घोड़ासहन में ओबेगो गारमेंट्स फैक्टरी का विकास आयुक्त व डीएम ने किया निरीक्षण, कहा—रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार घोड़ासहन (पूर्वी चंपारण): स्थानीय गांधी नगर स्थित नवनिर्मित ओबेगो गारमेंट्स फैक्टरी में शुक्रवार को दिनभर प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहीं। बिहार सरकार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह और जिले के जिलाधिकारी सौरव सुमन यादव ने संयुक्त रूप से फैक्टरी का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं और उत्पादन प्रणाली का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों शीर्ष अधिकारियों ने फैक्टरी के विभिन्न प्रभागों का जायजा लिया। उन्होंने सिलाई (स्टिचिंग), कटिंग, पैकेजिंग यूनिट तथा मैट्रेस रूम का अवलोकन कर वहां आधुनिक मशीनों से तैयार किए जा रहे कपड़ों की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली की जानकारी ली। फैक्टरी परिसर पहुंचने पर संचालक उमेश जायसवाल ने अधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्हें मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया। स्थानीय स्तर पर आजीविका को मिलेगा बढ़ावा निरीक्षण के उपरांत फैक्टरी के मीटिंग हॉल में अधिकारियों ने संचालक एवं तकनीकी कर्मियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। बैठक में फैक्टरी की दैनिक उत्पादन क्षमता, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों की संख्या, कच्चे माल की आपूर्ति तथा भविष्य में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने फैक्टरी के इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि घोड़ासहन जैसे क्षेत्र में इस स्तर की गारमेंट्स फैक्टरी का स्थापित होना अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उद्योगों के विस्तार से क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, जिससे आसपास के लोगों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों व प्रबुद्धजनों से अपील की कि वे ऐसे उद्यमों को बढ़ावा देने में सकारात्मक सहयोग करें ताकि पलायन पर प्रभावी रोक लग सके। ये अधिकारी रहे उपस्थित निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद रहा। मौके पर सिकरहना एसडीओ विजय कुमार, डीएसपी अभिषेक कुमार, सहायक अभियंता आलोक कुमार, सीओ अतुल कुमार बादल, आरओ संकलदेव सहित फैक्टरी प्रबंधन से जुड़े कई कर्मचारी और स्थानीय लोग मौजूद थे।
घोड़ासहन में ओबेगो गारमेंट्स फैक्टरी का विकास आयुक्त व डीएम ने किया निरीक्षण, कहा—रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार घोड़ासहन (पूर्वी चंपारण): स्थानीय गांधी नगर स्थित नवनिर्मित ओबेगो गारमेंट्स फैक्टरी में शुक्रवार को दिनभर प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहीं। बिहार सरकार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह और जिले के जिलाधिकारी सौरव सुमन यादव ने संयुक्त रूप से फैक्टरी का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं और उत्पादन प्रणाली का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों शीर्ष अधिकारियों ने फैक्टरी के विभिन्न प्रभागों का जायजा लिया। उन्होंने सिलाई (स्टिचिंग), कटिंग, पैकेजिंग यूनिट तथा मैट्रेस रूम का अवलोकन कर वहां आधुनिक मशीनों से तैयार किए जा रहे कपड़ों की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली की जानकारी ली। फैक्टरी परिसर पहुंचने पर संचालक उमेश जायसवाल ने अधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्हें मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया। स्थानीय स्तर पर आजीविका को मिलेगा बढ़ावा निरीक्षण के उपरांत फैक्टरी के मीटिंग हॉल में अधिकारियों ने संचालक एवं तकनीकी कर्मियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। बैठक में फैक्टरी की दैनिक उत्पादन क्षमता, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों की संख्या, कच्चे माल की आपूर्ति तथा भविष्य में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने फैक्टरी के इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि घोड़ासहन जैसे क्षेत्र में इस स्तर की गारमेंट्स फैक्टरी का स्थापित होना अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उद्योगों के विस्तार से क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, जिससे आसपास के लोगों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों व प्रबुद्धजनों से अपील की कि वे ऐसे उद्यमों को बढ़ावा देने में सकारात्मक सहयोग करें ताकि पलायन पर प्रभावी रोक लग सके। ये अधिकारी रहे उपस्थित निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद रहा। मौके पर सिकरहना एसडीओ विजय कुमार, डीएसपी अभिषेक कुमार, सहायक अभियंता आलोक कुमार, सीओ अतुल कुमार बादल, आरओ संकलदेव सहित फैक्टरी प्रबंधन से जुड़े कई कर्मचारी और स्थानीय लोग मौजूद थे।
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- शिवहर में बाढ़ और सुखाड़ की तैयारियों की समीक्षा बैठक समाज कल्याण मंत्री डॉ श्वेता गुप्ता शिवहर में शुक्रवार को समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता की अध्यक्षता में बाढ़ और सुखाड़ से निपटने की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीएम प्रतिभा रानी, एसपी शैलेन्द्र सिंह सहित जिले के कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।1
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- बीते दिन वैशाली के दौरे के दौरान हाजीपुर सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मरीजों के रेफरल से जुड़े रिकॉर्ड को देखा। कुछ मामलों में रेफरल के कारण और रिकॉर्ड के रख-रखाव में कमियाँ मिलीं। #viralreels #breakingnews #vmjlivenews #NewsUpdate #BiharNews1
- फरक्का (गंगा) जल संधि से बिहार की हकमारी, नहीं हो इसका नवीनीकरण जदयू के “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद" को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन शिवहर जिला अध्यक्ष कमलेश पांडे फरक्का (गंगा) जल संधि से बिहार की हकमारी, नहीं हो इसका नवीनीकरण जदयू के “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद" को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन शिवहर जिला अध्यक्ष कमलेश पांडे बिहार के हक और बिहारवासियों के हित के लिए फरक्का जल संधि पर जिला जदयू की प्रेसवार्ता शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को जिला मुख्यालय में जदयू की ओर से प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। फरक्का जल संधि पर जन-जागरुकता के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता में पार्टी द्वारा चलाए जा रहे "फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद" कार्यक्रम और इसके उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ध्यातव्य है कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा इस कार्यक्रम के तहत गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में संवाद कर रहे है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। पार्टी के इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में होगा क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। प्रेसवार्ता के दौरान जिलाध्यक्ष ने कहा कि जदयू का स्पष्ट स्टैंड है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है। अभी हाल में संसद के मानसूत्र सत्र के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा जी ने राज्यसभा में बड़ी मुखरता से इस विषय को उठाया और कहा कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं।1
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