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गुमला के बसिया में रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग से सरस्वती शिशु विद्या मंदिर तक जाने वाली सड़क की जर्जर हालत से तंग आकर स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और छात्रों ने खुद ही सड़क की मरम्मत का बीड़ा उठाया। लगातार अनदेखी से परेशान होकर छात्रों और शिक्षकों ने खुद फावड़ा उठाकर सड़क सुधारने का काम किया। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और जलजमाव के कारण आए दिन बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे थे। विद्यालय के शिक्षक नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः लाचार होकर बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को स्वयं श्रमदान कर गड्ढों को भरना पड़ा।

3 hrs ago
user_Niraj kumar Sahu
Niraj kumar Sahu
पत्रकार बसिया, गुमला, झारखंड•
3 hrs ago

गुमला के बसिया में रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग से सरस्वती शिशु विद्या मंदिर तक जाने वाली सड़क की जर्जर हालत से तंग आकर स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और छात्रों ने खुद ही सड़क की मरम्मत का बीड़ा उठाया। लगातार अनदेखी से परेशान होकर छात्रों और शिक्षकों ने खुद फावड़ा उठाकर सड़क सुधारने का काम किया। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और जलजमाव के कारण आए दिन बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे थे। विद्यालय के शिक्षक नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः लाचार होकर बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को स्वयं श्रमदान कर गड्ढों को भरना पड़ा।

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  • गुमला के बसिया में रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग से सरस्वती शिशु विद्या मंदिर तक जाने वाली सड़क की जर्जर हालत से तंग आकर स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और छात्रों ने खुद ही सड़क की मरम्मत का बीड़ा उठाया। लगातार अनदेखी से परेशान होकर छात्रों और शिक्षकों ने खुद फावड़ा उठाकर सड़क सुधारने का काम किया। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और जलजमाव के कारण आए दिन बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे थे। विद्यालय के शिक्षक नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः लाचार होकर बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को स्वयं श्रमदान कर गड्ढों को भरना पड़ा।
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    गुमला के बसिया में रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग से सरस्वती शिशु विद्या मंदिर तक जाने वाली सड़क की जर्जर हालत से तंग आकर स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और छात्रों ने खुद ही सड़क की मरम्मत का बीड़ा उठाया। लगातार अनदेखी से परेशान होकर छात्रों और शिक्षकों ने खुद फावड़ा उठाकर सड़क सुधारने का काम किया।

सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और जलजमाव के कारण आए दिन बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे थे। विद्यालय के शिक्षक नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः लाचार होकर बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को स्वयं श्रमदान कर गड्ढों को भरना पड़ा।
    user_Niraj kumar Sahu
    Niraj kumar Sahu
    पत्रकार बसिया, गुमला, झारखंड•
    3 hrs ago
  • सिमडेगा जिला के लचरागढ़ निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट एवं भ्रष्टाचार निरोधक जांच विभाग के सक्रिय सदस्य विष्णु साहू ने राज्य स्तर पर धर्मांतरण और भूमि कब्जे के मामलों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने 'डॉक्ट्रिन ऑफ क्रिश्चियन डिस्कवरी' के सिद्धांत का हवाला देते हुए बताया कि करीब 500 वर्ष पहले 15वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों के बीच बनी सहमति और ईसाइयों के धर्मगुरु पोप के समर्थन के तहत गैर-ईसाई देशों पर कब्जे और धर्मांतरण की छूट दी गई थी। सन 1493 में पोप एलेकजेंडर 6वें द्वारा दुनिया को दो हिस्सों में बांटने, 1498 में वास्कोडिगामा के आगमन, 1770 में जेम्स कुक के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने और अमेरिका, न्यूजीलैंड, कनाडा तथा भारत पर कब्जे के इतिहास का उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने 1510 ईस्वी में गोवा पर अल्बुकर्क के कब्जे, मंदिर तोड़ने और 1543 के गोवा एक्विजिशन के दमनकारी इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि आजादी के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' चलाकर 36 घंटे में ही उन्हें वहां से खदेड़ा था। विष्णु साहू ने आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रार्थना सभाओं और चंगाई सभाओं के जरिए बीमारियों को ठीक करने के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर और लालच देकर धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। झारखंड में इसी गुप्त षड्यंत्र के तहत सीएनटी एक्ट को ताक पर रखकर खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में गरीब आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर मिशनरी स्कूलों व चर्च का निर्माण कराया गया। जिन आदिवासियों की जमीनें ली गईं, वे आज भूमिहीन होकर प्रवासी मजदूर के रूप में जीवन यापन करने के लिए राज्य से बाहर जाने पर मजबूर हैं। इसके अलावा सरकारी और गैर-मजरुआ भूमि तथा जंगलों को काटकर भी मिशनरी संस्थाओं ने जमीनों पर कब्जा किया है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणी छोटा नागपुर के प्रायः हर सरकारी विभाग में क्रिश्चियन समुदाय के लोग काबिज हैं, जिससे गैर-ईसाई आदिवासियों और आम लोगों को अपने कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पादरियों द्वारा विभिन्न शोषणों के फरमान जारी करने और झूठे एससी-एसटी मुकदमों का डर दिखाकर नफरत फैलाने के काम किए जा रहे हैं। इसी नीति के तहत मेघालय में लगभग 75% और मिजोरम तथा नागालैंड में 87% से 90% तक ईसाई आबादी हो चुकी है। उन्होंने झारखंड के नागरिकों से किसी भी लालच या अंधविश्वास में न पड़ने का अनुरोध किया और राज्य व केंद्र सरकार से देश की एकता, अखंडता और समरसता बनाए रखने के लिए ठोस रणनीति बनाकर कार्रवाई करने का आग्रह किया।
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    सिमडेगा जिला के लचरागढ़ निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट एवं भ्रष्टाचार निरोधक जांच विभाग के सक्रिय सदस्य विष्णु साहू ने राज्य स्तर पर धर्मांतरण और भूमि कब्जे के मामलों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने 'डॉक्ट्रिन ऑफ क्रिश्चियन डिस्कवरी' के सिद्धांत का हवाला देते हुए बताया कि करीब 500 वर्ष पहले 15वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों के बीच बनी सहमति और ईसाइयों के धर्मगुरु पोप के समर्थन के तहत गैर-ईसाई देशों पर कब्जे और धर्मांतरण की छूट दी गई थी। सन 1493 में पोप एलेकजेंडर 6वें द्वारा दुनिया को दो हिस्सों में बांटने, 1498 में वास्कोडिगामा के आगमन, 1770 में जेम्स कुक के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने और अमेरिका, न्यूजीलैंड, कनाडा तथा भारत पर कब्जे के इतिहास का उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने 1510 ईस्वी में गोवा पर अल्बुकर्क के कब्जे, मंदिर तोड़ने और 1543 के गोवा एक्विजिशन के दमनकारी इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि आजादी के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' चलाकर 36 घंटे में ही उन्हें वहां से खदेड़ा था।

विष्णु साहू ने आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रार्थना सभाओं और चंगाई सभाओं के जरिए बीमारियों को ठीक करने के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर और लालच देकर धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। झारखंड में इसी गुप्त षड्यंत्र के तहत सीएनटी एक्ट को ताक पर रखकर खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में गरीब आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर मिशनरी स्कूलों व चर्च का निर्माण कराया गया। जिन आदिवासियों की जमीनें ली गईं, वे आज भूमिहीन होकर प्रवासी मजदूर के रूप में जीवन यापन करने के लिए राज्य से बाहर जाने पर मजबूर हैं। इसके अलावा सरकारी और गैर-मजरुआ भूमि तथा जंगलों को काटकर भी मिशनरी संस्थाओं ने जमीनों पर कब्जा किया है।

उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणी छोटा नागपुर के प्रायः हर सरकारी विभाग में क्रिश्चियन समुदाय के लोग काबिज हैं, जिससे गैर-ईसाई आदिवासियों और आम लोगों को अपने कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पादरियों द्वारा विभिन्न शोषणों के फरमान जारी करने और झूठे एससी-एसटी मुकदमों का डर दिखाकर नफरत फैलाने के काम किए जा रहे हैं। इसी नीति के तहत मेघालय में लगभग 75% और मिजोरम तथा नागालैंड में 87% से 90% तक ईसाई आबादी हो चुकी है। उन्होंने झारखंड के नागरिकों से किसी भी लालच या अंधविश्वास में न पड़ने का अनुरोध किया और राज्य व केंद्र सरकार से देश की एकता, अखंडता और समरसता बनाए रखने के लिए ठोस रणनीति बनाकर कार्रवाई करने का आग्रह किया।
    user_SHAMBHU. S. CHAUHAN
    SHAMBHU. S. CHAUHAN
    Business Networking Company सिसई, गुमला, झारखंड•
    7 hrs ago
  • झारखंड के सिमडेगा स्थित झूलन सिंह चौक पर गुरुवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) एवं सीबीएसई की मार्किंग में कथित गड़बड़ी, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना एवं जिला सचिव मो. सफीक खान के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं शामिल हुए, जिन्होंने पैदल मार्च निकालते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के साथ न्याय और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने कहा कि छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है। वहीं जिला सचिव मो. सफीक खान ने कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से नीट-2026 एवं सीबीएसई मार्किंग विवाद की निष्पक्ष जांच कराने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
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    झारखंड के सिमडेगा स्थित झूलन सिंह चौक पर गुरुवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) एवं सीबीएसई की मार्किंग में कथित गड़बड़ी, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना एवं जिला सचिव मो. सफीक खान के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं शामिल हुए, जिन्होंने पैदल मार्च निकालते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के साथ न्याय और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना ने कहा कि छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है। वहीं जिला सचिव मो. सफीक खान ने कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से नीट-2026 एवं सीबीएसई मार्किंग विवाद की निष्पक्ष जांच कराने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
    user_Satyam kumar keshri
    Satyam kumar keshri
    सिमडेगा, सिमडेगा, झारखंड•
    3 hrs ago
  • खूंटी जिले के तोरपा थाना क्षेत्र में हुई ज्वेलरी दुकान और शराब दुकान चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर से चार शातिर अपराधियों को दबोच लिया है। गिरफ्तार अपराधियों के पास से चोरी किए गए आभूषण, शराब की बोतलें, ताला काटने के औजार और अन्य सामान बरामद किए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी गुरुवार दोपहर 1:00 बजे एसपी ऋषभ गर्ग ने प्रेस वार्ता आयोजित करके दी।
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    खूंटी जिले के तोरपा थाना क्षेत्र में हुई ज्वेलरी दुकान और शराब दुकान चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर से चार शातिर अपराधियों को दबोच लिया है।

गिरफ्तार अपराधियों के पास से चोरी किए गए आभूषण, शराब की बोतलें, ताला काटने के औजार और अन्य सामान बरामद किए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी गुरुवार दोपहर 1:00 बजे एसपी ऋषभ गर्ग ने प्रेस वार्ता आयोजित करके दी।
    user_Durga Baraik
    Durga Baraik
    Local News Reporter कर्रा, खूंटी, झारखंड•
    6 hrs ago
  • Address angrabari bichna khunti pin code 835210 jharkhand
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    Address angrabari bichna khunti pin code 835210 jharkhand
    user_Rishi Kisan Machine
    Rishi Kisan Machine
    Farmer तोरपा, खूंटी, झारखंड•
    13 hrs ago
  • रांची में नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। राजधानी रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय के समीप कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथ में तख्तियां और बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने नीट परीक्षा धांधली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश कार्यालय का घेराव करने आगे बढ़े, जिन्हें पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने "शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो" और "युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो" जैसे नारे लगाए और विरोध जताते हुए केंद्र सरकार का पुतला भी फूंका। कांग्रेस नेताओं ने कहा, "देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य खतरे में है। नीट परीक्षा में हुई धांधली कोई मामूली बात नहीं है। जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी।" मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इस उग्र प्रदर्शन के कारण काफी देर तक इलाके में हलचल और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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    रांची में नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। राजधानी रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय के समीप कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथ में तख्तियां और बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने नीट परीक्षा धांधली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश कार्यालय का घेराव करने आगे बढ़े, जिन्हें पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने "शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो" और "युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो" जैसे नारे लगाए और विरोध जताते हुए केंद्र सरकार का पुतला भी फूंका। कांग्रेस नेताओं ने कहा, "देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य खतरे में है। नीट परीक्षा में हुई धांधली कोई मामूली बात नहीं है। जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी।"

मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इस उग्र प्रदर्शन के कारण काफी देर तक इलाके में हलचल और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
    user_Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Insurance Agent लापुंग, रांची, झारखंड•
    13 hrs ago
  • रांची के हरमू बायपास रोड पर JPSC और NEET जैसे मुद्दों के नाम पर कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और शक्ति प्रदर्शन का ढोंग रचा, जिसके कारण घंटों तक पूरा शहर थमा रहा, यातायात ठप हो गया और आम जनता भीषण जाम में फंसी रही। इस प्रदर्शन के चलते सड़क पर कई एम्बुलेंस सायरन बजा-बजाकर फंसी रहीं, जिनके अंदर मरीज जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे थे और बाहर परिजन बिलख रहे थे। इसके बावजूद राजनीतिक झंडे लहरा रहे कार्यकर्ताओं ने उनकी चीखों पर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं छुट्टी के बाद घर लौटने की आस में बैठे मासूम बच्चे बिना पानी और किसी राहत के गाड़ियों के धुएं के बीच स्कूल बसों में घंटों कैद रहे। घटना को लेकर प्रशासन की घोर लापरवाही पर सवाल उठाए गए हैं कि दो बड़े दलों के आमने-सामने आने की जानकारी के बावजूद ट्रैफिक पुलिस निष्क्रिय रही और रूट डायवर्जन नहीं किया गया। परीक्षा में धांधली पर गुस्सा जायज है, लेकिन आम नागरिकों, बीमार मरीजों और बच्चों को परेशान करके किए जाने वाले इस विरोध को 'जनहित' नहीं बल्कि 'सार्वजनिक उत्पीड़न' करार दिया गया है। जनता की मांग है कि विरोध प्रदर्शन तय जगहों पर ही हों और हरमू बायपास जैसे संवेदनशील रास्तों को तुरंत 'नो-प्रोटेस्ट ज़ोन' घोषित किया जाए।
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    रांची के हरमू बायपास रोड पर JPSC और NEET जैसे मुद्दों के नाम पर कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और शक्ति प्रदर्शन का ढोंग रचा, जिसके कारण घंटों तक पूरा शहर थमा रहा, यातायात ठप हो गया और आम जनता भीषण जाम में फंसी रही।

इस प्रदर्शन के चलते सड़क पर कई एम्बुलेंस सायरन बजा-बजाकर फंसी रहीं, जिनके अंदर मरीज जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे थे और बाहर परिजन बिलख रहे थे। इसके बावजूद राजनीतिक झंडे लहरा रहे कार्यकर्ताओं ने उनकी चीखों पर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं छुट्टी के बाद घर लौटने की आस में बैठे मासूम बच्चे बिना पानी और किसी राहत के गाड़ियों के धुएं के बीच स्कूल बसों में घंटों कैद रहे।

घटना को लेकर प्रशासन की घोर लापरवाही पर सवाल उठाए गए हैं कि दो बड़े दलों के आमने-सामने आने की जानकारी के बावजूद ट्रैफिक पुलिस निष्क्रिय रही और रूट डायवर्जन नहीं किया गया। परीक्षा में धांधली पर गुस्सा जायज है, लेकिन आम नागरिकों, बीमार मरीजों और बच्चों को परेशान करके किए जाने वाले इस विरोध को 'जनहित' नहीं बल्कि 'सार्वजनिक उत्पीड़न' करार दिया गया है। जनता की मांग है कि विरोध प्रदर्शन तय जगहों पर ही हों और हरमू बायपास जैसे संवेदनशील रास्तों को तुरंत 'नो-प्रोटेस्ट ज़ोन' घोषित किया जाए।
    user_Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Insurance Agent लापुंग, रांची, झारखंड•
    6 hrs ago
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