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आदर्श नगर पालिका परिषद बांसी के पूर्व अध्यक्ष ध्रुव चंद जायसवाल ने श्मशान घाट को जाने वाले मार्ग की बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि श्मशान घाट जैसा महत्वपूर्ण रास्ता उपेक्षा का शिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि इसकी मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए। जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि आखिर आदर्श नगर पालिका परिषद बांसी का यह श्मशान घाट रोड कब सुधरेगा और उन्हें इस समस्या का संतोषजनक जवाब कब मिलेगा।
Rashid Malik
आदर्श नगर पालिका परिषद बांसी के पूर्व अध्यक्ष ध्रुव चंद जायसवाल ने श्मशान घाट को जाने वाले मार्ग की बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि श्मशान घाट जैसा महत्वपूर्ण रास्ता उपेक्षा का शिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि इसकी मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए। जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि आखिर आदर्श नगर पालिका परिषद बांसी का यह श्मशान घाट रोड कब सुधरेगा और उन्हें इस समस्या का संतोषजनक जवाब कब मिलेगा।
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- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि राज्य में महिलाओं का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का तत्काल संज्ञान लिया है, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सभी बेटियों का सम्मान एक समान होता है। उन्होंने कहा, "बेटी, बेटी होती है और सबकी बेटी एक समान होती है," यह संदेश देते हुए कि किसी भी महिला के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीएम योगी ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दूसरों को उपदेश देने से पहले सपा को अपने कार्यकर्ताओं को 'संस्कारित' करने की आवश्यकता है, और सपा प्रमुख को अपने कार्यकर्ताओं को भाषा में संयम रखने की सीख देने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्यकर्ता भाषा में संयम नहीं रख सकते, तो उन्हें सरकार के हवाले कर दें, क्योंकि वे उन्हें अच्छी तरह समझाना जानते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से भी अपील की कि वे अपने कार्यकर्ताओं को बुजुर्गों, महिलाओं और वरिष्ठ नेताओं के प्रति मर्यादित भाषा का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करें, ताकि 'बेटी का अपमान' किसी भी कीमत पर स्वीकार न हो।1
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- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) की संघीय कार्यकारिणी की बैठक 12 जून को बेंगलुरु में संपन्न हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं के आंदोलन तथा प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 के विरोध में सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। फेडरेशन ने उत्तर प्रदेश में चल रहे निजीकरण विरोधी आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी रंजन कुमार ने एआईपीईएफ द्वारा दिए गए समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के बिजली कर्मियों और अभियंताओं का मनोबल और मजबूत हुआ है। एआईपीईएफ ने अपने प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में पिछले 562 दिनों से बिजली कर्मी एवं अभियंता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। बिजली पंचायतों, महापंचायतों, रैलियों और जनसभाओं के माध्यम से यह आंदोलन अब एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। फेडरेशन ने आंदोलन के दौरान कर्मचारियों के स्थानांतरण, संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर किए गए कदमों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रयास बताया। संघर्ष समिति के पदाधिकारी राघवेंद्र सिंह ने मांग की है कि निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए तथा आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों और अभियंताओं के विरुद्ध की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयों को बिना शर्त समाप्त किया जाए। बैठक में पारित दूसरे प्रस्ताव में, एआईपीईएफ ने प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 का कड़ा विरोध करते हुए इसे बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा देने वाला बताया। फेडरेशन का कहना है कि विधेयक के प्रावधान सार्वजनिक वितरण कंपनियों को कमजोर कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाएंगे, जिससे किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और कमजोर वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एआईपीईएफ ने चेतावनी दी कि यदि आगामी मानसून सत्र में यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया, तो राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) एवं अन्य संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम चलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रव्यापी "लाइटनिंग स्ट्राइक" सहित अन्य आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। संघर्ष समिति की पदाधिकारी दीक्षा श्रीवास्तव ने जोर दिया कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर चुका है और यह सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, उपभोक्ताओं, किसानों तथा बिजली कर्मियों के हितों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण अभियान बन गया है। इसी क्रम में, शुक्रवार को संतकबीरनगर में भी बिजली कर्मियों ने अपना विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें सहायक लेखाकार प्रिंस गुप्ता, संतोष गुप्ता, कार्यकारी सहायक अमरनाथ यादव, दिलीप सिंह, राघवेंद्र सिंह, दीक्षा श्रीवास्तव, सूरज प्रजापति, अशोक कुमार, सत्येंद्र सिंह, रंजन कुमार, वीरेंद्र मौर्य, प्रदुम्न कुमार और संजय यादव समेत अन्य विद्युत कर्मी मौजूद रहे।1
- संतकबीरनगर के नाथनगर स्थित महुली थाने की पुलिस टीम ने, थानाध्यक्ष के नेतृत्व में, थाना क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर न्यायालय द्वारा जारी गैर जमानती वारंट से संबंधित दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित क्रिमिनल अपील नंबर 947/1985, हरनरायण अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संतकबीरनगर के आदेश के अनुपालन में की गई। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में दादर हरदो निवासी अखिलानंद (पुत्र हरनरायण) और गौराखुर्द निवासी सीताराम (पुत्र रामविलास) शामिल हैं, जिन्हें नियमानुसार न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संतकबीरनगर भेजा गया। इस गिरफ्तारी अभियान में उपनिरीक्षक अजय कुमार भारती, हेड कांस्टेबल आनंद दुबे और कांस्टेबल सुनील सिंह की टीम शामिल थी। महुली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपराधों और अपराधियों के विरुद्ध उनकी प्रभावी कार्यवाही आगे भी लगातार जारी रहेगी।3
- उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार लगाए जाने के विरोध में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बस्ती में शुक्रवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई है कि इस बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए। व्यापारियों का कहना है कि बीच सत्र में इस तरह की वृद्धि से उद्योग जगत और आम जनता पर महंगाई का बोझ पड़ेगा, जिसका प्रतिकूल प्रभाव आम उपभोक्ताओं के साथ ही व्यापार पर भी पड़ेगा। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्ती मंडल अध्यक्ष डॉ. हरिमूर्ति सिंह ‘मनोज’ ने आरोप लगाया कि जून माह से लागू किए गए इस अधिभार को लगाने से पहले विद्युत नियामक आयोग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। प्रदेश उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद मद्धेशिया ने इस बढ़ोतरी को उपभोक्ताओं पर 'दोहरी मार' बताया, क्योंकि औद्योगिक और घरेलू बिलों में पहले से ही फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है। प्रदेश उपाध्यक्ष सुनीत पांडेय ने वाणिज्यिक (एलएमवी-2) श्रेणी के बिलों में फिक्स चार्ज और मिनिमम चार्ज दोनों के पहले से लागू होने की बात कही, जबकि जिला महामंत्री आलोक दुबे ने घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक बिलों में 7.5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी भी जोड़े जाने की जानकारी दी। जिला संगठन महामंत्री भरत राम गुप्ता ‘बबलू’ ने तर्क दिया कि विद्युत नियामक आयोग हर साल उत्पादन और खर्चों की समीक्षा के बाद सुनवाई कर दरों का निर्धारण करता है, ऐसे में बीच सत्र में अचानक दरों में वृद्धि करना अनुचित है। जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने इस अचानक बढ़ोतरी को गलत परंपरा की शुरुआत बताते हुए आगाह किया कि इसका सीधा असर महंगाई के रूप में आम जनता को भुगतना पड़ेगा। नगर अध्यक्ष राणा महेंद्र प्रताप और महामंत्री धीरेंद्र चौधरी ने कहा कि बिजली की लागत बढ़ने से उत्तर प्रदेश का उद्योग और व्यापार प्रभावित होगा, जिससे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और अंततः बाजार पर भी असर पड़ेगा। जिला महामंत्री आलोक दुबे और जिला संगठन महामंत्री भरत राम गुप्ता ‘बबलू’ ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उद्योग मंच के जिला अध्यक्ष कमलेश चौधरी और जिला युवा संगठन महामंत्री सत्य प्रकाश दुबे सहित अन्य पदाधिकारियों ने ईंधन अधिभार के नाम पर की गई 10 प्रतिशत बढ़ोतरी को तुरंत समाप्त करने के आदेश जारी करने की मांग की। इस अवसर पर विकास शर्मा, पवन गुप्ता, ओम प्रकाश चौधरी, प्रवीण सिंह, अजय कनौजिया सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।3
- संतकबीरनगर जिला कारागार में शुक्रवार को 'बंदी समस्या समाधान दिवस' के तहत एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह के निर्देशन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनील कुमार सिंह की पहल पर संपन्न हुआ। शिविर में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ अन्जय कुमार श्रीवास्तव ने जेल में बंद कैदियों की समस्याओं को सुना। इस दौरान, धनघटा थाना क्षेत्र के रामपुर मध्य गांव निवासी रामानंद ने गांजा रखने के आरोप में कानूनी सहायता मांगी, जबकि बेलहर कला थाना क्षेत्र के लोहरसन गांव निवासी अहमद अली ने चोरी के मामले में अधिवक्ता उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अतिरिक्त, बनौली गांव निवासी छोटू राजभर ने बताया कि जमानत मंजूर होने के बावजूद जमानतदार न मिलने के कारण वे जेल से रिहा नहीं हो पा रहे हैं। अन्य बंदियों ने भी अपनी कानूनी और व्यक्तिगत समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा, जिस पर उन्हें समाधान का भरोसा दिलाया गया। इस दौरान बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता एवं उनके अधिकारों की जानकारी भी प्रदान की गई। कार्यक्रम में डिप्टी जेलर हरिकेश और जेल पीएलवी सुनील कुमार सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।1
- संतकबीरनगर के मेंहदावल में बेलहर विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत कन्धरापार के राजस्व गांव पकरडीहा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पूर्व ग्राम प्रधान विजय प्रकाश और उनके परिवार के लगभग सात सदस्यों के नाम अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची से गायब हो गए हैं। इसमें विजय प्रकाश की पत्नी पूनम रानी भी शामिल हैं, जो 2010 से 2013 के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। विजय प्रकाश, जो स्वयं पूर्व ग्राम प्रधान रहे हैं, ने बताया कि उनके अलावा उनके पुत्र सौरभ कुमार और गौरव कुमार, भाई विनोद कुमार, छोटी बहू रोमन और 75 वर्षीय माता शारदा देवी सहित परिवार के कई सदस्यों के नाम बिना किसी पूर्व सूचना के सूची से हटा दिए गए हैं। परिवार पिछले लगभग 20 वर्षों से गांव में रह रहा है और सरकारी राशन की दुकान का संचालन भी करता है। उन्होंने आशंका जताई है कि मतदाता सूची से नाम हटाने के पीछे कहीं राजनीतिक कारण तो नहीं हैं, क्योंकि उनका कहना है कि अब तक प्रत्येक मतदाता सूची में उनके परिवार के नाम दर्ज रहते थे, लेकिन इस बार उनके कुछ समर्थकों के नाम भी गायब हैं। इस मामले को लेकर पीड़ित विजय प्रकाश ने मेंहदावल उपजिलाधिकारी (एसडीएम) तथा संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने तत्काल नाम पुनः शामिल करने और संबंधित बीएलओ के खिलाफ जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। विजय प्रकाश ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नाम शामिल नहीं किए गए, तो उनके परिवार के सदस्य आगामी चुनाव में मतदान के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाएगी और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।2
- बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से गुजरने वाले व्यस्त हाईवे पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमराती दिख रही है, जहाँ रात 10:00 बजे के बाद खुलेआम अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। आरोप है कि यह गोरखधंधा पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। स्थानीय सूत्रों और निवासियों के अनुसार, हाईवे किनारे स्थित ढाबों और अवैध अड्डों पर ग्राहकों से 100-50 रुपये अतिरिक्त 'सुविधा शुल्क' लेकर शराब बेची जा रही है। यह महज एक अवैध व्यापार नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा है, जिसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस का मौन संरक्षण प्राप्त है। इस अवैध धंधे के कारण स्थानीय लोग और राहगीर भारी दहशत में हैं। जब भी किसी ने इसका विरोध करने की कोशिश की, तो उसे दबंगों और शराब माफियाओं द्वारा जान से मारने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी गई हैं। आम जनता सवाल उठा रही है कि एक जिम्मेदार नागरिक को कानून का पालन करने की अपेक्षा करने पर क्यों डराया-धमकाया जा रहा है, और क्या माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून को अपने जेब में लेकर घूम रहे हैं? लोगों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या कप्तानगंज पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी इस बड़े पैमाने पर हो रही अवैध बिक्री से अनभिज्ञ हैं। इतने बड़े कारोबार को स्थानीय बीट सिपाहियों और गश्ती दलों द्वारा न देख पाना उनकी कार्यशैली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जिससे यह संदेह गहराता है कि ये विभाग अपनी जेबें भरने के लिए इस अवैध धंधे को फलने-फूलने दे रहे हैं। यह स्थिति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनाई गई सख्त नीति के दावों को धज्जियां उड़ा रही है। हाईवे पर देर रात बिकती शराब न केवल अवैध है, बल्कि यह नशे में धुत होकर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रही है। स्थानीय निवासियों ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अवैध धंधे को संरक्षण देने वाले पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो किसी बड़ी अनहोनी या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह देखना बाकी है कि क्या बस्ती प्रशासन इस 'सुविधा शुल्क' वाले अवैध कारोबार पर लगाम कसने का साहस दिखा पाएगा, या फिर पुलिस की चुप्पी इसी तरह आम जनता पर भारी पड़ती रहेगी।1
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