मध्यप्रदेश के बैतूल जिले को अक्सर विकास का हॉटस्पॉट बताया जाता है, जो प्रदेश भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का गृह जिला होने के साथ ही एक केंद्रीय मंत्री और सत्ता पक्ष के पाँच विधायकों का गढ़ भी है। हालांकि, भीमपुर तहसील के ग्राम पिपल्या और धामन्या के बीच बहने वाली ताप्ती नदी की एक तस्वीर इन सभी विकास के दावों की पोल खोल रही है। आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी इस नदी पर पुल का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण ग्रामीणों को हर साल लगभग 6 महीने तक जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के धामन्या गांव में पुल न होने से ग्रामीणों का संपर्क साल के आधे हिस्से में कट जाता है। उन्हें मजबूरी में तेज बहाव वाली नदी को पैदल पार करना पड़ता है, जिसमें वे अपने पालतू जानवरों को भी साथ ले जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली छात्र होते हैं, जिन्हें रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है। वहीं, बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीण खुद नदी में उतरकर उन्हें कंधे या चारपाई पर लादकर पार कराते हैं, जिससे मरीज और मदद करने वाले दोनों की जान खतरे में रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में कोई भी छोटी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बैतूल जिला प्रदेश के बड़े नेताओं का गृह जिला होने और यहाँ सत्ता पक्ष के कई जनप्रतिनिधि होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वे शिकायत करते हैं कि चुनाव के समय तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं होता। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने कहा, "हम 6 महीने तक इसी तरह नदी पार करते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमार को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाते। कब तक हमारी जान इसी तरह जोखिम में रहेगी?"
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले को अक्सर विकास का हॉटस्पॉट बताया जाता है, जो प्रदेश भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का गृह जिला होने के साथ ही एक केंद्रीय मंत्री और सत्ता पक्ष के पाँच विधायकों का गढ़ भी है। हालांकि, भीमपुर तहसील के ग्राम पिपल्या और धामन्या के बीच बहने वाली ताप्ती नदी की एक तस्वीर इन सभी विकास के दावों की पोल खोल रही है। आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी इस नदी पर पुल का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण ग्रामीणों को हर साल लगभग 6 महीने तक जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के धामन्या गांव में पुल न होने
से ग्रामीणों का संपर्क साल के आधे हिस्से में कट जाता है। उन्हें मजबूरी में तेज बहाव वाली नदी को पैदल पार करना पड़ता है, जिसमें वे अपने पालतू जानवरों को भी साथ ले जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली छात्र होते हैं, जिन्हें रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है। वहीं, बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीण खुद नदी में उतरकर उन्हें कंधे या चारपाई पर लादकर पार कराते हैं, जिससे मरीज और मदद करने वाले दोनों की जान खतरे में रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में कोई भी छोटी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है,
लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बैतूल जिला प्रदेश के बड़े नेताओं का गृह जिला होने और यहाँ सत्ता पक्ष के कई जनप्रतिनिधि होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वे शिकायत करते हैं कि चुनाव के समय तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं होता। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने कहा, "हम 6 महीने तक इसी तरह नदी पार करते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमार को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाते। कब तक हमारी जान इसी तरह जोखिम में रहेगी?"
- आठनेर विकासखण्ड क्षेत्र के हिडली भाजपा मण्डल के ग्राम आष्टी में भाजपा मण्डल की एक कामकाजी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मण्डल द्वारा चलाए जाने वाले अभियानों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि मनोज जगताप और मण्डल अध्यक्ष सुनील टेकपुरे मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इन नेताओं की उपस्थिति में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का शुभारंभ किया गया, और मण्डल के प्रत्येक बूथ पर वृक्षारोपण करने के निर्देश भी दिए गए।1
- मनोहर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार, बैतूल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की दयनीय स्थिति सामने आई है। चिचोली विकासखंड के चुनागोसाई माध्यमिक शाला में वर्तमान में एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है, जिसके कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्वयं स्कूल के छात्रों ने इस समस्या का खुलासा किया है। शिक्षा के मंदिरों की इस दुर्दशा के बीच, प्रशासन द्वारा साक्षरता का ढोल पीटा जाना शिक्षा की लाचार व्यवस्था और सिस्टम की घोर लापरवाही को उजागर करता है। ग्रामीणों ने इस गंभीर अनदेखी पर चिंता जताते हुए बैतूल जिला कलेक्टर को एक आवेदन पत्र सौंपा है, जिसमें स्कूल में तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गई है।1
- बैतूल जिले के नेहरू पार्क चौपाटी स्थित एक पराठा गुमटी में आग लगने की घटना सामने आई है।1
- मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'सेफ क्लिक 2.0' साइबर जागरूकता अभियान के तहत झल्लार थाना क्षेत्र के शासकीय विद्यालय रम्भा और हायर सेकेंडरी चांदू में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचाव के विषय पर जागरूकता बढ़ाना था, जिसमें विद्यालय के लगभग 100 छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। थाना प्रभारी वाजिद खान ने उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों को वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, ओटीपी, फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, लॉटरी, निवेश और नौकरी के नाम पर होने वाली साइबर ठगी से सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। थाना प्रभारी ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी बैंक संबंधी जानकारी, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, ओटीपी या पासवर्ड साझा न करें। उन्होंने यह भी सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार, डिजिटल गोपनीयता और साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए गए। कार्यक्रम का समापन सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की शपथ दिलाने के साथ हुआ। विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें साइबर अपराधों से बचने के प्रति सजग बनाते हैं।3
- बैतूल कोतवाली पुलिस ने छेड़छाड़ के एक मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान भानू पिता शांतिलाल छिपने के रूप में हुई है, जो बैतूल के सदर वार्ड का निवासी है।1
- आमला विकासखंड की ग्राम पंचायत इटावा के मुख्य बस स्टैंड पर सुलभ शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण प्रतिदिन हजारों यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि शासन-प्रशासन ने अब तक इस गंभीर समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। इटावा का मुख्य बस स्टैंड मुलताई मार्ग पर एक प्रमुख आवागमन केंद्र है, जहाँ सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक यात्रियों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। इसके बावजूद, सार्वजनिक सुलभ शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही यात्रियों के लिए बैठने का कोई प्रतीक्षालय उपलब्ध है। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों के अनुसार, शौचालय न होने से सबसे ज़्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को उठानी पड़ती है। वहीं, प्रतीक्षालय के अभाव में यात्रियों को कड़ी धूप, बारिश और अन्य खराब मौसम की स्थितियों में खुले में ही बसों का इंतजार करना पड़ता है। इससे दुकानदारों और आम नागरिकों को भी दैनिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों और व्यापारियों ने ग्राम पंचायत तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल इटावा मुख्य बस स्टैंड पर सुलभ शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से यात्रियों को आवश्यक सुविधाएँ मिल सकेंगी और उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान हो पाएगा।4
- बैतूल के पोहर ग्राम में श्मशान घाट तक जाने वाला सीसी रोड भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है, जिससे विकास के दावों की पोल खुल गई है। हाल ही में बारस्कर परिवार की शव यात्रा के दौरान सैकड़ों लोगों को बारिश में कीचड़ भरे इस रास्ते से गुजरना पड़ा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। लोग इस स्थिति पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारें श्मशान घाटों के सौंदर्यीकरण और पहुंच मार्गों की सुख-सुविधाओं के लिए योजनाएं बनाकर पंचायतों के माध्यम से लाखों रुपए खर्च कर रही हैं, ताकि मृत आत्मा और शव यात्रा में शामिल लोगों की यात्रा सुखद हो सके। हालांकि, भैंसदेही विकासखण्ड क्षेत्र के ग्राम पोहर में, जहां पंचायत द्वारा लाखों रुपए खर्च कर श्मशान घाट तक सीसी रोड का निर्माण किया गया था, वह बारिश में पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गया है। लोग इस बात से हैरान-परेशान हैं कि जिस पवित्र स्थल पर एक दिन हर व्यक्ति को जाना है, वहां भी भ्रष्टाचार हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग टिप्पणी कर रहे हैं कि कम से कम स्वर्ग जाने वाली अंतिम यात्रा की सड़क तो ठीक बननी चाहिए, और ऐसे स्थान पर भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों ने इस तरह के संवेदनशील मामलों में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल यह देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं, या फिर हमेशा की तरह ग्रामीणों को इसी भ्रष्टाचार भरी सड़क से होकर गुजरना पड़ेगा।1
- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले को अक्सर विकास का हॉटस्पॉट बताया जाता है, जो प्रदेश भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का गृह जिला होने के साथ ही एक केंद्रीय मंत्री और सत्ता पक्ष के पाँच विधायकों का गढ़ भी है। हालांकि, भीमपुर तहसील के ग्राम पिपल्या और धामन्या के बीच बहने वाली ताप्ती नदी की एक तस्वीर इन सभी विकास के दावों की पोल खोल रही है। आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी इस नदी पर पुल का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण ग्रामीणों को हर साल लगभग 6 महीने तक जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के धामन्या गांव में पुल न होने से ग्रामीणों का संपर्क साल के आधे हिस्से में कट जाता है। उन्हें मजबूरी में तेज बहाव वाली नदी को पैदल पार करना पड़ता है, जिसमें वे अपने पालतू जानवरों को भी साथ ले जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली छात्र होते हैं, जिन्हें रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है। वहीं, बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीण खुद नदी में उतरकर उन्हें कंधे या चारपाई पर लादकर पार कराते हैं, जिससे मरीज और मदद करने वाले दोनों की जान खतरे में रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में कोई भी छोटी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बैतूल जिला प्रदेश के बड़े नेताओं का गृह जिला होने और यहाँ सत्ता पक्ष के कई जनप्रतिनिधि होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वे शिकायत करते हैं कि चुनाव के समय तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं होता। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने कहा, "हम 6 महीने तक इसी तरह नदी पार करते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमार को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाते। कब तक हमारी जान इसी तरह जोखिम में रहेगी?"3