झारखंड के गुमला जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के मुख्य बाजार में सोमवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना में दो लकड़ी की गुमटियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं, वहीं पास स्थित ‘राज बैग’ स्टोर में रखा लाखों रुपये मूल्य का बैग और अन्य सामान भी नष्ट हो गया। आग इतनी विकराल थी कि पूरे बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की शुरुआत एक गुमटी से धुआं उठने के साथ हुई, जिसके बाद यह तेजी से फैल गई। जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, दुकानदार और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों और दुकानदारों ने तत्परता दिखाते हुए पानी, पाइप और अन्य संसाधनों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। उनकी सूझबूझ से आग को आसपास की अन्य दुकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना की सूचना मिलने पर चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार और मुखिया शोभा देवी भी दलबल के साथ घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने मौके पर हुए नुकसान का जायजा लिया और पीड़ित दुकानदारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन मामले की जांच में जुट गए हैं।
झारखंड के गुमला जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के मुख्य बाजार में सोमवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना में दो लकड़ी की गुमटियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं, वहीं पास स्थित ‘राज बैग’ स्टोर में रखा लाखों रुपये मूल्य का बैग और अन्य सामान भी नष्ट हो गया। आग इतनी विकराल थी कि पूरे बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की शुरुआत एक गुमटी से धुआं उठने के साथ हुई, जिसके बाद यह तेजी से फैल गई। जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, दुकानदार और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों और दुकानदारों ने तत्परता दिखाते हुए पानी, पाइप और अन्य संसाधनों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। उनकी सूझबूझ से आग को आसपास की अन्य दुकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना की सूचना मिलने पर चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार और मुखिया शोभा देवी भी दलबल के साथ घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने मौके पर हुए नुकसान का जायजा लिया और पीड़ित दुकानदारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन मामले की जांच में जुट गए हैं।
- गुमला जिले के चैनपुर बाजार टांड़ रोड स्थित राज बैग पैलेस एंड सिंगार दुकान में सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस दौरान आसपास के दुकानदारों, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर मानवता और साहस का परिचय दिया। उन्होंने बाल्टी से पानी डालकर घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया। हालांकि, आग बुझने तक दो गुमटी दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो चुकी थीं, जबकि तीसरी दुकान का एक हिस्सा भी आग की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया। इस अग्निकांड में लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।1
- झारखंड के गुमला जिले के पालकोट स्थित केराटोली निवासी 38 वर्षीय तीर्थनाथ सिंह को उनके छोटे भाई मनोहर सिंह ने शनिवार सुबह धान रोपने को लेकर हुए विवाद में हथौड़ी से मारकर घायल कर दिया। यह घटना सुबह करीब 8 बजे हुई। परिजनों ने तीर्थनाथ सिंह को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ जमीन विवाद में मारपीट के बाद वे ज़ख़्मी हालत में उपचाराधीन हैं।1
- दिल्ली में आदिवासी समाज ने एक प्रमुख मांग उठाई है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलता है, तो उसका अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा समाप्त कर दिया जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि इस मांग को लेकर कथित तौर पर लगभग 10 लाख आदिवासी समाज के सदस्य दिल्ली में एकत्र हुए हैं। यह मांग मुख्य रूप से ईसाई और मुस्लिम धर्मों में होने वाले धर्मांतरण के संदर्भ में है।1
- गुमला के सिसई थाना परिसर में बकरीद पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन हेतु एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव और अंचल पुलिस निरीक्षक गुलशन भेंगरा ने की, जिसमें पर्व को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की अपील की गई। पुलिस प्रशासन ने लोगों से किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने का आग्रह किया। साथ ही, सोशल मीडिया पर गलत अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर तत्काल थाना प्रभारी को सूचना देने के निर्देश दिए गए, ताकि ऐसे व्यक्तियों पर उचित कार्रवाई की जा सके। बैठक के दौरान अंजुमन फलाहुल मुस्लेमिन संगठन सिसई ने बकरीद की नमाज़ के निर्धारित समय की जानकारी दी। बताया गया कि सिसई के आठ अलग-अलग मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6:30 बजे से 8:00 बजे तक नमाज़ अदा की जाएगी। संगठन ने पशु बलि की तस्वीरें या वीडियो लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात भी कही। प्रशासन ने आगामी 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आश्वासन दिया। विशेष रूप से, 28 मई को बृहस्पतिवार होने के कारण सिसई प्रखंड में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भारी भीड़ की आशंका के मद्देनजर सड़कों पर वाहनों के आवागमन को वन-वे (एक तरफा) रखा जाएगा, ताकि जाम की स्थिति न बने और आम जनता को असुविधा न हो। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य सिसई उत्तरी विजयलक्ष्मी कुमारी, पंसस रेखा देवी, जाकिर अली, थाना प्रभारी नीरज कुमार, एसआई अजय कुमार, जनप्रतिनिधि सुनीता कुमारी, शकुंतला देवी, बंदीराम उरांव, शांति समिति के सदस्य अंजुमन सदर सलमान अली, बैबूल अंसारी, निरंजन सिंह, तेजमोहन साहु, विपिन बिहारी झा, कैप्टन लोहरा उरांव, मनोज वर्मा, सूरज सिंह, नवल महतो, सुप्रदीप साहु सहित कई अन्य प्रबुद्ध गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।4
- लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेन्हा से एक मामला सामने आया है, जहाँ एक चिकित्सक ने शक्ति का दुरुपयोग करते हुए सरकारी कार्य में हस्तक्षेप किया। यह घटना पुलिस हिरासत में आए एक आरोपी की उम्र और स्वास्थ्य सत्यापन को लेकर संबंधित चिकित्सक से हुई बहस से जुड़ी है। इस पूरे प्रकरण को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि सरकारी कार्यों में ही चिकित्सक इस प्रकार शक्ति का दुरुपयोग करते हैं और हस्तक्षेप करते हैं, तो आम जनता के साथ उनका व्यवहार कैसा होगा और उन्हें कैसी सुविधाएँ मिलती होंगी। यह स्थिति जांच का विषय है।1
- कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में भटकल के पास एक नदी में सीपियां इकट्ठा करने गए आठ लोगों की डूबने से मौत हो गई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद दो अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मरने वालों में सात महिलाएं शामिल थीं। यह घटना तब हुई जब ये लोग नदी में सीपियां चुन रहे थे।1
- झारखंड के गुमला जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के मुख्य बाजार में सोमवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना में दो लकड़ी की गुमटियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं, वहीं पास स्थित ‘राज बैग’ स्टोर में रखा लाखों रुपये मूल्य का बैग और अन्य सामान भी नष्ट हो गया। आग इतनी विकराल थी कि पूरे बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की शुरुआत एक गुमटी से धुआं उठने के साथ हुई, जिसके बाद यह तेजी से फैल गई। जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, दुकानदार और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों और दुकानदारों ने तत्परता दिखाते हुए पानी, पाइप और अन्य संसाधनों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। उनकी सूझबूझ से आग को आसपास की अन्य दुकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना की सूचना मिलने पर चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार और मुखिया शोभा देवी भी दलबल के साथ घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने मौके पर हुए नुकसान का जायजा लिया और पीड़ित दुकानदारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन मामले की जांच में जुट गए हैं।1
- गुमला के सिसई प्रखंड से उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए मज़दूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट और बकाया मजदूरी का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस से वापस लौटे पीड़ित मज़दूरों ने अपनी आपबीती समाजसेवी संजय वर्मा को सुनाई, जिसके बाद उनके नेतृत्व में मज़दूरों ने श्रम विभाग गुमला में शिकायत दर्ज कराई है। सिसई के इन मज़दूरों ने बनारस के 'सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठा' के मालिक और एक स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाकर दिन-रात काम कराने, मारपीट करने और बाल मज़दूरी कराने के साथ-साथ तय वेतन न देने का आरोप लगाया है। पीड़ित मज़दूर सिसई के लकेया बांसटोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में (यह तिथि मूल पाठ में दी गई है) एक स्थानीय एजेंट ने लगभग 20 मज़दूरों को 15 हज़ार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर भट्ठे पर ले गया था, लेकिन वहां उन्हें गुज़ारे के नाम पर मात्र 1500 रुपये दिए जाते थे और उनसे कड़ी मेहनत कराई जाती थी। मज़दूरों का आरोप है कि बकाया मज़दूरी मांगने पर भट्ठा मालिक डब्लू सिंह गाली-गलौज और मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन काम कराया जाता था और उनके साथ भी मारपीट की जाती थी, जिससे कई मज़दूर प्रताड़ना से परेशान होकर पहले ही वहां से भाग निकले थे। जगरनाथ तुरी सहित चार मज़दूरों ने किसी तरह 6 माह 15 दिन तक वहां काम किया, जिसके बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें भी बिना मज़दूरी दिए मारपीट कर भगा दिया। वापस लौटने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने किसी दूसरे ईंट भट्ठे में एक सप्ताह काम करके पैसे जुटाए और फिर सिसई लौटे। पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि उनके चार मज़दूरों के कुल 3 लाख 90 हज़ार रुपये की मज़दूरी भट्ठा मालिक के पास बकाया है। उन्होंने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है। समाजसेवी संजय वर्मा ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुमला ज़िले के मज़दूरों के साथ दूसरे राज्यों में ऐसी अमानवीय घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें मारपीट और बकाया मजदूरी न दिए जाने के मामले पहले भी डिब्रुगढ़, असम से सामने आए थे। उन्होंने इन घटनाओं के लिए स्थानीय एजेंटों को सबसे अधिक दोषी ठहराया, जो अपनी मोटी कमाई के लालच में भोले-भाले गरीब मज़दूरों को पैसे का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और उन्हें 'बेचने' का काम करते हैं। वर्मा ने बताया कि इन एजेंटों के पास मज़दूर भेजने का कोई वैध दस्तावेज़ या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से ऐसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सख्ती दिखाते हुए इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।3
- सोशल मीडिया पर लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला सवाल वायरल हो रहा है, जिसमें सीधे तौर पर पूछा गया है कि क्या ईसाई और आदिवासी 'एक ही मां के औलाद' हैं। यह पोस्ट ईसाई और आदिवासी पहचान के बीच के संबंध पर एक तीव्र और विवादास्पद प्रश्न उठाता है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।1