निवाली में श्रीराम कथा के आठवें दिन शबरी और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन निवाली में श्रीराम कथा के आठवें दिन शबरी और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन ईश्वर केवल भाव व भक्ति के भुखे है शबरी मिलन उदाहरण है केवट प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति में कोई ऊंच-नीच नहीं होती। केवट का प्रभु के चरण पखारना और भगवान का उसे गले लगाना मानवता का सबसे बड़ा संदेश है। (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी) निवाली,1 अप्रेल बुधवार गुमडीया रोड पर पंचमुखी हनुमान मंदीर की स्थापना को एक वर्ष होने पर पंचमुखी मंदीर समिति व्दारा गुमडीया रोड पर कंचन जीजी के निवास के समीप मैदान पर 24 मार्च से 1 अप्रेल तक नौ दिवसीय नगर में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा वाचक पंडित रमेश शर्मा ने भक्त और भगवान के अनन्य प्रेम का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने शबरी के अटूट विश्वास और केवट के निस्वार्थ प्रेम के प्रसंगों को विस्तार से समझाया। शबरी प्रसंग: पंडित शर्मा ने बताया कि कैसे शबरी के वर्षों के इंतजार और उनके जूठे बेरों को प्रभु श्रीराम ने सहज स्वीकार किया, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं। केवट संवाद: केवट प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति में कोई ऊंच-नीच नहीं होती। केवट का प्रभु के चरण पखारना और भगवान का उसे गले लगाना मानवता का सबसे बड़ा संदेश है। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में आरती के पश्चात महाप्रसाद का वितरण किया गया।
निवाली में श्रीराम कथा के आठवें दिन शबरी और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन निवाली में श्रीराम कथा के आठवें दिन शबरी और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन ईश्वर केवल भाव व भक्ति के भुखे है शबरी मिलन उदाहरण है केवट प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति में कोई ऊंच-नीच नहीं होती। केवट का प्रभु के चरण पखारना और भगवान का उसे
गले लगाना मानवता का सबसे बड़ा संदेश है। (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी) निवाली,1 अप्रेल बुधवार गुमडीया रोड पर पंचमुखी हनुमान मंदीर की स्थापना को एक वर्ष होने पर पंचमुखी मंदीर समिति व्दारा गुमडीया रोड पर कंचन जीजी के निवास के समीप मैदान पर 24 मार्च से 1 अप्रेल तक नौ दिवसीय नगर में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा वाचक पंडित
रमेश शर्मा ने भक्त और भगवान के अनन्य प्रेम का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने शबरी के अटूट विश्वास और केवट के निस्वार्थ प्रेम के प्रसंगों को विस्तार से समझाया। शबरी प्रसंग: पंडित शर्मा ने बताया कि कैसे शबरी के वर्षों के इंतजार और उनके जूठे बेरों को प्रभु श्रीराम ने सहज स्वीकार किया, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर केवल प्रेम
और भक्ति के भूखे हैं। केवट संवाद: केवट प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति में कोई ऊंच-नीच नहीं होती। केवट का प्रभु के चरण पखारना और भगवान का उसे गले लगाना मानवता का सबसे बड़ा संदेश है। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में आरती के पश्चात महाप्रसाद का वितरण किया गया।
- निवाली में श्रीराम कथा के आठवें दिन शबरी और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन ईश्वर केवल भाव व भक्ति के भुखे है शबरी मिलन उदाहरण है केवट प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति में कोई ऊंच-नीच नहीं होती। केवट का प्रभु के चरण पखारना और भगवान का उसे गले लगाना मानवता का सबसे बड़ा संदेश है। (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी) निवाली,1 अप्रेल बुधवार गुमडीया रोड पर पंचमुखी हनुमान मंदीर की स्थापना को एक वर्ष होने पर पंचमुखी मंदीर समिति व्दारा गुमडीया रोड पर कंचन जीजी के निवास के समीप मैदान पर 24 मार्च से 1 अप्रेल तक नौ दिवसीय नगर में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा वाचक पंडित रमेश शर्मा ने भक्त और भगवान के अनन्य प्रेम का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने शबरी के अटूट विश्वास और केवट के निस्वार्थ प्रेम के प्रसंगों को विस्तार से समझाया। शबरी प्रसंग: पंडित शर्मा ने बताया कि कैसे शबरी के वर्षों के इंतजार और उनके जूठे बेरों को प्रभु श्रीराम ने सहज स्वीकार किया, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं। केवट संवाद: केवट प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति में कोई ऊंच-नीच नहीं होती। केवट का प्रभु के चरण पखारना और भगवान का उसे गले लगाना मानवता का सबसे बड़ा संदेश है। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में आरती के पश्चात महाप्रसाद का वितरण किया गया।4
- बड़वानी SP पद्मविलोचन शुक्ल ने नए नवाचारों को लेकर की प्रेस कांफ्रेस,मीडिया से अभियान को लेकर की चर्चा,1
- राजपुर (बड़वानी)। नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्ति को लेकर प्रशासन द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। इसी क्रम में राजपुर नगर परिषद में चार एल्डरमैन की नियुक्ति की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नियुक्त किए गए नामों में — आफताब राज (वार्ड 12), दीपक पटेल (वार्ड 13), प्रवीण जैन (वार्ड 4) एवं यशवंत कानपूरे (वार्ड 15) शामिल हैं। नव-नियुक्त एल्डरमैन के नगर परिषद पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष शिखा विजय अग्रवाल, उपाध्यक्ष आकाश बर्मन, पार्षद दीपा हुकुमचंद गुप्ता, कालू पटवा, तोताराम धनगर, राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि विजय अग्रवाल, पूर्व संगठन मंत्री हुकुमचंद गुप्ता, विशाल पटेल, राजू कुशवाहा, वार्ड 7 के वास्कले, जावेद कुरेशी, सीएमओ जगदीश धांगड़ एवं नगर परिषद के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। बताया जा रहा है कि इन नियुक्तियों के बाद राजपुर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और इसे आगामी विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नव-नियुक्त एल्डरमैन से शहर के विकास, स्वच्छता, सड़क, पानी एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। सभी नव-नियुक्त एल्डरमैन को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।1
- बड़वानी में एक पिता की रिटायरमेंट की कहानी हमें प्रेरणा देती है कि सेवानिवृत्ति किसी मेडल से कम नहीं है। यह खबर हमें बताती है कि जब बच्चे अपने पिता के रास्ते पर चलते हैं तो वे न केवल अपने पिता का सम्मान करते हैं बल्कि उनकी सेवानिवृत्ति को भी एक सम्मान के रूप में देखते हैं। यह हिंदी न्यूज की एक अनोखी खबर है जो हमेंiयह याद दिलाती है कि एक पिता एक रोल मॉडल होता है और उसकी सेवानिवृत्ति एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होता है। बड़वानी की इस खबर में हमें यह देखने को मिलता है कि कैसे एक पिता की सेवानिवृत्ति उसके परिवार के लिए कितनी महत्वपूर्ण होती है और यह कैसे एक प्रेरणा का स्रोत बनती है। यह न्यूज हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सेवानिवृत्ति किसी मेडल से कम नहीं है और यह एक पिता के जीवन में एक महत्वपूर्ण क्षण होता है। बड़वानी की यह खबर हमें प्रेरित करती है और हमें यह याद दिलाती है कि एक पिता का सम्मान और प्रेम किसी भी चीज से कम नहीं है।2
- Post by NIMAD DASTAK NEWS1
- बड़वानी।जिले के ग्राम सजवानी में मक्का की फसल पूरी तरह से सूखकर बर्बाद होने का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। प्रभावित किसान संजय बर्फा (पिता हेमचंद बर्फा) एवं काना (पिता बाबुल राठौर) ने शिव एग्रो, सेगांव फाटा बड़वानी से मक्का 9459 सिखर किस्म का बीज खरीदा था। किसानों का आरोप है कि बीज विक्रेता द्वारा उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि उक्त बीज में “सुखने की बीमारी” नहीं आएगी और फसल अच्छी होगी, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत रही। किसानों के अनुसार, फसल की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन कुछ समय बाद पौधे अचानक सूखने लगे और स्थिति इतनी खराब हो गई कि पूरी फसल बिना भुट्टे के ही नष्ट हो गई। खेतों में खड़ी मक्का सूखकर खत्म हो गई, जिससे किसानों को उत्पादन का एक भी दाना प्राप्त नहीं हुआ। इस नुकसान से किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि उन्होंने बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर काफी खर्च किया था। पीड़ित किसान संजय बर्फा ने बताया, “हमें दुकानदार ने भरोसा दिलाया था कि इस बीज से कोई बीमारी नहीं आएगी और फसल अच्छी होगी, लेकिन पूरी फसल सूख गई। अब हमारे पास कुछ भी नहीं बचा है। हमने कई बार दुकानदार से बात की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।” मामले को लेकर किसानों ने राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के माध्यम से कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विभाग बड़वानी को लिखित आवेदन सौंपकर जांच की मांग की है। आवेदन में बीज की गुणवत्ता की जांच कर संबंधित कंपनी और विक्रेता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। किसानों ने बिल की छायाप्रति भी आवेदन के साथ संलग्न की है। वहीं इस पूरे मामले में शिव एग्रो के संचालक राधेश्याम काग ने किसानों के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि बीज पूरी तरह सही था और यदि बीज में खराबी होती तो अंकुरण ही नहीं होता या पौधे विकसित नहीं होते। उनके अनुसार, यह समस्या “विल्ट” बीमारी के कारण हो सकती है, जो वर्तमान में कई प्रकार की मक्का वैरायटी में देखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या जमीन की उर्वरता और पोषक तत्वों की कमी से जुड़ी हो सकती है, न कि बीज की गुणवत्ता से।राधेश्याम काग ने बताया, “हमारे यहां से कई किसानों ने यही बीज लिया है, लेकिन ऐसी शिकायत कहीं और से नहीं आई है। यह जमीन की समस्या या मौसमी प्रभाव हो सकता है। फिर भी यदि जांच होती है तो हम सहयोग करेंगे।”1
- Post by SNY R LIVE MP1
- Post by NIMAD DASTAK NEWS1