खेजड़ी आंदोलन समर्थन में युवाओं ने आधी रात को शहर में निकाला पैदल मार्च बीकानेर, राजस्थान ; बीकानेर में खेजड़ी आंदोलन के समर्थन में युवाओं ने आधी रात को पैदल मार्च शुरू किया। मार्च का उद्देश्य स्थानीय प्रशासन और जनता का ध्यान आंदोलन की मांगों की ओर आकर्षित करना बताया गया। युवाओं का कहना है कि खेजड़ी संरक्षण और इससे जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आगामी दिनों में और व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम करने का संकेत भी दिया। खेजड़ी आंदोलन समर्थन में युवाओं ने आधी रात को शहर में निकाला पैदल मार्च बीकानेर, राजस्थान ; बीकानेर में खेजड़ी आंदोलन के समर्थन में युवाओं ने आधी रात को पैदल मार्च शुरू किया। मार्च का उद्देश्य स्थानीय प्रशासन और जनता का ध्यान आंदोलन की मांगों की ओर आकर्षित करना बताया गया। युवाओं का कहना है कि खेजड़ी संरक्षण और इससे जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आगामी दिनों में और व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम करने का संकेत भी दिया।
खेजड़ी आंदोलन समर्थन में युवाओं ने आधी रात को शहर में निकाला पैदल मार्च बीकानेर, राजस्थान ; बीकानेर में खेजड़ी आंदोलन के समर्थन में युवाओं ने आधी रात को पैदल मार्च शुरू किया। मार्च का उद्देश्य स्थानीय प्रशासन और जनता का ध्यान आंदोलन की मांगों की ओर आकर्षित करना बताया गया। युवाओं का कहना है कि खेजड़ी संरक्षण और इससे जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आगामी दिनों में और व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम करने का संकेत भी दिया। खेजड़ी आंदोलन समर्थन में युवाओं ने आधी रात को शहर में निकाला पैदल मार्च बीकानेर, राजस्थान ; बीकानेर में खेजड़ी आंदोलन के समर्थन में युवाओं ने आधी रात को पैदल मार्च शुरू किया। मार्च का उद्देश्य स्थानीय प्रशासन और जनता का ध्यान आंदोलन की मांगों की ओर आकर्षित करना बताया गया। युवाओं का कहना है कि खेजड़ी संरक्षण और इससे जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आगामी दिनों में और व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम करने का संकेत भी दिया।
- कोटा शिक्षा नगरी में बढ़ती फीस और उस पर लगने वाले टैक्स को लेकर समाजसेवी हिम्मत सिंह हाड़ा ने कड़ी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य आर्थिक बोझ के कारण प्रभावित हो रहा है और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। हाड़ा ने सवाल उठाया कि जब एक छात्र की सालाना फीस 1 लाख रुपये होती है तो उस पर 18 प्रतिशत तक टैक्स क्यों लिया जा रहा है। उनके अनुसार शिक्षा और चिकित्सा जैसे मूलभूत क्षेत्रों पर कर लगाना युवाओं और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। उन्होंने मांग की कि सरकार को शिक्षा पर टैक्स समाप्त कर छात्रों को सब्सिडी, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाएं देनी चाहिए, ताकि उनका मनोबल बढ़े और हर प्रतिभाशाली छात्र को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके। समाजसेवी हिम्मत सिंह हाड़ा ने कहा कि युवा ही देश का भविष्य हैं, और उनके सपनों पर आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि सहयोग और प्रोत्साहन होना चाहिए।1
- कोटा के रेलवे कॉलोनी थाना क्षेत्र में एक 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा द्वारा आत्महत्या करने का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के समय छात्रा घर पर थी, तभी उसकी मां ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया और परिजनों की मदद से उसे तत्काल एमबीएस अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल छात्रा का अस्पताल में उपचार जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।1
- सोशल मीडिया फ्रेंड ने जन्मदिन का बहाना बनाकर सूरत बुलाया, नशा देकर दुष्कर्म का आरोप, दो गिरफ्तार जिले की 21 वर्षीय युवती के साथ गुजरात के सूरत में दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि उसे जन्मदिन मनाने के बहाने सूरत बुलाया गया और करीब 20 दिनों तक अलग-अलग होटलों में रखकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। इस दौरान उसके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और नशे के इंजेक्शन लगाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका पुलिस रिमांड लिया है।1
- आज हम बात कर रहे हैं UGC के नए नियमों की, जिन्हें कई संगठन और छात्र “काला कानून” बता रहे हैं। आखिर इन नियमों में ऐसा क्या है, जिससे विरोध हो रहा है? और क्या ये नियम छात्रों के हित में हैं या नुकसानदायक? इन्हीं सवालों पर आज हम विशेषज्ञ से खास बातचीत कर रहे हैं।1
- राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था। लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है अपने क्षेत्र की सभी वायरल विडियोज के लिए डाउनलोड करें शुरू ऐप (Shuru App) 👇🏻1
- कड़ाके की सर्दी के बीच बच्चों को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से पुकार शिक्षा सेवा समिति द्वारा संचालित 'पुकार की परवाह' अभियान के अंतर्गत आज एक सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, धागड़मऊ कला में आयोजित इस कार्यक्रम में कक्षा पहली से पाँचवीं तक के 70 से अधिक छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क स्वेटर वितरित किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राजकुमार वधवा, भाजपा नगर अध्यक्ष राजेंद्र दशोरा एवं अविनाश मित्तल ने अपने हाथों से नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वेटर पहनाए। कड़ाके की ठंड में गर्म स्वेटर पाकर स्कूली बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। समिति का 'पुकार की परवाह' अभियान इसी दिशा में एक सार्थक कदम है। विद्यालय परिवार ने जताया आभार: विद्यालय की प्रधानाचार्या नीलम शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में पुकार समिति की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा करते हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। ये रहे उपस्थित: इस अवसर पर विद्यालय स्टाफ एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें व्याख्याता बजरंग लाल सुथार, ललिता वैष्णव, गोपाल कृष्ण शर्मा, कंचन कंवर, आशा गौतम, मनोज सोनी, सूर्यकान्ता जैन, गुड्डी मीणा, इंद्रेश मीणा, अमरचंद कंजर, दिनेश लबाना, लोकेश राणा और अंतिमबला आमेठा प्रमुख रूप से शामिल थे।1
- Post by VKH NEWS1
- राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है।1
- ग्राम बेगाना में लेवा रोड से दण्ड ka रास्ता है जिसपे पानी भरा हुआ है रास्ता में पानी भरा हुआ है और आदमी निकले मे खेत में जाने की परेशानी आती है1