नल-जल योजना में अनियमितताओं के आरोप, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल खटखरी में टंकी धराशायी होने के बाद भी नहीं चेता पीएचई विभाग! जिला मुख्यालय के आसपास ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल मऊगंज जिले में ग्रामीणों को घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित नल-जल योजना अब अपनी कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि योजना के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों में जिम्मेदार अधिकारियों और संविदाकारों की कथित मिलीभगत से जमकर अनियमितताएं की जा रही हैं। स्थिति यह है कि कहीं नल-जल योजना का केवल कागजों और फोटो सेशन में संचालन दिखाई दे रहा है, तो कहीं निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर ही गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। नईगढ़ी जनपद अंतर्गत खटखरी में नल-जल योजना के तहत निर्मित पानी की टंकी के धराशायी होने की घटना के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित विभाग ने जिले में संचालित अन्य योजनाओं के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की व्यापक जांच कराने की दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। जिला मुख्यालय के आसपास भी सामने आ रहे सवाल जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुछ ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना के नाम पर कराए गए कार्यों को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का शुभारंभ और संचालन दिखाने के लिए फोटो सेशन तो कराए गए, लेकिन वास्तविक स्थिति में आज भी कई परिवारों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि योजना धरातल पर सुचारू रूप से संचालित नहीं है तो उसके संचालन और भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई? निर्माण कार्य हादसे का कारण बनने का आरोप! कुछ स्थानों पर नल-जल योजना से जुड़े निर्माण कार्यों की स्थिति इतनी चिंताजनक बताई जा रही है कि वह दुर्घटना का कारण तक बन चुकी है। इस संबंध में शिकायत मऊगंज थाने तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यदि शिकायत सही है तो यह केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। खटखरी की घटना के बाद जांच की जरूरत लेकिन कोरम पूर्ति तक सीमित ना रहे जांच! नईगढी जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खटखरी में पानी की टंकी धराशायी होने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर करोड़ों रुपये की योजनाओं में निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों, स्ट्रक्चरल डिजाइन और निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी किसकी है? यदि विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया था तो कमजोर निर्माण समय रहते पकड़ में क्यों नहीं आया? कार्यपालन यंत्री की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल? नल-जल योजना से जुड़े कार्यों को लेकर पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री संजय पांडे की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन, घटिया निर्माण अथवा शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित संविदाकार से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक जवाबदेही तय की जाए। बड़ा सवाल—फोटो में पानी या गांव में पानी? सरकार की मंशा ग्रामीणों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की है, लेकिन यदि योजनाएं केवल कागजों और फोटो तक सीमित रह जाएं तो करोड़ों रुपये खर्च करने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को फोटो सेशन के बजाय वास्तविक जलापूर्ति की स्थिति का सत्यापन करना चाहिए। अब देखना यह है कि खटखरी की घटना से सबक लेते हुए पीएचई विभाग मऊगंज जिले में संचालित नल-जल योजनाओं का तकनीकी ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराता है या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी। ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे
नल-जल योजना में अनियमितताओं के आरोप, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल खटखरी में टंकी धराशायी होने के बाद भी नहीं चेता पीएचई विभाग! जिला मुख्यालय के आसपास ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल मऊगंज जिले में ग्रामीणों को घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित नल-जल योजना अब अपनी कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि योजना के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों में जिम्मेदार अधिकारियों और संविदाकारों की कथित मिलीभगत से जमकर अनियमितताएं की जा रही हैं। स्थिति यह है कि कहीं नल-जल योजना का केवल कागजों और फोटो सेशन में संचालन दिखाई दे रहा है, तो कहीं निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर ही गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। नईगढ़ी जनपद अंतर्गत खटखरी में नल-जल योजना के तहत निर्मित पानी की टंकी के धराशायी होने की घटना के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित विभाग ने जिले में संचालित अन्य योजनाओं के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की व्यापक जांच कराने की दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। जिला मुख्यालय के आसपास भी सामने आ रहे सवाल जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुछ ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना के नाम पर कराए गए कार्यों को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का शुभारंभ और संचालन दिखाने के लिए फोटो सेशन तो कराए गए, लेकिन वास्तविक स्थिति में आज भी कई परिवारों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि योजना धरातल पर सुचारू रूप से संचालित नहीं है तो उसके संचालन और भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई? निर्माण कार्य हादसे का कारण बनने का आरोप! कुछ स्थानों पर नल-जल योजना से जुड़े निर्माण कार्यों की स्थिति इतनी चिंताजनक बताई जा रही है कि वह दुर्घटना का कारण तक बन चुकी है। इस संबंध में शिकायत मऊगंज थाने तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यदि शिकायत सही है तो यह केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। खटखरी की घटना के बाद जांच की जरूरत लेकिन कोरम पूर्ति तक सीमित ना रहे जांच! नईगढी जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खटखरी में पानी की टंकी धराशायी होने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर करोड़ों रुपये की योजनाओं में निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों, स्ट्रक्चरल डिजाइन और निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी किसकी है? यदि विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया था तो कमजोर निर्माण समय रहते पकड़ में क्यों नहीं आया? कार्यपालन यंत्री की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल? नल-जल योजना से जुड़े कार्यों को लेकर पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री संजय पांडे की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन, घटिया निर्माण अथवा शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित संविदाकार से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक जवाबदेही तय की जाए। बड़ा सवाल—फोटो में पानी या गांव में पानी? सरकार की मंशा ग्रामीणों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की है, लेकिन यदि योजनाएं केवल कागजों और फोटो तक सीमित रह जाएं तो करोड़ों रुपये खर्च करने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को फोटो सेशन के बजाय वास्तविक जलापूर्ति की स्थिति का सत्यापन करना चाहिए। अब देखना यह है कि खटखरी की घटना से सबक लेते हुए पीएचई विभाग मऊगंज जिले में संचालित नल-जल योजनाओं का तकनीकी ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराता है या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी। ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे
- नल-जल योजना में अनियमितताओं के आरोप, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल खटखरी में टंकी धराशायी होने के बाद भी नहीं चेता पीएचई विभाग! जिला मुख्यालय के आसपास ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल मऊगंज जिले में ग्रामीणों को घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित नल-जल योजना अब अपनी कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि योजना के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों में जिम्मेदार अधिकारियों और संविदाकारों की कथित मिलीभगत से जमकर अनियमितताएं की जा रही हैं। स्थिति यह है कि कहीं नल-जल योजना का केवल कागजों और फोटो सेशन में संचालन दिखाई दे रहा है, तो कहीं निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर ही गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। नईगढ़ी जनपद अंतर्गत खटखरी में नल-जल योजना के तहत निर्मित पानी की टंकी के धराशायी होने की घटना के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित विभाग ने जिले में संचालित अन्य योजनाओं के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की व्यापक जांच कराने की दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। जिला मुख्यालय के आसपास भी सामने आ रहे सवाल जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुछ ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना के नाम पर कराए गए कार्यों को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का शुभारंभ और संचालन दिखाने के लिए फोटो सेशन तो कराए गए, लेकिन वास्तविक स्थिति में आज भी कई परिवारों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि योजना धरातल पर सुचारू रूप से संचालित नहीं है तो उसके संचालन और भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई? निर्माण कार्य हादसे का कारण बनने का आरोप! कुछ स्थानों पर नल-जल योजना से जुड़े निर्माण कार्यों की स्थिति इतनी चिंताजनक बताई जा रही है कि वह दुर्घटना का कारण तक बन चुकी है। इस संबंध में शिकायत मऊगंज थाने तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यदि शिकायत सही है तो यह केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। खटखरी की घटना के बाद जांच की जरूरत लेकिन कोरम पूर्ति तक सीमित ना रहे जांच! नईगढी जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खटखरी में पानी की टंकी धराशायी होने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर करोड़ों रुपये की योजनाओं में निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों, स्ट्रक्चरल डिजाइन और निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी किसकी है? यदि विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया था तो कमजोर निर्माण समय रहते पकड़ में क्यों नहीं आया? कार्यपालन यंत्री की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल? नल-जल योजना से जुड़े कार्यों को लेकर पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री संजय पांडे की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन, घटिया निर्माण अथवा शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित संविदाकार से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक जवाबदेही तय की जाए। बड़ा सवाल—फोटो में पानी या गांव में पानी? सरकार की मंशा ग्रामीणों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की है, लेकिन यदि योजनाएं केवल कागजों और फोटो तक सीमित रह जाएं तो करोड़ों रुपये खर्च करने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को फोटो सेशन के बजाय वास्तविक जलापूर्ति की स्थिति का सत्यापन करना चाहिए। अब देखना यह है कि खटखरी की घटना से सबक लेते हुए पीएचई विभाग मऊगंज जिले में संचालित नल-जल योजनाओं का तकनीकी ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराता है या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी। ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे1
- छतरपुर जैसी कार्रवाई की मांग, सरपंच के लेटर पर जांच की गुहार छतरपुर में शराब दुकान पर हुई कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सतना जिले के बेला और केमार के ग्रामीणों ने मांग की है कि यातायात प्रभारी द्वारा छतरपुर की तर्ज पर यहां भी पीने वालों, पिलाने वालों और दुकान के सामने बैठकर पीने वालों पर वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि केमार में शराब दुकान अवैध रूप से संचालित है। सरपंच द्वारा आबकारी विभाग और कलेक्टर को दिए गए लेटर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसकी जांच होनी चाहिए। *छतरपुर जैसी कार्रवाई की मांग, सरपंच के लेटर पर जांच की गुहार* छतरपुर में शराब दुकान पर हुई कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सतना जिले के बेला और केमार के ग्रामीणों ने मांग की है कि यातायात प्रभारी द्वारा छतरपुर की तर्ज पर यहां भी पीने वालों, पिलाने वालों और दुकान के सामने बैठकर पीने वालों पर वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि केमार में शराब दुकान अवैध रूप से संचालित है। सरपंच द्वारा आबकारी विभाग और कलेक्टर को दिए गए लेटर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसकी जांच होनी चाहिए।1
- भारत इंटरनेशनल स्कूल में दोहरे उत्सव की धूम: गणेश पूजा के साथ मनाया गया हिंदी दिवस रामपुर बघेलान। स्थानीय भारत इंटरनेशनल स्कूल में आज गणेश चतुर्थी एवं हिंदी दिवस के पावन अवसर पर एक भव्य और गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दोहरे उत्सव को लेकर स्कूल परिसर में भारी उत्साह देखा गया, जहां बच्चों के भीतर अध्यात्म, कला और अपनी संस्कृति के प्रति चेतना जगाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के संचालक श्री सुनील सोनी एवं श्रीमती पद्मा सोनी ने भगवान श्री गणेश जी की मूर्ति की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस विशेष अवसर पर संस्था संचालक श्री सुनील सोनी जी ने बच्चों को संबोधित करते हुए हिंदी दिवस और मातृभाषा के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा के प्रति सदैव आदर और सम्मान की भावना रखनी चाहिए, क्योंकि भाषा ही हमें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़कर रखती है। वहीं, स्कूल के प्राचार्य श्री मनीष तिवारी जी ने भी भगवान गणेश जी से बच्चों के लिए अच्छे संस्कार, बुद्धि और विवेक की कामना की। उत्सव को और रंगीन बनाने के लिए स्कूल में हिंदी लेखन, फैंसी ड्रेस और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने अपनी कला, वेशभूषा और भाषा कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस मौके पर विद्यालय का समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।3
- Post by Anil yadav1
- कल्पना मिश्रा की मौत के 12वें दिन भी पिता का धरना जारी, डॉक्टरों पर FIR की मांग को लेकर जल सत्याग्रह शुरू, रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर चल रहा धरना 12वें दिन भी जारी है। कल्पना मिश्रा के पिता लगातार धरना स्थल पर बैठे हुए हैं। अब डॉक्टरों पर FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर जल सत्याग्रह की शुरुआत भी हो गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिलहाल यह सांकेतिक जल सत्याग्रह है, लेकिन अगर जल्द ही FIR दर्ज नहीं की गई तो इसे निरंतर जारी किया जाएगा।1
- गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल मनगवां के वार्ड क्रमांक 2 स्थित मौनी बाबा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्षद शमा परवीन हाफिज मोहम्मद अली के प्रयासों से पेयजल व्यवस्था की गई। नगर पालिका अधिकारी के आदेश पर पहले हैंडपंप लगवाया गया और 13 सितंबर 2026 को उसमें कमर्शियल पंप डलवाकर श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी की सुविधा सुनिश्चित की गई। वरिष्ठ समाजसेवी हाफिज कारी मोहम्मद अली साहब सहित स्थानीय नागरिकों ने इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की। यह कार्य मनगवां की हिंदू-मुस्लिम एकता, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल है।1
- 🏆 एशिया की सरताज बनीं भारत की बेटियां भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए विमेंस टी20 एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। 💥 *बड़ी खबर*💥 *🏆 एशिया की सरताज बनीं भारत की बेटियां!* भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए विमेंस टी20 एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। । दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए डिफेंडिंग चैंपियन श्रीलंका को 72 रनों से करारी शिकस्त दी और 8वीं बार एशिया कप की चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में 183/5 का मजबूत स्कोर खड़ा किया था जिसके जवाब में पूरी श्रीलंकाई टीम 19.4 ओवरों में महज 111 रनों पर ढेर हो गई।1
- प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत श्रमिकों का पंजीयन अभियान ग्राम पंचायतों में असंगठित क्षेत्र के पात्र श्रमिकों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना यानी PM-SYM से जोड़ने के लिए पंजीयन अभियान चलाया जा रहा है। निर्देश के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर पर CSC VLE द्वारा पात्र श्रमिकों का ऑनलाइन पंजीयन कराया जाएगा। पंचायत सचिव और GRS को श्रमिकों की सूची उपलब्ध कराने तथा योजना के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं के पंजीयन को भी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही गई है। अभियान के तहत प्रतिदिन लगभग 50 से 100 पात्र हितग्राहियों का पंजीयन कराने और इसकी जानकारी संबंधित ग्रुप में साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस योजना के लिए 18 से 40 वर्ष की आयु के असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जैसे कृषि श्रमिक, निर्माण श्रमिक, घरेलू कामगार और स्ट्रीट वेंडर आदि पात्र हो सकते हैं। पंजीयन के लिए ई-श्रम कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और मोबाइल नंबर जैसे दस्तावेज आवश्यक बताए गए हैं। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ₹5,000 प्रतिमाह तक की पेंशन का प्रावधान है, जो योजना के नियमों और अंशदान के अनुसार देय होती है। प्रशासन की ओर से पात्र श्रमिकों से अपील की गई है कि वे योजना की पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेकर अपने नजदीकी CSC केंद्र या ग्राम पंचायत में संपर्क करें और पात्र होने पर पंजीयन कराएं। ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे1