनी प्यास बुझाने के लिए वहां पहुंच जाता है। बंदरों के पानी पी लेने के बाद युवक अपनी दुकान पर लौट आता है और दिन भर कई बार इस प्रक्रिया को दोहराता है ताकि कोई भी जीव प्यासा न रहे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब लोग अपने स्वार्थ में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में एक सामान्य आइसक्रीम विक्रेता द्वारा वन्य जीवों के प्रति दिखाई जा रही यह संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि गर्मी में पक्षियों और वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ा पुण्य का कार्य है, क्योंकि पानी की कमी से जीव गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। इस आइसक्रीम विक्रेता का सेवा कार्य किसी प्रचार के लिए नहीं, बल्कि जीवों के प्रति उसकी सहज संवेदना का परिणाम है। उसका यह प्रयास यह संदेश देता है कि मानवता केवल इंसानों की सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति और उसमें रहने वाले प्रत्येक जीव के प्रति दया और जिम्मेदारी निभाने में भी है। उसका यह निस्वार्थ कार्य साबित करता है कि दूसरों के लिए किया गया छोटा सा प्रयास भी किसी बड़े पुण्य और तीर्थ यात्रा से कम नहीं होता।
- अनूपपुर के नेशनल हाईवे-43 पर स्थित सांडा मोड़ पर एक आइसक्रीम विक्रेता अपनी व्यस्तताओं के बावजूद मानवता और जीव प्रेम की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यह युवक भीषण गर्मी में प्रतिदिन बंदरों की प्यास बुझाने का काम कर रहा है, जिसकी स्थानीय लोग भी सराहना कर रहे हैं। सांडा मोड़ के पास सरई के घने पेड़ों में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी के स्रोत कम होने लगते हैं, जिससे इन वन्य जीवों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे मुश्किल समय में यह आइसक्रीम विक्रेता अपनी आजीविका चलाने के साथ-साथ बेजुबान जीवों की सेवा को भी अपना दायित्व मान रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह अपनी दुकान पर ग्राहकों को आइसक्रीम बेचने के बीच-बीच में पास के हैंडपंप तक जाता है, उसे चलाकर पानी निकालता है, और जैसे ही पानी बहता है, पेड़ों पर बैठे बंदरों का झुंड अपनी प्यास बुझाने के लिए वहां पहुंच जाता है। बंदरों के पानी पी लेने के बाद युवक अपनी दुकान पर लौट आता है और दिन भर कई बार इस प्रक्रिया को दोहराता है ताकि कोई भी जीव प्यासा न रहे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब लोग अपने स्वार्थ में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में एक सामान्य आइसक्रीम विक्रेता द्वारा वन्य जीवों के प्रति दिखाई जा रही यह संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि गर्मी में पक्षियों और वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ा पुण्य का कार्य है, क्योंकि पानी की कमी से जीव गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। इस आइसक्रीम विक्रेता का सेवा कार्य किसी प्रचार के लिए नहीं, बल्कि जीवों के प्रति उसकी सहज संवेदना का परिणाम है। उसका यह प्रयास यह संदेश देता है कि मानवता केवल इंसानों की सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति और उसमें रहने वाले प्रत्येक जीव के प्रति दया और जिम्मेदारी निभाने में भी है। उसका यह निस्वार्थ कार्य साबित करता है कि दूसरों के लिए किया गया छोटा सा प्रयास भी किसी बड़े पुण्य और तीर्थ यात्रा से कम नहीं होता।1
- महाराणा प्रताप जयंती के विशेष अवसर पर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत परासी के समस्त ठाकुर समाज ने हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित की हैं। इस विशेष संदेश में, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को उनके शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के प्रति उनके धर्म के लिए शत-शत नमन किया गया है। उन्हें 'राजपूती आन-बान-शान के प्रतीक', 'मातृभूमि के गौरव' और 'स्वाभिमान के सूर्य' के रूप में याद करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई है। संदेश में कहा गया है कि महाराणा प्रताप ने कभी झुकना नहीं सीखा, संघर्ष जिनकी पहचान बना और जिन्होंने वीरता की अमर गाथा लिखी। यह श्रद्धांजलि 'जय महाराणा प्रताप!', 'जय मेवाड़!' और 'जय मातृभूमि!' के नारों के साथ संपन्न होती है।1
- शहडोल नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत जय स्तंभ चौक स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय के विराट सभागार में बुधवार को दोपहर करीब 4:00 बजे तक समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता और पत्रकार उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य UCC पर चर्चा करना और अंतिम ड्राफ्ट के लिए जनसुझाव आमंत्रित करना था। इस दौरान जनता से अंतिम जनसुझाव भी लिए गए।1
- Post by Ramesh Kumar Kewat1
- नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया, जहाँ वार्ड पार्षद सिल्लू रजक ने विशेष रूप से बच्चों का अभिनंदन किया। इस मौके पर पार्षद रजक ने बच्चों का टीका-चंदन कर उनका उत्साहवर्धन किया और उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप ट्रॉफी तथा बिस्किट वितरित किए। पार्षद सिल्लू रजक ने बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी आने, शिक्षा ग्रहण करने और एक स्वस्थ व संस्कारित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों का सर्वांगीण विकास ही समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। इस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बच्चों और उनके अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए नए सत्र के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं। यह कार्यक्रम इस महत्वपूर्ण संदेश के साथ संपन्न हुआ कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं, और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए शिक्षा तथा संस्कारों दोनों का होना अत्यंत आवश्यक है।3
- पुलिस ने एक मोटरसाइकिल चोरी के मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस कार्रवाई के तहत, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके कब्जे से कुल सात वाहन जब्त किए गए हैं।1
- अनूपपुर में कलेक्टर हर्षल पंचोली की अध्यक्षता और पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराव की उपस्थिति में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यों की विस्तृत चर्चा हुई और पूर्व में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा की गई। कलेक्टर पंचोली ने सभी निर्माण एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़क सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता पर लागू करने के निर्देश दिए, यह कहते हुए कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को ओवरलोड वाहनों पर विशेष निगरानी रखने और नियमानुसार कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया, क्योंकि ओवरलोडिंग सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराव ने जिले में सड़क सुरक्षा मजबूत करने और यातायात नियमों के प्रभावी पालन के लिए विशेष जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने हेलमेट के अनिवार्य उपयोग और यातायात नियमों के पालन के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने आमजन से वाहन चलाते समय नियमित रूप से हेलमेट का उपयोग करने की अपील की, इसे कानूनी आवश्यकता के साथ-साथ जीवन की सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन बताया। बैठक में यातायात विभाग ने बताया कि जिले में पहले से चिन्हित 11 ब्लैक स्पॉट्स में से अधिकांश स्थानों पर सुधारात्मक कार्य और दुर्घटनाओं में कमी आने के कारण उन्हें ब्लैक स्पॉट की श्रेणी से हटा दिया गया है। वर्तमान में केवल 4 ब्लैक स्पॉट बचे हैं, जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हैं। विभाग ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2026 में अब तक 187 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 232 लोग घायल हुए हैं और 71 लोगों की मृत्यु हुई है। इस पर कलेक्टर पंचोली ने दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स सांदा तिराहा, बदरा तिराहा, पसला ढाबा और तुलरा चौराहा पर रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था, स्पीड ब्रेकर, संकेतक बोर्ड और अन्य आवश्यक सुरक्षात्मक व्यवस्थाएं शीघ्र स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए संबंधित विभागों को समन्वित और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में चचाई रोड स्थित नो-एंट्री पॉइंट पर प्रकाश व्यवस्था, भुंडा कोना एवं राजेंद्रग्राम क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर निर्माण, अमरकंटक चौराहे में स्पीड ब्रेकर लगाने, और आदर्श मार्ग, शंकर मंदिर तिराहा सहित अन्य प्रमुख तिराहों व चौराहों पर अतिक्रमण एवं यातायात जाम की समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए गए। नगर पालिका अनूपपुर, यातायात विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों को समन्वय स्थापित कर सप्ताह में एक दिन अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया। इस बैठक में डिप्टी कलेक्टर कमलेश पुरी, जिला परिवहन अधिकारी सुरेंद्र सिंह गौतम, यातायात प्रभारी विनोद दुबे सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।1
- शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आकाशवाणी केंद्र के पास बिजली लाइन में फॉल्ट सुधारने के दौरान एक आउटसोर्स कर्मचारी की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना ने बिजली विभाग और आउटसोर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान मालाचुआ निवासी कुंदन सिंह के रूप में हुई है, जो क्रिस्टा कंपनी के माध्यम से बिजली विभाग में कार्यरत था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुंदन सिंह बिजली लाइन पर मरम्मत का काम कर रहा था, तभी अचानक लाइन में हाई वोल्टेज करंट प्रवाहित हो गया, जिसकी चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आउटसोर्स कर्मचारियों से पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना ही जोखिम भरे कार्य कराए जाते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कर्मचारी लाइन पर काम कर रहा था तो संबंधित लाइन का शटडाउन क्यों नहीं लिया गया और किसकी अनुमति से बिजली आपूर्ति चालू की गई। लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और संबंधित कंपनी के जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह हादसा एक बार फिर बिजली विभाग में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।1