logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

6 hrs ago
user_Bashir Khan
Bashir Khan
Farmer Gharsana, Sri Ganganagar•
6 hrs ago

More news from Sri Ganganagar and nearby areas
  • Post by Bashir Khan
    1
    Post by Bashir Khan
    user_Bashir Khan
    Bashir Khan
    Farmer Gharsana, Sri Ganganagar•
    6 hrs ago
  • बुजुर्गों का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
    1
    बुजुर्गों का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
    user_User2307
    User2307
    Nurse अनूपगढ़, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • Post by Sakir Husen1983 news reporter 8824615723
    1
    Post by Sakir Husen1983 news reporter 8824615723
    user_Sakir Husen1983 news reporter 8824615723
    Sakir Husen1983 news reporter 8824615723
    Bikaner, Rajasthan•
    11 hrs ago
  • बीकानेर के रणजीतपुरा में दुष्कर्म और हत्या का मामला: आरोपी की चालाकी से गाँव स्तब्ध तावीज बना गले का फंदा
    1
    बीकानेर के रणजीतपुरा में दुष्कर्म और हत्या का मामला: आरोपी की चालाकी से गाँव स्तब्ध तावीज बना गले का फंदा
    user_आईरा समाचार बीकानेर
    आईरा समाचार बीकानेर
    Journalist Bikaner, Rajasthan•
    11 hrs ago
  • बीकानेर का बैडशीट छपाई का एक मात्र स्थान मोहता सराय, हाफिज कॉलोनी , भाटी भवन से आगे बासनी जायका के पास
    2
    बीकानेर का बैडशीट छपाई का एक मात्र स्थान मोहता सराय, हाफिज कॉलोनी , भाटी भवन से आगे बासनी जायका के पास
    user_साबीर भाटी
    साबीर भाटी
    Screen printing shop बीकानेर, बीकानेर, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Ram Ram ji
    1
    Ram Ram ji
    user_जगदीश श्री गंगानगर
    जगदीश श्री गंगानगर
    Journalist गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    53 min ago
  • भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के पास आज सुबह कॉल आई थी। सद्भावना नगर से जहां पर बताया गया है कि शिखाधारी साही (हिस्ट्रिक्स इंडिका) है। जख्मी है। जिसे तुरंत रेस्क्यू किया जाए। भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के संस्थापक राजेन्द्र आलसिखा मौके पर पहुंचे। और रेस्क्यू किया वेटरिनरी हॉस्पिटल श्रीगंगानगर में उसका ट्रीटमेंट किया और वन विभाग वालों को सौंप दिया था। वन विभाग वालों के पास रखने के लिए कोई भी पिंजरा या जाल नहीं था।
    1
    भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के पास आज सुबह कॉल आई थी। सद्भावना नगर से जहां पर बताया गया है कि शिखाधारी साही (हिस्ट्रिक्स इंडिका) है। जख्मी है। जिसे तुरंत रेस्क्यू किया जाए। भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के संस्थापक राजेन्द्र आलसिखा मौके पर पहुंचे। और रेस्क्यू किया वेटरिनरी हॉस्पिटल श्रीगंगानगर में उसका ट्रीटमेंट किया और वन विभाग वालों को सौंप दिया था। वन विभाग
वालों के पास रखने के लिए कोई भी पिंजरा या जाल नहीं था।
    user_Rajinder allsikha
    Rajinder allsikha
    NGO Worker गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • इकबाल खान बीकानेर,द्वारा , साल 1993 में अफ्रीकी देश सूडान भयानक अकाल से गुजर रहा था। भूख और बीमारी से हजारों लोग मर रहे थे। इसी दौरान दक्षिण अफ्रीका के फोटो पत्रकार केविन कार्टर वहां रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे। एक दिन उन्होंने एक मार्मिक दृश्य देखा। एक कुपोषित बच्चा जमीन पर झुका हुआ था और राहत शिविर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। कुछ दूरी पर एक गिद्ध खड़ा था, मानो वह बच्चे के मरने का इंतजार कर रहा हो। यह दृश्य बेहद दर्दनाक था। कार्टर ने उस पल को अपने कैमरे में कैद कर लिया।यह तस्वीर 26 मार्च 1993 को अमेरिकी अखबार दा न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित हुई। तस्वीर छपते ही दुनिया भर में हलचल मच गई। लोगों ने पहली बार अकाल की भयावह सच्चाई को इतने करीब से देखा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूडान के लिए राहत और सहायता की मांग तेज हो गई। इस तस्वीर के लिए 1994 में केविन कार्टर को पत्रकारिता का प्रतिष्ठित पुलित्जर प्राइज दिया गया। हालांकि, पुरस्कार मिलने के साथ ही विवाद भी खड़ा हो गया। एक दिन केविन कार्टर के पास एक फोन आया और बोला वहां कितने गिद्ध थे, पत्रकार ने जवाब दिया एक , उस कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा नहीं दो थे एक वो जो उसके मरने का इंतजार कर रहा था दूसरा वो जो उसकी फोटो ले रहा था,अगर वो फोटो लेने के बजाय बच्चे की मदद करता तो शायद बच सकता था, कार्टर ने बाद में कहा कि उन्होंने फोटो लेने के बाद गिद्ध को भगा दिया था और उन्हें बीमारी के खतरे के कारण बच्चों को छूने से मना किया गया था। उस बच्चे का आगे क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं हो सका,लेकिन लगातार आलोचना और युद्ध-अकाल की भयावह यादों ने कार्टर को मानसिक रूप से तोड़ दिया। 27 जुलाई 1994 को उन्होंने आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि वे दर्द, भूख और मौत के दृश्यों से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे थे।यह तस्वीर आज भी पत्रकारिता, मानवता और नैतिक जिम्मेदारी पर बहस का विषय बनी हुई है। वैसे केविन कार्टर जैसे पत्रकार आज इस दुनिया में बहुत कम दिखाई देते हैं। आज का दौर ऐसा है जहां कई जगहों पर मीडिया पर यह आरोप लगता है कि वह संवेदनशील घटनाओं पर भी राजनीति तलाश लेती है, बहसें चलती रहती हैं और शोर बढ़ता जाता है।
    1
    इकबाल खान बीकानेर,द्वारा , साल 1993 में अफ्रीकी देश सूडान भयानक अकाल से गुजर रहा था। भूख और बीमारी से हजारों लोग मर रहे थे। इसी दौरान दक्षिण अफ्रीका के फोटो पत्रकार  केविन कार्टर  वहां रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे।
एक दिन उन्होंने एक मार्मिक दृश्य देखा। एक कुपोषित बच्चा जमीन पर झुका हुआ था और राहत शिविर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। कुछ दूरी पर एक गिद्ध खड़ा था, मानो वह बच्चे के मरने का इंतजार कर रहा हो। यह दृश्य बेहद दर्दनाक था। कार्टर ने उस पल को अपने कैमरे में कैद कर लिया।यह तस्वीर 26 मार्च 1993 को अमेरिकी अखबार  दा न्यूयॉर्क टाइम्स  में प्रकाशित हुई। तस्वीर छपते ही दुनिया भर में हलचल मच गई। लोगों ने पहली बार अकाल की भयावह सच्चाई को इतने करीब से देखा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूडान के लिए राहत और सहायता की मांग तेज हो गई।
इस तस्वीर के लिए 1994 में केविन कार्टर को पत्रकारिता का प्रतिष्ठित  पुलित्जर प्राइज  दिया गया। हालांकि, पुरस्कार मिलने के साथ ही विवाद भी खड़ा हो गया। एक दिन केविन कार्टर  के पास एक फोन आया और बोला वहां कितने गिद्ध थे, पत्रकार ने जवाब दिया एक , उस कॉल करने वाले व्यक्ति  ने कहा नहीं दो थे एक वो जो उसके मरने का इंतजार कर रहा था दूसरा वो जो उसकी फोटो ले रहा था,अगर वो फोटो लेने के बजाय बच्चे की मदद करता तो शायद बच सकता था, कार्टर ने बाद में कहा कि उन्होंने फोटो लेने के बाद गिद्ध को भगा दिया था और उन्हें बीमारी के खतरे के कारण बच्चों को छूने से मना किया गया था। उस बच्चे का आगे क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं हो सका,लेकिन लगातार आलोचना और युद्ध-अकाल की भयावह यादों ने कार्टर को मानसिक रूप से तोड़ दिया। 27 जुलाई 1994 को उन्होंने आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि वे दर्द, भूख और मौत के दृश्यों से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे थे।यह तस्वीर आज भी पत्रकारिता, मानवता और नैतिक जिम्मेदारी पर बहस का विषय बनी हुई है। वैसे केविन कार्टर जैसे पत्रकार आज इस दुनिया में बहुत कम दिखाई देते हैं। आज का दौर ऐसा है जहां कई जगहों पर मीडिया पर यह आरोप लगता है कि वह संवेदनशील घटनाओं पर भी राजनीति तलाश लेती है, बहसें चलती रहती हैं और शोर बढ़ता जाता है।
    user_आईरा समाचार बीकानेर
    आईरा समाचार बीकानेर
    Journalist Bikaner, Rajasthan•
    12 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.