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पलामू की राजहरा कोलियरी में 15 साल बाद लौटी रौनक, कोयले का रोड सेल शुरू; 25,000 टन की मंजूरी मिली

3 hrs ago
user_Anit tiwary
Anit tiwary
Electrician गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
3 hrs ago

पलामू की राजहरा कोलियरी में 15 साल बाद लौटी रौनक, कोयले का रोड सेल शुरू; 25,000 टन की मंजूरी मिली

More news from झारखंड and nearby areas
  • Post by Anit tiwary
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    Post by Anit tiwary
    user_Anit tiwary
    Anit tiwary
    Electrician गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    3 hrs ago
  • फारबिसगंज मुझे एक साथ दुकान ने पिकप ड्रावर का मेनरोड चाकू से गला काट दिया वारदात cctv camera 📸 मेरिकॉर्ड हो गया l (Forbesganj) भारत के बिहार राज्य के अररिया जिले में स्थित एक प्रमुख शहर और नगर पालिका है। यह नेपाल की सीमा के करीब स्थित है और अररिया जिले के अंतर्गत आता है, जो पूर्व में पूर्णिया जिले का हिस्सा था।
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    फारबिसगंज  मुझे एक साथ दुकान ने पिकप ड्रावर का मेनरोड चाकू से गला काट दिया वारदात cctv camera 📸 मेरिकॉर्ड हो गया l (Forbesganj) भारत के बिहार राज्य के अररिया जिले में स्थित एक प्रमुख शहर और नगर पालिका है। यह नेपाल की सीमा के करीब स्थित है और अररिया जिले के अंतर्गत आता है, जो पूर्व में पूर्णिया जिले का हिस्सा था।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    8 hrs ago
  • झारखंड के छात्राओं को इस दिन मिलेगी स्कॉलरशिप पूरी जानकारी इस वीडियो में
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    झारखंड के छात्राओं को इस दिन मिलेगी स्कॉलरशिप पूरी जानकारी इस वीडियो में
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • Baba Bachcharaj Kunwar Dham
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    Baba Bachcharaj Kunwar Dham
    user_दैनिक भास्कर डंडई
    दैनिक भास्कर डंडई
    स्थानीय समाचार रिपोर्टर दंदई, गढ़वा, झारखंड•
    8 hrs ago
  • Post by Sunil singh
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    Post by Sunil singh
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    23 hrs ago
  • चिनीयां थाना क्षेत्र के कुम्हार टोली, चिनीयां–रंका मुख्य सड़क पर रविवार दोपहर करीब 3 बजे उस वक्त अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्थानीय लोगों ने सड़क पर ही थ्रेसर मशीन लगाकर गेहूं की दवाई (मड़ाई) शुरू कर दी। देखते ही देखते मुख्य सड़क ‘थ्रेसर जोन’ में तब्दील हो गई और वहां से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। करीब दो घंटे तक सड़क पर ही थ्रेसर मशीन चलती रही, जिससे उड़ने वाले भूसे और धूल (डस्ट) ने पूरे इलाके को ढक लिया। सड़क से गुजर रहे बाइक सवार, साइकिल चालक और पैदल राहगीर धूल के गुबार में फंसकर परेशान हो गए। कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में भी दिक्कत महसूस हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुख्य सड़क है, जहां दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद सड़क पर इस तरह से गेहूं की दवाई करना न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। राहगीरों में इसको लेकर खासा आक्रोश देखा गया। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों के लिए खेत या खुले स्थान का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक सड़क का। कई लोगों ने प्रशासन से इस मामले में कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगे चलकर इससे बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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    चिनीयां थाना क्षेत्र के कुम्हार टोली, चिनीयां–रंका मुख्य सड़क पर रविवार दोपहर करीब 3 बजे उस वक्त अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्थानीय लोगों ने सड़क पर ही थ्रेसर मशीन लगाकर गेहूं की दवाई (मड़ाई) शुरू कर दी। देखते ही देखते मुख्य सड़क ‘थ्रेसर जोन’ में तब्दील हो गई और वहां से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
करीब दो घंटे तक सड़क पर ही थ्रेसर मशीन चलती रही, जिससे उड़ने वाले भूसे और धूल (डस्ट) ने पूरे इलाके को ढक लिया। सड़क से गुजर रहे बाइक सवार, साइकिल चालक और पैदल राहगीर धूल के गुबार में फंसकर परेशान हो गए। कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में भी दिक्कत महसूस हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुख्य सड़क है, जहां दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद सड़क पर इस तरह से गेहूं की दवाई करना न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।
राहगीरों में इसको लेकर खासा आक्रोश देखा गया। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों के लिए खेत या खुले स्थान का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक सड़क का। कई लोगों ने प्रशासन से इस मामले में कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगे चलकर इससे बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    user_Hemant Kumar
    Hemant Kumar
    चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    19 hrs ago
  • बलरामपुर: जमवंतपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र में साल भर से CBC मशीन खराब, इलाज के अभाव में बैरंग लौट रहे ग्रामीण ​ बलरामपुर जिले के जमान्तपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। विकासखंड के ग्राम जमवंतपुर स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र में पिछले एक साल से CBC (Complete Blood Count) मशीन खराब पड़ी है। अधिकारियों की इस बड़ी लापरवाही के कारण ग्रामीणों को बुनियादी खून जांच की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। ​इलाज के अभाव में 'उल्टे पैर' लौटने को मजबूर मरीज ​ग्रामीणों का आरोप है कि उप-स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद जब उन्हें पता चलता है कि ब्लड टेस्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें भारी निराशा हाथ लगती है। कई मरीज इलाज के अभाव में अस्पताल से उल्टे पैर घर लौटने को मजबूर हैं। जो ग्रामीण आर्थिक रूप से थोड़े सक्षम हैं, उन्हें मजबूरी में 15 से 20 किलोमीटर दूर रामानुजगंज या जिला मुख्यालय बलरामपुर की दौड़ लगानी पड़ रही है। ​स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही ​हैरानी की बात यह है कि मशीन खराब होने की सूचना विभाग को है, लेकिन साल भर बीत जाने के बाद भी इसे सुधारने या नई मशीन लगाने की जहमत नहीं उठाई गई। ​दूरी की मार: जमवंतपुर से मुख्य शहरों की दूरी अधिक होने के कारण गरीब मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ​समय पर इलाज नहीं: ब्लड रिपोर्ट न होने की वजह से डॉक्टर भी सही उपचार शुरू करने में असमर्थ रहते हैं। ​​इलाके के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार एक तरफ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अंचलों में एक मशीन तक ठीक नहीं कराई जा रही है। ​हम बीमार होकर अस्पताल जाते हैं ताकि जांच हो सके, लेकिन वहां मशीन बंद पड़ी है। अब गरीब आदमी 20 किलोमीटर दूर टेस्ट कराने कैसे जाए
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    बलरामपुर: जमवंतपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र में साल भर से CBC मशीन खराब, इलाज के अभाव में बैरंग लौट रहे ग्रामीण
​ बलरामपुर जिले के जमान्तपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। विकासखंड के ग्राम जमवंतपुर स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र में पिछले एक साल से CBC (Complete Blood Count) मशीन खराब पड़ी है। अधिकारियों की इस बड़ी लापरवाही के कारण ग्रामीणों को बुनियादी खून जांच की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
​इलाज के अभाव में 'उल्टे पैर' लौटने को मजबूर मरीज
​ग्रामीणों का आरोप है कि उप-स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद जब उन्हें पता चलता है कि ब्लड टेस्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें भारी निराशा हाथ लगती है। कई मरीज इलाज के अभाव में अस्पताल से उल्टे पैर घर लौटने को मजबूर हैं। जो ग्रामीण आर्थिक रूप से थोड़े सक्षम हैं, उन्हें मजबूरी में 15 से 20 किलोमीटर दूर रामानुजगंज या जिला मुख्यालय बलरामपुर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
​स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही
​हैरानी की बात यह है कि मशीन खराब होने की सूचना विभाग को है, लेकिन साल भर बीत जाने के बाद भी इसे सुधारने या नई मशीन लगाने की जहमत नहीं उठाई गई।
​दूरी की मार: जमवंतपुर से मुख्य शहरों की दूरी अधिक होने के कारण गरीब मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
​समय पर इलाज नहीं: ब्लड रिपोर्ट न होने की वजह से डॉक्टर भी सही उपचार शुरू करने में असमर्थ रहते हैं।
​​इलाके के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार एक तरफ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अंचलों में एक मशीन तक ठीक नहीं कराई जा रही है।
​हम बीमार होकर अस्पताल जाते हैं ताकि जांच हो सके, लेकिन वहां मशीन बंद पड़ी है। अब गरीब आदमी 20 किलोमीटर दूर टेस्ट कराने कैसे जाए
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • किसानों की सुरक्षा के लिए “किसान मित्र छड़ी” एक उपयोगी नवाचार है। इसमें कंपन अलर्ट और सोलर टॉर्च जैसी सुविधाएं हैं, जो रात में खेतों में काम करते समय सांप व अन्य खतरों से बचाव में मदद करती हैं। कृषि क्षेत्र में AI, ड्रोन, जीएम बीज (GM Seeds) और ड्रिप सिंचाई जैसे नए प्रयोगों से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि, लागत में कमी, जल संरक्षण और कीट-मुक्त फसलों का उत्पादन संभव हुआ है। इन आधुनिक तकनीकों से किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान और बेहतर मंडी भाव मिलने से आय दोगुनी करने में मदद मिल रही है, साथ ही जैविक खेती से मृदा स्वास्थ्य बेहतर हो रहा हैl
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    किसानों की सुरक्षा के लिए “किसान मित्र छड़ी” एक उपयोगी नवाचार है। इसमें कंपन अलर्ट और सोलर टॉर्च जैसी सुविधाएं हैं, जो रात में खेतों में काम करते समय सांप व अन्य खतरों से बचाव में मदद करती हैं।
कृषि क्षेत्र में AI, ड्रोन, जीएम बीज (GM Seeds) और ड्रिप सिंचाई जैसे नए प्रयोगों से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि, लागत में कमी, जल संरक्षण और कीट-मुक्त फसलों का उत्पादन संभव हुआ है। इन आधुनिक तकनीकों से किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान और बेहतर मंडी भाव मिलने से आय दोगुनी करने में मदद मिल रही है, साथ ही जैविक खेती से मृदा स्वास्थ्य बेहतर हो रहा हैl
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    8 hrs ago
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