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देश में गौ रक्षा से जुड़े एक मामले में न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, चौदह गौ रक्षकों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। वहीं, दूसरी ओर गौ तस्करों को मात्र दस दिनों के भीतर ज़मानत मिल गई, जिस पर 'वाह सरकार' कहकर तंज़ कसा गया है। यह स्थिति न्याय के कथित दोहरे मापदंड पर गहरा आक्रोश और प्रश्नचिह्न लगाती है।
Om Singh
देश में गौ रक्षा से जुड़े एक मामले में न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, चौदह गौ रक्षकों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। वहीं, दूसरी ओर गौ तस्करों को मात्र दस दिनों के भीतर ज़मानत मिल गई, जिस पर 'वाह सरकार' कहकर तंज़ कसा गया है। यह स्थिति न्याय के कथित दोहरे मापदंड पर गहरा आक्रोश और प्रश्नचिह्न लगाती है।
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- देश में गौ रक्षा से जुड़े एक मामले में न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, चौदह गौ रक्षकों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। वहीं, दूसरी ओर गौ तस्करों को मात्र दस दिनों के भीतर ज़मानत मिल गई, जिस पर 'वाह सरकार' कहकर तंज़ कसा गया है। यह स्थिति न्याय के कथित दोहरे मापदंड पर गहरा आक्रोश और प्रश्नचिह्न लगाती है।1
- हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड अंतर्गत डांटो कला के चरवा अहरा में लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे गहरीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का विधिवत शिलान्यास किए बिना ही कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिससे योजना की पारदर्शिता एवं वैधता पर गहरा संदेह उत्पन्न हो रहा है और उनमें आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों के अनुसार, कार्यस्थल पर योजना से संबंधित कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है, जिसके कारण योजना की स्वीकृत राशि, प्राक्कलन, कार्य अवधि, संवेदक का नाम एवं तकनीकी स्वीकृति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आम जनता को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है तथा सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि संबंधित संवेदक एवं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की अनदेखी करते हुए यह कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ कराया जा रहा है, तो योजना से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, उपायुक्त एवं लघु सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में कार्यस्थल पर तत्काल योजना सूचना बोर्ड लगाया जाना, शिलान्यास, प्रशासनिक स्वीकृति एवं प्राक्कलन की जानकारी सार्वजनिक की जाना, कार्य की गुणवत्ता एवं प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाना, अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाना तथा जांच पूरी होने तक कार्य पर रोक लगाने पर विचार किया जाना शामिल है।1
- हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड में संचालित एसजीपी एंटरप्राइजेज सहयोगी ग्रुप "पांडु" ने अपने ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार, भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। समूह की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि संगठन वैध दस्तावेजों और निर्धारित नियमों के अनुरूप कार्य कर रहा है, बावजूद इसके कुछ लोग लगातार समूह की छवि को खराब करने और बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। समूह के अध्यक्ष मोहम्मद समशुल ने जानकारी दी कि एसजीपी एंटरप्राइजेज सहयोगी ग्रुप "पांडु" 15 सदस्यों का एक पंजीकृत समूह है। इस समूह का NKAS Services Pvt. Ltd. के साथ विधिवत एग्रीमेंट है, जिसके तहत जनवरी माह से ट्रांसपोर्टिंग का कार्य संचालित किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समूह के पास सभी आवश्यक एवं वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं, और कार्य पूरी पारदर्शिता तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। मोहम्मद समशुल ने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व समूह और उसके सदस्यों को बेवजह परेशान कर रहे हैं, साथ ही झूठे एवं बेबुनियाद आरोप लगाकर संगठन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि समूह के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप वास्तविकता से कोसों दूर और पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एसजीपी एंटरप्राइजेज सहयोगी ग्रुप "पांडु" का गठन स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करने और जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने के उद्देश्य से किया गया है, और समूह हमेशा नियम-कानूनों का पालन करते हुए कार्य करता रहा है तथा आगे भी करता रहेगा। मोहम्मद समशुल ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को कोई वास्तविक शिकायत है, तो उसे सक्षम मंच पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि अफवाहें फैलाकर और गलत जानकारी प्रसारित करके किसी संस्था की छवि खराब करनी चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सत्य सामने आने के बाद समूह के विरुद्ध फैलाए जा रहे भ्रम और आरोप स्वतः समाप्त हो जाएँगे। इस अवसर पर मोहम्मद मंजूर, मोहम्मद इम्तियाज, मोहम्मद तबरेज आलम, मोहम्मद बशीरुद्दीन, मोहम्मद कलाम, मोहम्मद मकसूद, मोहम्मद राजू, मोहम्मद आजाद, मोहम्मद वारिस, मोहम्मद अफसर सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में आरोपों का खंडन करते हुए संगठन की वैधता और पारदर्शी कार्यप्रणाली में अपना विश्वास दोहराया।1
- भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर एक महंत भगवान की मूर्ति के साथ नंगे पांव समाहरणालय पहुंचे। उन्होंने इस संबंध में अपनी शिकायत दर्ज कराई। प्रशासन ने महंत को भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का पक्का भरोसा दिया है।1
- केरेडारी कोल माइंस में 'SGP-MGP' का कथित तौर पर माफिया राज चल रहा है। इस स्थिति पर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या एनटीपीसी (NTPC) और नकास (NKAS) ट्रांसपोर्टिंग की मिलीभगत से जनता को लूटा जा रहा है।1
- नन्हे बच्चों के हृदय स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष पहल की गई है। इसी के तहत हृदय जांच शिविर का आयोजन किया गया है।1
- हजारीबाग के कटकमसांडी प्रखंड अंतर्गत डांटो कला के चरवा अहरा में लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे गहरीकरण कार्य पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्य को बिना विधिवत शिलान्यास किए ही प्रारंभ कर दिया गया है, जिससे योजना की पारदर्शिता और वैधता पर गहरा संदेह पैदा हो गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कार्यस्थल पर योजना से संबंधित कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है। इसके अभाव में योजना की स्वीकृत राशि, प्राक्कलन, कार्य अवधि, संवेदक का नाम और तकनीकी स्वीकृति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ आम जनता तक नहीं पहुँच पा रही हैं। यह स्थिति ग्रामीणों में भारी असंतोष पैदा कर रही है और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर संबंधित संवेदक (ठेकेदार) और विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी करते हुए कार्य कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि कार्य पारदर्शिता से हो रहा है, तो सभी जानकारियाँ सार्वजनिक की जानी चाहिए। इन गंभीर आरोपों के मद्देनजर, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, उपायुक्त और लघु सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है। उनकी मुख्य मांगों में कार्यस्थल पर तत्काल योजना सूचना बोर्ड लगाया जाना, शिलान्यास, प्रशासनिक स्वीकृति और प्राक्कलन की जानकारी को सार्वजनिक करना, तथा कार्य की गुणवत्ता एवं प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराना शामिल है। ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जांच पूरी होने तक गहरीकरण कार्य पर रोक लगाने पर भी विचार करने की अपील की है।1
- राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा ‘हम भारत की महिलाएँ’ नामक एक प्रेरणादायी पुस्तक प्रकाशित की गई है, जो भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिला सदस्यों को एक आदरांजलि है। यह पुस्तक उन महिलाओं के विचारों, संघर्षों और महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करती है, जिन्होंने समानता, न्याय और स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक मूल्यों को एक मजबूत आधार प्रदान किया। यह प्रकाशन केवल इतिहास का एक दस्तावेज मात्र नहीं है, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है। पुस्तक विशेष रूप से महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उनकी अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित करती है।1