गनवाही प्राथमिक शाला में मिड डे मील के बाद बच्चों से बर्तन धुलवाने का मामला जिम्मेदारों पर उठे सवाल डिंडोरी -- जनपद डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गनवाही प्राथमिक शाला में मध्यान भोजन योजना के तहत परोसे जाने वाले भोजन के बाद बच्चों से ही थालियां धुलवाए जाने का मामला सामने आया है। सरकारी योजना का उद्देश्य जहां बच्चों को पोषण और शिक्षा से जोड़ना है, वहीं विद्यालय परिसर में नौनिहालों के हाथों में किताबों की जगह बर्तन नजर आना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, भोजन वितरण के बाद छोटे-छोटे बच्चे कतार में खड़े होकर अपनी-अपनी थालियां धोते देखे गए। यह दृश्य न सिर्फ बाल अधिकारों की अनदेखी दर्शाता है, बल्कि स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा जाता है, न कि रसोई और सफाई के काम के लिए। मध्यान भोजन योजना का स्पष्ट उद्देश्य बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना और स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि बच्चों से श्रम कराया जा रहा है, तो यह योजना की मंशा के विपरीत है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में बच्चों से इस प्रकार का कार्य न कराया जाए और विद्यालय का माहौल शिक्षा केंद्रित बना रहे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
गनवाही प्राथमिक शाला में मिड डे मील के बाद बच्चों से बर्तन धुलवाने का मामला जिम्मेदारों पर उठे सवाल डिंडोरी -- जनपद डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गनवाही प्राथमिक शाला में मध्यान भोजन योजना के तहत परोसे जाने वाले भोजन के बाद बच्चों से ही थालियां धुलवाए जाने का मामला सामने आया है। सरकारी योजना का उद्देश्य जहां बच्चों को पोषण और शिक्षा से जोड़ना है, वहीं विद्यालय परिसर में नौनिहालों के हाथों में किताबों की जगह बर्तन नजर आना व्यवस्था पर गंभीर सवाल
खड़े कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, भोजन वितरण के बाद छोटे-छोटे बच्चे कतार में खड़े होकर अपनी-अपनी थालियां धोते देखे गए। यह दृश्य न सिर्फ बाल अधिकारों की अनदेखी दर्शाता है, बल्कि स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा जाता है, न कि रसोई और सफाई के काम के लिए। मध्यान भोजन योजना का स्पष्ट उद्देश्य बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना और स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। ऐसे
में यदि बच्चों से श्रम कराया जा रहा है, तो यह योजना की मंशा के विपरीत है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में बच्चों से इस प्रकार का कार्य न कराया जाए और विद्यालय का माहौल शिक्षा केंद्रित बना रहे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
- डिंडोरी -- शहपुरा। नगर परिषद शहपुरा में बन रहे NH-45Eसड़क डिवाइडर की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने डिवाइडर निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाते हुए नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) रीना राठौर को विकास विभाग भोपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि निर्माणाधीन डिवाइडर की ऊंचाई प्राक्कलन (एस्टीमेट) के विपरीत अधिक रखी जा रही है। साथ ही डिवाइडर के साथ नाली और पुलियों की उचित व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे आमजन को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजेश गुप्ता ने बताया कि डिवाइडर की ऊंचाई जरूरत से ज्यादा होने के कारण वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए खतरे की स्थिति बन सकती है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है, ताकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मापदंडों की निष्पक्ष समीक्षा हो सके। इस संबंध में जब CMO रीना राठौर से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।6
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- Post by Ashok Sondhiya1
- मंण्डला जिले का कान्हा टाइगर रिजर्व पूरे विष्व में प्रसिद्ध है, जो देसी विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, प्राकृतिक सम्पदा से भरे कान्हा पार्क में वन्य प्राणी स्वतंत्रता से विचरण करते हुए फलफूल रहे है। परन्तु कुछ दिनों से बाघों व तेंदुए की वर्चस्व की लड़ाई में व प्राकृतिक तरीके से बाघ व तेंदुए की मौत की खबरे आ रही है। कान्हा के जरियाबारे पगडंडी के पास कक्ष क्रमांक 632 बिट लांघा दादर वन परिक्षेत्र किसली के अंतर्गत एक नर तेंदुए का शव गश्ती के दौरान मिला।मृत नर तेंदुए की उम्र तीन से चार साल के बीच बताई गई है। तुरन्त ही खबर कान्हा प्रबन्धन के वरिष्ट अधिकारियों को दी गई,मौके पर कान्हा टाइगर रिजर्व के वरिष्ट अधिकारी व चिकित्सक पहुँचे, मृत नर तेंदुए के आसपास का स्थान सुरक्षित कर जांच शुरू की गई । जांच के दौरान मृत तेंदुए के आसपास बाघ की उपस्थिति के निशान पाए गए,तेंदुए के सिर पर बाघ के दांत के गहरे निशान पाए गए है,मृत तेंदुए के सभी अंग सुरक्षित पाए गए है,जिससे शिकार की आशंका से इन्कार किया गया। अधिकारियों द्वारा बाघ व तेंदुए की आपसी लड़ाई में तेंदुए की मौत की पुष्टि की गई है। शव परीक्षण (पोस्टमार्टम ) के बाद मृत तेंदुए का शव दाह किया गया है।1
- Post by Prashant Patel1
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- डिंडोरी -- जनपद डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गनवाही प्राथमिक शाला में मध्यान भोजन योजना के तहत परोसे जाने वाले भोजन के बाद बच्चों से ही थालियां धुलवाए जाने का मामला सामने आया है। सरकारी योजना का उद्देश्य जहां बच्चों को पोषण और शिक्षा से जोड़ना है, वहीं विद्यालय परिसर में नौनिहालों के हाथों में किताबों की जगह बर्तन नजर आना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, भोजन वितरण के बाद छोटे-छोटे बच्चे कतार में खड़े होकर अपनी-अपनी थालियां धोते देखे गए। यह दृश्य न सिर्फ बाल अधिकारों की अनदेखी दर्शाता है, बल्कि स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा जाता है, न कि रसोई और सफाई के काम के लिए। मध्यान भोजन योजना का स्पष्ट उद्देश्य बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना और स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि बच्चों से श्रम कराया जा रहा है, तो यह योजना की मंशा के विपरीत है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में बच्चों से इस प्रकार का कार्य न कराया जाए और विद्यालय का माहौल शिक्षा केंद्रित बना रहे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।3