गोबरा नवापारा में प्रशासन ने महानदी के दुलना घाट पर अवैध रेत खनन और परिवहन को रोकने के लिए शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई की। राजस्व और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने अवैध रेत परिवहन के लिए बनाए गए रपटा को जेसीबी मशीन की सहायता से ध्वस्त कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की है; दुलना महानदी में रेत का अवैध परिवहन लगातार जारी था और बार-बार की कार्रवाइयों के बावजूद रुकने का नाम नहीं ले रहा था। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, तहसीलदार विक्रांत सिंह राठौर के नेतृत्व में पटवारी और पुलिस जवानों की टीम मौके पर पहुंची और नदी किनारे अवैध रूप से निर्मित इस रपटा को गिरा दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और हाइवा के माध्यम से रेत का अवैध परिवहन धड़ल्ले से होता है, और प्रशासन की कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद फिर से रपटा बना लिया जाता है। इस स्थिति पर अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, साथ ही लगातार निगरानी रखने के लिए एक टीम गठित करने की बात भी कही गई है।
गोबरा नवापारा में प्रशासन ने महानदी के दुलना घाट पर अवैध रेत खनन और परिवहन को रोकने के लिए शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई की। राजस्व और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने अवैध रेत परिवहन के लिए बनाए गए रपटा को जेसीबी मशीन की सहायता से ध्वस्त कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की है; दुलना महानदी में रेत का अवैध परिवहन लगातार जारी था और बार-बार की कार्रवाइयों के बावजूद रुकने का नाम नहीं ले रहा था। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, तहसीलदार विक्रांत सिंह राठौर के नेतृत्व में पटवारी और पुलिस जवानों की टीम मौके पर पहुंची और नदी किनारे अवैध रूप से निर्मित इस रपटा को गिरा दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और हाइवा के माध्यम से रेत का अवैध परिवहन धड़ल्ले से होता है, और प्रशासन की कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद फिर से रपटा बना लिया जाता है। इस स्थिति पर अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, साथ ही लगातार निगरानी रखने के लिए एक टीम गठित करने की बात भी कही गई है।
- गोबरा नवापारा में प्रशासन ने महानदी के दुलना घाट पर अवैध रेत खनन और परिवहन को रोकने के लिए शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई की। राजस्व और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने अवैध रेत परिवहन के लिए बनाए गए रपटा को जेसीबी मशीन की सहायता से ध्वस्त कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की है; दुलना महानदी में रेत का अवैध परिवहन लगातार जारी था और बार-बार की कार्रवाइयों के बावजूद रुकने का नाम नहीं ले रहा था। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, तहसीलदार विक्रांत सिंह राठौर के नेतृत्व में पटवारी और पुलिस जवानों की टीम मौके पर पहुंची और नदी किनारे अवैध रूप से निर्मित इस रपटा को गिरा दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और हाइवा के माध्यम से रेत का अवैध परिवहन धड़ल्ले से होता है, और प्रशासन की कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद फिर से रपटा बना लिया जाता है। इस स्थिति पर अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, साथ ही लगातार निगरानी रखने के लिए एक टीम गठित करने की बात भी कही गई है।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, रायपुर जिले के मढ़ी गांव में स्थित गौरी गणेश इस्पात प्राइवेट लिमिटेड ने 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल में कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए फलदार, छायादार और फूलदार पौधों का रोपण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कंपनी के वरिष्ठ महाप्रबंधक शुभागेश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि पेड़ केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की भी नींव हैं। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाएं और उसकी उचित देखभाल करें। मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। उन्होंने यह भी बताया कि 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान लोगों को अपनी मां के सम्मान में पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने की प्रेरणा देता है। इस कार्यक्रम में चांडक जी, शरद राज मिश्रा, एस.के. महोबिया, अमित सिंह सहित कंपनी के कई अधिकारी, कर्मचारी, स्थानीय नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। इस विशेष पौधरोपण कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और एक हरित भविष्य का संदेश दिया गया।1
- दुर्ग पुलिस ने अवैध कोयला भंडारण और फर्जी बिलिंग के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए 15 टन से अधिक कोयला जब्त किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। संपत्ति संबंधी अपराधों और अवैध कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत, खुर्सीपार गेट पर विजय केसरवानी द्वारा भारी मात्रा में कोयले के अवैध भंडारण और बिक्री की सूचना मिली थी, जिस पर थाना खुर्सीपार पुलिस और एसीसीयू दुर्ग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। मौके पर दबिश के दौरान, मुख्य आरोपी विजय कुमार केसरवानी के कब्जे से लगभग 15.530 टन कोयला, जिसका मूल्य 3 लाख रुपये से अधिक बताया गया है, और व्यापार में प्रयुक्त कांटा-तराजू सहित अन्य अभिलेख बरामद किए गए। विजय ने खुद को वैध व्यापारी प्रदर्शित करने के लिए फर्जी जीएसटी बिल जैसे कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सूझबूझ, तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक जांच पद्धति का उपयोग करते हुए इन दस्तावेजों का गहन सत्यापन कराया। जांच के दौरान, प्रस्तुत सभी जीएसटी दस्तावेज, परिवहन अभिलेख और अन्य रिकॉर्ड फर्जी पाए गए, जिससे पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उपलब्ध कराने में राजकुमार मिश्रा और उसके सहयोगी सुनील शर्मा की सक्रिय भूमिका थी। वित्तीय लेनदेन, डिजिटल भुगतान माध्यमों और मोबाइल संचार के विश्लेषण से उनकी संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने इन दोनों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की। इस प्रकरण में कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें विजय कुमार केसरवानी, राजकुमार मिश्रा और सुनील शर्मा शामिल हैं। प्रकरण में बरामद कोक-कोयले के वास्तविक स्रोत, स्वामित्व और संभावित चोरी या अन्य आपराधिक गतिविधियों से संबंध की जांच अभी जारी है। दुर्ग पुलिस इस आर्थिक अपराध और संपत्ति संबंधी मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी विस्तृत पड़ताल कर रही है।4
- प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, तिल्दा नेवरा में 04 जून 2026 को पत्रकार दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य "पत्रकार सम्मान समारोह एवं परिचर्चा - वैश्विक शांति की आवश्यकता: मीडिया की भूमिका" कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों के महत्वपूर्ण योगदान का सम्मान करना, साथ ही समाज में शांति, नैतिकता और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में तिल्दा नेवरा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद नन्हे बच्चों ने एक आकर्षक स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। पूरे आयोजन का वातावरण आध्यात्मिकता, सम्मान और सामाजिक समरसता से परिपूर्ण रहा। मुख्य अतिथि मधुकर द्वेदी ने अपने संबोधन में पत्रकारिता को समाज और विश्व में शांति स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने पत्रकारों को "नारद मुनि" की उपाधि देते हुए कहा कि आदिकाल से ही सूचना और संवाद का समाज में विशेष महत्व रहा है। उन्होंने पत्रकारों से निष्पक्षता, संवेदनशीलता और सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल समाचारों का प्रसारण नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का कार्य भी करती है। इस अवसर पर प्रियंका कौशल ने पत्रकारों को समाज का सजग प्रहरी बताया और कहा कि वे अपने कर्तव्य को ईमानदारी तथा वफादारी से निभाकर समाज में जागरूकता व सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने पत्रकारों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें विशेष उपाधि से संबोधित किया। विशाल कौशल ने पत्रकारिता के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका उद्भव वर्ष 1826 में हुआ था और तब से यह लोकतंत्र व समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर निरंतर विकसित होती रही है, अपनी विश्वसनीयता और प्रभाव को मजबूत करती हुई। तिल्दा प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोती ज्ञान चंदानी, संरक्षक गौरीशंकर शैनी और छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ के अध्यक्ष गजेन्द्र रथ गर्व ने भी पत्रकारों के सम्मान में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने पत्रकारिता को न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के समान "समाचार पालिका" के रूप में चौथे स्तंभ की उपाधि दी, जो समाज को जागरूक और उत्तरदायी बनाती है। तिल्दा नेवरा की पार्षद रानी सौरभ जैन ने भी पत्रकारों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज की आवाज बनकर जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाते हैं। समारोह के समापन पर, उपस्थित सभी पत्रकारों को स्मृति चिन्ह के रूप में डायरी और पेन भेंट कर सम्मानित किया गया। इस पूरे आयोजन ने पत्रकारिता के महत्व, उसकी सामाजिक जिम्मेदारी और वैश्विक शांति के संदेश को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।4
- डोंडेरा के निवासियों ने अपने घरों के पीछे के नाले की लगातार गंदगी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नाला पूरी तरह साफ नहीं रहता और गंदा पड़ा रहता है, जिसके चलते डोंडेरा का सारा कचरा उनके नाले में आ जाता है। इस गंदगी के कारण बड़े पैमाने पर मच्छरों का प्रकोप पनप रहा है, जिससे उन्हें अपनी जान को खतरा महसूस हो रहा है। नागरिकों ने नगर निगम रिसाली डोंडेरा नगर पंचायत से इस समस्या का तत्काल समाधान करने और नाले की पूरी तरह सफाई कराने की मांग की है।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा में एक भयावह घटना सामने आई है, जहाँ आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित चौपाटी में एक झूले से गिरने के बाद एक 15 वर्षीय बच्चे की दुखद मौत हो गई। इस हादसे का लाइव वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।1
- आज, 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है, यह दिन हमें प्रकृति को सबसे बड़े उपहार के रूप में याद दिलाता है, जिसे बचाना हमारा परम कर्तव्य है। इस अवसर पर, स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ ने सभी छत्तीसगढ़वासियों से अपनी धरती को हरा-भरा, स्वच्छ और समृद्ध बनाए रखने की अपील की है। छत्तीसगढ़ अपनी वन संपदा का खजाना है, जहाँ घने जंगल, महानदी, शिवनाथ, इंद्रावती और सोन जैसी नदियाँ, बस्तर की पहाड़ियाँ और स्थानीय संस्कृति का प्रकृति से गहरा जुड़ाव है। हालांकि, वनों की कटाई, खनन गतिविधियों का असंतुलित विस्तार, प्लास्टिक प्रदूषण और जल स्रोतों का प्रदूषण राज्य की इस प्राकृतिक समृद्धि के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। वर्तमान में, राज्य में वन क्षेत्र लगातार दबाव में है, नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट और प्लास्टिक कचरा बढ़ता जा रहा है, जबकि गर्मी के मौसम में तापमान में वृद्धि और अनियमित वर्षा पर्यावरणीय असंतुलन का स्पष्ट संकेत देती है। बस्तर, सरगुजा और रायगढ़ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जैव विविधता खतरे में है। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ सरकार के हरित छत्तीसगढ़ अभियान, सामुदायिक वन प्रबंधन और जन-जागरण के प्रयास एक सकारात्मक दिशा की ओर इशारा करते हैं। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिनमें हर छत्तीसगढ़ी को कम से कम एक पेड़ लगाने और उसे संरक्षित करने का संकल्प लेना, साथ ही स्कूल, कॉलेज और गाँवों में सामूहिक वृक्षारोपण अभियान चलाना शामिल है। प्लास्टिक प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए थर्माकोल, सिंगल यूज़ प्लास्टिक और पॉलीथीन का प्रयोग कम करके कपड़े के थैले और बाँस की टोकरियों का उपयोग बढ़ाने की बात कही गई है। जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, नदियों की सफाई और तालाबों के पुनरुद्धार पर जोर दिया गया है। सतत विकास की दिशा में खनन और औद्योगिक विकास को पर्यावरण अनुकूल बनाने तथा वन्य जीवों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों को भागीदार बनाने का आह्वान किया गया है। इसके अलावा, बच्चों को पर्यावरण शिक्षा देकर और सोशल मीडिया पर #हराभाराछत्तीसगढ़ जैसे अभियान चलाकर जागरूकता फैलाने की भी बात कही गई है। अपने संदेश में, स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ ने कहा है कि प्रकृति हमें माफ़ नहीं करती बल्कि जवाब देती है; यदि हम आज पेड़ों को काटेंगे, नदियों को गंदा करेंगे और जंगलों को नष्ट करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को सूखे, बाढ़ और प्रदूषण का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने विभिन्न वर्गों से अपील की है: हर घर से शुरुआत करते हुए अपने आसपास एक छोटा बगीचा बनाएँ; युवाओं को भविष्य का रक्षक मानते हुए पर्यावरण को अपना करियर और मिशन बनाने का आग्रह किया गया है; महिलाओं और किसानों को धरती माँ के सबसे करीब बताते हुए जैविक खेती अपनाने और वृक्ष संरक्षण करने की सलाह दी गई है। सरकार और प्रशासन से अपील की गई है कि वे विकास की राह में पर्यावरण को कभी पीछे न छोड़ें। एक स्वच्छ, हरा-भरा और समृद्ध छत्तीसगढ़ हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। आज विश्व पर्यावरण दिवस पर यह संकल्प लेने का आह्वान किया गया है कि “मैं छत्तीसगढ़ की हरियाली बचाऊंगा/बचाऊंगी।” जय जोहर! जय छत्तीसगढ़! हरित छत्तीसगढ़, स्वच्छ छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़!1
- स्थानीय निवासियों को नल में पानी न आने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि यह समस्या घर के कनेक्शन में खराबी के कारण उत्पन्न हुई है। इस संबंध में नगर निगम, निसली, डौंकेरा और जिला पंचायत को अवगत कराया गया है।1