पशुपालकों की लापरवाही ने ली एक और गौमाता की जान दूध बंद होते ही सड़क पर छोड़ दी, तीन दिन तक जिंदगी की जंग लड़ती रही गाय; युवाओं ने बचाने की हर कोशिश की, आखिरकार तड़प-तड़पकर तोड़ा दम गैंजी में प्रशासन व पंचायत से सख्त कार्रवाई की मांग, बेसहारा गौवंश छोड़ने वालों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की उठी आवाज सीमलवाड़ा। समीपवर्ती गैंजी गांव में बेसहारा गौवंश की उपेक्षा का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव में पिछले दो-तीन दिनों से एक गाय खेतों के समीप गंभीर रूप से बीमार अवस्था में पड़ी हुई थी। सूचना मिलने पर गांव के गौ-सेवकों, व्यापारी मंडल के सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने मानवता का परिचय देते हुए गाय को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद गाय ने दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, गाय की हालत गंभीर होने पर युवाओं ने पशु चिकित्सक डॉ. बाबूलाल डेंडोर को मौके पर बुलाया। लगातार तीन दिनों तक गाय का उपचार किया गया। उसे ड्रिप लगाई गई, इंजेक्शन दिए गए और अन्य आवश्यक उपचार भी किए गए। जब गाय उठने की स्थिति में नहीं रही तो युवाओं ने पिकअप एवं लिफ्ट मशीन की सहायता से उसे खड़ा करने का भी प्रयास किया, ताकि उसकी जान बचाई जा सके। लेकिन बीमारी और कमजोरी इतनी अधिक थी कि आखिरकार गाय ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। गाय की मृत्यु के बाद गांव के युवाओं ने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और दुःख देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि कई पशुपालक जब तक गाय दूध देती है तब तक उसकी देखभाल करते हैं, लेकिन जैसे ही दूध देना बंद होता है, उसे सड़कों और खेतों में बेसहारा छोड़ दिया जाता है। यही बेसहारा गौवंश भूख और प्यास से भटकता रहता है, प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हो जाता है तथा धीरे-धीरे बीमारी और कुपोषण का शिकार होकर दम तोड़ देता है। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल पशु क्रूरता ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता का भी उदाहरण है। एक ओर देशभर में गाय को राष्ट्रीय गौमाता का दर्जा देने की मांग उठाई जाती है, गौ-सेवा और गौ-रक्षा की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर दूध बंद होते ही उसी गाय को मरने के लिए बेसहारा छोड़ देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव और आसपास की सड़कों पर बड़ी संख्या में बेसहारा गौवंश घूमता रहता है। इससे आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक इन पशुओं से टकराकर घायल हो चुके हैं। यदि समय रहते प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में गंभीर हादसे हो सकते हैं। ग्रामीण युवाओं ने ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि गांव में बेसहारा घूम रहे गौवंश के वास्तविक मालिकों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए जाएं। जो लोग जानबूझकर अपने पशुओं को लावारिस छोड़ते हैं, उनके विरुद्ध पशु क्रूरता निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही बेसहारा गौवंश को निकटवर्ती गौशालाओं में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तथा आवश्यकता होने पर गांव में स्थायी गौशाला स्थापित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत और प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई करें तो गैंजी गांव गौ-संरक्षण के क्षेत्र में पूरे क्षेत्र के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है। पशुपालकों के नाम संदेश गाय केवल दूध देने तक ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए प्रत्येक पशुपालक का नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह अपने पशुओं की जीवनभर देखभाल करे। दूध बंद होने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ देना न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि कानूनन भी अपराध की श्रेणी में आता है। यदि स्वयं पालन-पोषण संभव नहीं है तो संबंधित गौशाला या प्रशासन से संपर्क कर उचित व्यवस्था कराएं, लेकिन किसी भी हालत में गौवंश को सड़कों पर मरने के लिए न छोड़ें।
पशुपालकों की लापरवाही ने ली एक और गौमाता की जान दूध बंद होते ही सड़क पर छोड़ दी, तीन दिन तक जिंदगी की जंग लड़ती रही गाय; युवाओं ने बचाने की हर कोशिश की, आखिरकार तड़प-तड़पकर तोड़ा दम गैंजी में प्रशासन व पंचायत से सख्त कार्रवाई की मांग, बेसहारा गौवंश छोड़ने वालों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की उठी आवाज सीमलवाड़ा। समीपवर्ती गैंजी गांव में बेसहारा गौवंश की उपेक्षा का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव में पिछले दो-तीन दिनों से एक गाय खेतों के समीप गंभीर रूप से बीमार अवस्था में पड़ी हुई थी। सूचना मिलने पर गांव के गौ-सेवकों, व्यापारी मंडल के सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने मानवता का परिचय देते हुए गाय को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद गाय ने दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, गाय की हालत गंभीर होने पर युवाओं ने पशु चिकित्सक डॉ. बाबूलाल डेंडोर को मौके पर बुलाया। लगातार तीन दिनों तक गाय का उपचार किया गया।
उसे ड्रिप लगाई गई, इंजेक्शन दिए गए और अन्य आवश्यक उपचार भी किए गए। जब गाय उठने की स्थिति में नहीं रही तो युवाओं ने पिकअप एवं लिफ्ट मशीन की सहायता से उसे खड़ा करने का भी प्रयास किया, ताकि उसकी जान बचाई जा सके। लेकिन बीमारी और कमजोरी इतनी अधिक थी कि आखिरकार गाय ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। गाय की मृत्यु के बाद गांव के युवाओं ने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और दुःख देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि कई पशुपालक जब तक गाय दूध देती है तब तक उसकी देखभाल करते हैं, लेकिन जैसे ही दूध देना बंद होता है, उसे सड़कों और खेतों में बेसहारा छोड़ दिया जाता है। यही बेसहारा गौवंश भूख और प्यास से भटकता रहता है, प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हो जाता है तथा धीरे-धीरे बीमारी और कुपोषण का शिकार होकर दम तोड़ देता है। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल
पशु क्रूरता ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता का भी उदाहरण है। एक ओर देशभर में गाय को राष्ट्रीय गौमाता का दर्जा देने की मांग उठाई जाती है, गौ-सेवा और गौ-रक्षा की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर दूध बंद होते ही उसी गाय को मरने के लिए बेसहारा छोड़ देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव और आसपास की सड़कों पर बड़ी संख्या में बेसहारा गौवंश घूमता रहता है। इससे आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक इन पशुओं से टकराकर घायल हो चुके हैं। यदि समय रहते प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में गंभीर हादसे हो सकते हैं। ग्रामीण युवाओं ने ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि गांव में बेसहारा घूम रहे गौवंश के वास्तविक मालिकों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए जाएं। जो लोग जानबूझकर अपने पशुओं को लावारिस छोड़ते हैं, उनके विरुद्ध पशु क्रूरता निवारण अधिनियम सहित अन्य
प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही बेसहारा गौवंश को निकटवर्ती गौशालाओं में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तथा आवश्यकता होने पर गांव में स्थायी गौशाला स्थापित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत और प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई करें तो गैंजी गांव गौ-संरक्षण के क्षेत्र में पूरे क्षेत्र के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है। पशुपालकों के नाम संदेश गाय केवल दूध देने तक ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए प्रत्येक पशुपालक का नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह अपने पशुओं की जीवनभर देखभाल करे। दूध बंद होने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ देना न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि कानूनन भी अपराध की श्रेणी में आता है। यदि स्वयं पालन-पोषण संभव नहीं है तो संबंधित गौशाला या प्रशासन से संपर्क कर उचित व्यवस्था कराएं, लेकिन किसी भी हालत में गौवंश को सड़कों पर मरने के लिए न छोड़ें।
- जितेन्द्र कुमारडूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थानग्राम पंचायत व प्रशासन बेसहारा छोड़ने वाले गायों के मालिकों पर पशु क्रुरता अधिनियम के तहत कार्रवाई करें। गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का अभियान चलाया जा रहा है और दूसरी तरफ गैंजी में गाय की यह दुर्दशा मन को झकझौर कर देने वाली है।4 hrs ago
- बेसहारा गौवंश की मौत, कार्रवाई की मांग समीपवर्ती गैंजी गांव में बेसहारा छोड़े गए गौवंश की समस्या एक बार फिर सामने आई है। समीपवर्ती गैंजी गांव में बेसहारा छोड़े गए गौवंश की समस्या एक बार फिर सामने आई है। गांव में पिछले तीन दिनों से एक गाय खेतों के पास गंभीर हालत में पड़ी थी। सूचना मिलने पर गांव के गौसेवकों, व्यापारी मंडल के सदस्यों एवं स्थानीय युवाओं ने तत्परता दिखाते हुए पशु चिकित्सक डॉ. बाबूलाल डेण्डोर को बुलाकर उपचार शुरू कराया। लगातार तीन दिनों तक ड्रिप, इंजेक्शन और अन्य उपचार किए गए, लेकिन गाय की हालत में सुधार नहीं हुआ। गाय को बचाने के लिए युवाओं ने पिकअप और लिफ्ट मशीन की सहायता से उसे खड़ा करने का भी प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी मौत हो गई। इसके बाद गांव के युवाओं, गौसेवकों और व्यापारी मंडल के सदस्यों ने मिलकर पूरे सम्मान के साथ गौवंश का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान युवाओं ने आरोप लगाया कि कई पशुपालक दूध देना बंद होने के बाद गायों को बेसहारा छोड़ देते हैं। ये पशु सड़कों पर भटकते हैं, प्लास्टिक व कचरा खाने से बीमार हो जाते हैं और दुर्घटनाओं का भी कारण बनते हैं। युवाओं ने ग्राम पंचायत व प्रशासन से मांग की कि बेसहारा घूम रहे गौवंश के मालिकों की पहचान कर नोटिस दिए जाएं तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत दोषियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसी गायों को गौशाला भेजने अथवा गांव में स्थायी गौशाला की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं तो गैंजी गांव गौ-संरक्षण का आदर्श बन सकता है।3
- पशुपालकों की लापरवाही ने ली एक और गौमाता की जान दूध बंद होते ही सड़क पर छोड़ दी, तीन दिन तक जिंदगी की जंग लड़ती रही गाय; युवाओं ने बचाने की हर कोशिश की, आखिरकार तड़प-तड़पकर तोड़ा दम गैंजी में प्रशासन व पंचायत से सख्त कार्रवाई की मांग, बेसहारा गौवंश छोड़ने वालों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की उठी आवाज सीमलवाड़ा। समीपवर्ती गैंजी गांव में बेसहारा गौवंश की उपेक्षा का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव में पिछले दो-तीन दिनों से एक गाय खेतों के समीप गंभीर रूप से बीमार अवस्था में पड़ी हुई थी। सूचना मिलने पर गांव के गौ-सेवकों, व्यापारी मंडल के सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने मानवता का परिचय देते हुए गाय को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद गाय ने दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, गाय की हालत गंभीर होने पर युवाओं ने पशु चिकित्सक डॉ. बाबूलाल डेंडोर को मौके पर बुलाया। लगातार तीन दिनों तक गाय का उपचार किया गया। उसे ड्रिप लगाई गई, इंजेक्शन दिए गए और अन्य आवश्यक उपचार भी किए गए। जब गाय उठने की स्थिति में नहीं रही तो युवाओं ने पिकअप एवं लिफ्ट मशीन की सहायता से उसे खड़ा करने का भी प्रयास किया, ताकि उसकी जान बचाई जा सके। लेकिन बीमारी और कमजोरी इतनी अधिक थी कि आखिरकार गाय ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। गाय की मृत्यु के बाद गांव के युवाओं ने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और दुःख देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि कई पशुपालक जब तक गाय दूध देती है तब तक उसकी देखभाल करते हैं, लेकिन जैसे ही दूध देना बंद होता है, उसे सड़कों और खेतों में बेसहारा छोड़ दिया जाता है। यही बेसहारा गौवंश भूख और प्यास से भटकता रहता है, प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हो जाता है तथा धीरे-धीरे बीमारी और कुपोषण का शिकार होकर दम तोड़ देता है। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल पशु क्रूरता ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता का भी उदाहरण है। एक ओर देशभर में गाय को राष्ट्रीय गौमाता का दर्जा देने की मांग उठाई जाती है, गौ-सेवा और गौ-रक्षा की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर दूध बंद होते ही उसी गाय को मरने के लिए बेसहारा छोड़ देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव और आसपास की सड़कों पर बड़ी संख्या में बेसहारा गौवंश घूमता रहता है। इससे आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक इन पशुओं से टकराकर घायल हो चुके हैं। यदि समय रहते प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में गंभीर हादसे हो सकते हैं। ग्रामीण युवाओं ने ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि गांव में बेसहारा घूम रहे गौवंश के वास्तविक मालिकों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए जाएं। जो लोग जानबूझकर अपने पशुओं को लावारिस छोड़ते हैं, उनके विरुद्ध पशु क्रूरता निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही बेसहारा गौवंश को निकटवर्ती गौशालाओं में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तथा आवश्यकता होने पर गांव में स्थायी गौशाला स्थापित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत और प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई करें तो गैंजी गांव गौ-संरक्षण के क्षेत्र में पूरे क्षेत्र के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है। पशुपालकों के नाम संदेश गाय केवल दूध देने तक ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए प्रत्येक पशुपालक का नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह अपने पशुओं की जीवनभर देखभाल करे। दूध बंद होने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ देना न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि कानूनन भी अपराध की श्रेणी में आता है। यदि स्वयं पालन-पोषण संभव नहीं है तो संबंधित गौशाला या प्रशासन से संपर्क कर उचित व्यवस्था कराएं, लेकिन किसी भी हालत में गौवंश को सड़कों पर मरने के लिए न छोड़ें।4
- *सीमलवाड़ा: 2023 में हुआ शिलान्यास, 2026 में भी कीचड़ में चल रहे बेड़सा के बच्चे* सीमलवाड़ा।* ग्राम पंचायत बेड़सा में 12 सितंबर 2023 को बेड़सा सीनियर स्कूल से खांणगा तालाब तक डामर सड़क का शिलान्यास माननीय सांसद राजकुमार रोत के हाथों किया गया था जब वो विधायक थे। शिलान्यास पट्टिका आज भी लगी है। लेकिन 2 साल बाद भी जमीन पर आज भी काम अधूरा पड़ा हे। आपकी स्क्रीन पर दिख रही ये तस्वीरें उसी रास्ते की हैं। बरसात में ये कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ और पत्थरों से भर गया है। इसी रास्ते से रोजाना बेड़सा सीनियर स्कूल के बच्चे, शिक्षक और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आते-जाते हैं। वीडियो में देखिए कैसे छोटे-छोटे बच्चे बैग लेकर इस फिसलन भरे रास्ते पर चलने को मजबूर हैं। अभिभावकों का कहना है अगर जल्द सड़क नहीं बनी तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शिलान्यास वाले वादे को याद रखा जाए और सड़क का काम तुरंत शुरू किया जाए। "ये हैं ग्राम पंचायत बेड़सा की वो सड़क जिसका शिलान्यास 12 सितंबर 2023 को हुआ था। देखिए आज 2026 में भी बच्चे इसी कीचड़ और पत्थरों वाले रास्ते से स्कूल जा रहे हैं। शिलान्यास पट्टिका तो लगी है, पर सड़क नहीं बनी। बच्चे रोज गिरते-पड़ते आते-जाते हैं। प्रशासन कब सुनेगा बेड़सा की आवाज?" `#बेड़सा #सीमलवाड़ा #अधूरीसड़क #शिक्षा #जनसमस्या`1
- नेशनल हाईवे पर रेडियम पट्टी लगाने के नाम पर अवैध वसूली करने वाली अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश, 8 गिरफ्तार तीसरी आंख मोबाइल नंबर पर मिली शिकायत के बाद डीएसटी की बड़ी कार्रवाई दिल्ली से संचालित होता था पूरा रैकेट, अर्टिगा कार, 21 हजार रुपये नकद व रसीद कट्टे जब्त संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। उदयपुर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर रात के अंधेरे में वाहनों को रोककर रेडियम रिफ्लेक्टर लगाने के नाम पर जबरन अवैध वसूली करने वाली एक अंतरराज्यीय गैंग का जिला पुलिस की विशेष टीम (डीएसटी) ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के आठ सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर उनके पास से 21,000 रुपये नकद, एक अर्टिगा कार, टॉर्च, मोबाइल और फर्जी रसीद कट्टे जब्त किए हैं। जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई की पटकथा एसपी द्वारा जारी तीसरी आंख हेल्पलाइन नंबर पर मिली एक गुप्त शिकायत के बाद लिखी गई थी। - जाल बिछाकर पुलिस ने की कार्यवाही पुलिस से प्राप्त जानकारी अनुसार, 30 जुलाई की रात तीसरी आंख नंबर पर सूचना मिली थी कि रतनपुर पुलिस चौकी के पास कुछ लोग टॉर्च लेकर आते हैं और हाईवे पर आने-जाने वाले वाहनों को डरा-धमकाकर रेडियम पट्टी लगाने के नाम पर अवैध वसूली करते हैं। सूचना की पुष्टि के बाद डीएसटी प्रभारी व बिछीवाड़ा पुलिस की संयुक्त टीम ने प्राइवेट वाहन में बैठकर जाल बिछाया। जैसे ही पुलिस की गाड़ी रतनपुर ओवरब्रिज के पास पहुंची, आरोपितों ने टॉर्च से इशारा कर गाड़ी को साइड में रुकवा लिया। गाड़ी पर पहले से रेडियम पट्टी लगी होने की बात कहने पर भी आरोपित जबरन 300 रुपये की मांग करने लगे और रुपये न देने पर गाड़ी जब्त करने की धमकी दी। उन्होंने पीबी रोड सेफ्टी रिफ्लेक्टिव एंटरप्राइजेज नाम की 300 रुपये की फर्जी रसीद काटकर थमा दी। इशारा मिलते ही आसपास मुस्तैद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर मौके से सभी आठों आरोपितों को दबोच लिया। - दिल्ली से संचालित होता था पूरा रैकेट पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपित दिल्ली निवासी बॉबी कुमार के इशारे पर गैंग बनाकर काम कर रहे थे। इनके पास रेडियम पट्टी लगाने की न तो कोई आधिकारिक स्वीकृति थी और न ही पंजीकरण से संबंधित कोई वैध दस्तावेज। कार्रवाई के दौरान पकड़े गए आरोपितों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और स्थानीय क्षेत्र के शातिर शामिल हैं। मामले में पुलिस ने विजय सिंह (46) निवासी हाजीपुर लोणी बॉर्डर गाजियाबाद उत्तर प्रदेश, विनोद कुमार (43) निवासी उज्ज भदोही उत्तर प्रदेश, प्रदीप कुमार (50) निवासी लोणी बॉर्डर गाजियाबाद उत्तर प्रदेश, अमित (46) निवासी मनसूरपुर मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश, वीरेंद्र कुमार (51) निवासी ज्वाला नगर शाहदरा दिल्ली, राजवीर सिंह (65) निवासी दातोली रगल सहारनपुर उत्तर प्रदेश, संजय (40) निवासी मथुरा गेट भरतपुर राजस्थान तथा जयेश (34) निवासी रतनपुर बिछीवाड़ा डूंगरपुर को गिरफ्तार किया है। - जैकेट पहनकर देते थे अधिकारी होने का झांसा पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य रात के समय हाईवे पर उतरते थे और भ्रम फैलाने के लिए खुद नाइट लाइट रिफ्लेक्टर जैकेट पहनते थे, ताकि वाहन चालकों को लगे कि वे किसी सरकारी विभाग के कर्मचारी हैं। गाड़ी रुकवाने के बाद ये प्रति वाहन 100, 200 व 300 रुपये की मांग करते थे और बदले में 2 महीने की वैधता वाली फर्जी रसीद थमा देते थे। जो चालक इसका विरोध करते थे, उन्हें गाड़ी जब्त करने की धमकी देकर डराया-धमकाया जाता था। पुलिस ने सभी अभियुक्तों के खिलाफ धारा 308(2) बीएनएस 2023 के तहत मामला दर्ज कर जांच बिछीवाड़ा थाना पुलिस को सौंप दी है। पुलिस अब गिरोह के मुख्य सरगना बॉबी कुमार की तलाश में जुट गई है।1
- भरत पंड्या संवाददाता डुंगरपुर 9829264909 निदेशक, डीपीआईआईटी, दिल्ली (केन्द्रिय प्रभारी अधिकारी, झौथरी) केंद्रीय प्रभारी अधिकारी श्री राकेश कुमार मीणा दो दिवसीय जिले के दौरे पर । भरत पंड्या संवाददाता डुंगरपुर 9829264909 निदेशक, डीपीआईआईटी, दिल्ली (केन्द्रिय प्रभारी अधिकारी, झौथरी) केंद्रीय प्रभारी अधिकारी श्री राकेश कुमार मीणा दो दिवसीय जिले के दौरे पर । जिला परिषद के ईडीपी सभागार में निदेशक, डीपीआईआईटी, नई दिल्ली एवं केंद्रीय प्रभारी अधिकारी श्री राकेश कुमार मीणा की अध्यक्षता एवं जिला कलक्टर देशलदान की उपस्थिति में आयोजित हो रही समीक्षा बैठक बैठक में भारत सरकार के आशान्वित ब्लॉक कार्यक्रम के तहत झौथरी ब्लॉक में संचालित विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति तथा विभिन्न विभागों के कार्यों की विस्तार से कर रहे समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और तय लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति के निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेखा गोड, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अलंकार गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर विपिन मीणा, प्रगति प्रसार अधिकारी मयंक चौबीसा सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- डूंगरपुर: मुरला गणेश मंदिर में फिर चोरी, एक साल में तीसरी वारदात; CCTV की वायरिंग काटकर चांदी की परत ले गए चोर डूंगरपुर। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध मुरला गणेश मंदिर एक बार फिर चोरों के निशाने पर आ गया। शुक्रवार तड़के अज्ञात चोरों ने मंदिर परिसर में स्थित भगवान धन कुबेर मंदिर में चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोर मंदिर का ताला तोड़कर अंदर घुसे और भगवान धन कुबेर की प्रतिमा के पीछे लगी करीब चार फीट ऊंची एवं चौड़ी चांदी वर्क वाली परत (पेलेट) चोरी कर फरार हो गए। मुरला गणेश मंदिर के पुजारी प्रवीण श्रीमाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्हें फोन पर मंदिर में चोरी होने की सूचना मिली। सूचना मिलने पर वे मंदिर पहुंचे तो देखा कि भगवान धन कुबेर मंदिर के मुख्य द्वार का ताला टूटा हुआ था। अंदर निरीक्षण करने पर प्रतिमा के पीछे लगी चांदी वर्क वाली परत गायब मिली। पुजारी ने बताया कि चोरों ने वारदात को अंजाम देने से पहले मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की वायरिंग काट दी, ताकि उनकी गतिविधियां कैमरे में कैद न हो सकें।उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में मुरला गणेश मंदिर में चोरी की यह तीसरी घटना है। इससे पहले भी चोर मंदिर की दान पेटी चोरी कर ले गए थे। पुजारी का आरोप है कि पूर्व में हुई चोरी की घटनाओं का अब तक कोतवाली पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है। लगातार हो रही वारदातों से श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन में रोष है तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- निराश्रित गोवंश की समस्या को लेकर समाजसेवियों ने की पहल, बीमार गोवंश का कराया उपचार हेडलाइन: निराश्रित गोवंश की समस्या को लेकर समाजसेवियों ने की पहल, बीमार गोवंश का कराया उपचार गेजी में पशुपालन विभाग की मेडिकल टीम ने किया स्वास्थ्य परीक्षण, गोवंश संरक्षण के लिए जनजागरण का आह्वान। हर खबर वागड़ कुआं । गेंजी गांव में निराश्रित एवं बीमार गोवंश की बढ़ती समस्या को देखते हुए समाजसेवियों ने पहल कर पशुपालन विभाग की मेडिकल वेटरनरी टीम को मौके पर बुलाया। समाजसेवी अनिल जैन एवं राजेंद्र लखबारा के नेतृत्व में टीम ने बीमार गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक उपचार शुरू कराया। समाजसेवियों ने बताया कि क्षेत्र में कई पशुपालक दूध निकालने के बाद गायों को खुले में छोड़ देते हैं। इससे गोवंश सड़कों पर भटकता रहता है और प्लास्टिक सहित अन्य हानिकारक पदार्थ खाकर बीमार हो जाता है। समय पर उपचार नहीं मिलने से कई बार उनकी जान पर भी बन आती है। अभियान के दौरान पंचायत समिति के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर उपचार कार्य का निरीक्षण किया तथा आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। समय पर इलाज मिलने से गंभीर अवस्था में मिले कई गोवंश की स्थिति में सुधार आया। समाजसेवी अनिल जैन ने आमजन एवं पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि गोवंश की सुरक्षा और देखभाल प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने प्रशासन से भी बेसहारा गोवंश के चारे, उपचार और संरक्षण की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा पशुपालकों से दूध निकालने के बाद गोवंश को खुले में छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की मांग की। इस अवसर पर गदूलाल यादव, कन्हैयालाल पंचाल, हितेश कलाल, शांतिलाल, नरेश कुमार कलाल, मोतीलाल प्रजापत, प्रवीण भाई, नरेंद्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।1