पन्ना के गढ़ीपड़रिया ग्राम पंचायत अंतर्गत घुसरहा मोहल्ले में जल निगम की लापरवाही के कारण इस वर्ष भारी जलभराव की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जल निगम ने पुल के ऊपर बिछाई गई पाइपलाइन को ढंकने के लिए लगभग एक फीट ऊंची कंक्रीट की दीवार बना दी है। इस दीवार के खड़े होने से पुल की जल निकासी क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, बृंदाबन बांध के ओवरफ्लो होने पर हर साल पानी इस पुल के ऊपर से होकर बहता है और कई बार लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। अब पुल की ऊंचाई पर अतिरिक्त कंक्रीट डाल दिए जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इससे न केवल घुसरहा मोहल्ले के मकानों में, बल्कि समीप स्थित स्कूल परिसर में भी पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बारिश के दिनों में जनजीवन प्रभावित होने और बच्चों की पढ़ाई बाधित होने की चिंता सता रही है। इस संकट को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि अधिकारी मौके का निरीक्षण कर पुल पर बनाई गई इस कंक्रीट संरचना की तकनीकी जांच करवाएं और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि बरसात के मौसम में किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि को रोका जा सके।
पन्ना के गढ़ीपड़रिया ग्राम पंचायत अंतर्गत घुसरहा मोहल्ले में जल निगम की लापरवाही के कारण इस वर्ष भारी जलभराव की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जल निगम ने पुल के ऊपर बिछाई गई पाइपलाइन को ढंकने के लिए लगभग एक फीट ऊंची कंक्रीट की दीवार बना दी है। इस दीवार के खड़े होने से पुल की जल निकासी क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, बृंदाबन बांध के ओवरफ्लो होने पर हर साल पानी इस पुल के ऊपर से होकर बहता है और कई बार लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। अब पुल की ऊंचाई पर अतिरिक्त कंक्रीट डाल दिए जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव
बाधित होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इससे न केवल घुसरहा मोहल्ले के मकानों में, बल्कि समीप स्थित स्कूल परिसर में भी पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बारिश के दिनों में जनजीवन प्रभावित होने और बच्चों की पढ़ाई बाधित होने की चिंता सता रही है। इस संकट को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि अधिकारी मौके का निरीक्षण कर पुल पर बनाई गई इस कंक्रीट संरचना की तकनीकी जांच करवाएं और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि बरसात के मौसम में किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि को रोका जा सके।
- पन्ना के गढ़ीपड़रिया ग्राम पंचायत अंतर्गत घुसरहा मोहल्ले में जल निगम की लापरवाही के कारण इस वर्ष भारी जलभराव की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जल निगम ने पुल के ऊपर बिछाई गई पाइपलाइन को ढंकने के लिए लगभग एक फीट ऊंची कंक्रीट की दीवार बना दी है। इस दीवार के खड़े होने से पुल की जल निकासी क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, बृंदाबन बांध के ओवरफ्लो होने पर हर साल पानी इस पुल के ऊपर से होकर बहता है और कई बार लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। अब पुल की ऊंचाई पर अतिरिक्त कंक्रीट डाल दिए जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इससे न केवल घुसरहा मोहल्ले के मकानों में, बल्कि समीप स्थित स्कूल परिसर में भी पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बारिश के दिनों में जनजीवन प्रभावित होने और बच्चों की पढ़ाई बाधित होने की चिंता सता रही है। इस संकट को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि अधिकारी मौके का निरीक्षण कर पुल पर बनाई गई इस कंक्रीट संरचना की तकनीकी जांच करवाएं और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि बरसात के मौसम में किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि को रोका जा सके।2
- मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की तारा ग्राम पंचायत में गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ ग्राम पंचायत के सरपंच और उनके साथियों पर एक युवक को बीच सड़क लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। बेखौफ आरोपियों ने युवक को सरेआम घेरकर डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे युवक खून से लथपथ होकर सड़क पर ही गिर पड़ा। अचानक हुई इस मारपीट से इलाके में हड़कंप मच गया और घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस घटना के बाद यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में दबंगों के सिर से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है? पीड़ित और परिजन पुलिस से आरोपियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई और सख्त धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को ओबीसी महासभा के बैनर तले हजारों की संख्या में छात्रों, किसानों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए कूच किया। प्रदर्शनकारी प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू करने और सरकारी भर्तियों में 13% पदों पर लगाए गए होल्ड को तत्काल समाप्त करने की मांग कर रहे थे। विधानसभा की ओर बढ़ रहे इन प्रदर्शनकारियों को जब पुलिस ने रंगमहल चौराहे पर भारी बैरिकेडिंग करके रोका, तो दोनों पक्षों के बीच तीखा संघर्ष देखने को मिला। इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पर चढ़कर अपना कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (वज्र वाहन) का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं, इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला कम नहीं हुआ और वे वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर थाने ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में ओबीसी महासभा राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य धर्मेंद्र कुशवाहा, राकेश लोधी, लोकेंद्र गुर्जर, सीबी कुशवाहा, डॉ. बृजेंद्र यादव, रूपेश यादव और ओबीसी महासभा युवा मोर्चा के सतना जिला अध्यक्ष दीपनारायण कुशवाहा (राजा सतना) सहित कई क्रांतिकारी साथी शामिल रहे। ओबीसी महासभा के इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी भारी समर्थन मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर, कांग्रेस विधायक सचिन यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने खुद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि यदि ओबीसी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी बंद नहीं की गई, तो यह आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक और भी उग्र रूप धारण करेगा। वहीं, ओबीसी महासभा के नेताओं ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का यह दमनकारी रवैया उनके संघर्ष को रोक नहीं सकता और जब तक उन्हें संवैधानिक 27% अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी।1
- पन्ना जिले के अमानगंज स्थित शासकीय महाविद्यालय में भारी अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं, जिससे छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस अव्यवस्था को लेकर सीधे तौर पर यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर बच्चों के भविष्य के साथ किए जा रहे इस खिलवाड़ और महाविद्यालय की भारी अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार कौन है?1
- उचेहरा में NEET पेपर लीक के मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं ने मशाल जुलूस निकाला। यह मशाल जुलूस सोनम वांगचुंग के समर्थन में भी निकाला गया। प्रदर्शनकारियों का यह जुलूस रपटा तिराहा से प्रारंभ होकर मुख्य मार्ग होते हुए बस स्टैंड स्थित महात्मा गांधी स्मारक पहुंचा और वहां राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।1
- मध्यप्रदेश की राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी द्वारा ब्राह्मण एवं राजपूत (ठाकुर) समाज के संबंध में दिए गए सार्वजनिक बयान पर स्पष्टीकरण की मांग को लेकर सामाजिक संगठनों का गुस्सा भड़क उठा है। इसी सिलसिले में विभिन्न सामाजिक संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल सतना पहुंचा। सवर्ण अधिकारी एवं कर्मचारी संगठन (म.प्र.) के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर अजय तिवारी के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यमंत्री से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संवाद करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर उन्हें मंत्री निवास तक जाने की अनुमति नहीं दी। मार्ग में रोके जाने के बाद, प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों के माध्यम से राज्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय ब्राह्मण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय त्रिपाठी, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अवधेश उर्मिलिया, और श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष भरत सिंह परिहार के साथ-साथ पन्ना, सतना, रीवा, कटनी और अन्य जिलों के कई पदाधिकारी शामिल थे। संगठनों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने 19 जुलाई 2026 को ही जिला एवं पुलिस प्रशासन को लिखित सूचना देकर यह साफ कर दिया था कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का प्रदर्शन, घेराव या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ना नहीं है, बल्कि वे केवल सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए तथ्यात्मक संवाद करना चाहते हैं। ज्ञापन सौंपते हुए प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर अजय तिवारी ने कहा कि किसी भी समाज पर बिना पर्याप्त आधार के सार्वजनिक आरोप लगाने से व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने राज्यमंत्री को अपने बयान पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय में ऐसा नहीं किया गया, तो संगठन पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से ज्ञापन, संवाद और विरोध कार्यक्रम आयोजित करेगा। वहीं, अखिल भारतीय ब्राह्मण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय त्रिपाठी ने कहा कि किसी व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना ठीक नहीं है। इस मौके पर पन्ना से भूपेंद्र सिंह परमार, अखिल भार्गव, आलोक खरे, धीरेन्द्र खरे, गंगाप्रसाद शर्मा, सुरेंद्र खरे, अंकित पाठक, सतीश शर्मा, कमल सिंह राजपूत, मनीष पाठक और शिवेंद्र मिश्रा सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।1
- पन्ना जिले की तारा ग्राम पंचायत में गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ ग्राम पंचायत के सरपंच और उनके साथियों पर एक युवक को बीच सड़क लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। इन बेखौफ आरोपियों ने युवक को सरेआम घेरकर डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे पीड़ित खून से लथपथ होकर सड़क पर ही गिर पड़ा। अचानक हुई इस मारपीट से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पूरी सड़क रणभूमि में तब्दील हो गई, जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस खौफनाक घटना के बाद पीड़ित और उसके परिजनों द्वारा पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और सख्त धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की जा रही है। ऐसे में यह बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या जिले में दबंगों के सिर से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है?1
- उचेहरा में छात्रों ने सोमवार को सोनम वांगचुक के समर्थन में एक शांतिपूर्ण मशाल जुलूस निकाला और वर्तमान शिक्षा नीति व लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ अपना कड़ा विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करने और पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। इस मशाल जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा दीपक प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। कार्यक्रम के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस बल मुस्तैद रहा। वहीं, छात्रों के इस प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ एवं युवा नेता भी इस मशाल जुलूस में शामिल हुए।1