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निमास में पानी की समस्या एक एक बूंद को तबाह पीने वाला भी और घर के इस्तेमाल करने वाला भी निवास गांव में आए दिन पीने वाले पानी की और घर में उसे होने वाली पानी की बहुत गंभीर समस्या और इसे सही नहीं किया जा रहा
Mahendra Barman
निमास में पानी की समस्या एक एक बूंद को तबाह पीने वाला भी और घर के इस्तेमाल करने वाला भी निवास गांव में आए दिन पीने वाले पानी की और घर में उसे होने वाली पानी की बहुत गंभीर समस्या और इसे सही नहीं किया जा रहा
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- हमारी तो बस एक ही परेशानी है वह जो सबकी जिंदगानी है सबके पास पानी है मगर हमारे पास कहां पानी है1
- कटनी नगर//- कलेक्टर-एसपी ने किया रक्तदान, लोगों से भी रक्तदान की अपील...... 📰 कलेक्टर-एसपी ने किया रक्तदान, लोगों से भी अधिक से अधिक रक्तदान की अपील सेवा संकल्प अभियान के तहत जिला चिकित्सालय में रक्तदान शिविर, अब तक 25 यूनिट रक्त संग्रहित कटनी। सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर को जिला चिकित्सालय में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। शिविर में कलेक्टर आशीष तिवारी और पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने स्वयं रक्तदान कर आमजन को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया। रक्तदान के बाद कलेक्टर और एसपी ने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान से बीमार, घायल एवं अन्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है और आपात स्थिति में किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। 25 यूनिट रक्त का संग्रह जिला चिकित्सालय में आयोजित रक्तदान शिविर में अब तक 25 यूनिट रक्त संग्रहित किया जा चुका है। शिविर में रक्तदान का क्रम लगातार जारी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे आगे आकर रक्तदान करें और सेवा संकल्प अभियान में सहभागी बनकर जरूरतमंद मरीजों की मदद करें। रिपोर्ट:- राकेश निषाद AIMA MEDIA-24×7 जन जन की आवाज़ 📞 75097476863
- बस स्टैंड ऑडिटोरियम में गूंजा हिंदू समाज की एकजुटता का संदेश विश्व हिंदू परिषद के स्थापना दिवस समारोह में संतों, समाजसेवियों और विभिन्न हिंदू संगठनों ज्योति तिवारी संभागीय ब्यूरो जबलपुर, कटनी के प्रतिनिधियों ने की सहभागिता (/6267641443/)👈 कटनी। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल जिला कटनी के तत्वावधान में बुधवार को बस स्टैंड स्थित ऑडिटोरियम हॉल में विश्व हिंदू परिषद का स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं हिंदू संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा समाजजनों ने सहभागिता की। समारोह के दौरान संगठन की स्थापना, उसके उद्देश्यों तथा समाजसेवा से जुड़े कार्यों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री जितेंद्र वर्मा रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध उद्योगपति एवं सिंधी समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र तीर्थानी ने की। मुख्य संत के रूप में बाल ब्रह्मचारी संत श्री ब्रह्मानंद जी महाराज की उपस्थिति रही। वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में नूपुर कपूर, सुधांशु तिवारी तथा डॉ. श्रीमती निधि प्रसंग बजाज उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में कार्यक्रम प्रभारी मोनी जैसवानी, जिला अध्यक्ष लखन साहू, कार्यक्रम संयोजक मनीष दुबे तथा जिला मंत्री राहुल मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जुटे रहे। 1964 में हुई थी विश्व हिंदू परिषद की स्थापना समारोह में वक्ताओं ने विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि संगठन की स्थापना 29 अगस्त 1964 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर हुई थी। विहिप के आधिकारिक विवरण के अनुसार संगठन हिंदू समाज के संगठन, धर्म की रक्षा तथा समाजसेवा को अपने प्रमुख उद्देश्यों में शामिल करता है। वक्ताओं ने कहा कि संगठन द्वारा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक गतिविधियां संचालित की जाती हैं। स्थापना दिवस समारोह को संगठन के कार्यकर्ताओं के लिए अपने उद्देश्यों और सामाजिक दायित्वों को दोहराने का अवसर बताया गया। सामाजिक सहभागिता और संगठन विस्तार पर जोर कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर सामाजिक एवं सेवा गतिविधियों में सहभागिता करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका से समाज में सेवा, संस्कार और आपसी समन्वय को बढ़ावा दिया जा सकता है। समारोह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने संगठन की आगामी गतिविधियों को लेकर भी चर्चा की। कार्यक्रम के माध्यम से अधिक से अधिक समाजजनों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने तथा सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह स्थापना दिवस समारोह को लेकर विहिप एवं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह नजर आया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समाजजन मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं का स्वागत किया गया तथा संगठन की गतिविधियों एवं सामाजिक भूमिका पर विचार रखे गए। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर विहिप पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा पूर्व से ही संपर्क अभियान चलाया गया था। इससे पहले आयोजित बैठक में भी कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम की जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं और अधिक से अधिक समाजजनों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया था। संतों और अतिथियों की उपस्थिति रही विशेष आकर्षण समारोह में संत श्री ब्रह्मानंद जी महाराज की उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। वहीं विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। मंच से वक्ताओं ने संगठन की गतिविधियों, सामाजिक सेवा और हिंदू समाज से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए। समारोह में विहिप बजरंग दल के प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। कार्यक्रम के अंत में आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले कार्यकर्ताओं और समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उल्लेखनीय है कि विश्व हिंदू परिषद के अनुसार संगठन की स्थापना 1964 में हुई थी और वर्तमान में वह सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक गतिविधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य संचालित करता है।4
- पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी जबलपुर। जिस पिता ने कभी अपनी औलाद की जरूरतों के लिए मजदूरी की होगी, जिसने अपनी संतान को पालने के लिए जिंदगी के तमाम संघर्ष सहे होंगे, उसी पिता की जिंदगी का आखिरी पड़ाव रानीताल के एक डिवाइडर पर खत्म हो गया। 70 वर्षीय अशोक कुमार जैन का शव रानीताल बजरंग बली मंदिर के सामने डिवाइडर पर मिला। उनके पास उनकी बेटी अनीता कुमार जैन बैठी थी। आंखों में आंसू थे, सामने पिता का शव था और दिल में सिर्फ एक सवाल—काश, मैं अपने पिता के लिए कुछ कर पाती... अशोक कुमार की जिंदगी गरीबी और अभावों से घिरी रही। मजदूरी कर किसी तरह जीवन चलाया। पत्नी का साथ पहले ही छूट चुका था। बच्चे बड़े हुए तो अपने-अपने संसार में चले गए। बुढ़ापे में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आर्थिक तंगी ने उन्हें रानीताल में मांगकर जीवन गुजारने को मजबूर कर दिया। आखिरकार जिस सड़क किनारे वे जिंदगी के दिन काट रहे थे, वहीं उनकी जिंदगी की आखिरी सांस भी थम गई। राहगीरों ने देखा शव... पास बैठी थी बेटी रानीताल में डिवाइडर पर बुजुर्ग का शव देखकर राहगीरों ने सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जानकारी जुटाई तो शव की पहचान अशोक कुमार जैन के रूप में हुई। शव के पास उनकी बेटी अनीता बैठी थी। पिता को इस हालत में देखकर वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी। सूचना मिलने पर गरीब नवाज कमेटी के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामने आने के बाद कमेटी ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। तीन बेटियां थीं... मगर अंतिम सफर में एक ही बेटी साथ थी अनीता ने बताया कि परिवार में बेटियां और बेटे हैं, लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने परिवारों में चले गए। उसकी दो बहनों की शादी संपन्न परिवारों में हुई। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पिता से उनका संपर्क कम हो गया। अनीता ने खुद अपनी पसंद से मध्यमवर्गीय बर्मन परिवार में विवाह किया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने पिता से रिश्ता नहीं तोड़ा। शायद यही वजह थी कि पिता की मौत की खबर मिलते ही वह दौड़ी चली आई। लेकिन इस बार वह बेटी अपने पिता को बचाने नहीं, उन्हें आखिरी बार विदा करने आई थी। "जिस पिता ने मेरी हर जरूरत पूरी करने के लिए मेहनत की... आज मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही" पिता के शव के पास बैठी अनीता की यह बात वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गई। पिता की मौत का दुख तो था ही, लेकिन उससे बड़ा दर्द अपनी बेबसी का था। पिता के लिए बेटी की आंखों में आंसू थे, मगर जेब में अंतिम संस्कार का खर्च नहीं। डेढ़ साल की उम्र से शुरू हुआ था अनीता का संघर्ष अनीता ने बताया कि जब वह महज डेढ़ वर्ष की थी, तब गरीबी के कारण उसके मामा के परिवार ने उसे अपने घर से बाहर कर दिया था। बचपन से ही उसने अभाव देखे और संघर्ष के बीच जिंदगी गुजारी। शायद गरीबी ने दोनों—पिता और बेटी—को अलग-अलग उम्र में एक ही दर्द दिया था। फर्क सिर्फ इतना था कि पिता जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर थे और बेटी चाहकर भी उनके लिए बहुत कुछ नहीं कर पा रही थी। जब अपने कमजोर पड़े, समाज ने थामा हाथ अशोक कुमार के अंतिम संस्कार के लिए जब आर्थिक संकट सामने आया तो गरीब नवाज कमेटी आगे आई। कमेटी के सदस्यों ने शव को रानीताल मुक्ति धाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। बेटी अनीता ने नम आंखों से पिता को अंतिम विदाई दी। जिस पिता की जिंदगी अकेलेपन में गुजर गई, उनके अंतिम सफर में समाज का एक हाथ सहारा बन गया। एक डिवाइडर पर खत्म हुई जिंदगी... लेकिन कहानी छोड़ गई कई सवाल रानीताल का वह डिवाइडर अब सिर्फ सड़क का हिस्सा नहीं रह गया। वह एक ऐसे पिता की आखिरी कहानी का गवाह बन गया, जिसने गरीबी में जिंदगी काटी, बुढ़ापे में मांगकर गुजारा किया और आखिरकार सड़क किनारे दम तोड़ दिया। अशोक कुमार की मौत कई सवाल छोड़ गई है— क्या बुजुर्ग माता-पिता का सहारा उनकी आर्थिक स्थिति देखकर तय होगा? क्या गरीबी रिश्तों के बीच भी दीवार खड़ी कर देती है? और क्या ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की पहचान समय रहते नहीं होनी चाहिए, ताकि उनका आखिरी वक्त सड़क किनारे अकेलेपन में न बीते? अशोक कुमार चले गए। बेटी ने अंतिम विदाई दे दी। गरीब नवाज कमेटी ने अंतिम सफर में साथ दिया। लेकिन रानीताल का वह डिवाइडर पीछे छोड़ गया एक ऐसा दर्द, जिसका जवाब शायद सिर्फ परिवार नहीं, पूरे समाज को तलाशना होगा।1
- कटनी नगर//- श्री गणेश जी की पाँच महाआरती का आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। कटनी शहर के गणेश चौक में गणेश उत्सव की भव्य छटा देखने को मिल रही है। भगवान श्री गणेश जी की पाँच महाआरती का आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। भक्तों ने सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हुए भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया।👌🙏🍂🧿💞🌺1
- कटनी: इंटरसिटी एक्सप्रेस से कटकर 30 बकरियों की मौत, 3 महिलाएं बच गई 💥*बड़ी खबर*💥 *इंटरसिटी एक्सप्रेस से कटकर 30 बकरियों की मौत, 3 महिलाएं बाल-बाल बचीं, घटना का लाइव वीडियो आया सामने* इंटरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आने से 30 बकरियों की मौत हो गई। जबकि, बकरियों की झुंड इधर-उधर भागती रहीं। संयोग ही रहा कि बकरियां चरा रहीं महिलाएं बाल-बाल बच गईं।हथिगवां के कृष्णा राम का पुरवा बिसहिया के पास रेलवे फाटक के समीप बुधवार सुबह 11 बजे कुछ महिलाएं बकरियां चरा रहीं थीं, तभी ट्रेन की चपेट मे आने से हादसा हो गया। सूचना पर पहुंची आरपीएफ ने मामले की जांच की इस दौरान ट्रेन 10 मिनट तक रुकी रही!1
- चंद घंटों में चाकूबाजी का खुलासा, दो विधि उल्लंघनकारी बालक अभिरक्षा में निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद, किशोर न्यायालय से भेजे गए बाल संप्रेषण गृह कटनी। कुठला थाना क्षेत्र के इन्द्रानगर गली नंबर-7 में चाकूबाजी की घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो विधि उल्लंघनकारी बालकों को अभिरक्षा में लिया। पुलिस के अनुसार, दोनों ने विकास निषाद पर चाकू से हमला किया था। घायल को उपचार के लिए शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने विवेचना के दौरान दोनों की पहचान कर 15 सितंबर 2026 को अभिरक्षा में लिया। पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया। दोनों को किशोर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जबलपुर स्थित बाल संप्रेषण गृह भेजने के आदेश दिए गए। कार्रवाई एसपी अभिनय विश्वकर्मा के निर्देश, एएसपी कमल मौर्य व डीएसपी शिवा पाठक के मार्गदर्शन तथा कुठला थाना प्रभारी अखलेश दाहिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने की।1
- दसवें दिन भी नहीं टूटा यूजीसी विरोधी अनशन, पत्रकार वार्ता में छलका आक्रोश दिनांक 18 तारीख 1:00 आत्महत्या अवधेश उमरिया जिन्होंने बोला कि मैं आत्मा देखा करूंगा अगर मेरी मांग पूरी नहीं होती तो 💥*जिला कटनी से ज्योति तिवारी की खास खबर*💥। //6267641443//👈 अनशनकारियों ने कहा—मुद्दा किसी एक समाज का नहीं, सभी वर्गों के हित से जुड़ा; जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर जताई नाराजगी* अवधेश उरमलिया की घोषणा—18 सितंबर तक सरकार का प्रतिनिधि नहीं आया तो कलेक्ट्रेट के बाहर आत्मदाह करूंगा* कटनी। यूजीसी कानून के कथित दुरुपयोग और आरक्षण व्यवस्था के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर चल रहा अनशन बुधवार को दसवें दिन भी जारी रहा। इसी क्रम में अनशनकारियों ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर आंदोलन की मांगों और अब तक शासन-प्रशासन की ओर से मिले प्रतिसाद को लेकर अपनी बात रखी। अनशनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समाज के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसमें सभी वर्गों के हित और अधिकार सुरक्षित रहें। पत्रकार वार्ता में अनशनकारियों ने कहा कि यूजीसी के कथित दुरुपयोग को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता है। उनका आरोप है कि कानून के तहत लगाए गए आरोपों का पर्याप्त सत्यापन किए बिना गिरफ्तारी जैसी स्थिति उत्पन्न होने से लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने कहा कि जब देश में समानता और समान कानून की बात की जाती है, तब विभिन्न कानूनों के प्रावधानों और उनकी व्याख्या को लेकर भी स्पष्टता तथा व्यापक चर्चा जरूरी है। *'आरक्षण सुधार का मुद्दा सभी समाजों से जुड़ा'* अनशनकारियों ने कहा कि यूजीसी का विरोध अथवा आरक्षण व्यवस्था के मूलभूत ढांचे में सुधार की मांग को केवल सवर्ण समाज का मुद्दा समझना सही नहीं होगा। उनका कहना है कि आरक्षण व्यवस्था का प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर व्यापक सामाजिक एवं संवैधानिक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकारों को समाप्त करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग करना है जिसमें सभी वर्गों के साथ न्याय हो। इसके लिए सरकार को संबंधित कानूनों और व्यवस्थाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। *जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी* अनशनकारियों ने कहा कि आंदोलन को दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई विधायक या सांसद अनशन स्थल पर पहुंचकर उनकी बात सुनने नहीं आया। उन्होंने कहा कि उन्हें कम से कम यह आश्वासन मिलने की उम्मीद थी कि उनकी मांगों को संसद में चर्चा के लिए रखने अथवा पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। अनशनकारियों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की इस कथित उदासीनता से उनमें पीड़ा और निराशा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रतिनिधि अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से चर्चा करें और उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाएं। *18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी* पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव एवं अनशनकारी अवधेश उरमलिया ने कहा कि दस दिन बीत जाने के बाद भी उनकी मांगों को लेकर किसी विधायक या सांसद की ओर से पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि अब भी सरकार का कोई प्रतिनिधि अनशन स्थल पर नहीं पहुंचता है तो वे 18 सितंबर को कटनी कलेक्ट्रेट के बाहर आत्मदाह करने का कदम उठाएंगे। उरमलिया ने इस घोषणा के साथ कहा कि उनके द्वारा उठाए जाने वाले इस कदम की जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासन एवं स्थानीय सांसद की होगी। उनकी इस घोषणा के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है। अनशनकारियों ने कहा कि वे सरकार से संवाद और अपनी मांगों पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने सरकार एवं जनप्रतिनिधियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए वार्ता की पहल करने तथा उनकी मांगों को उचित मंच पर रखने की मांग की है।4