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सवाई माधोपुर के रणथंभौर में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक दो दिवसीय CSR कॉन्क्लेव का आयोजन होटल सवाई विलास में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर के उद्योगपति और वनाधिकारी जुटे, जिसका मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास को बढ़ावा देना था। कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि वन मंत्री संजय शर्मा रहे, जबकि वन विभाग के एसीएस आनंद कुमार ने इसकी अध्यक्षता की। अरिजीत बनर्जी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। वन मंत्री संजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में वन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बेहतर कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने देश में पहली बार ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जहाँ लोग बिना नर्सरी जाए ऑनलाइन पौधे मंगवा सकते हैं। साथ ही, राजस्थान में पहली बार संभाग स्तर पर वन मेले लगाए गए हैं, जो भविष्य में जिला स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। मंत्री ने उद्योगपतियों से अपील करते हुए उनके पिछले सहयोग की सराहना की, जिसमें वन विभाग को फंड, वाहन और संसाधन उपलब्ध कराना तथा जंगल में वन चौकियाँ स्थापित करना शामिल था। उन्होंने विशेष रूप से जंगलों से विस्थापित होने वाले गाँवों की मदद का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 2022 में वन विभाग ने विस्थापित परिवारों के पैकेज में बढ़ोतरी की थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। विस्थापित परिवारों को जो उबड़-खाबड़ ज़मीनें आवंटित की जाती हैं, वे वहाँ जाने से हिचकते हैं। वन मंत्री ने उद्योगपतियों से सीएसआर फंड का उपयोग कर इन उबड़-खाबड़ जमीनों पर विस्थापित गाँवों को गोद लेकर अच्छी सुविधाओं वाली कॉलोनियाँ विकसित करने में सहयोग करने का आह्वान किया। रणथंभौर में बाघों की संख्या पर बात करते हुए वन मंत्री ने कहा कि वर्तमान में रणथंभौर में क्षमता से अधिक बाघ हैं, लेकिन अभी उनके विस्थापन की आवश्यकता कम है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में बाघों को रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा जैसे स्थानों पर विस्थापित किया जा सकता है, लेकिन तात्कालिक आवश्यकता नहीं है।

3 hrs ago
user_Rakesh Agarwal
Rakesh Agarwal
पत्रकारिता Sawai Madhopur, Rajasthan•
3 hrs ago

सवाई माधोपुर के रणथंभौर में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक दो दिवसीय CSR कॉन्क्लेव का आयोजन होटल सवाई विलास में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर के उद्योगपति और वनाधिकारी जुटे, जिसका मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास को बढ़ावा देना था। कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि वन मंत्री संजय शर्मा रहे, जबकि वन विभाग के एसीएस आनंद कुमार ने इसकी अध्यक्षता की। अरिजीत बनर्जी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। वन मंत्री संजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में वन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बेहतर कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने देश में पहली बार ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जहाँ लोग बिना नर्सरी जाए ऑनलाइन पौधे मंगवा सकते हैं। साथ ही, राजस्थान में पहली बार संभाग स्तर पर वन मेले लगाए गए हैं, जो भविष्य में जिला स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। मंत्री ने उद्योगपतियों से अपील करते हुए उनके पिछले सहयोग की सराहना की, जिसमें वन विभाग को फंड, वाहन और संसाधन उपलब्ध कराना तथा जंगल में वन चौकियाँ स्थापित करना शामिल था। उन्होंने विशेष रूप से जंगलों से विस्थापित होने वाले गाँवों की मदद का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 2022 में वन विभाग ने विस्थापित परिवारों के पैकेज में बढ़ोतरी की थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। विस्थापित परिवारों को जो उबड़-खाबड़ ज़मीनें आवंटित की जाती हैं, वे वहाँ जाने से हिचकते हैं। वन मंत्री ने उद्योगपतियों से सीएसआर फंड का उपयोग कर इन उबड़-खाबड़ जमीनों पर विस्थापित गाँवों को गोद लेकर अच्छी सुविधाओं वाली कॉलोनियाँ विकसित करने में सहयोग करने का आह्वान किया। रणथंभौर में बाघों की संख्या पर बात करते हुए वन मंत्री ने कहा कि वर्तमान में रणथंभौर में क्षमता से अधिक बाघ हैं, लेकिन अभी उनके विस्थापन की आवश्यकता कम है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में बाघों को रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा जैसे स्थानों पर विस्थापित किया जा सकता है, लेकिन तात्कालिक आवश्यकता नहीं है।

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  • जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर द्वारा 23 जून 2026 को सवाई माधोपुर स्थित एडीआर सेंटर, जिला न्यायालय परिसर में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पोश एक्ट) की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करना था। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में गठित आंतरिक परिवाद समिति के अध्यक्षों और सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रोजेक्टर और पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पोश एक्ट 2013 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव समीक्षा गौतम ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक संस्थान और विभाग में सुरक्षित, सम्मानजनक और लैंगिक समानता पर आधारित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना नियोक्ता का दायित्व है। उन्होंने यह भी बताया कि आंतरिक परिवाद समिति की भूमिका केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता और रोकथाम संबंधी गतिविधियों का संचालन करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। असिस्टेंट एलएडीसी अक्षय राजावत ने प्रतिभागियों को कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की परिभाषा, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, आंतरिक परिवाद समिति की संरचना, समिति के अधिकार एवं कर्तव्य, जांच प्रक्रिया, गोपनीयता बनाए रखने के प्रावधान तथा अधिनियम के उल्लंघन की स्थिति में लागू दंडात्मक प्रावधानों के संबंध में विस्तार से अवगत कराया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यवहारिक उदाहरणों और प्रकरणों के माध्यम से अधिनियम की व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से अपने-अपने विभागों में पोश एक्ट के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विकास अधिकारी पंचायत समिति जगदीश प्रसाद मीना, इंस्पेक्टर रूकमणी गुर्जर, जेवीवीएनएल से कनिष्ठ विधि सहायक निधि शर्मा, सखी वनस्टॉप सेन्टर की प्रबन्धक हीना सिंह, नगर विकास न्याय तहसीलदार विष्णु माथुर, अति. खण्ड विकास अधिकारी जिला परिषद रामराज मीना, अधिकार मित्र सुनिता जोनवाल सहित विभिन्न विभागों में गठित आंतरिक परिवाद समिति के सदस्य शामिल रहे।
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    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर द्वारा 23 जून 2026 को सवाई माधोपुर स्थित एडीआर सेंटर, जिला न्यायालय परिसर में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पोश एक्ट) की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करना था। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में गठित आंतरिक परिवाद समिति के अध्यक्षों और सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रोजेक्टर और पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पोश एक्ट 2013 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव समीक्षा गौतम ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक संस्थान और विभाग में सुरक्षित, सम्मानजनक और लैंगिक समानता पर आधारित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना नियोक्ता का दायित्व है। उन्होंने यह भी बताया कि आंतरिक परिवाद समिति की भूमिका केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता और रोकथाम संबंधी गतिविधियों का संचालन करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। असिस्टेंट एलएडीसी अक्षय राजावत ने प्रतिभागियों को कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की परिभाषा, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, आंतरिक परिवाद समिति की संरचना, समिति के अधिकार एवं कर्तव्य, जांच प्रक्रिया, गोपनीयता बनाए रखने के प्रावधान तथा अधिनियम के उल्लंघन की स्थिति में लागू दंडात्मक प्रावधानों के संबंध में विस्तार से अवगत कराया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यवहारिक उदाहरणों और प्रकरणों के माध्यम से अधिनियम की व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से अपने-अपने विभागों में पोश एक्ट के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विकास अधिकारी पंचायत समिति जगदीश प्रसाद मीना, इंस्पेक्टर रूकमणी गुर्जर, जेवीवीएनएल से कनिष्ठ विधि सहायक निधि शर्मा, सखी वनस्टॉप सेन्टर की प्रबन्धक हीना सिंह, नगर विकास न्याय तहसीलदार विष्णु माथुर, अति. खण्ड विकास अधिकारी जिला परिषद रामराज मीना, अधिकार मित्र सुनिता जोनवाल सहित विभिन्न विभागों में गठित आंतरिक परिवाद समिति के सदस्य शामिल रहे।
    user_Rakesh Agarwal
    Rakesh Agarwal
    पत्रकारिता Sawai Madhopur, Rajasthan•
    15 min ago
  • रवासा से हिंदूपुरा जाने वाली सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है, जिसकी जिम्मेदारी न तो शासन उठा रहा है और न ही प्रशासन। इस स्थिति के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की इतनी जर्जर स्थिति के बावजूद, इस पर ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की दिक्कतें और बढ़ती जा रही हैं।
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    रवासा से हिंदूपुरा जाने वाली सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है, जिसकी जिम्मेदारी न तो शासन उठा रहा है और न ही प्रशासन। इस स्थिति के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की इतनी जर्जर स्थिति के बावजूद, इस पर ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की दिक्कतें और बढ़ती जा रही हैं।
    user_Sanjay rasoolpura social worker
    Sanjay rasoolpura social worker
    Lawyer Sawai Madhopur•
    4 hrs ago
  • राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर में आयोजित दो दिवसीय सीएसआर कॉन्क्लेव का पहला दिन अत्यंत सफल और सार्थक रहा। इस कॉन्क्लेव में विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक विकास हेतु कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में, माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही अधिक प्रभावी बन सकता है। उन्होंने राज्य में जैव विविधता संरक्षण, हरित विकास और सतत आजीविका संवर्धन के लिए CSR के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव के पहले दिन के बाद, माननीय वन मंत्री ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 8 बाघों के दर्शन हुए, जिनमें वयस्क बाघ, बाघिनें और शावक शामिल थे। बाघों का यह सफल दिखना रणथम्भौर में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन की प्रभावशीलता को दर्शाता है। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने माननीय मंत्री को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीव निगरानी, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्री ने संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के प्रयासों की प्रशंसा की। कॉन्क्लेव के पहले दिन विभिन्न संस्थाओं द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण, हरित अवसंरचना, इको-टूरिज्म विकास, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई प्रस्तावों पर सकारात्मक चर्चा हुई। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्क्लेव राज्य में संरक्षण और विकास के क्षेत्र में CSR निवेश को एक नई दिशा प्रदान करेगा। द्वितीय दिवस पर तकनीकी सत्रों, विषयगत प्रस्तुतियों और संभावित CSR साझेदारियों पर विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी।
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    राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर में आयोजित दो दिवसीय सीएसआर कॉन्क्लेव का पहला दिन अत्यंत सफल और सार्थक रहा। इस कॉन्क्लेव में विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक विकास हेतु कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया।

कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में, माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही अधिक प्रभावी बन सकता है। उन्होंने राज्य में जैव विविधता संरक्षण, हरित विकास और सतत आजीविका संवर्धन के लिए CSR के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव के पहले दिन के बाद, माननीय वन मंत्री ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 8 बाघों के दर्शन हुए, जिनमें वयस्क बाघ, बाघिनें और शावक शामिल थे। बाघों का यह सफल दिखना रणथम्भौर में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने माननीय मंत्री को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीव निगरानी, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्री ने संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के प्रयासों की प्रशंसा की। कॉन्क्लेव के पहले दिन विभिन्न संस्थाओं द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण, हरित अवसंरचना, इको-टूरिज्म विकास, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई प्रस्तावों पर सकारात्मक चर्चा हुई। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्क्लेव राज्य में संरक्षण और विकास के क्षेत्र में CSR निवेश को एक नई दिशा प्रदान करेगा। द्वितीय दिवस पर तकनीकी सत्रों, विषयगत प्रस्तुतियों और संभावित CSR साझेदारियों पर विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी।
    user_नरेन्द्र शर्मा
    नरेन्द्र शर्मा
    Local News Reporter सवाई माधोपुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • सवाई माधोपुर जिले के सारसोप गांव स्थित ऐतिहासिक किले पर विराजमान मां चामुंडा माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी दिव्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं। विशेष अवसरों, नवरात्रों और अन्य धार्मिक आयोजनों पर तो दूर-दूर से भक्तगण मां के दरबार में शीश नवाने आते हैं। मंदिर परिसर से आसपास का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है, जो भक्तों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है। ग्रामीणों की प्रबल मान्यता है कि मां चामुंडा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जिससे यहां का आध्यात्मिक वातावरण सदैव जीवंत बना रहता है। जय माता रानी।
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    सवाई माधोपुर जिले के सारसोप गांव स्थित ऐतिहासिक किले पर विराजमान मां चामुंडा माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी दिव्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।

प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं। विशेष अवसरों, नवरात्रों और अन्य धार्मिक आयोजनों पर तो दूर-दूर से भक्तगण मां के दरबार में शीश नवाने आते हैं। मंदिर परिसर से आसपास का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है, जो भक्तों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है।

ग्रामीणों की प्रबल मान्यता है कि मां चामुंडा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जिससे यहां का आध्यात्मिक वातावरण सदैव जीवंत बना रहता है। जय माता रानी।
    user_Ravi  Dainik bhaskar
    Ravi Dainik bhaskar
    Photographer चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर बनास नदी बॉर्डर पर बजरी परिवहन व्यवस्था ठप हो गई है, जिससे इसरदा-सोलापुर और बनेठा क्षेत्र में बजरी ढुलाई रुक गई है। आरोप है कि रवन्ना (ई-परमिट) और रॉयल्टी होने के बावजूद वाहनों को रोका गया है। इस कारण दर्जनों वाहन कई घंटों से नदी क्षेत्र में खड़े हैं, जहां उन्हें न तो आगे जाने की अनुमति मिल रही है और न ही वापस लौटने का रास्ता है। इस स्थिति के चलते वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर खाने-पीने की व्यवस्था न होने के कारण वे अत्यधिक परेशान हैं। यह विवाद स्थानीय विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच फँसे वाहनों के कारण उत्पन्न हुआ है। वाहन चालकों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है, साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि वैध परिवहन को क्यों रोका जा रहा है। बनास नदी में फँसे इन दर्जनों बजरी वाहनों के चालकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
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    राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर बनास नदी बॉर्डर पर बजरी परिवहन व्यवस्था ठप हो गई है, जिससे इसरदा-सोलापुर और बनेठा क्षेत्र में बजरी ढुलाई रुक गई है। आरोप है कि रवन्ना (ई-परमिट) और रॉयल्टी होने के बावजूद वाहनों को रोका गया है। इस कारण दर्जनों वाहन कई घंटों से नदी क्षेत्र में खड़े हैं, जहां उन्हें न तो आगे जाने की अनुमति मिल रही है और न ही वापस लौटने का रास्ता है।

इस स्थिति के चलते वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर खाने-पीने की व्यवस्था न होने के कारण वे अत्यधिक परेशान हैं। यह विवाद स्थानीय विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच फँसे वाहनों के कारण उत्पन्न हुआ है।

वाहन चालकों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है, साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि वैध परिवहन को क्यों रोका जा रहा है। बनास नदी में फँसे इन दर्जनों बजरी वाहनों के चालकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
    user_Irfan Rajasthan patrika
    Irfan Rajasthan patrika
    Local News Reporter चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार, सवाई माधोपुर जिले में बिजली सुधार के लिए शुरू किया गया लगभग 200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट अटक गया है। यह स्थिति RDSS (रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) प्रोजेक्ट की विफलता के कारण पैदा हुई है।
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    जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार, सवाई माधोपुर जिले में बिजली सुधार के लिए शुरू किया गया लगभग 200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट अटक गया है। यह स्थिति RDSS (रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) प्रोजेक्ट की विफलता के कारण पैदा हुई है।
    user_जनहित आवाज न्यूज़
    जनहित आवाज न्यूज़
    Newsagent Khandar, Sawai Madhopur•
    17 hrs ago
  • राजस्थान के ककोड क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब भगवान के घर भी सुरक्षित नहीं रहे। बीती देर रात चोरों ने प्रसिद्ध ककोड पलसे बालाजी मंदिर को अपना निशाना बनाते हुए वहाँ रखा भारी-भरकम दानपात्र चुरा लिया और फरार हो गए। इस घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, क्योंकि पिछले एक साल से क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं और उनका संयम अब जवाब दे रहा है। यह कोई पहली घटना नहीं है; ककोड और आसपास के इलाकों में पिछले एक साल में एक दर्जन से ज्यादा चोरियां हो चुकी हैं, जिनमें पुलिस एक भी मामले का खुलासा करने में नाकाम रही है। इससे पहले चोर देवनारायण मंदिर से तांबे का कलश, तेजाजी मंदिर से पीतल का घंटा, तांबे का कलश और पीतल के बर्तन चुरा चुके हैं। वैद्यनाथ धाम और बरड के बालाजी स्थान पर भी चोरों ने हाथ साफ कर पुलिस को खुली चुनौती दी थी। क्षेत्र में बढ़ते अपराधों की सबसे बड़ी वजह ककोड पुलिस चौकी का स्टाफ विहीन होना है। यह चौकी वर्तमान में केवल एक हेड कांस्टेबल और एक सिपाही के भरोसे चल रही है, जिसमें भी हेड कांस्टेबल सप्ताह में तीन दिन बनेठा थाने पर रहते हैं, जिससे अधिकांश समय चौकी पर ताला लगा रहता है। सूत्रों के मुताबिक, अपराधियों का खौफ इस कदर है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा यहाँ लगाए गए कार्मिक भी ज्वाइन करने से कतरा रहे हैं। बताया गया है कि यहाँ ट्रांसफर किए गए एक एएसआई (ASI) ने तो डर के मारे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए प्रार्थना पत्र तक दे दिया है। पुलिसकर्मियों के इस डर के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि करीब एक माह पूर्व ककोड चौकी क्षेत्र में अकेले गश्त कर रहे एक पुलिसकर्मी को शिकारियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। लगातार हो रही चोरियों और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 'खाकी ही सुरक्षित नहीं है' और पुलिसकर्मी यहां आने से डर रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ककोड चौकी में पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं किया गया और इन चोरियों का खुलासा नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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    राजस्थान के ककोड क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब भगवान के घर भी सुरक्षित नहीं रहे। बीती देर रात चोरों ने प्रसिद्ध ककोड पलसे बालाजी मंदिर को अपना निशाना बनाते हुए वहाँ रखा भारी-भरकम दानपात्र चुरा लिया और फरार हो गए। इस घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, क्योंकि पिछले एक साल से क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं और उनका संयम अब जवाब दे रहा है।

यह कोई पहली घटना नहीं है; ककोड और आसपास के इलाकों में पिछले एक साल में एक दर्जन से ज्यादा चोरियां हो चुकी हैं, जिनमें पुलिस एक भी मामले का खुलासा करने में नाकाम रही है। इससे पहले चोर देवनारायण मंदिर से तांबे का कलश, तेजाजी मंदिर से पीतल का घंटा, तांबे का कलश और पीतल के बर्तन चुरा चुके हैं। वैद्यनाथ धाम और बरड के बालाजी स्थान पर भी चोरों ने हाथ साफ कर पुलिस को खुली चुनौती दी थी।

क्षेत्र में बढ़ते अपराधों की सबसे बड़ी वजह ककोड पुलिस चौकी का स्टाफ विहीन होना है। यह चौकी वर्तमान में केवल एक हेड कांस्टेबल और एक सिपाही के भरोसे चल रही है, जिसमें भी हेड कांस्टेबल सप्ताह में तीन दिन बनेठा थाने पर रहते हैं, जिससे अधिकांश समय चौकी पर ताला लगा रहता है। सूत्रों के मुताबिक, अपराधियों का खौफ इस कदर है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा यहाँ लगाए गए कार्मिक भी ज्वाइन करने से कतरा रहे हैं। बताया गया है कि यहाँ ट्रांसफर किए गए एक एएसआई (ASI) ने तो डर के मारे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए प्रार्थना पत्र तक दे दिया है। पुलिसकर्मियों के इस डर के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि करीब एक माह पूर्व ककोड चौकी क्षेत्र में अकेले गश्त कर रहे एक पुलिसकर्मी को शिकारियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।

लगातार हो रही चोरियों और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 'खाकी ही सुरक्षित नहीं है' और पुलिसकर्मी यहां आने से डर रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ककोड चौकी में पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं किया गया और इन चोरियों का खुलासा नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
    user_Anand Sharma
    Anand Sharma
    उनियारा, टोंक, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • सवाई माधोपुर के रणथंभौर में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक दो दिवसीय CSR कॉन्क्लेव का आयोजन होटल सवाई विलास में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर के उद्योगपति और वनाधिकारी जुटे, जिसका मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास को बढ़ावा देना था। कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि वन मंत्री संजय शर्मा रहे, जबकि वन विभाग के एसीएस आनंद कुमार ने इसकी अध्यक्षता की। अरिजीत बनर्जी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। वन मंत्री संजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में वन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बेहतर कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने देश में पहली बार ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जहाँ लोग बिना नर्सरी जाए ऑनलाइन पौधे मंगवा सकते हैं। साथ ही, राजस्थान में पहली बार संभाग स्तर पर वन मेले लगाए गए हैं, जो भविष्य में जिला स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। मंत्री ने उद्योगपतियों से अपील करते हुए उनके पिछले सहयोग की सराहना की, जिसमें वन विभाग को फंड, वाहन और संसाधन उपलब्ध कराना तथा जंगल में वन चौकियाँ स्थापित करना शामिल था। उन्होंने विशेष रूप से जंगलों से विस्थापित होने वाले गाँवों की मदद का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 2022 में वन विभाग ने विस्थापित परिवारों के पैकेज में बढ़ोतरी की थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। विस्थापित परिवारों को जो उबड़-खाबड़ ज़मीनें आवंटित की जाती हैं, वे वहाँ जाने से हिचकते हैं। वन मंत्री ने उद्योगपतियों से सीएसआर फंड का उपयोग कर इन उबड़-खाबड़ जमीनों पर विस्थापित गाँवों को गोद लेकर अच्छी सुविधाओं वाली कॉलोनियाँ विकसित करने में सहयोग करने का आह्वान किया। रणथंभौर में बाघों की संख्या पर बात करते हुए वन मंत्री ने कहा कि वर्तमान में रणथंभौर में क्षमता से अधिक बाघ हैं, लेकिन अभी उनके विस्थापन की आवश्यकता कम है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में बाघों को रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा जैसे स्थानों पर विस्थापित किया जा सकता है, लेकिन तात्कालिक आवश्यकता नहीं है।
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    सवाई माधोपुर के रणथंभौर में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक दो दिवसीय CSR कॉन्क्लेव का आयोजन होटल सवाई विलास में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर के उद्योगपति और वनाधिकारी जुटे, जिसका मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास को बढ़ावा देना था।

कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि वन मंत्री संजय शर्मा रहे, जबकि वन विभाग के एसीएस आनंद कुमार ने इसकी अध्यक्षता की। अरिजीत बनर्जी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। वन मंत्री संजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में वन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बेहतर कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने देश में पहली बार ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जहाँ लोग बिना नर्सरी जाए ऑनलाइन पौधे मंगवा सकते हैं। साथ ही, राजस्थान में पहली बार संभाग स्तर पर वन मेले लगाए गए हैं, जो भविष्य में जिला स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।

मंत्री ने उद्योगपतियों से अपील करते हुए उनके पिछले सहयोग की सराहना की, जिसमें वन विभाग को फंड, वाहन और संसाधन उपलब्ध कराना तथा जंगल में वन चौकियाँ स्थापित करना शामिल था। उन्होंने विशेष रूप से जंगलों से विस्थापित होने वाले गाँवों की मदद का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 2022 में वन विभाग ने विस्थापित परिवारों के पैकेज में बढ़ोतरी की थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। विस्थापित परिवारों को जो उबड़-खाबड़ ज़मीनें आवंटित की जाती हैं, वे वहाँ जाने से हिचकते हैं। वन मंत्री ने उद्योगपतियों से सीएसआर फंड का उपयोग कर इन उबड़-खाबड़ जमीनों पर विस्थापित गाँवों को गोद लेकर अच्छी सुविधाओं वाली कॉलोनियाँ विकसित करने में सहयोग करने का आह्वान किया।

रणथंभौर में बाघों की संख्या पर बात करते हुए वन मंत्री ने कहा कि वर्तमान में रणथंभौर में क्षमता से अधिक बाघ हैं, लेकिन अभी उनके विस्थापन की आवश्यकता कम है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में बाघों को रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा जैसे स्थानों पर विस्थापित किया जा सकता है, लेकिन तात्कालिक आवश्यकता नहीं है।
    user_Rakesh Agarwal
    Rakesh Agarwal
    पत्रकारिता Sawai Madhopur, Rajasthan•
    3 hrs ago
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