ऊना के कैफे में अचानक भड़क उठी आग, लाखों रुपए का हुआ नुकसान, दमकल विभाग ने किया आग पर काबू जिला मुख्यालय के हमीरपुर रोड स्थित एक कैफे में शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे अचानक आग भड़क उठी। जानकारी के अनुसार आग कैफे के रसोई घर में लगी, जिसने कुछ ही समय में विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान शॉर्ट सर्किट या गैस लीक की ओर इशारा कर रहे हैं। घटना के समय कैफे के साथ ही परिसर में स्थित जिम में कई युवा प्रशिक्षण के लिए पहुंचे हुए थे। जैसे ही आग की लपटें और धुआं दिखाई दिया, वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण प्रयास सफल नहीं हो सके। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया। अतिरिक्त दमकल अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि विभाग को सुबह करीब 6:40 बजे सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। उन्होंने बताया कि कैफे की रसोई पूरी तरह से जलकर राख हो गई, जबकि बाकी हिस्से को सुरक्षित बचा लिया गया। इस आगजनी की घटना में करीब 4 से 5 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ। फिलहाल दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच में जुटे हुए हैं।
ऊना के कैफे में अचानक भड़क उठी आग, लाखों रुपए का हुआ नुकसान, दमकल विभाग ने किया आग पर काबू जिला मुख्यालय के हमीरपुर रोड स्थित एक कैफे में शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे अचानक आग भड़क उठी। जानकारी के अनुसार आग कैफे के रसोई घर में लगी, जिसने कुछ ही समय में विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान शॉर्ट सर्किट या गैस लीक की ओर इशारा कर रहे हैं। घटना के समय कैफे के साथ ही परिसर में स्थित जिम में कई युवा प्रशिक्षण के लिए पहुंचे हुए थे। जैसे ही आग की लपटें और धुआं दिखाई दिया, वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास
किया, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण प्रयास सफल नहीं हो सके। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया। अतिरिक्त दमकल अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि विभाग को सुबह करीब 6:40 बजे सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। उन्होंने बताया कि कैफे की रसोई पूरी तरह से जलकर राख हो गई, जबकि बाकी हिस्से को सुरक्षित बचा लिया गया। इस आगजनी की घटना में करीब 4 से 5 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ। फिलहाल दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच में जुटे हुए हैं।
- जिला मुख्यालय के हमीरपुर रोड स्थित एक कैफे में शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे अचानक आग भड़क उठी। जानकारी के अनुसार आग कैफे के रसोई घर में लगी, जिसने कुछ ही समय में विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान शॉर्ट सर्किट या गैस लीक की ओर इशारा कर रहे हैं। घटना के समय कैफे के साथ ही परिसर में स्थित जिम में कई युवा प्रशिक्षण के लिए पहुंचे हुए थे। जैसे ही आग की लपटें और धुआं दिखाई दिया, वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण प्रयास सफल नहीं हो सके। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया। अतिरिक्त दमकल अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि विभाग को सुबह करीब 6:40 बजे सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। उन्होंने बताया कि कैफे की रसोई पूरी तरह से जलकर राख हो गई, जबकि बाकी हिस्से को सुरक्षित बचा लिया गया। इस आगजनी की घटना में करीब 4 से 5 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ। फिलहाल दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच में जुटे हुए हैं।2
- सुजानपुर हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए प्रदेश में “द्वेष और बदले की राजनीति” चरम पर होने का आरोप लगाया है। हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा के भाई और चाचा की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए राणा ने कहा कि यह कार्रवाई कानून के तहत नहीं, बल्कि राजनीतिक दुर्भावना के तहत की गई है। आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने सत्ता को “निजी हथियार” बना लिया है और पुलिस तंत्र का उपयोग केवल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही चलाई जा रही है, जहां सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आशीष शर्मा के परिवार के खिलाफ की गई कार्रवाई साफ तौर पर बदले की भावना से प्रेरित है और यह संदेश देने की कोशिश है कि जो भी मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलेगा, उसे इसी तरह निशाना बनाया जाएगा। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार अपराधियों और माफियाओं के प्रति नरम रवैया अपनाए हुए है, जबकि विपक्षी नेताओं पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे “दोहरी नीति” करार देते हुए कहा कि इससे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। राणा ने कहा कि विधानसभा में उठाए गए सवालों से बौखलाकर मुख्यमंत्री इस तरह के कदम उठा रहे हैं और अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए सत्ता का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का भी आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पत्नी के चुनाव के दौरान सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया। राणा के अनुसार, आचार संहिता के समय 66 महिला मंडलों को सरकारी बैंक के माध्यम से 50-50 हजार रुपये वितरित किए गए, जो चुनावी नियमों का खुला उल्लंघन है। कड़े शब्दों में हमला जारी रखते हुए राजेंद्र राणा ने कहा कि ऐसा मुख्यमंत्री प्रदेश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, जो व्यक्तिगत द्वेष से ग्रसित होकर केवल अपने और अपने परिवार के हितों तक सीमित रह गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इस तरह की राजनीति से त्रस्त है और बदलाव की प्रतीक्षा कर रही है। राजेंद्र राणा ने चेतावनी दी कि सत्ता के बल पर लोगों को डराने और दबाने की कोशिश ज्यादा दिन नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगी।1
- मजदूर युनियनों ने निरस्त किए गए श्रम कानूनों को बहाल करने को लेकर आवाज बुलंद की है। इन युनियनों का कहना है कि श्रम कानूनों को बहाल करने को करने को लेकर कई बार मांग उठाई गई है, लेकिन केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। जिसके चलते मजदूर वर्ग में केंद्र सरकार के खिलाफ रोष पनप रहा है। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) से संबद्ध यूनियन ने रेलवे टनल साइट महावाली में एनसीआर नोएडा, फरीदाबाद, पलवल, गंगुवाल के संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में जोरदार रौष रैली निकाली। रैली के दौरान मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। रैली में मुख्य रूप से मांग उठाई गई कि निरस्त किए गए 29 श्रम कानूनों को बहाल कर उन्हें सख्ती से लागू किया जाए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम कोड मजदूरों के हित में नहीं हैं, बल्कि बड़ी-बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे मजदूर वर्ग की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इसके अलावा रैली में यह भी मांग की गई कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारें तुरंत हस्तक्षेप करें और मजदूरों का न्यूनतम वेतन 26000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए, ताकि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिल सके। रैली को कांग्रेस नेता विजय शर्मा, सीटू के जिला सचिव बलबीर सिंह, पॉल, प्रधान अमृतलाल, सचिव प्रदीप ठाकुर सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने एकजुट होकर मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया।1
- बैजनाथ: सिया हत्या कांड को लेकर न्याय की गुहार । लाइव आशुतोष1
- Post by Munishkoundal1
- Post by Himachal Update 24 News1
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- हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलन अब संगठित रूप लेता जा रहा है। वीरवार को जिला मुख्यालय ऊना के विश्राम गृह में आयोजित पत्रकारवार्ता में “स्टेट कोलेशन फॉर लेजिस्लेशन ऑफ शेड्यूल कास्ट्स, शेड्यूल ट्राइब्स सब प्लान हिमाचल प्रदेश” के बैनर तले जुड़े सामाजिक नेताओं ने अपनी रणनीति स्पष्ट की। गठबंधन से जुड़े बीपी चंद्रा और सुखदेव विश्वप्रेमी इस मौके पर स्थानीय नेताओं के साथ पहुंचे। कार्यक्रम में सुखदेव विश्वप्रेमी ने कहा कि प्रदेश सरकार को चुनावी वादों के अनुरूप जल्द से जल्द इस कानून को लागू करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई, तो आगामी विधानसभा सत्र के दौरान राज्य भर में रोष प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि देश के पांच राज्यों में इस तरह के कानून पहले ही लागू किए जा चुके हैं, जिससे अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विकास को गति मिली है। हिमाचल में भी इसी तरह के कानून की लंबे समय से मांग की जा रही है। गठबंधन के अनुसार, 3 सितंबर 2024 से लेकर जनवरी 2026 तक इस मुद्दे पर विभिन्न स्तरों पर कई बैठकें और संवाद आयोजित किए जा चुके हैं। करीब 30 संस्थाओं और संगठनों को साथ लेकर यह अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। सामाजिक न्याय यात्रा चंबा जिला के डलहौजी क्षेत्र के तेलका और चुराह से शुरू होकर कांगड़ा, ज्वाली, नूरपुर, नगरोटा, कुल्लू, सोलन होते हुए ऊना पहुंची है, और आगे भी जारी रहेगी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और वंचित वर्गों को एकजुट करना है। गठबंधन के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर इस कानून को लागू करने की मांग उठाई है। दिसंबर 2024 के शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। इसके अलावा वर्ष 2025 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय नेताओं से भी इस विषय पर चर्चा की गई। अगस्त 2025 में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर हिमाचल में विशेष कानून बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। नवंबर 2025 में बिलासपुर में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ राज्य स्तरीय परामर्श बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सभी दलों ने इस कानून के समर्थन में सहमति जताई। उन्होंने कहा कि हाल ही में 18 जनवरी 2026 को शिमला के राजीव भवन में आयोजित बैठक में भी इस मुद्दे को लेकर रणनीति बनाई गई। बैठक में तय किया गया कि आगामी बजट सत्र के दौरान सरकार पर दबाव बनाते हुए इस कानून की प्रक्रिया शुरू करवाने की मांग को और तेज किया जाएगा। गठबंधन ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय नेतृत्व से आग्रह किया है कि चुनावी घोषणा पत्र के अनुरूप इस कानून को शीघ्र लागू किया जाए, ताकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के सामाजिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित किया जा सके।1