मुंडावर बस स्टैंड पर इन दिनों अतिक्रमण इस कदर बढ़ गया है कि आम जनता और राहगीरों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। मुख्य चौराहे और बस स्टैंड जैसे व्यस्त स्थान पर खुलेआम हो रहे इस अतिक्रमण पर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मुख्य सड़क पर ही दुकानें लगी हुई हैं और सामान बाहर तक फैलाकर रखा गया है, जिससे रोडवेज और निजी बसों को मुड़ने या खड़े होने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती, और हर समय बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। सड़क के बीचों-बीच खड़े वाहनों और अव्यवस्थित यातायात के कारण भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। बस स्टैंड के ठीक सामने लोग अपने वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े कर देते हैं, जिससे आए दिन लंबा जाम लग जाता है। 'बस स्टॉप मुंडावर' (सौजन्य से- नगरपालिका मुंडावर) लिखे शेड के नीचे और आसपास भी थड़ी-ठेले वालों ने पक्का कब्जा जमा लिया है, जिससे यात्रियों के बैठने के लिए बनी बेंचों के पास दुकानें लग गई हैं और यात्रियों को खड़े रहने पर मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय दुकानदारों द्वारा सड़क सीमा में सामान फैलाने और अस्थाई थड़ियों के कारण बस स्टैंड संकरा हो गया है, जिससे कस्बे के मुख्य मार्ग पर लगातार जाम लगा रहता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को इन वाहनों के बीच से जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है। जनता का आरोप है कि मुंडावर नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन को इस गंभीर समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रशासन की इस ढुलमुल नीति के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं, जिस पर जनता सवाल उठा रही है। कस्बावासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुंडावर बस स्टैंड को इस अवैध अतिक्रमण से मुक्त करवाकर यातायात व्यवस्था को सुचारू नहीं किया गया, तो उन्हें आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी।
मुंडावर बस स्टैंड पर इन दिनों अतिक्रमण इस कदर बढ़ गया है कि आम जनता और राहगीरों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। मुख्य चौराहे और बस स्टैंड जैसे व्यस्त स्थान पर खुलेआम हो रहे इस अतिक्रमण पर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मुख्य सड़क पर ही दुकानें लगी हुई हैं और सामान बाहर तक फैलाकर रखा गया है, जिससे रोडवेज और निजी बसों को मुड़ने या खड़े होने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती, और हर समय बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। सड़क के बीचों-बीच खड़े वाहनों और अव्यवस्थित यातायात के कारण भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। बस स्टैंड के ठीक सामने लोग अपने वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े कर देते हैं, जिससे आए दिन लंबा जाम लग जाता है। 'बस स्टॉप मुंडावर' (सौजन्य से- नगरपालिका मुंडावर) लिखे शेड के नीचे और आसपास भी थड़ी-ठेले वालों ने पक्का कब्जा जमा लिया है, जिससे यात्रियों के बैठने के लिए बनी बेंचों के पास दुकानें लग गई हैं और यात्रियों को खड़े रहने पर मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय दुकानदारों द्वारा सड़क सीमा में सामान फैलाने और अस्थाई थड़ियों के कारण बस स्टैंड संकरा हो गया है, जिससे कस्बे के मुख्य मार्ग पर लगातार जाम लगा रहता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को इन वाहनों के बीच से जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है। जनता का आरोप है कि मुंडावर नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन को इस गंभीर समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रशासन की इस ढुलमुल नीति के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं, जिस पर जनता सवाल उठा रही है। कस्बावासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुंडावर बस स्टैंड को इस अवैध अतिक्रमण से मुक्त करवाकर यातायात व्यवस्था को सुचारू नहीं किया गया, तो उन्हें आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी।
- मुंडावर बस स्टैंड पर इन दिनों अतिक्रमण इस कदर बढ़ गया है कि आम जनता और राहगीरों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। मुख्य चौराहे और बस स्टैंड जैसे व्यस्त स्थान पर खुलेआम हो रहे इस अतिक्रमण पर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मुख्य सड़क पर ही दुकानें लगी हुई हैं और सामान बाहर तक फैलाकर रखा गया है, जिससे रोडवेज और निजी बसों को मुड़ने या खड़े होने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती, और हर समय बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। सड़क के बीचों-बीच खड़े वाहनों और अव्यवस्थित यातायात के कारण भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। बस स्टैंड के ठीक सामने लोग अपने वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े कर देते हैं, जिससे आए दिन लंबा जाम लग जाता है। 'बस स्टॉप मुंडावर' (सौजन्य से- नगरपालिका मुंडावर) लिखे शेड के नीचे और आसपास भी थड़ी-ठेले वालों ने पक्का कब्जा जमा लिया है, जिससे यात्रियों के बैठने के लिए बनी बेंचों के पास दुकानें लग गई हैं और यात्रियों को खड़े रहने पर मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय दुकानदारों द्वारा सड़क सीमा में सामान फैलाने और अस्थाई थड़ियों के कारण बस स्टैंड संकरा हो गया है, जिससे कस्बे के मुख्य मार्ग पर लगातार जाम लगा रहता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को इन वाहनों के बीच से जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है। जनता का आरोप है कि मुंडावर नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन को इस गंभीर समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रशासन की इस ढुलमुल नीति के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं, जिस पर जनता सवाल उठा रही है। कस्बावासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुंडावर बस स्टैंड को इस अवैध अतिक्रमण से मुक्त करवाकर यातायात व्यवस्था को सुचारू नहीं किया गया, तो उन्हें आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी।1
- राजस्थान के खैरथल में एक जमीन विवाद से जुड़ा मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट में चल रहे इस जमीन विवाद के बीच 'फ्लोटिंग' की गई है। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अर्पण सेवा फाउंडेशन, बहरोड़ ने पर्यावरण संरक्षण और जीव कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। संस्था के 'प्रकृति आयाम' के तहत घिटोठ औद्योगिक क्षेत्र से लगे परतापूर चक नम्बर 02 वन क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए एक जलकुंड ('अर्पण वन्य जीव कुंड') का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही, पशुपालकों के लिए एक प्याऊ भी स्थापित किया गया है, ताकि जंगल में रहने वाले वन्यजीवों को भीषण गर्मी में शीतल और शुद्ध पानी उपलब्ध हो सके। यह पुनीत कार्य भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कमांडो और वरिष्ठ सदस्य सतपाल यादव, एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कमलेश देवी (निवासी: कांकर दोपा) के सौजन्य से संभव हुआ है। फाउंडेशन के सदस्यों ने इस सेवा कार्य पर सम्मानित भामाशाह सदस्य सूबेदार सतपाल जी का साफा और माला पहनाकर स्वागत किया और विधि विधान से पूजन करके इसका उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. राजेश कुमार यादव, प्रकृति आयाम प्रमुख, सचिव एडवोकेट भूपेंद्र प्रजापति, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार यादव, ओम यादव (संयोजक, पक्षी मित्र अभियान) सहित अनेक सम्मानित ग्रामवासी उपस्थित रहे। उपस्थित सभी सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया।2
- बानसूर-अलवर सड़क मार्ग पर भारी बारिश के बाद हुए जलभराव से स्थानीय लोगों को आखिरकार राहत मिल गई है। नगरपालिका प्रशासन ने ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए जनरेटर और पाइपों की मदद से सड़क पर जमा हुए पानी को बाहर निकलवाया, जिससे इस मार्ग पर आवागमन एक बार फिर सुचारू हो सका। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह समस्या हर मानसून के दौरान दोहराई जाती है, जहाँ सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है। इससे आमजन, वाहन चालक और व्यापारी वर्ग खासे परेशान होते हैं, और स्कूली बच्चों व मरीजों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस बार नगरपालिका द्वारा तत्परता दिखाते हुए जल निकासी का काम करवाया गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, ग्रामीणों ने नगरपालिका प्रशासन से सवाल किया है कि यह समस्या हर बारिश में क्यों दोहराई जानी चाहिए। वे मानते हैं कि अस्थायी इंतजामों से कुछ समय की राहत तो मिल जाती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान आवश्यक है। लोगों ने मांग की है कि नगरपालिका जल निकासी के लिए एक पक्की ड्रेनेज व्यवस्था का निर्माण करे, ताकि हर साल होने वाली इस परेशानी से स्थायी छुटकारा मिल सके। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि समस्या का समाधान बार-बार पाइप से पानी खींचना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से बनी पक्की ड्रेनेज लाइन है। उनका तर्क है कि जब तक नालों और नालियों की उचित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बारिश के मौसम में बानसूर-अलवर मार्ग पर जाम और जलभराव की स्थिति बनी रहेगी।1
- आज, 5 जून, 2026 को दुनिया भर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है, जहाँ पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई घोषणाएं, वैश्विक अभियान और जमीनी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस वर्ष की आधिकारिक थीम "नाउ फॉर क्लाइमेट" रखी गई है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने पर जोर देना है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के साथ, बाकू, अज़रबैजान इस साल का आधिकारिक वैश्विक मेजबान देश है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण बैठकें हो रही हैं। भारत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देश और दुनिया को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पिछले एक दशक में पर्यावरण के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित किया, जिसमें देश में बढ़ते ग्रीन कवर और चीता, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुआ व स्लॉथ बियर जैसे वन्यजीवों के संरक्षण में मिली सफलता की सराहना की। पीएम मोदी ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान की सफलता का भी जिक्र किया, जिससे देश के वन क्षेत्र में हर साल लगभग 1.1 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हो रही है। वहीं, राजनीतिक मोर्चे पर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने भी पर्यावरण दिवस पर संदेश देते हुए सरकार से कॉर्पोरेट और औद्योगिक नीतियों की समीक्षा करने और जंगलों व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नियमों को मजबूत करने की मांग की। कॉर्पोरेट और युवाओं ने भी विशेष पहल की है; उदाहरण के लिए, किआ इंडिया ने अपने सर्विस सेंटर्स पर 1,000 किलोग्राम ई-कचरा इकट्ठा करने और गाड़ियों के मुफ्त प्रदूषण जांच का अभियान शुरू किया। इसके अतिरिक्त, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो जैसे कार्यक्रमों में छात्रों और युवाओं ने समुद्र तटों को साफ करने वाले रोबोट और गन्ने के कचरे से बने बायोडिग्रेडेबल उत्पाद जैसे कई इको-फ्रेंडली इनोवेशन प्रस्तुत कर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है।2
- उत्तर प्रदेश और हरियाणा के रेवाड़ी से जुड़ी एक घटना में, एक महिला ने मात्र पाँच दिन के अंतराल में चार बच्चों को जन्म दिया है।1
- वैज्ञानिकों ने इंसानी शरीर को एक अद्भुत रचना बताया है, जिसके काम करने के तरीके हर किसी को हैरान कर सकते हैं। हमारे फेफड़े हर दिन 20 लाख लीटर हवा को फिल्टर करते हैं और अगर उन्हें पूरी तरह फैलाया जाए तो वे टेनिस कोर्ट के एक हिस्से को ढक सकते हैं। शरीर हर सेकंड 2.5 करोड़ नई कोशिकाएं बनाता है और हर दिन 200 अरब से अधिक रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है; किसी भी समय शरीर में 2500 अरब रक्त कोशिकाएं मौजूद रहती हैं, जिसमें एक बूंद खून में 25 करोड़ कोशिकाएं होती हैं। इंसान का खून हर दिन शरीर में 1,92,000 किलोमीटर का सफर करता है। शरीर में औसतन 5.6 लीटर खून होता है जो हर 20 सेकंड में एक बार पूरे शरीर का चक्कर काट लेता है। एक स्वस्थ इंसान का हृदय हर दिन 1,00,000 बार धड़कता है, जो साल भर में 3 करोड़ से ज्यादा बार हो जाता है। दिल का पंपिंग प्रेशर इतना तेज होता है कि यह खून को 30 फुट ऊपर उछाल सकता है। इंसान की आंखें एक करोड़ रंगों में बारीक से बारीक अंतर पहचान सकती हैं, और फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसका मुकाबला कर सके। हमारी नाक में एक प्राकृतिक एयर कंडीशनर होता है, जो गर्म हवा को ठंडा और ठंडी हवा को गर्म कर फेफड़ों तक पहुंचाता है। तंत्रिका तंत्र शरीर के बाकी हिस्सों तक 400 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से जरूरी निर्देश पहुंचाता है, और इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं। शरीर में 70 फीसदी पानी होता है, इसके अलावा इसमें बड़ी मात्रा में कार्बन, जिंक, कोबाल्ट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, निकिल और सिलिकॉन भी होता है। छींकते समय बाहर निकलने वाली हवा की रफ्तार 166 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो सकती है, और आंखें खोलकर छींकना नामुमकिन है। इंसान के वजन का 10 फीसदी हिस्सा शरीर में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है; एक वर्ग इंच त्वचा में 3.2 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं। आंखें बचपन में ही पूरी तरह विकसित हो जाती हैं और बाद में उनमें कोई विकास नहीं होता, जबकि नाक और कान पूरी जिंदगी विकसित होते रहते हैं। कान लाखों आवाजों में अंतर पहचान सकते हैं और 1,000 से 50,000 हर्ट्ज के बीच की ध्वनि तरंगें सुनते हैं। इंसान के दांत चट्टान की तरह मजबूत होते हैं, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों के विपरीत, वे बीमार होने पर खुद को दुरुस्त नहीं कर पाते। इंसान के मुंह में हर दिन 1.7 लीटर लार बनती है, जो खाने को पचाने के साथ-साथ जीभ में मौजूद 10,000 से ज्यादा स्वाद ग्रंथियों को नम बनाए रखती है। पलकें आंखों से पसीना बाहर निकालने और उनमें नमी बनाए रखने के लिए झपकती हैं; महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी बार पलकें झपकती हैं। अंगूठे का नाखून सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ता है, वहीं मध्यमा या मिडिल फिंगर का नाखून सबसे तेजी से बढ़ता है। पुरुषों में दाढ़ी के बाल सबसे तेजी से बढ़ते हैं; अगर कोई शख्स पूरी जिंदगी शेविंग न करे तो दाढ़ी 30 फुट लंबी हो सकती है। एक इंसान आम तौर पर जिंदगी के पांच साल खाना खाने में गुजार देता है और जीवन भर अपने वजन से 7,000 गुना ज्यादा भोजन खा चुका होता है। एक स्वस्थ इंसान के सिर से हर दिन 80 बाल झड़ते हैं। इंसान दुनिया में आने से पहले ही, यानी मां के गर्भ में ही सपने देखना शुरू कर देता है और बच्चे का विकास वसंत में तेजी से होता है। नींद के दौरान इंसान की ऊर्जा जलती है, दिमाग अहम सूचनाओं को स्टोर करता है, शरीर को आराम मिलता है और मरम्मत का काम भी होता है, साथ ही शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स भी निकलते हैं।1
- जनता ने भिवाड़ी बायपास से जुड़े मामलों पर सुनवाई का आग्रह किया है। लोगों का कहना है कि भिवाड़ी बायपास से संबंधित कुछ ऐसा है जो सालों से लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने संबंधित पक्षों से अपनी बात सुनने की अपील की है।1