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विराटनगर क्षेत्र के बागावास चौरासी/ग्राम पंचायत बागावास चौरासी निवासी मालीराम पूनिया के पुत्र राकेश पूनिया का राजस्थान पुलिस कांस्टेबल के पद पर पूर्ण रूप से चयन हो गया है। इस अवसर पर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं।

2 hrs ago
user_Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
रिपोर्टर Viratnagar, Jaipur•
2 hrs ago

विराटनगर क्षेत्र के बागावास चौरासी/ग्राम पंचायत बागावास चौरासी निवासी मालीराम पूनिया के पुत्र राकेश पूनिया का राजस्थान पुलिस कांस्टेबल के पद पर पूर्ण रूप से चयन हो गया है। इस अवसर पर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं।

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  • Post by Kotputli-Behror Breaking Live
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    Post by Kotputli-Behror Breaking Live
    user_Kotputli-Behror Breaking Live
    Kotputli-Behror Breaking Live
    Kotputli, Jaipur•
    5 hrs ago
  • खैरथल की एक महिला को उसके ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया है। इस घटना के बाद, महिला पिछले आठ दिनों से अपने ससुराल के मुख्य दरवाजे पर ही बैठी हुई है। बताया गया है कि महिला के ससुराल पक्ष के लोग घर पर ताला लगाकर वहां से फरार हो गए हैं।
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    खैरथल की एक महिला को उसके ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया है। इस घटना के बाद, महिला पिछले आठ दिनों से अपने ससुराल के मुख्य दरवाजे पर ही बैठी हुई है। बताया गया है कि महिला के ससुराल पक्ष के लोग घर पर ताला लगाकर वहां से फरार हो गए हैं।
    user_Voice of Labour
    Voice of Labour
    Alwar, Rajasthan•
    8 hrs ago
  • अलवर जिले के मालाखेड़ा स्थित बड़ेर गांव के एक ग्रामीण ने मालाखेड़ा थाने के एएसआई जाकिर हुसैन पर एक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना दिए जाने के बावजूद आरोपी को थाने नहीं लाया गया। ग्रामीण ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि "सिर्फ शराब पीने वालों को थाने में बंद नहीं कर सकते, वे कुछ भी कर सकते हैं।" इस पूरे मामले को लेकर बड़ेर गांव के ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
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    अलवर जिले के मालाखेड़ा स्थित बड़ेर गांव के एक ग्रामीण ने मालाखेड़ा थाने के एएसआई जाकिर हुसैन पर एक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना दिए जाने के बावजूद आरोपी को थाने नहीं लाया गया।

ग्रामीण ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि "सिर्फ शराब पीने वालों को थाने में बंद नहीं कर सकते, वे कुछ भी कर सकते हैं।" इस पूरे मामले को लेकर बड़ेर गांव के ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
    user_एस एस मिडिया अलवर
    एस एस मिडिया अलवर
    Local News Reporter मालखेड़ा, अलवर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है। यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।
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    भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे।

जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है।

यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।
    user_जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    Medical centre श्री माधोपुर, सीकर, राजस्थान•
    57 min ago
  • विराटनगर नगरपालिका में वाल्मीकि सेना की टीम ने सफाई कर्मचारियों के वेतन संबंधी समस्या को लेकर ईओ कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान, वाल्मीकि सेना ने अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और साफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि कल तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उनका आंदोलन अधिक उग्र रूप ले लेगा और शहर का सारा कचरा नगरपालिका कार्यालय में डाल दिया जाएगा।
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    विराटनगर नगरपालिका में वाल्मीकि सेना की टीम ने सफाई कर्मचारियों के वेतन संबंधी समस्या को लेकर ईओ कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान, वाल्मीकि सेना ने अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और साफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि कल तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उनका आंदोलन अधिक उग्र रूप ले लेगा और शहर का सारा कचरा नगरपालिका कार्यालय में डाल दिया जाएगा।
    user_RIVENDRA KUMAR SHARMA
    RIVENDRA KUMAR SHARMA
    Local News Reporter बेजुपाड़ा, दौसा, राजस्थान•
    1 hr ago
  • विराटनगर क्षेत्र के बीलवाडी ग्राम पंचायत के निकटवर्ती बास उदयसिंह गाँव में लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के पावन अवसर पर एक भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया। यह यात्रा गाँव के ऐतिहासिक सिद्ध बाबा मंदिर से विशेष पूजा-अर्चना और विधि-विधान के साथ शुरू हुई। यहाँ से शुरू होकर, यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए तेजाजी महाराज मंदिर परिसर पहुँची। यात्रा के दौरान मातृशक्ति (महिलाएँ) अपने सिर पर मंगल कलश धारण कर मंगल गीत गाती हुई चल रही थीं। डीजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर तेजाजी महाराज के भजनों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया, वहीं जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा पुष्प वर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। इस पावन अवसर पर कई गणमान्य नागरिक और सामाजिक प्रतिनिधि भी इस भव्य यात्रा के साक्षी बने। कार्यक्रम में शामिल हुए अतिथियों ने इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया और कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दौरान उन्होंने तेजाजी महाराज के चरणों में ढोक लगाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अमन-चैन तथा आमजन की खुशहाली की मंगल कामना की। सिद्ध बाबा मंदिर से तेजाजी महाराज मंदिर तक के पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का भारी उत्साह देखने को मिला। तेजाजी महाराज के गगनभेदी जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। मंदिर पहुँचने पर महाआरती की गई और सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को विशेष प्रसाद वितरित किया गया।
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    विराटनगर क्षेत्र के बीलवाडी ग्राम पंचायत के निकटवर्ती बास उदयसिंह गाँव में लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के पावन अवसर पर एक भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया।

यह यात्रा गाँव के ऐतिहासिक सिद्ध बाबा मंदिर से विशेष पूजा-अर्चना और विधि-विधान के साथ शुरू हुई। यहाँ से शुरू होकर, यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए तेजाजी महाराज मंदिर परिसर पहुँची। यात्रा के दौरान मातृशक्ति (महिलाएँ) अपने सिर पर मंगल कलश धारण कर मंगल गीत गाती हुई चल रही थीं। डीजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर तेजाजी महाराज के भजनों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया, वहीं जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा पुष्प वर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।

इस पावन अवसर पर कई गणमान्य नागरिक और सामाजिक प्रतिनिधि भी इस भव्य यात्रा के साक्षी बने। कार्यक्रम में शामिल हुए अतिथियों ने इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया और कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दौरान उन्होंने तेजाजी महाराज के चरणों में ढोक लगाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अमन-चैन तथा आमजन की खुशहाली की मंगल कामना की।

सिद्ध बाबा मंदिर से तेजाजी महाराज मंदिर तक के पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का भारी उत्साह देखने को मिला। तेजाजी महाराज के गगनभेदी जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। मंदिर पहुँचने पर महाआरती की गई और सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को विशेष प्रसाद वितरित किया गया।
    user_Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    रिपोर्टर Viratnagar, Jaipur•
    6 hrs ago
  • अलवर के एमआईए क्षेत्र स्थित धनखेड़ा गांव में एक विवाद सामने आया है, जिसके बारे में स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इसका मुख्य कारण पानी की टंकी से जुड़ा मामला है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। इस घटना के बाद से पूरे गांव में चर्चा का माहौल बना हुआ है, और लोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। 'वॉइस ऑफ लेबर' की टीम इस मामले की जमीनी हकीकत सामने लाने का प्रयास कर रही है। यह जानकारी स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दी गई है और बताया गया है कि आधिकारिक जांच व प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर तथ्य अलग भी हो सकते हैं।
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    अलवर के एमआईए क्षेत्र स्थित धनखेड़ा गांव में एक विवाद सामने आया है, जिसके बारे में स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इसका मुख्य कारण पानी की टंकी से जुड़ा मामला है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

इस घटना के बाद से पूरे गांव में चर्चा का माहौल बना हुआ है, और लोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। 'वॉइस ऑफ लेबर' की टीम इस मामले की जमीनी हकीकत सामने लाने का प्रयास कर रही है। यह जानकारी स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दी गई है और बताया गया है कि आधिकारिक जांच व प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर तथ्य अलग भी हो सकते हैं।
    user_Voice of Labour
    Voice of Labour
    Alwar, Rajasthan•
    15 hrs ago
  • प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र लोगों को महंगी दवाओं से मुक्ति दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है, जहाँ दवा का 'साल्ट' और 'असर' बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों जैसा ही होने के बावजूद, ग्राहकों को काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है। इन केंद्रों पर रक्तचाप, शुगर और हृदय रोग सहित सभी तरह की बीमारियों के लिए WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाएं 50% से 90% तक सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। यह पहल 'स्वास्थ्य भी, बचत भी' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य लोगों के मेडिकल बिल को आधा करना है। फार्मासिस्ट दीपक शर्मा के अनुसार, पीएम जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड जैसी गुणवत्ता वाली दवाएं अत्यधिक किफायती दरों पर प्रदान करते हैं। ग्राहकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र पर आकर उत्तम दवाइयों का लाभ उठाएं और अपने स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बचत करें।
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    प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र लोगों को महंगी दवाओं से मुक्ति दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है, जहाँ दवा का 'साल्ट' और 'असर' बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों जैसा ही होने के बावजूद, ग्राहकों को काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है। इन केंद्रों पर रक्तचाप, शुगर और हृदय रोग सहित सभी तरह की बीमारियों के लिए WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाएं 50% से 90% तक सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं।

यह पहल 'स्वास्थ्य भी, बचत भी' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य लोगों के मेडिकल बिल को आधा करना है। फार्मासिस्ट दीपक शर्मा के अनुसार, पीएम जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड जैसी गुणवत्ता वाली दवाएं अत्यधिक किफायती दरों पर प्रदान करते हैं। ग्राहकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र पर आकर उत्तम दवाइयों का लाभ उठाएं और अपने स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बचत करें।
    user_जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    Medical centre Sri Madhopur, Sikar•
    4 hrs ago
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