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सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र स्थित मीतापुर में सोन नदी में तीन लड़कों के डूबने से हड़कंप मच गया है। यह घटना तब हुई जब लोग एक वैवाहिक कार्यक्रम से संबंधित ‘चौथी छुड़ाने’ के लिए नदी किनारे पहुंचे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इसी दौरान दो लड़के नदी में डूब गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास के दौरान नदी की तरफ दौड़ने वाला एक और लड़का भी डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी, सीओ सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। इस दौरान आक्रोशित स्थानीय लोगों की भी बड़ी भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। फ़िलहाल, राज्य आपदा राहत बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुंचकर डूबे हुए लड़कों के शवों की तलाश में जुटी हुई है।
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सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र स्थित मीतापुर में सोन नदी में तीन लड़कों के डूबने से हड़कंप मच गया है। यह घटना तब हुई जब लोग एक वैवाहिक कार्यक्रम से संबंधित ‘चौथी छुड़ाने’ के लिए नदी किनारे पहुंचे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इसी दौरान दो लड़के नदी में डूब गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास के दौरान नदी की तरफ दौड़ने वाला एक और लड़का भी डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी, सीओ सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। इस दौरान आक्रोशित स्थानीय लोगों की भी बड़ी भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। फ़िलहाल, राज्य आपदा राहत बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुंचकर डूबे हुए लड़कों के शवों की तलाश में जुटी हुई है।
More news from Sonbhadra and nearby areas
- सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र स्थित मीतापुर में सोन नदी में तीन लड़कों के डूबने से हड़कंप मच गया है। यह घटना तब हुई जब लोग एक वैवाहिक कार्यक्रम से संबंधित ‘चौथी छुड़ाने’ के लिए नदी किनारे पहुंचे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इसी दौरान दो लड़के नदी में डूब गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास के दौरान नदी की तरफ दौड़ने वाला एक और लड़का भी डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी, सीओ सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। इस दौरान आक्रोशित स्थानीय लोगों की भी बड़ी भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। फ़िलहाल, राज्य आपदा राहत बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुंचकर डूबे हुए लड़कों के शवों की तलाश में जुटी हुई है।4
- Post by Ravi1
- करगारा मितlपुर गाँव में शादी के बाद 'चौथु छुड़ाने' की रस्म के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। इस घटना में दो लड़के और एक लड़की नदी में डूब गए, जिससे तीनों की मौत हो गई।1
- सोनभद्र के जुड़वरिया ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने चकरोड की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर उनकी अनदेखी का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि दो साल से शिकायत के बाद भी उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की मांग है कि बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही इस रास्ते को दुरुस्त कराया जाए।1
- सोनभद्र में सोन नदी एक दर्दनाक हादसे की गवाह बनी, जहाँ शादी की पारंपरिक रस्म के तहत स्नान करने पहुँचे लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। नहाने के दौरान दो किशोर गहरे पानी में समा गए और उन्हें बचाने की कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके बाद वे लापता हो गए। इस घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जुट गई और हालात और बिगड़ गए। चोपन थाना क्षेत्र के मीतापुर ग्राम पंचायत स्थित सोन नदी में शादी के बाद होने वाली पारंपरिक स्नान की रस्म के दौरान परिवार के लोग नदी में उतरे थे। परिजनों के अनुसार, नहाते समय दो किशोर अचानक गहरे पानी की ओर चले गए और देखते ही देखते नदी में डूब गए। आसपास मौजूद महिलाओं और परिजनों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। मृतक के चाचा सुखनंदन ने भी इस दर्दनाक हादसे का विवरण दिया। जानकारी मिलते ही परिजन, ग्रामीण और आसपास के लोग बड़ी संख्या में नदी तट पर पहुँच गए, जिससे भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना पर पहुँची पुलिस टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों ने आरोप लगाया कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिससे मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इसी अफरा-तफरी के बीच जब लोग नदी के रास्ते बाहर निकलने लगे, तभी एक और युवक गहरे पानी में समा गया। इसके बाद लापता लोगों की संख्या बढ़कर तीन हो गई, जिससे मौके पर मौजूद लोगों की चिंता और बढ़ गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई। एडिशनल एसपी, पुलिस फोर्स, पीएसी के जवान और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचकर स्थिति की निगरानी में जुट गए। एनडीआरएफ को भी सूचना भेजी गई है और नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाकर स्थानीय गोताखोरों की सहायता से तीनों युवकों की तलाश की जा रही है। सोन नदी किनारे मातम और बेचैनी का माहौल है, जहाँ परिजनों की निगाहें राहत एवं बचाव दलों पर टिकी हैं। प्रशासन लापता युवकों को खोजने के लिए हरसंभव प्रयास करने का दावा कर रहा है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर शोक और तनाव का माहौल बना हुआ है।2
- सोनभद्र जिले की ओबरा नगर पंचायत के अधिकारियों पर फर्जी निस्तरण करने और शासन को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। यह मामला ओबरा नगर पंचायत के गुलाब तिराहा, गजराज वार्ड 3 से संबंधित है, जहां नागेंद्र पांडे नामक व्यक्ति द्वारा एक सार्वजनिक सड़क पर चैंबर का निर्माण किया गया है। आरोप है कि इस अवैध निर्माण पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अधिकारियों ने इस मामले में केवल ऊपरी तौर पर कार्रवाई करते हुए, चैंबर के ऊपर पत्तियां, गिट्टी और मिट्टी डालकर इसे फर्जी तरीके से निस्तारित कर दिया। यह कार्यवाही केवल कागजों पर दिखावे के लिए की गई प्रतीत होती है, जबकि मौके पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस पूरी घटना को नगर पंचायत अधिकारियों द्वारा जानबूझकर की गई लापरवाही और शासन को भ्रमित करने का प्रयास बताया जा रहा है।2
- जनपद चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बरबसपुर में सरकारी धन से हो रहे निर्माण कार्यों की हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ एक भवन के भीतर बड़े जोर-शोर से टाइल्स लगाने का काम चल रहा है, वहीं इसी भवन का बाहरी हिस्सा बेहद चिंताजनक स्थिति में है। भवन की बाहरी दीवार पर बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इतना ही नहीं, भवन के बाहर गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हुआ है, जो सरकारी दावों की पोल खोलता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ टाइल्स जैसी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है, वहीं बुनियादी सुरक्षा और साफ-सफाई को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। यह गंभीर गंदगी और दीवारों की जर्जर स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है। अब यह देखना बाकी है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस ओर कब ध्यान देते हैं और इन खामियों को कब तक ठीक किया जाता है।1
- सोनभद्र जिले के कोन ब्लॉक स्थित ससनयी डीह बाबा स्थल पर आदिवासी परिवारों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद की। एक महत्वपूर्ण बैठक में, ग्रामीणों ने अपने परंपरागत अधिकारों और वन संरक्षण को लेकर पुरजोर ढंग से बात रखी। इस दौरान सभी आदिवासी परिवारों ने मिलकर अपने अधिकारों की हर हाल में रक्षा करने का दृढ़ संकल्प लिया।1