जनपद सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र अंतर्गत मीतापुर ग्राम पंचायत में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब सोन नदी में नहाने गए दो मासूम बच्चे अचानक गहरे पानी में डूब गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चे परिवार की महिलाओं के साथ सोन नदी में स्नान करने गए थे। इसी दौरान नदी के किनारे खेलते समय उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में समा गए। घटना को देख मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया, लेकिन तब तक दोनों बच्चे पानी की तेज धारा में लापता हो चुके थे। सूचना मिलते ही चोपन पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश अभियान शुरू कराया गया। वहीं, प्रशासन द्वारा एनडीआरएफ को भी सूचना दे दी गई है। नदी किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा है और सभी की निगाहें राहत एवं बचाव दल की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। परिजन बच्चों के सकुशल मिलने की आस लगाए हुए हैं, जबकि प्रशासन हर संभव प्रयास में जुटा हुआ है। फिलहाल समाचार लिखे जाने तक दोनों बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल सका था।
जनपद सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र अंतर्गत मीतापुर ग्राम पंचायत में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब सोन नदी में नहाने गए दो मासूम बच्चे अचानक गहरे पानी में डूब गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चे परिवार की महिलाओं के साथ सोन नदी में स्नान करने गए थे। इसी
दौरान नदी के किनारे खेलते समय उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में समा गए। घटना को देख मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया, लेकिन तब तक दोनों बच्चे पानी की तेज धारा में लापता हो चुके थे। सूचना मिलते ही चोपन पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थानीय गोताखोरों
की मदद से तलाश अभियान शुरू कराया गया। वहीं, प्रशासन द्वारा एनडीआरएफ को भी सूचना दे दी गई है। नदी किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा है और सभी की निगाहें राहत एवं बचाव दल की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ
है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। परिजन बच्चों के सकुशल मिलने की आस लगाए हुए हैं, जबकि प्रशासन हर संभव प्रयास में जुटा हुआ है। फिलहाल समाचार लिखे जाने तक दोनों बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल सका था।
- सोनभद्र के ओबरा स्थित रेणुका घाट पर एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब ओबरा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण 11 लोग नदी के बीच बने एक टापू में फंस गए। ये लोग घाट पर घूमने आए थे और नदी में पानी कम होने के कारण बेफिक्र होकर टापू तक पहुंच गए थे, जहां वे तस्वीरें और सेल्फी ले रहे थे। बांध से पानी छोड़ने के बाद नदी का बहाव तेजी से बढ़ा और टापू चारों तरफ से पानी से घिर गया, जिससे लोग बीच धारा में ही फंसकर रह गए। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और डैम प्रबंधन से संपर्क कर पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगवाई गई। हालांकि, नदी का बहाव काफी देर तक तेज बना रहा, जिससे फंसे हुए लोगों को टापू पर ही इंतजार करना पड़ा। अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम, पीआरवी के साथ नगर पंचायत के सभासद अजीत कनौजिया और स्थानीय युवकों ने मिलकर घंटों चले राहत अभियान के बाद सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस सफल बचाव अभियान के बाद फंसे हुए लोगों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेणुका घाट पर अचानक जलस्तर बढ़ने की घटनाएं पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद घाट पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड और स्थायी सुरक्षा इंतजामों की कमी बनी हुई है। यह घटना, हालांकि बिना किसी जनहानि के समाप्त हो गई, लेकिन इसने एक बार फिर घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी तंत्र की पोल खोल दी है। अब स्थानीय लोग भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए घाट पर प्रभावी चेतावनी व्यवस्था, सुरक्षा बैरिकेडिंग और स्थायी निगरानी की मांग कर रहे हैं।1
- Post by Ravi1
- विंढमगंज-कोन मार्ग पर जारी सड़क निर्माण कार्य में हो रही अत्यधिक देरी के कारण स्थानीय ग्रामीणों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर हर जगह बिखरी गिट्टी, उड़ती धूल और जगह-जगह से उखड़ी सतह के चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे आवागमन जोखिम भरा हो गया है। इसी क्रम में विंढमगंज-कोन मार्ग पर फिर एक हादसा हुआ, जहाँ एक एसयूवी खाई में पलट गई। यह घटना लगातार हो रहे हादसों की कड़ी का हिस्सा है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि निर्माण कार्य की धीमी गति यातायात को बुरी तरह बाधित कर रही है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों ने संबंधित विभाग से पुरजोर मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि यह मार्ग सुरक्षित हो सके और ग्रामीणों को हो रही असुविधा से मुक्ति मिल सके।2
- थाना रायपुर क्षेत्र में एक पति-पत्नी की मृत्यु के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) श्री ऋषभ रुणवाल ने एक बयान जारी किया है।1
- सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील के करथुआ पोस्ट में स्थित हिग्राम खमरिया कला के बैरिहवा टोला में एक हैंडपंप पिछले दो साल से बंद पड़ा है।1
- प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस पहल के अंतर्गत, कुल 315 हाई स्कूलों और 214 हायर सेकेंडरी विद्यालयों को उन्नत किया जाएगा।1
- सोनभद्र के ओबरा तहसील में डीएस माइनिंग खदान के विरोध में आदिवासियों ने कांग्रेस के साथ मिलकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान में हो रही ब्लास्टिंग के कारण उनके घरों में दरारें आ गई हैं और उनकी जान को भी खतरा है। प्रदर्शनकारियों ने खदान को तत्काल बंद कराने की मांग की और प्रशासन को अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। आदिवासियों और कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे हाईवे जाम कर देंगे।1
- जनपद चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बरबसपुर में सरकारी धन से हो रहे निर्माण कार्यों की हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ एक भवन के भीतर बड़े जोर-शोर से टाइल्स लगाने का काम चल रहा है, वहीं इसी भवन का बाहरी हिस्सा बेहद चिंताजनक स्थिति में है। भवन की बाहरी दीवार पर बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इतना ही नहीं, भवन के बाहर गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हुआ है, जो सरकारी दावों की पोल खोलता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ टाइल्स जैसी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है, वहीं बुनियादी सुरक्षा और साफ-सफाई को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। यह गंभीर गंदगी और दीवारों की जर्जर स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है। अब यह देखना बाकी है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस ओर कब ध्यान देते हैं और इन खामियों को कब तक ठीक किया जाता है।1
- मध्य प्रदेश के सागर जिला अस्पताल से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वायरल वीडियो में एक मरीज अस्पताल के बिस्तर पर कथित तौर पर शराब पीता हुआ दिख रहा है। यह घटना तब सामने आई जब मरीज के हाथ में कुछ देर पहले तक ड्रिप लगी हुई थी, जिसका स्पष्ट निशान भी उसके हाथ पर दिखाई दे रहा है। वीडियो के अनुसार, एक नर्स द्वारा रोकने की कोशिश के बावजूद मरीज का "इलाज" शराब के साथ जारी रहा, जिससे अस्पताल परिसर में निगरानी व्यवस्था की घोर लापरवाही उजागर हुई है। इस घटना ने लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है कि क्या अब स्वास्थ्य व्यवस्था का नया "कॉकटेल" सामने आया है, जहाँ "एक हाथ में ड्रिप, दूसरे में पैग… मरीज रहेगा फिट या सिस्टम होगा हिट?" अस्पताल प्रबंधन की निगरानी और मरीजों की सुरक्षा पर उठे ये गंभीर सवाल व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।1