वाराणसी के युवा धावक अभय कुमार दुबे ने हांगकांग में आयोजित एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर पूरे पूर्वांचल और जिले का नाम रोशन किया है। ऑटो चालक के बेटे अभय, भारतीय पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा थे, जिन्होंने 3 मिनट 05.54 सेकेंड का समय निकालकर देश को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि दिलाई। उनकी इस सफलता के बाद वाराणसी में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि लंबे समय बाद जिले के किसी एथलीट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीता है। विकास इंटर कॉलेज के छात्र अभय के पिता प्रेमचंद्र दुबे एक ऑटो चालक हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, अभय ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। अभय पिछले चार वर्षों से वाराणसी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संकुल में नियमित प्रशिक्षण ले रहे थे, जहाँ उन्होंने क्रीड़ा अधिकारी डॉ. मंजूर आलम अंसारी के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा को निखारा। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. ए.के. सिंह ने अभय की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि यह सफलता न सिर्फ उनके विद्यालय बल्कि पूरे शहर के लिए गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अभय की यह जीत जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह बढ़ाएगी। हांगकांग से लौटने पर अभय का भव्य स्वागत किया जाएगा, जो यह साबित करता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता हो, तो प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
वाराणसी के युवा धावक अभय कुमार दुबे ने हांगकांग में आयोजित एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर पूरे पूर्वांचल और जिले का नाम रोशन किया है। ऑटो चालक के बेटे अभय, भारतीय पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा थे, जिन्होंने 3 मिनट 05.54 सेकेंड का समय निकालकर देश को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि दिलाई। उनकी इस सफलता के बाद वाराणसी में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि लंबे समय बाद जिले के किसी एथलीट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीता है। विकास इंटर कॉलेज के छात्र अभय के पिता प्रेमचंद्र दुबे एक ऑटो चालक हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, अभय ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। अभय पिछले चार वर्षों से वाराणसी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संकुल में नियमित प्रशिक्षण ले रहे थे, जहाँ उन्होंने क्रीड़ा अधिकारी डॉ. मंजूर आलम अंसारी के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा को निखारा। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. ए.के. सिंह ने अभय की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि यह सफलता न सिर्फ उनके विद्यालय बल्कि पूरे शहर के लिए गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अभय की यह जीत जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह बढ़ाएगी। हांगकांग से लौटने पर अभय का भव्य स्वागत किया जाएगा, जो यह साबित करता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता हो, तो प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
- वाराणसी में लंबे समय से सफाई न होने से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यहां के स्थानीय नेता भी इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मौजूदा गंदगी के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भाजपा की सरकार में भी इतनी गंदगी मौजूद है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने और जल्द से जल्द सफाई करवाने की अपील की है।1
- जनपद जौनपुर की ग्राम पंचायत हिसामपुर में भगत श्रीराम पूजारी जी ने माता रानी जी की पूजा संपन्न कराई। इस दौरान भगत श्रीराम पूजारी जी ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की।1
- जनपद जौनपुर में, होटल रिवर व्यू में राज्यमंत्री के नेतृत्व में 'मन की बात' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के संबोधन को डिजिटल टेलीविजन के माध्यम से सुना गया। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग मंत्री गिरिश चन्द्र यादव सहित हजारों कार्यकर्ता और सैकड़ों वरिष्ठ लोग उपस्थित रहे।1
- जौनपुर जिले के पुरव बाजार में स्थापित नया यूनियन बैंक अपने ग्राहकों को अच्छी सुविधाएँ प्रदान कर रहा है। बैंक की इस पहल से ग्राहकों को बेहतर सेवाएँ मिल रही हैं।1
- कर्तव्य और अनुशासन की मिसाल के रूप में पहचाने जाने वाले अशोक पाण्डेय सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी विदाई के अवसर पर एक भावभीना समारोह आयोजित किया गया, जहाँ उन्हें सम्मानित किया गया।1
- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की ग्राम पंचायत उसरांव जीतापुर में श्री महाराजा सुहेलदेव राजभर की एक मूर्ति स्थापित की गई है। इस मूर्ति की स्थापना राजभर समाज द्वारा की गई है, जिसके लिए समाज की तरफ से बहुत-बहुत बधाई व्यक्त की गई।1
- मुरादाबाद जिले के कुंदरकी थाना क्षेत्र के चकफाजलपुर गांव में 21 वर्षीय फरहत नामक युवक ने अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक से कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। परिजनों के अनुसार, फरहत पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहा था, और बताया जा रहा है कि उसने यह कदम उठाने से पहले पूरी घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया था। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक फरहत की मौत हो चुकी थी। घटना के समय कुछ बच्चे भी पास में मौजूद थे, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर कुंदरकी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों को भी अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है, जिसमें प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं इस दुखद घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।1
- राजस्थान के अलवर जिले के तिजारा क्षेत्र स्थित पालपुर गाँव में इंसानियत को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक नवजात बच्ची को लगभग 70 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद वह मासूम ज़िंदा बच गई। यह घटना सोमवार सुबह तब सामने आई जब स्कूल जा रहे कुछ बच्चों को कुएं के अंदर से रोने की आवाज़ सुनाई दी। पहले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन ध्यान से सुनने पर उन्होंने तुरंत गाँव वालों को इसकी सूचना दी। ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रस्सियों की मदद से कुएं में उतरकर बच्ची को बाहर निकाला। बच्ची को बाहर निकालते ही ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बच्ची की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर नवजात को कुएं में किसने और क्यों फेंका। पुलिस आस-पास के इलाकों में बच्ची के माता-पिता की तलाश भी कर रही है। इस घटना से पूरे इलाके में भारी आक्रोश है, और लोग सवाल उठा रहे हैं कि कोई इतनी निर्दयी हरकत कैसे कर सकता है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्कूल जा रहे बच्चों ने समय रहते रोने की आवाज़ न सुनी होती, तो मासूम की जान बचाना संभव नहीं था। यह घटना क्रूरता और मानवता, दोनों की मिसाल बन गई है, जहाँ एक तरफ किसी ने नवजात को मौत के कुएं में फेंक दिया, तो दूसरी तरफ बच्चों की सतर्कता और ग्रामीणों की बहादुरी ने उसे नया जीवन प्रदान किया।1