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jay savariya seth ji sabaka sapanapura karana mere seth

3 hrs ago
user_Kamlesh tabiyar Tabiyar
Kamlesh tabiyar Tabiyar
Nurse अरथुना, बांसवाड़ा, राजस्थान•
3 hrs ago

jay savariya seth ji sabaka sapanapura karana mere seth

More news from राजस्थान and nearby areas
  • Post by Rajendra Tabiyar
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    Post by Rajendra Tabiyar
    user_Rajendra Tabiyar
    Rajendra Tabiyar
    Actor गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • Post by Bapulal Ahari
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    Post by Bapulal Ahari
    user_Bapulal Ahari
    Bapulal Ahari
    Electrician गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • Post by Kantilal Makvana
    1
    Post by Kantilal Makvana
    user_Kantilal Makvana
    Kantilal Makvana
    बागीदौरा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • छींच क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर में होली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में भव्य फागोत्सव का आयोजन किया गया। भक्ति और उल्लास के इस संगम में श्रद्धालु पूरी तरह सराबोर नजर आए। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में गुलाल के रंगों और भजनों की स्वर लहरियों ने ऐसा समां बांधा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। मंदिर समिति के वालेंग राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज भगवान गणेश के विशेष श्रृंगार और आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजित भजन संध्या में पुरुष वर्ग ने मोर्चा संभाला। पुरुष श्रद्धालुओं ने पारंपरिक होली गीतों और फाग के भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा परिसर 'गणपति बप्पा मोरया' और 'होली है' के जयकारों से गूंज उठा। चंग की थाप और ढोलक की जुगलबंदी पर गाए गए लोकगीतों ने वातावरण को पूरी तरह फागुनी रंग में रंग दिया। एक ओर जहाँ पुरुष वर्ग अपनी गायकी से भगवान को रिझा रहा था, वहीं दूसरी ओर महिला श्रद्धालुओं ने उत्साह और उमंग के साथ फागोत्सव के आनंद को दोगुना कर दिया। महिलाओं ने पारंपरिक वागड़ी लोकगीतों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। केसरिया और फागुनी परिधानों में सजी महिलाओं ने गुलाल की होली खेलकर अपनी खुशी का इजहार किया। श्रद्धा और संस्कृति के इस अनूठे मेल ने उपस्थित सभी भक्तों का मन मोह लिया। फागोत्सव में उपस्थित महिलाओं ने बताया कि "फागोत्सव हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। भगवान गणेश के चरणों में भजनों और नृत्य के माध्यम से अपनी हाजिरी लगाना परम सुखद अनुभव है।" उत्सव के अंत में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मंदिर मंडल की ओर से सुरक्षा और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम के समापन पर भगवान को विशेष भोग लगाया गया और उपस्थित सभी भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया। इस फागोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और मेल-जोल का संदेश भी दिया। देर शाम तक चले इस उत्सव में छींच सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
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    छींच क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर में होली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में भव्य फागोत्सव का आयोजन किया गया। भक्ति और उल्लास के इस संगम में श्रद्धालु पूरी तरह सराबोर नजर आए। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में गुलाल के रंगों और भजनों की स्वर लहरियों ने ऐसा समां बांधा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।
मंदिर समिति के वालेंग राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज भगवान गणेश के विशेष श्रृंगार और आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजित भजन संध्या में पुरुष वर्ग ने मोर्चा संभाला। पुरुष श्रद्धालुओं ने पारंपरिक होली गीतों और फाग के भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा परिसर 'गणपति बप्पा मोरया' और 'होली है' के जयकारों से गूंज उठा। चंग की थाप और ढोलक की जुगलबंदी पर गाए गए लोकगीतों ने वातावरण को पूरी तरह फागुनी रंग में रंग दिया।
एक ओर जहाँ पुरुष वर्ग अपनी गायकी से भगवान को रिझा रहा था, वहीं दूसरी ओर महिला श्रद्धालुओं ने उत्साह और उमंग के साथ फागोत्सव के आनंद को दोगुना कर दिया। महिलाओं ने पारंपरिक वागड़ी लोकगीतों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। केसरिया और फागुनी परिधानों में सजी महिलाओं ने गुलाल की होली खेलकर अपनी खुशी का इजहार किया। श्रद्धा और संस्कृति के इस अनूठे मेल ने उपस्थित सभी भक्तों का मन मोह लिया।
फागोत्सव में उपस्थित महिलाओं ने बताया कि "फागोत्सव हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। भगवान गणेश के चरणों में भजनों और नृत्य के माध्यम से अपनी हाजिरी लगाना परम सुखद अनुभव है।"
उत्सव के अंत में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मंदिर मंडल की ओर से सुरक्षा और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम के समापन पर भगवान को विशेष भोग लगाया गया और उपस्थित सभी भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया।
इस फागोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और मेल-जोल का संदेश भी दिया। देर शाम तक चले इस उत्सव में छींच सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
    user_धर्मेंद्र उपाध्याय
    धर्मेंद्र उपाध्याय
    पत्रकार बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी (भारत माता मंदिर परिसर में गैर नूत्य की रहीं धुम दुर दराज व अनेक गांवों से आए लोगों ने लिया भाग) राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित विश्व हिन्दू परिषद के नेतृत्व में भारत माता मंदिर परिसर राती तलाई में आज होली के पर्व पर गैर नूत्य का आयोजन किया गया जिसमें दुर दराज व अलग-अलग गांवों से संगठन के लोग आए और जम कर गैर नूत्य किया जीसे बांसवाड़ा नगर सहित अन्य लोग भी इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल रहे
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    कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी 
(भारत माता मंदिर परिसर में गैर नूत्य की रहीं धुम दुर दराज व अनेक गांवों से आए लोगों ने लिया भाग)
राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित विश्व हिन्दू परिषद के नेतृत्व में भारत माता मंदिर परिसर राती तलाई में आज होली के पर्व पर गैर नूत्य का आयोजन किया गया जिसमें दुर दराज व अलग-अलग गांवों से संगठन के लोग आए और जम कर गैर नूत्य किया जीसे बांसवाड़ा नगर सहित अन्य लोग भी इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल रहे
    user_Dharmendra Soni
    Dharmendra Soni
    Kushalgarh, Banswara•
    5 hrs ago
  • 3 साल के मासूम निसार ने रखा अपना पहला रोजा, संवाददाता - संतोष व्यास ​डूंगरपुर। इबादत के मुकद्दस महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग पूरी शिद्दत के साथ रोजे रख रहे हैं, वहीं डूंगरपुर में एक साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे ने अपनी भक्ति और दृढ़ निश्चय से सभी को हैरान कर दिया है। एमएमबी ग्रुप डूंगरपुर के सदर नूर मोहम्मद मकरानी के नवासे मोहम्मद निसार मकरानी ने महज 3 साल 11 माह की नन्ही उम्र में अपना पहला रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। मासूम की इस हिम्मत और लगन को देखकर न सिर्फ मकरानी परिवार बल्कि पूरे समाज में चर्चा हो रही है। ​मकरानी ने बताया कि नन्हे निसार ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी और उत्साह के साथ सेहरी के वक्त उठकर रोजा रखने की जिद की। निसार ने परिवार के सभी सदस्यों से स्पष्ट कहा कि आज वह भी रोजा रखेगा। इतनी कम उम्र में बच्चे के इस फैसले ने एक पल के लिए सबको हैरत में डाल दिया, लेकिन उसके जज्बे को देखते हुए परिजनों ने खुशी-खुशी उसका साथ दिया। निसार के लिए प्रेरणा का स्रोत घर का माहौल रहा है, उनके भाई अब्दुल हाफिज इस साल के अपने सभी रोजे मुकम्मल कर रहे हैं और बहन मेहरीन फातिमा भी नियमित रूप से रोजे रख रही हैं। अपने भाई-बहनों को इबादत करते देख निसार के मन में भी रोजा रखने की इच्छा जागी। ​इस नेक और बरकत वाले मौके पर निसार के वालिद मोहम्मद वसीम, वालिदा मखदूमा मकरानी और दादी अनिसा मकरानी सहित पूरे मकरानी परिवार ने फूल-मालाओं और दुआओं के साथ मासूम को मुबारकबाद दी। परिजनों का कहना है कि नन्ही उम्र में दीन के प्रति ऐसा लगाव वाकई काबिले-तारीफ है। दिन भर चले इस सिलसिले के बाद शाम को इफ्तार के वक्त मासूम के चेहरे पर एक अलग ही रौनक और खुशी देखने को मिली। सोशल मीडिया और क्षेत्र में भी इस छोटे से रोजेदार की खूब सराहना की जा रही है।
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    3 साल के मासूम निसार ने रखा अपना पहला रोजा, 
संवाददाता - संतोष व्यास
​डूंगरपुर। इबादत के मुकद्दस महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग पूरी शिद्दत के साथ रोजे रख रहे हैं, वहीं डूंगरपुर में एक साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे ने अपनी भक्ति और दृढ़ निश्चय से सभी को हैरान कर दिया है। एमएमबी ग्रुप डूंगरपुर के सदर नूर मोहम्मद मकरानी के नवासे मोहम्मद निसार मकरानी ने महज 3 साल 11 माह की नन्ही उम्र में अपना पहला रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। मासूम की इस हिम्मत और लगन को देखकर न सिर्फ मकरानी परिवार बल्कि पूरे समाज में चर्चा हो रही है।
​मकरानी ने बताया कि नन्हे निसार ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी और उत्साह के साथ सेहरी के वक्त उठकर रोजा रखने की जिद की। निसार ने परिवार के सभी सदस्यों से स्पष्ट कहा कि आज वह भी रोजा रखेगा। इतनी कम उम्र में बच्चे के इस फैसले ने एक पल के लिए सबको हैरत में डाल दिया, लेकिन उसके जज्बे को देखते हुए परिजनों ने खुशी-खुशी उसका साथ दिया। निसार के लिए प्रेरणा का स्रोत घर का माहौल रहा है, उनके भाई अब्दुल हाफिज इस साल के अपने सभी रोजे मुकम्मल कर रहे हैं और बहन मेहरीन फातिमा भी नियमित रूप से रोजे रख रही हैं। अपने भाई-बहनों को इबादत करते देख निसार के मन में भी रोजा रखने की इच्छा जागी।
​इस नेक और बरकत वाले मौके पर निसार के वालिद मोहम्मद वसीम, वालिदा मखदूमा मकरानी और दादी अनिसा मकरानी सहित पूरे मकरानी परिवार ने फूल-मालाओं और दुआओं के साथ मासूम को मुबारकबाद दी। परिजनों का कहना है कि नन्ही उम्र में दीन के प्रति ऐसा लगाव वाकई काबिले-तारीफ है। दिन भर चले इस सिलसिले के बाद शाम को इफ्तार के वक्त मासूम के चेहरे पर एक अलग ही रौनक और खुशी देखने को मिली। सोशल मीडिया और क्षेत्र में भी इस छोटे से रोजेदार की खूब सराहना की जा रही है।
    user_Santosh vyas
    Santosh vyas
    Local News Reporter डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • Post by Kamlesh tabiyar Tabiyar
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    Post by Kamlesh tabiyar Tabiyar
    user_Kamlesh tabiyar Tabiyar
    Kamlesh tabiyar Tabiyar
    Nurse अरथुना, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • Post by Rajendra Tabiyar
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    Post by Rajendra Tabiyar
    user_Rajendra Tabiyar
    Rajendra Tabiyar
    Actor गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    11 hrs ago
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    5769
    user_Kantilal Makvana
    Kantilal Makvana
    बागीदौरा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    7 hrs ago
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