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शिक्षक 10 मिनट लेट होकर पहुंचा तो अभिवावकों ने शिक्षक को परिसर में जाने से रोका... शिक्षक 10 मिनट लेट होकर पहुंचा तो अभिवावकों ने शिक्षक को परिसर में जाने से रोका...
Tatkal News Bihar 24
शिक्षक 10 मिनट लेट होकर पहुंचा तो अभिवावकों ने शिक्षक को परिसर में जाने से रोका... शिक्षक 10 मिनट लेट होकर पहुंचा तो अभिवावकों ने शिक्षक को परिसर में जाने से रोका...
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- बक्सर में सीआरपीएफ जवानों की नई पहल: रिटायर्ड वीरों का होगा भव्य स्वागत, स्टेशन से घर तक सम्मान यात्रा बक्सर। देश की सुरक्षा में सालों तक सरहदों और दुर्गम इलाकों में तैनात रहने वाले जवानों के सम्मान में बक्सर के सीआरपीएफ परिवार ने एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल शुरू की है। अब जिले के जो भी जवान सेवा से सेवानिवृत्त होकर अपने गांव लौटेंगे, उनका स्टेशन पर भव्य स्वागत किया जाएगा और ढोल-नगाड़ों के साथ सम्मानपूर्वक उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य रिटायर्ड जवानों को सामाजिक सम्मान दिलाना और उनके त्याग व सेवा को पहचान दिलाना है। इस नई परंपरा की जानकारी देते हुए बेचनपुरवा निवासी सीआरपीएफ जवान लाल साहब ने बताया कि जिले के सभी जवानों ने मिलकर एक ग्रुप बनाया है, जिसमें वे हर महीने अपने वेतन से कुछ राशि जमा करते हैं। पहले इस फंड से शहीद परिवारों की मदद की जाती थी, लेकिन अब जवानों ने तय किया है कि रिटायर होकर लौटने वाले साथियों का भी सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जब हमारा जवान देश की सेवा करके घर लौटता है, तो उसे एक सम्मान भरी जिंदगी मिलनी चाहिए। समाज को यह पता चलना चाहिए कि यह वही व्यक्ति है जिसने वर्षों तक देश की सुरक्षा की है।” इसी क्रम में बक्सर स्टेशन पर सेवानिवृत्त सीआरपीएफ जवान सुदर्शन ठाकुर का भव्य स्वागत किया गया। ग्राम गंगौली, पोस्ट सेमरी (जिला बक्सर) निवासी ठाकुर ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में 35 वर्षों से अधिक समय तक सेवा दी। उन्होंने 01 मई 1991 को सीआरपीएफ जॉइन किया था और अपने कार्यकाल में देश के कई संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में तैनात रहे। उनकी अंतिम पोस्टिंग 36वीं बटालियन, ददम सर्कल, जिला तिरप (अरुणाचल प्रदेश) में थी, जहां उन्होंने पूरी निष्ठा, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता के साथ अपनी जिम्मेदारी को निभाया।4
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- कोतवाली में अगर मीडिया कर्मी को कोई जानकारी लेना है तो अपनी योग्यता बतानी पड़ेगी। बिल्थरारोड (बलिया): पत्रकार द्वारा पुलिस व्यवहार को लेकर शिकायत, जांच की प्रतीक्षा उभांव थाना क्षेत्र से पुलिस-मीडिया संवाद को लेकर एक प्रकरण संज्ञान में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार द्वारा एक घटना के संबंध में जानकारी हेतु उभांव थाने पर तैनात उपनिरीक्षक से दूरभाष पर संपर्क किया गया था। आरोप है कि आवश्यक तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने के स्थान पर संबंधित पुलिसकर्मी द्वारा पत्रकार की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित प्रश्न किए गए। इस संबंध में पत्रकार द्वारा उच्चाधिकारियों को शिकायत प्रेषित किए जाने की बात कही जा रही है। शिकायत के बाद कथित रूप से थाने की ओर से एक कर्मचारी के माध्यम से फोन कर यह संदेश दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है कि “साहब मुकदमा भी करते हैं।” इस कथन को पत्रकार पक्ष ने दबाव की स्थिति के रूप में प्रस्तुत किया है। हालांकि, इस विषय में आधिकारिक स्तर पर अभी तक कोई लिखित स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है। प्रकरण के संबंध में उभांव थाना प्रभारी से पूछे जाने पर उन्होंने स्वयं को क्षेत्र में नवीन तैनाती बताया और संबंधित पत्रकार को व्यक्तिगत रूप से न पहचान पाने की बात कही। इस पर स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों के बीच यह प्रश्न उठ रहा है कि पुलिस-मीडिया संवाद की कोई औपचारिक व्यवस्था या अधिकृत सूची उपलब्ध है या नहीं। यदि ऐसी सूची उपलब्ध नहीं है, तो सूचना विभाग अथवा प्रशासनिक स्तर पर समन्वय स्थापित कर औपचारिक परिचय बैठक आयोजित किए जाने का सुझाव भी दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में संवाद संबंधी भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। बताया गया है कि प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी रसड़ा को सौंपी गई है। शिकायत के लगभग 72 घंटे पश्चात भी जांच की प्रगति को लेकर कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है। संबंधित पक्षों द्वारा निष्पक्ष जांच की अपेक्षा व्यक्त की गई है। प्रशासनिक दृष्टि से पुलिस एवं मीडिया दोनों की भूमिकाएं जनहित से जुड़ी हैं। ऐसे मामलों में स्पष्ट संवाद, निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन तथा पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक माना जाता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।3