नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के पहरैठा गांव स्थित पहाड़ पर बुधवार सुबह करीब सात बजे जंगली हाथियों का झुंड देखे जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग भयभीत हो गए हैं और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग करते हुए वन विभाग के अधिकारियों को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन उनका आरोप है कि फोरेस्टर और डीएफओ को फोन करने के बावजूद किसी ने फोन नहीं उठाया। ग्रामीणों के अनुसार, सुबह पहाड़ की ओर गए लोगों ने हाथियों के झुंड को टहलते देखा, जिसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। हाथियों के डर से लोगों ने खेतों और जंगल की ओर जाना बंद कर दिया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथियों का झुंड आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ा तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। बताया जाता है कि गोविंदपुर क्षेत्र में पिछले करीब दो महीनों से जंगली हाथियों का आतंक लगातार जारी है। इस दौरान हाथियों के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अनेक घरों और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है और लोग लगातार भय के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि दो दिन पहले सरकंडा में भी हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया था, फसलों को रौंद दिया था और लोगों को रातभर जागकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। अब पहरैठा के पहाड़ पर हाथियों के दोबारा दिखाई देने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं वन विभाग से हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने और प्रभावित गांवों में निगरानी दल तैनात करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के पहरैठा गांव स्थित पहाड़ पर बुधवार सुबह करीब सात बजे जंगली हाथियों का झुंड देखे जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग भयभीत हो गए हैं और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग करते हुए वन विभाग के अधिकारियों को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन उनका आरोप है कि फोरेस्टर और डीएफओ को फोन करने के बावजूद किसी ने फोन नहीं उठाया। ग्रामीणों के अनुसार, सुबह पहाड़ की ओर गए लोगों ने हाथियों के झुंड को टहलते देखा, जिसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। हाथियों के डर से लोगों ने खेतों और जंगल की ओर जाना बंद कर दिया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथियों का झुंड आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ा तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। बताया जाता है कि गोविंदपुर क्षेत्र में पिछले करीब दो महीनों से जंगली हाथियों का आतंक लगातार जारी है। इस दौरान हाथियों के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अनेक घरों और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है और लोग लगातार भय के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि दो दिन पहले सरकंडा में भी हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया था, फसलों को रौंद दिया था और लोगों को रातभर जागकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। अब पहरैठा के पहाड़ पर हाथियों के दोबारा दिखाई देने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं वन विभाग से हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने और प्रभावित गांवों में निगरानी दल तैनात करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
- मुख्यमंत्री ने भोजपुर से अपराध और अपराधियों के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने का सख्त संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अपराध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।1
- नालंदा जिले में एक भीषण सड़क दुर्घटना में तीन युवकों की मौत हो गई। बताया गया है कि तीनों युवक एक ही बाइक पर सवार होकर बाजार से कुछ सामान लेने जा रहे थे। इसी दौरान बाईपास पर उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई और पेड़ से जा टकराई। इस हादसे में एक युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवकों ने बिहार शरीफ के मॉडल अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद से मृतकों के परिजनों का हाल बेहाल है।1
- गया जिले के नीमचक बथानी अंतर्गत जिला परिषद क्षेत्र संख्या-11 के इमामगंज गाँव में नाली की गंभीर समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों की शिकायत पर जिला परिषद प्रतिनिधि मोहम्मद औरंगजेब तुरंत मौके पर पहुँचे और स्थिति का निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि नालियों के जाम होने और पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे उन्हें आने-जाने और स्वच्छता संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मोहम्मद औरंगजेब ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके शीघ्र समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनता की समस्याओं का निवारण उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और वे क्षेत्र के विकास तथा जनहित के मुद्दों पर लगातार काम करते रहेंगे। ग्रामीणों ने भी उनकी त्वरित प्रतिक्रिया और समस्या के समाधान के प्रयासों की प्रशंसा की। मोहम्मद औरंगजेब ने कहा, "जनता की आवाज पर तुरंत पहुंचना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करना ही जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।"1
- बिहार में एक घटना सामने आई है जिसमें सम्राट चौधरी पर पुलिसकर्मियों पर पिस्तौल तानने का आरोप लगा है। यह घटना कथित तौर पर राज्य के 'सुशासन राज' पर सवाल उठा रही है।1
- शेखपुरा में 17 जून, 2026 को उप विकास आयुक्त श्री संजय कुमार की अध्यक्षता में एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले की सभी 6 परियोजनाओं के तहत चल रही विभिन्न लोक कल्याणकारी और स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया गया। बैठक के दौरान, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, शेखपुरा ने बताया कि जिला राष्ट्रीय मानकों के आधार पर कई क्षेत्रों में अग्रणी है। आभा आईडी वेरिफिकेशन में शेखपुरा 85.79% लाभार्थियों के सत्यापन के साथ राज्य में पहले स्थान पर है, जबकि राज्य का औसत 61.95% है। इसी तरह, आधार फेस मैचिंग में भी शेखपुरा 96.46% दक्षता के साथ बिहार में शीर्ष पर है। मई माह में जिले के शत-प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्र कम से कम 21 दिन खुले रहे, और 99.68% डोर-टू-डोर गृह भ्रमण का लक्ष्य पूरा कर जिले ने राज्य रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त किया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत जिले के 718 स्वीकृत केंद्रों के सापेक्ष 958 कुल पंजीकरण किए गए हैं, जिसमें घाटकुसुम्भा प्रखंड 31.32% उपलब्धि के साथ सबसे आगे है, जबकि बरबीघा 14.14% के साथ सबसे पीछे है। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत अब तक 905 पंजीकरण (42.01%) किए गए हैं, जिसमें घाटकुसुम्भा ने सर्वाधिक 72.84% का लक्ष्य हासिल किया है। जिले के कुल 718 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 207 अपने भवन में, 363 गैर-सरकारी भवनों में, और शेष अन्य सरकारी स्थलों व विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं। शौचालय निर्माण योजना के तहत 99 केंद्रों पर कार्य पूरा हो चुका है। विभागीय पारदर्शिता बनाए रखने हेतु आंगन ऐप के माध्यम से किए गए निरीक्षणों में अनियमितता पाए जाने पर शेखपुरा, अरियरी और घाटकुसुम्भा की सेविकाओं के मानदेय में कटौती की दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है। पोषण ट्रैकर पर लगातार बेहतरीन मॉनिटरिंग और शत-प्रतिशत कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए चेवाड़ा प्रखंड की महिला पर्यवेक्षिका सायमी तबस्सुम को जिले की 'बेस्ट परफॉर्मर' के रूप में चुना गया है। उप विकास आयुक्त महोदय ने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों और महिला पर्यवेक्षिकाओं को लंबित मामलों, विशेषकर सोशली पेंडिंग फॉर्म्स और आधार लिंकिंग को अगले एक सप्ताह के भीतर मिशन मोड में निपटाने का कड़ा निर्देश दिया है, ताकि जिला अपनी शीर्ष रैंकिंग बनाए रख सके। उन्होंने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और महिला पर्यवेक्षिका को सही प्रतिवेदनों से अवगत कराने का भी निर्देश दिया। बैठक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के साथ अन्य कर्मी भी उपस्थित थे।3
- नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के पहरैठा गांव स्थित पहाड़ पर बुधवार सुबह करीब सात बजे जंगली हाथियों का झुंड देखे जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग भयभीत हो गए हैं और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग करते हुए वन विभाग के अधिकारियों को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन उनका आरोप है कि फोरेस्टर और डीएफओ को फोन करने के बावजूद किसी ने फोन नहीं उठाया। ग्रामीणों के अनुसार, सुबह पहाड़ की ओर गए लोगों ने हाथियों के झुंड को टहलते देखा, जिसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। हाथियों के डर से लोगों ने खेतों और जंगल की ओर जाना बंद कर दिया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथियों का झुंड आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ा तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। बताया जाता है कि गोविंदपुर क्षेत्र में पिछले करीब दो महीनों से जंगली हाथियों का आतंक लगातार जारी है। इस दौरान हाथियों के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अनेक घरों और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है और लोग लगातार भय के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि दो दिन पहले सरकंडा में भी हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया था, फसलों को रौंद दिया था और लोगों को रातभर जागकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। अब पहरैठा के पहाड़ पर हाथियों के दोबारा दिखाई देने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं वन विभाग से हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने और प्रभावित गांवों में निगरानी दल तैनात करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है।1
- बुधवार को शेखपुरा में उप विकास आयुक्त संजय कुमार की अध्यक्षता में एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले की सभी छह परियोजनाओं में चल रही विभिन्न लोक कल्याणकारी और स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, शेखपुरा ने बताया कि आभा आईडी वेरिफिकेशन में जिला 85.79% लाभार्थियों के सत्यापन के साथ राज्य में प्रथम स्थान पर है, जबकि राज्य का औसत 61.95% है। आधार फेस मैचिंग के मामले में भी शेखपुरा 96.46% दक्षता के साथ बिहार में पहले पायदान पर काबिज है। मई माह में जिले के शत-प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्र कम से कम 21 दिन खुले रहे, और 99.68% डोर टू डोर गृह भ्रमण के लक्ष्य को पूरा कर जिले ने राज्य रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त किया है। समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) और मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। पीएमएमवीवाई के तहत जिले के कुल 718 स्वीकृत केंद्रों के सापेक्ष अब तक 958 पंजीकरण किए गए हैं। इसमें घाटकुसुम्भा प्रखंड 31.32% उपलब्धि के साथ सबसे आगे है, जबकि बरबीघा 14.14% के साथ सबसे पीछे है। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत जिले में अब तक 905 पंजीकरण (42.01%) हुए हैं, जिसमें घाटकुसुम्भा ने सर्वाधिक 72.84% का लक्ष्य हासिल किया है। जिले के 718 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 207 केंद्र अपने भवन में, 363 गैर-सरकारी भवनों में और शेष अन्य सरकारी स्थलों व विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं। शौचालय निर्माण योजना के तहत अब तक 99 केंद्रों पर कार्य पूर्ण हो चुका है। विभागीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आंगन ऐप के जरिए किए गए निरीक्षणों में अनियमितता पाए जाने पर शेखपुरा, अरियरी और घाटकुसुम्भा की सेविकाओं के मानदेय से कटौती की दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है। पोषण ट्रैकर पर लगातार बेहतरीन मॉनिटरिंग और शत-प्रतिशत कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए चेवाड़ा प्रखंड की महिला पर्यवेक्षिका सायमी तबस्सुम को जिले की 'बेस्ट परफॉर्मर' चुना गया है। उप विकास आयुक्त ने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों और महिला पर्यवेक्षिकाओं को लंबित मामलों, विशेषकर सोशली पेंडिंग फॉर्म्स और आधार लिंकिंग, को मिशन मोड में अगले एक सप्ताह के भीतर निपटाने का कड़ा निर्देश दिया, ताकि जिला अपनी शीर्ष रैंकिंग बनाए रख सके। इस बैठक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और अन्य कर्मी उपस्थित थे।1
- शेखपुरा में प्रशासनिक स्तर पर अनुमंडल कार्यालय, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डीआरडीए, जेल प्रशासन और सभी प्रखंड कार्यालयों के अधिकारियों व कर्मियों ने सामूहिक रूप से "नशा मुक्त भारत" की शपथ ली है। इस पहल को एक सराहनीय कदम बताया गया है, जो समाज में एक सकारात्मक संदेश भेजेगा और नशामुक्ति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। यह जानकारी डी.पी.आर.ओ., शेखपुरा द्वारा दी गई है। इस पहल के कुछ महत्वपूर्ण प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है। यह संकल्प लेना कि नशामुक्ति केवल एक व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है, सभी कार्यालय प्रधानों द्वारा अपने कर्मियों के साथ इस संदेश को प्रभावी ढंग से प्रसारित करता है। अभियान का जिले के हर विभाग और प्रखंड स्तर तक पहुँचना यह सुनिश्चित करता है कि नशा मुक्ति का संदेश अंतिम छोर तक के नागरिकों और कर्मियों तक पहुँच सके। इसके अतिरिक्त, अपने कार्यालयों में नशामुक्ति का संकल्प लेने से कार्यस्थल का वातावरण स्वस्थ और सुरक्षित बनता है, जिसका सीधा प्रभाव सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ता है। जिले में "नशा मुक्त सप्ताह" के अंतर्गत कई कार्यालयों में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम और शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। ऐसे अभियान समाज को स्वस्थ और नशामुक्त बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम माने जा रहे हैं।4
- झारखंड के कोडरमा में कोर्ट के आदेश पर सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है। इस अभियान के तहत गरीब, दलित और मजदूर परिवारों के घर तोड़े जा रहे हैं। हालांकि, इस पर यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि जिन परिवारों के घर टूट रहे हैं, उनके पुनर्वास के लिए प्रशासन द्वारा क्या व्यवस्था की गई है। यह स्वीकार किया गया है कि कानून का पालन करना आवश्यक है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है कि कोई भी परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश न हो। प्रशासन और सरकार से यह मांग की जा रही है कि वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अतिक्रमण से प्रभावित हुए इन परिवारों के लिए उचित और तत्काल व्यवस्था करें।1