विशेष रिपोर्ट : वादों की ‘राख’ में सुलगता आक्रोश; मजदूर दिवस पर NTPC सीपत के खिलाफ हुंकार भरेंगे ग्रामीण... बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर से सटे NTPC Limited (सीपत संयंत्र) के खिलाफ अब आर-पार की जंग की तैयारी है। लंबे समय से वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और शोषण का दंश झेल रहे प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। 1 मई, मजदूर दिवस के अवसर पर सुखरीपाली स्थित ठाकुर देव द्वार पर एक विशाल जनआंदोलन होने जा रहा है, जिसमें 24 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रबंधन को घेरने की रणनीति तैयार की गई है। वादों की भेंट चढ़ता विश्वास : ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन ने बार-बार बैठकों और झूठे आश्वासनों के जरिए केवल समय बर्बाद किया है। 9 मार्च को होने वाले आंदोलन को प्रशासन ने यह कहकर रुकवाया था कि 1 मई तक सभी समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ये क्या जादू है?...🤔 फ्लाई ऐश विभाग में 'करोड़ों का खेल'? - स्थानीय जनप्रतिनिधियों - नरेन्द्र वस्त्रकार और रेवा शंकर साहू - ने फ्लाई ऐश विभाग के AGM पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं। उनकी प्रमुख मांगें और आरोप निम्नलिखित हैं: फर्जी बिलिंग : एक ही वाहन पर कई नेम प्लेट लगाकर फर्जी भुगतान का दावा। अवैध निकासी : 'सेनोस्फीयर' जैसे प्रतिबंधित पदार्थों की चोरी-छिपे निकासी। CBI जांच की मांग : जनप्रतिनिधियों ने AGM के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच की मांग की है ताकि इस 'अरबों के घोटाले' का पर्दाफाश हो सके। श्रम अधिकारों का हनन और रोजगार में धांधली - NTPC प्रबंधन पर स्थानीय युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप है: आरक्षण की अनदेखी : आदिवासियों के लिए आरक्षित 152 पद सालों से लंबित हैं। भर्ती में भ्रष्टाचार : 692 पदों की भर्ती में गड़बड़ी और बाहरी लोगों को प्राथमिकता देने के आरोप। न्यूनतम मजदूरी का उल्लंघन : Minimum Wages Act, 1948 के तहत तय ₹541 की जगह मजदूरों को केवल ₹300–350 थमाए जा रहे हैं। पर्यावरण और किसानी पर प्रहार : राख डाइक (Ash Dyke) से होने वाले रिसाव ने क्षेत्र में तबाही मचा रखी है: बंजर होती जमीन : रिसाव के कारण उपजाऊ खेत दलदल में बदल रहे हैं और नहरें जाम हो चुकी हैं। स्वास्थ्य संकट : उड़ती राख से इंसानों और मवेशियों की जान पर बन आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह Environment Protection Act, 1986 और NGT के नियमों का सीधा उल्लंघन है। जर्जर बुनियादी ढांचा और CSR की विफलता : Companies Act, 2013 के तहत मिलने वाले CSR फंड का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। ओवरलोडिंग की मार : 14 टन क्षमता वाली सड़कों पर 70 टन के भारी वाहन दौड़ रहे हैं। खंडहर होता क्षेत्र : प्रसिद्ध "घूमना पुल" बीते 4 वर्षों से जर्जर है, लेकिन मरम्मत की सुध लेने वाला कोई नहीं। "हक मांगने पर मिलती है धमकी" ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी वे अपने जायज अधिकारों की मांग करते हैं, प्रबंधन उन्हें National Security Act (रासुका) के तहत कार्रवाई करने की धमकी देकर डराने की कोशिश करता है। मौन है प्रबंधन - इस पूरे विवाद पर जब संबंधित AGM का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। उनकी यह चुप्पी आरोपों को और अधिक हवा दे रही है। आगे क्या? - कल का सूर्योदय NTPC प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाला है। मजदूर दिवस पर होने वाला यह जनआंदोलन न केवल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करेगा, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता की भी परीक्षा लेगा।
विशेष रिपोर्ट : वादों की ‘राख’ में सुलगता आक्रोश; मजदूर दिवस पर NTPC सीपत के खिलाफ हुंकार भरेंगे ग्रामीण... बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर से सटे NTPC Limited (सीपत संयंत्र) के खिलाफ अब आर-पार की जंग की तैयारी है। लंबे समय से वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और शोषण का दंश झेल रहे प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। 1 मई, मजदूर दिवस के अवसर पर सुखरीपाली स्थित ठाकुर देव द्वार पर एक विशाल जनआंदोलन होने जा रहा है, जिसमें 24 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रबंधन को घेरने की रणनीति तैयार की गई है। वादों की भेंट चढ़ता विश्वास : ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन ने बार-बार बैठकों और झूठे आश्वासनों के जरिए केवल समय बर्बाद किया है। 9 मार्च को होने वाले आंदोलन को प्रशासन ने यह कहकर रुकवाया था कि 1 मई तक सभी समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ये क्या जादू है?...🤔 फ्लाई ऐश विभाग में 'करोड़ों का खेल'? - स्थानीय जनप्रतिनिधियों - नरेन्द्र वस्त्रकार और रेवा शंकर साहू - ने फ्लाई ऐश विभाग के AGM पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए
हैं। उनकी प्रमुख मांगें और आरोप निम्नलिखित हैं: फर्जी बिलिंग : एक ही वाहन पर कई नेम प्लेट लगाकर फर्जी भुगतान का दावा। अवैध निकासी : 'सेनोस्फीयर' जैसे प्रतिबंधित पदार्थों की चोरी-छिपे निकासी। CBI जांच की मांग : जनप्रतिनिधियों ने AGM के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच की मांग की है ताकि इस 'अरबों के घोटाले' का पर्दाफाश हो सके। श्रम अधिकारों का हनन और रोजगार में धांधली - NTPC प्रबंधन पर स्थानीय युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप है: आरक्षण की अनदेखी : आदिवासियों के लिए आरक्षित 152 पद सालों से लंबित हैं। भर्ती में भ्रष्टाचार : 692 पदों की भर्ती में गड़बड़ी और बाहरी लोगों को प्राथमिकता देने के आरोप। न्यूनतम मजदूरी का उल्लंघन : Minimum Wages Act, 1948 के तहत तय ₹541 की जगह मजदूरों को केवल ₹300–350 थमाए जा रहे हैं। पर्यावरण और किसानी पर प्रहार : राख डाइक (Ash Dyke) से होने वाले रिसाव ने क्षेत्र में तबाही मचा रखी है: बंजर होती जमीन : रिसाव के कारण उपजाऊ खेत दलदल में बदल रहे हैं और नहरें जाम हो चुकी हैं। स्वास्थ्य संकट : उड़ती राख से इंसानों और मवेशियों की जान पर बन आई है। विशेषज्ञों
के अनुसार, यह Environment Protection Act, 1986 और NGT के नियमों का सीधा उल्लंघन है। जर्जर बुनियादी ढांचा और CSR की विफलता : Companies Act, 2013 के तहत मिलने वाले CSR फंड का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। ओवरलोडिंग की मार : 14 टन क्षमता वाली सड़कों पर 70 टन के भारी वाहन दौड़ रहे हैं। खंडहर होता क्षेत्र : प्रसिद्ध "घूमना पुल" बीते 4 वर्षों से जर्जर है, लेकिन मरम्मत की सुध लेने वाला कोई नहीं। "हक मांगने पर मिलती है धमकी" ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी वे अपने जायज अधिकारों की मांग करते हैं, प्रबंधन उन्हें National Security Act (रासुका) के तहत कार्रवाई करने की धमकी देकर डराने की कोशिश करता है। मौन है प्रबंधन - इस पूरे विवाद पर जब संबंधित AGM का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। उनकी यह चुप्पी आरोपों को और अधिक हवा दे रही है। आगे क्या? - कल का सूर्योदय NTPC प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाला है। मजदूर दिवस पर होने वाला यह जनआंदोलन न केवल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करेगा, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता की भी परीक्षा लेगा।
- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर से सटे NTPC Limited (सीपत संयंत्र) के खिलाफ अब आर-पार की जंग की तैयारी है। लंबे समय से वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और शोषण का दंश झेल रहे प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। 1 मई, मजदूर दिवस के अवसर पर सुखरीपाली स्थित ठाकुर देव द्वार पर एक विशाल जनआंदोलन होने जा रहा है, जिसमें 24 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रबंधन को घेरने की रणनीति तैयार की गई है। वादों की भेंट चढ़ता विश्वास : ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन ने बार-बार बैठकों और झूठे आश्वासनों के जरिए केवल समय बर्बाद किया है। 9 मार्च को होने वाले आंदोलन को प्रशासन ने यह कहकर रुकवाया था कि 1 मई तक सभी समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ये क्या जादू है?...🤔 फ्लाई ऐश विभाग में 'करोड़ों का खेल'? - स्थानीय जनप्रतिनिधियों - नरेन्द्र वस्त्रकार और रेवा शंकर साहू - ने फ्लाई ऐश विभाग के AGM पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं। उनकी प्रमुख मांगें और आरोप निम्नलिखित हैं: फर्जी बिलिंग : एक ही वाहन पर कई नेम प्लेट लगाकर फर्जी भुगतान का दावा। अवैध निकासी : 'सेनोस्फीयर' जैसे प्रतिबंधित पदार्थों की चोरी-छिपे निकासी। CBI जांच की मांग : जनप्रतिनिधियों ने AGM के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच की मांग की है ताकि इस 'अरबों के घोटाले' का पर्दाफाश हो सके। श्रम अधिकारों का हनन और रोजगार में धांधली - NTPC प्रबंधन पर स्थानीय युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप है: आरक्षण की अनदेखी : आदिवासियों के लिए आरक्षित 152 पद सालों से लंबित हैं। भर्ती में भ्रष्टाचार : 692 पदों की भर्ती में गड़बड़ी और बाहरी लोगों को प्राथमिकता देने के आरोप। न्यूनतम मजदूरी का उल्लंघन : Minimum Wages Act, 1948 के तहत तय ₹541 की जगह मजदूरों को केवल ₹300–350 थमाए जा रहे हैं। पर्यावरण और किसानी पर प्रहार : राख डाइक (Ash Dyke) से होने वाले रिसाव ने क्षेत्र में तबाही मचा रखी है: बंजर होती जमीन : रिसाव के कारण उपजाऊ खेत दलदल में बदल रहे हैं और नहरें जाम हो चुकी हैं। स्वास्थ्य संकट : उड़ती राख से इंसानों और मवेशियों की जान पर बन आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह Environment Protection Act, 1986 और NGT के नियमों का सीधा उल्लंघन है। जर्जर बुनियादी ढांचा और CSR की विफलता : Companies Act, 2013 के तहत मिलने वाले CSR फंड का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। ओवरलोडिंग की मार : 14 टन क्षमता वाली सड़कों पर 70 टन के भारी वाहन दौड़ रहे हैं। खंडहर होता क्षेत्र : प्रसिद्ध "घूमना पुल" बीते 4 वर्षों से जर्जर है, लेकिन मरम्मत की सुध लेने वाला कोई नहीं। "हक मांगने पर मिलती है धमकी" ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी वे अपने जायज अधिकारों की मांग करते हैं, प्रबंधन उन्हें National Security Act (रासुका) के तहत कार्रवाई करने की धमकी देकर डराने की कोशिश करता है। मौन है प्रबंधन - इस पूरे विवाद पर जब संबंधित AGM का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। उनकी यह चुप्पी आरोपों को और अधिक हवा दे रही है। आगे क्या? - कल का सूर्योदय NTPC प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाला है। मजदूर दिवस पर होने वाला यह जनआंदोलन न केवल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करेगा, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता की भी परीक्षा लेगा।3
- आज धारमजयगड़ नोनाईजोर बृज के पास 7:5 बजे बस और सफारी जोरदार टक्कर1
- अंबिकापुर/लुंड्रा, 30 अप्रैल 2026। जिला सरगुजा में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल अंबिकापुर एवं थाना लुंड्रा की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई करते हुए आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब और एक डस्टर वाहन जब्त किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस को 29 अप्रैल को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बहेराडीह निवासी दया साहू मध्य प्रदेश से अवैध रूप से अंग्रेजी शराब लाकर अपने पुराने खंडहरनुमा घर में संग्रहित करता है और वाहन के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों में बिक्री करता है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल दबिश दी। कार्रवाई के दौरान आरोपी दया साहू अपनी डस्टर कार (क्रमांक CG 11 MB 5170) में निकलने की कोशिश कर रहा था, जिसे पुलिस ने घेराबंदी कर रोक लिया। वाहन की तलाशी लेने पर डिक्की से 750 एमएल की 6 बोतल आफ्टर डार्क व्हिस्की तथा 180 एमएल की 300 नग अंग्रेजी शराब बरामद की गई। कुल मिलाकर 101.46 लीटर शराब, जिसकी कीमत लगभग 92,060 रुपये आंकी गई है, जब्त की गई। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त डस्टर वाहन सहित कुल 5,09,260 रुपये की संपत्ति जब्त की है। आरोपी के पास शराब से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं पाए जाने पर थाना लुंड्रा में अपराध क्रमांक 96/2026 धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी दया साहू (उम्र 52 वर्ष), निवासी लुंड्रा, को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।1
- Post by Dhananajy jangde1
- Post by हमर जशपुर1
- बिलासपुर में हत्या मामलों की जांच पर बड़ा प्रशिक्षण: ‘स्मार्ट विवेचना’ से 100% दोषसिद्धि का लक्ष्य।1
- दिनांक 30/4/2026 दो पहर के 3 बजे बारिस होते समय बीजली के प्रहार् से ग्राम पंचायत् लोखंडी के करम कोना के एक पोवाल् माचे मे आग लगी किसी भी प्रकार का जीव जंतु को कोई हनी नही पहुची। गाव के सभी लोग आग बुझाने पहुचे लेकीन बहुत देर होने के कारण बुझाने मे असमर्थत रे ।1
- जगदलपुर। शहर के बोधघाट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शांति नगर वार्ड में नजूल जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थाने की दहलीज तक जा पहुंचा है। एक तरफ जहां बेघर होने का डर था, वहीं दूसरी ओर सत्ता और नियमों का दबाव; इन दोनों के बीच हुए टकराव ने इतना उग्र रूप ले लिया कि महिला पार्षद और पीड़ित परिवार की महिलाओं के बीच जमकर मारपीट हुई। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, बोधघाट क्षेत्र में एक महिला अपनी पांच बेटियों के साथ पिछले कई वर्षों से लगभग 250 वर्ग फीट के एक कच्चे मकान में गुजर-बसर कर रही है। बरसात और भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए परिवार ने इस कच्चे मकान की मरम्मत कर इसे पक्का बनाने का काम शुरू किया था। विवाद तब शुरू हुआ जब क्षेत्र की भाजपा महिला पार्षद ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य को 'अवैध' बताते हुए रुकवा दिया। पार्षद का तर्क था कि नजूल भूमि पर बिना अनुमति के पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता, जबकि पीड़ित परिवार का कहना है कि वे वर्षों से वहां रह रहे हैं और उनके पास सिर छिपाने के लिए यही एकमात्र सहारा है। सड़क पर छिड़ा 'संग्राम' देखते ही देखते बहस गाली-गलौज और फिर शारीरिक हिंसा में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों की महिलाएं आपस में भिड़ गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि कैसे महिलाएं एक-दूसरे के बाल खींच रही हैं और मारपीट कर रही हैं। बीच बचाव करने आए लोग भी इस हाईवोल्टेज ड्रामे को रोकने में नाकाम रहे। पुलिसिया कार्रवाई और राजनीतिक गरमाहट घटना के तुरंत बाद दोनों पक्ष बोधघाट थाने पहुंचे। पार्षद पक्ष: सरकारी काम में बाधा डालने और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार: पार्षद पर सत्ता का धौंस दिखाने और गरीब परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। बोधघाट पुलिस का कहना है: "दोनों पक्षों की शिकायत दर्ज कर ली गई है। मारपीट के वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। राजस्व विभाग से जमीन की स्थिति की रिपोर्ट भी मांगी जा सकती है।" सवालिया घेरे में प्रशासन यह घटना शहर में नजूल भूमि पर काबिज हजारों परिवारों के भविष्य और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या प्रशासन केवल गरीबों के छोटे निर्माणों पर ही डंडा चलाता है, या फिर नियमों का पालन सभी के लिए समान है? फिलहाल, इस मारपीट के वीडियो ने पूरे शहर में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है और पुलिस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।1