डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा क्षेत्र के गांगी गांव के 18 वर्षीय छात्र सुमित बंजारा की गुजरात के वडोदरा शहर में मात्र एक लाख रुपये की उधारी के विवाद में चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। दिल दहला देने वाली इस वारदात को हमलावरों ने पिता की आंखों के सामने ही अंजाम दिया, जबकि बीच-बचाव करने गया बड़ा भाई भी इस हमले में घायल हो गया। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद गांगी गांव में गहरा शोक और भारी आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, गांगी निवासी विक्रम भाई बंजारा पिछले कई वर्षों से वडोदरा में स्क्रैप का कारोबार करते हैं। उनका छोटा बेटा सुमित गांव में रहकर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रतनपुरा में कक्षा 11 में पढ़ाई कर रहा था। सुमित मात्र चार दिन पहले ही अपने पिता से मिलने वडोदरा गया था और अगले दिन उसे वापस गांव लौटना था। सोमवार रात वीआईपी रोड स्थित लक्ष्मीनगर निवासी मेघराज उर्फ रमेश बंजारा के साथ ₹1 लाख के लेनदेन को लेकर बैठक चल रही थी। बैठक के दौरान मेघराज ने पैसे देने से मना कर दिया, जिससे विवाद बढ़ गया। इसके बाद मेघराज अपने 10 से 15 साथियों के साथ पहुंचा और विक्रम भाई से मारपीट शुरू कर दी। पिता को बचाने के लिए जब सुमित, शैलेश और त्रिजेश आगे आए, तो आरोपी धर्मेश, विनोद, अजय और पंकज उन्हें खींचकर पास के मोबाइल टावर के पास ले गए। वहां आरोपियों ने शैलेश की पीठ पर चाकू से हमला किया, जबकि अजय ने सुमित के चेहरे पर और धर्मेश ने उसकी पीठ पर ताबड़तोड़ चाकू मारे। गंभीर रूप से घायल सुमित को इलाज के लिए एसएसजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। मंगलवार शाम जब सुमित का शव गांगी गांव पहुंचा, तो भड़के ग्रामीण और परिजन शव को मुख्य आरोपी मेघराज के घर ले जाकर विरोध जताने की जिद पर अड़ गए। सूचना मिलते ही धंबोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सूझबूझ से समझाइश कर तनावपूर्ण स्थिति को संभाला। बुधवार को दरियाटी में समाज की बैठक आयोजित कर आरोपियों को कड़ी सजा और सामाजिक स्तर पर दंडित करने की मांग की गई, जिसके बाद सुमित का अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के पिता ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। वहीं, गुजरात की बापोद पुलिस ने 9 आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर इनमें से सात को हिरासत में ले लिया है।
डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा क्षेत्र के गांगी गांव के 18 वर्षीय छात्र सुमित बंजारा की गुजरात के वडोदरा शहर में मात्र एक लाख रुपये की उधारी के विवाद में चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। दिल दहला देने वाली इस वारदात को हमलावरों ने पिता की आंखों के सामने ही अंजाम दिया, जबकि बीच-बचाव करने गया बड़ा भाई भी इस हमले में घायल हो गया। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद गांगी गांव में गहरा शोक और भारी आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, गांगी निवासी विक्रम भाई बंजारा पिछले कई वर्षों से वडोदरा में स्क्रैप का कारोबार करते हैं। उनका छोटा बेटा सुमित गांव में रहकर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रतनपुरा में कक्षा 11 में पढ़ाई कर रहा था। सुमित मात्र चार दिन पहले ही अपने पिता से मिलने वडोदरा गया था और अगले दिन उसे वापस गांव लौटना था। सोमवार रात वीआईपी रोड स्थित लक्ष्मीनगर निवासी मेघराज उर्फ रमेश बंजारा के साथ ₹1 लाख के लेनदेन को लेकर बैठक चल रही थी। बैठक के दौरान मेघराज ने पैसे देने से मना कर दिया, जिससे विवाद बढ़ गया। इसके बाद मेघराज अपने 10 से 15 साथियों के साथ पहुंचा और विक्रम भाई से
मारपीट शुरू कर दी। पिता को बचाने के लिए जब सुमित, शैलेश और त्रिजेश आगे आए, तो आरोपी धर्मेश, विनोद, अजय और पंकज उन्हें खींचकर पास के मोबाइल टावर के पास ले गए। वहां आरोपियों ने शैलेश की पीठ पर चाकू से हमला किया, जबकि अजय ने सुमित के चेहरे पर और धर्मेश ने उसकी पीठ पर ताबड़तोड़ चाकू मारे। गंभीर रूप से घायल सुमित को इलाज के लिए एसएसजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। मंगलवार शाम जब सुमित का शव गांगी गांव पहुंचा, तो भड़के ग्रामीण और परिजन शव को मुख्य आरोपी मेघराज के घर ले जाकर विरोध जताने की जिद पर अड़ गए। सूचना मिलते ही धंबोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सूझबूझ से समझाइश कर तनावपूर्ण स्थिति को संभाला। बुधवार को दरियाटी में समाज की बैठक आयोजित कर आरोपियों को कड़ी सजा और सामाजिक स्तर पर दंडित करने की मांग की गई, जिसके बाद सुमित का अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के पिता ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। वहीं, गुजरात की बापोद पुलिस ने 9 आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर इनमें से सात को हिरासत में ले लिया है।
- सीमलवाड़ा में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा (बीपीएमएम) ने अलग 'भीलप्रदेश राज्य' के गठन सहित आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और भाषा संरक्षण को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम 42 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन सीमलवाड़ा उपखंड कार्यालय में रीडर अनिल रोत के माध्यम से प्रेषित किया गया। संगठन का कहना है कि आजादी के बाद भील सांस्कृतिक क्षेत्र चार राज्यों में विभाजित हो गया, जिससे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, विकास और संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। इसी को लेकर संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल सीमावर्ती क्षेत्रों तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली को मिलाकर अलग भीलप्रदेश राज्य के गठन की मांग की गई है। ज्ञापन में आदिवासी क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समुदाय के अधिकारों को प्रभावी बनाने और अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान की पांचवीं अनुसूची और अनुच्छेद-244 की मूल भावना के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। इसके साथ ही, मोर्चा ने 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने, जेलों में बंद आदिवासी कैदियों के मामलों की समीक्षा कर राहत देने, आदिवासी धर्म के लिए पृथक धर्म कॉलम कोड पुनः लागू करने और भीली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई है। जल परियोजनाओं को लेकर 'नर्मदा-पावागढ़ भीलप्रदेश पेयजल परियोजना' को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने और जयसमंद, माही एवं जाखम बांध के पानी का प्राथमिक उपयोग स्थानीय आदिवासियों के लिए सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, अरावली, विंध्याचल, सातपुड़ा और सह्याद्री पर्वतमालाओं में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण करने, आदिवासियों के लिए भूमि बैंक बनाने, भूमिहीन परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने, पुलिस एवं प्रशासन में स्थानीय आदिवासियों को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने, भील रेजिमेंट के गठन और अनुसूचित क्षेत्रों में शराबबंदी लागू करने की मांग की गई है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं में भूमि गंवाने वाले परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा बेणेश्वर, पावागढ़, अंबाजी और देवमोगरा जैसे आस्था स्थलों को बाहरी अतिक्रमण से बचाने के लिए विशेष नीति बनाने की भी मांग की गई है। इस दौरान कमलेश डेंडोर, शांतिलाल रोत, रणछोड़ कोटेड सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।3
- राजस्थान शिक्षक संघ (एसटीएफआई) जिला कमेटी डूंगरपुर ने जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ के नेतृत्व में शिक्षकों के स्थानांतरण में व्याप्त अव्यवस्थाओं और अमानवीय दृष्टिकोण के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया। आक्रोशित शिक्षकों ने इस दौरान शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर व मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सभी अन्यायपूर्ण और बदले की भावना से किए गए तबादलों को तत्काल निरस्त करने की मांग की। शिक्षक नेताओं का आरोप है कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया ने प्रदेश के शैक्षिक वातावरण को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे सत्र की शुरुआत में ही नामांकन अभियान और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत कुमार खराड़ी और जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के साथ-साथ असाध्य रोग से पीड़ित, विधवा और दिव्यांग शिक्षकों तक को दूर-दराज के क्षेत्रों में भेजकर मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। स्थिति यह बन गई है कि शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपने तबादले रुकवाने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला मंत्री धनराज खराड़ी और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य देवीलाल गौड ने सरकार से इन विसंगतिपूर्ण तबादलों को तुरंत रद्द करने और पूर्व वादे के अनुसार सभी संवर्गों के लिए एक पारदर्शी, न्यायसंगत व स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। वहीं, संघर्ष समिति के संयोजक जीवन लाल बरांडा और जिला उपाध्यक्ष नारायण लाल कोटेड ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो शिक्षक संगठन प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और शिक्षा विभाग की होगी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांतिलाल खराड़ी, रामलाल भगोरा, सतीश अहारी, केशव कोटेड, मानशंकर खराड़ी, गोपाल पाटीदार, नारायण लाल डामोर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।1
- राजस्थान के डूंगरपुर में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने सरकार के सामने एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की सबसे बड़ी मांग उठाते हुए बड़ा अल्टीमेटम दिया है। मोर्चा का साफ तौर पर कहना है कि भील आदिवासियों की संस्कृति, न्याय और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अब अलग राज्य बनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इसके साथ ही, देश की सुरक्षा के लिए राजपूत रेजिमेंट की तर्ज पर 'भील रेजिमेंट' का गठन करने की मांग भी बेहद पुरजोर तरीके से उठाई गई है। मोर्चा ने वागड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें सामने रखी हैं। इसमें पहली मांग है कि पवित्र बेणेश्वर धाम टापू की 80 फीसदी ज़मीन को आदिवासियों के नाम पर दर्ज किया जाए। इसके अलावा, अनास नदी को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों पर तत्काल ताला लगाने की मांग की गई है, और बांसवाड़ा के भूकिया-जगपुरा में सोने की खदानों की होने वाली नीलामी को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने के लिए कहा गया है। इस आंदोलन के तहत 9 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और भीली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने जैसी प्रमुख मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं। इस विस्तृत मांग पत्र के सामने आने के बाद से क्षेत्र की सियासत में हलचल काफी तेज हो गई है।2
- राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के डूंगरपुर जिले के दौरे के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पायलट ने अपने दौरे की शुरुआत बेणेश्वर धाम में श्री हरि मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ की, जहां उन्होंने बेणेश्वर पीठाधीश्वर महंत अच्युतानंद महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद साबला पहुंचने पर पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसमें सिसोदिया ने आसमान में ड्रोन उड़ाकर पुष्प वर्षा की और पायलट को पगड़ी पहनाकर व तलवार भेंट कर सम्मानित किया। साबला में सिसोदिया कार्यालय और आसपुर सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ढाई साल के कार्यकाल में राज्य सरकार ने जनता का विश्वास पूरी तरह खो दिया है और डबल इंजन में केवल धुआं बचा है। पायलट ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि चंपत मंदिर के चढ़ावे को चपत लगा गया और सरकार इस पर लीपापोती करने में जुटी है। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और सरकार पंचायत चुनाव कराने में आनाकानी कर रही है, लेकिन यदि आज चुनाव करा दिए जाएं तो कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। सभा स्थल पर मौजूद महिलाओं से बातचीत के दौरान महिलाओं ने रोजगार न मिलने, महंगाई की मार, पानी-बिजली कटौती और गैस सिलेंडर की बढ़ती दरों की शिकायत की, जिससे उन्हें जंगलों से लकड़ी लाकर खाना पकाना पड़ रहा है। पायलट ने कहा कि सरकार गरीबों के रोजगार पर संकट पैदा करने और नरेगा को पूरी तरह बंद करने की मंशा से एक अलग योजना लेकर आई है। इस दौरान स्थानीय लोगों ने सोम कमला बांध का पानी सागवाड़ा न ले जाने की मांग रखी, वहीं कई दावेदारों ने गाड़ियों में कार्यकर्ताओं को लाकर पायलट के सामने अपनी दावेदारी का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, रघुवीर सिंह मीणा, प्रेम कुमार पाटीदार, जिलाध्यक्ष गणेश घोघरा, पूर्व जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, शंकर यादव और पूर्व विधायक पुजीलाल परमार सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भारी संख्या में उपस्थित रहे।1
- राजस्थान की सियासत से बड़ी खबर आ रही है, जहां कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने एक बार फिर मौजूदा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गणोड़ा के ऐतिहासिक और पवित्र बेणेश्वर धाम पहुंचे सचिन पायलट ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था पर जमकर निशाना साधा। सचिन पायलट ने सीधे तौर पर युवाओं के मुद्दों को उठाते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने पेपर लीक, चंदा चोरी, बढ़ते अपराध और बुनियादी ढांचे में हो रहे कथित घोटालों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। इसके साथ ही, पायलट ने सड़कों और पुलों के निर्माण में गंभीर धांधली होने का आरोप लगाते हुए सरकार से इन बुनियादी घोटालों पर जवाब मांगा है।1
- Raj Kumar ji rot.........................,............1
- भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने राजस्थान के सीमलवाड़ा उपखंड कार्यालय में जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत एक अलग 'भीलप्रदेश राज्य' के गठन की मांग उठाई है। इस प्रस्तावित राज्य में राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों और दादरा नगर हवेली को शामिल करने की मांग की गई है। मोर्चा का कहना है कि भील सांस्कृतिक क्षेत्र आजादी के बाद चार अलग-अलग राज्यों में बंट गया, जिससे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, विकास और अधिकारों को नुकसान पहुंचा है। ज्ञापन के जरिए भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने चारों राज्यों की विधानसभाओं से इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग की है। इसके अलावा, अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों को प्रशासन, शिक्षा और पुलिस व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व देने, विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने, भीली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और अलग भील रेजिमेंट का गठन करने की मांग भी उठाई गई है। मोर्चा ने नर्मदा-पावागढ़ पेयजल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने, आदिवासी क्षेत्रों में जल आरक्षण का प्रावधान करने, वन संरक्षण कानून-2023 को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू नहीं करने, भूमि बैंक बनाकर भूमिहीन आदिवासियों को जमीन उपलब्ध कराने और उनके धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान मोर्चा के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।2
- भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के संस्थापक और राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजकुमार रोत ने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के आदिवासी अधिकार सम्मेलन में भारत के मूल निवासियों के अधिकारों को लेकर बेहद प्रभावशाली भाषण दिया है। वैश्विक मंच से देश के करोड़ों आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करते हुए सांसद रोत ने भारत सरकार के उस पुराने और पारंपरिक दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें कहा जाता रहा है कि भारत में कोई विशिष्ट 'इंडिजिनस' (आदिवासी) समुदाय नहीं है। उन्होंने पुरजोर शब्दों में स्पष्ट किया कि भारत की अनुसूचित जनजातियां ही यहाँ की मूल निवासी हैं। 13 से 17 जुलाई तक चले इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में सांसद राजकुमार रोत ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 14 करोड़ आदिवासी आबादी निवास करती है, जो कुल 705 अलग-अलग आदिवासी समूहों में विभाजित है और जिन्हें संविधान के तहत 'अनुसूचित जनजाति' (ST) का दर्जा प्राप्त है। ऐतिहासिक और नस्लीय रूप से प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉयड, नेग्रिटो, द्रविड़ और मंगोलॉयड मूल से जुड़े इन समूहों को उन्होंने भारत के मूल स्वदेशी समुदाय होने का सबसे बड़ा प्रमाण बताया। अपने इस तर्क को कानूनी मजबूती देने के लिए सांसद रोत ने साल 2011 के प्रसिद्ध 'कैलाश बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने माना था कि अनुसूचित जनजातियां ही इस देश के मूल निवासियों की वंशज हैं। संबोधन के समापन पर बेहद भावुक और गर्वित नजर आए राजकुमार रोत ने गर्व के साथ बताया कि वह स्वयं भील आदिवासी समुदाय से आते हैं, जो राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र का सबसे बड़ा आदिवासी समूह है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भील समाज और देश के करोड़ों शोषित आदिवासी भाई-बहनों का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए एक परम सम्मान की बात है। उन्होंने अपनी बात को पारंपरिक संबोधन 'जोहार' के साथ समाप्त किया।1
- डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा क्षेत्र के गांगी गांव के 18 वर्षीय छात्र सुमित बंजारा की गुजरात के वडोदरा शहर में मात्र एक लाख रुपये की उधारी के विवाद में चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। दिल दहला देने वाली इस वारदात को हमलावरों ने पिता की आंखों के सामने ही अंजाम दिया, जबकि बीच-बचाव करने गया बड़ा भाई भी इस हमले में घायल हो गया। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद गांगी गांव में गहरा शोक और भारी आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, गांगी निवासी विक्रम भाई बंजारा पिछले कई वर्षों से वडोदरा में स्क्रैप का कारोबार करते हैं। उनका छोटा बेटा सुमित गांव में रहकर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रतनपुरा में कक्षा 11 में पढ़ाई कर रहा था। सुमित मात्र चार दिन पहले ही अपने पिता से मिलने वडोदरा गया था और अगले दिन उसे वापस गांव लौटना था। सोमवार रात वीआईपी रोड स्थित लक्ष्मीनगर निवासी मेघराज उर्फ रमेश बंजारा के साथ ₹1 लाख के लेनदेन को लेकर बैठक चल रही थी। बैठक के दौरान मेघराज ने पैसे देने से मना कर दिया, जिससे विवाद बढ़ गया। इसके बाद मेघराज अपने 10 से 15 साथियों के साथ पहुंचा और विक्रम भाई से मारपीट शुरू कर दी। पिता को बचाने के लिए जब सुमित, शैलेश और त्रिजेश आगे आए, तो आरोपी धर्मेश, विनोद, अजय और पंकज उन्हें खींचकर पास के मोबाइल टावर के पास ले गए। वहां आरोपियों ने शैलेश की पीठ पर चाकू से हमला किया, जबकि अजय ने सुमित के चेहरे पर और धर्मेश ने उसकी पीठ पर ताबड़तोड़ चाकू मारे। गंभीर रूप से घायल सुमित को इलाज के लिए एसएसजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। मंगलवार शाम जब सुमित का शव गांगी गांव पहुंचा, तो भड़के ग्रामीण और परिजन शव को मुख्य आरोपी मेघराज के घर ले जाकर विरोध जताने की जिद पर अड़ गए। सूचना मिलते ही धंबोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सूझबूझ से समझाइश कर तनावपूर्ण स्थिति को संभाला। बुधवार को दरियाटी में समाज की बैठक आयोजित कर आरोपियों को कड़ी सजा और सामाजिक स्तर पर दंडित करने की मांग की गई, जिसके बाद सुमित का अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के पिता ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। वहीं, गुजरात की बापोद पुलिस ने 9 आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर इनमें से सात को हिरासत में ले लिया है।2