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खनिज संशोधन बिल के विरोध में झामुमो का एकदिवसीय धरना अनुपम संदेश / जोनसन लकड़ा / महुआडांड़ [ लातेहार] : खान एवं खनिज विधेयक 2026 के विरोध में झामुमो कार्यकर्ताओं ने शनिवार को प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने विधेयक वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी की। इसके बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा गया। जिला संगठन सचिव परवेज आलम ने कहा कि विधेयक रद्द होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
JONSON LAKRA
खनिज संशोधन बिल के विरोध में झामुमो का एकदिवसीय धरना अनुपम संदेश / जोनसन लकड़ा / महुआडांड़ [ लातेहार] : खान एवं खनिज विधेयक 2026 के विरोध में झामुमो कार्यकर्ताओं ने शनिवार को प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने विधेयक वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी की। इसके बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा गया। जिला संगठन सचिव परवेज आलम ने कहा कि विधेयक रद्द होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
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- खनिज संशोधन बिल के विरोध में झामुमो का एकदिवसीय धरना अनुपम संदेश / जोनसन लकड़ा / महुआडांड़ [ लातेहार] : खान एवं खनिज विधेयक 2026 के विरोध में झामुमो कार्यकर्ताओं ने शनिवार को प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने विधेयक वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी की। इसके बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा गया। जिला संगठन सचिव परवेज आलम ने कहा कि विधेयक रद्द होने तक संघर्ष जारी रहेगा।1
- MMDR संशोधन के विरोध में गारू में झामुमो ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन । MMDR संशोधन के विरोध में गारू में झामुमो ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन जोहार झारखण्ड/ गारू संवाददाता जल-जंगल-जमीन व खनिज अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग, संशोधन के प्रावधानों पर जताई आपत्ति जोहार झारखण्ड/गारू संवाददाता गारू। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) गारू प्रखंड कमेटी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। शनिवार को झामुमो नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी/अंचलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए झारखंड के संवैधानिक अधिकारों तथा आदिवासी-मूलवासी समाज के जल, जंगल, जमीन एवं खनिज संसाधनों की रक्षा की मांग उठाई। ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड की पहचान उसकी मिट्टी, जंगल, पहाड़, नदियों और खनिज संपदा से जुड़ी हुई है। आदिवासी एवं मूलवासी समाज के लिए प्राकृतिक संसाधन केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, पहचान और अस्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में खनिज संसाधनों से संबंधित किसी भी कानून या नीति में राज्य के हितों और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। राज्य के संवैधानिक अधिकारों पर जताई चिंता झामुमो की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में MMDR संशोधन से जुड़े प्रावधानों को लेकर राज्य के अधिकारों पर चिंता व्यक्त की गई है। पत्र में कहा गया है कि खनिज अधिकारों, खनिज-युक्त भूमि तथा उनसे संबंधित कराधान के विषय राज्य के संवैधानिक एवं संघीय अधिकारों से जुड़े हुए हैं। इसलिए इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों और राज्यों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाना आवश्यक है। ज्ञापन में 25 जुलाई 2024 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Ltd. मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया गया है। झामुमो ने राष्ट्रपति से इस पूरे विषय के संवैधानिक, संघीय, वित्तीय, सामाजिक एवं पर्यावरणीय पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की रक्षा की मांग पत्र में कहा गया है कि झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समाज, विस्थापित परिवारों एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों को खनिज नीति और विकास प्रक्रिया में उचित स्थान मिलना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों से स्थानीय जनता, युवाओं और राज्य के विकास को अधिक लाभ मिलने की भी मांग की गई है। झामुमो ने कहा कि जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा झारखंड के लोगों के जीवन और पहचान से जुड़ी है। इसलिए इन संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय में स्थानीय समुदायों के हितों और राज्य के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण जरूरी है। राष्ट्रपति से आवश्यक पहल की अपील ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि MMDR संशोधन से जुड़े विषयों पर संविधान के तहत उपलब्ध विकल्पों तथा राज्य के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक पहल की जाए। झामुमो गारू प्रखंड की ओर से कहा गया कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाता रहेगा। ज्ञापन पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष मो. तौकीर मियां सहित पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं। पत्र में “हेमंत सोरेन जिंदाबाद” एवं “शिबू सोरेन जिंदाबाद” के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा की विचारधारा और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया है।2
- चोरी के 13 टुल्लू पंप बरामद, दो आरोपी गिरफ्तार भेजे गए जेल। चैनपुर थाना पुलिस ने गोदाम से टुल्लू पंप सहित अन्य सामान चोरी करने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर शनिवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चैनपुर निवासी रूपेश कुमार (26 वर्ष), पिता स्वर्गीय अंजन साहू तथा आकाश कुमार, पिता स्वर्गीय मोहन राम के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर अलग-अलग व्यक्तियों के पास बेचे गए 13 टुल्लू पंप बरामद किए हैं।1
- *ग्राउंड जीरो की वस्तु स्थित से अवगत होने के उपरांत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के रवि कुमार ने गुमला जिले के पदाधिकारियों को दिया आवश्यक दिशा निर्देश* *SIR-2026: पात्र नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, संदिग्ध मामलों की विधिवत जांच कर इसका स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निष्पादित करें *ERO/AERO स्तर से बूथवार प्रगति, लंबित मामलों और समस्याओं की नियमित समीक्षा करें पदाधिकारी* ================== *गुमला।* मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने गुमला जिले में SIR-2026 की ग्राउंड जीरो का अवलोकन करने के बाद जिला स्तर पर आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया में पात्र भारतीय नागरिकों को हरसंभव सहयोग मिले, संदिग्ध मामलों की उचित जांच हो और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी बूथों पर BLO के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने तथा BLO की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने ERO/AERO स्तर से बूथवार प्रगति, लंबित मामलों और समस्याओं की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि नागरिकता अथवा पात्रता को लेकर पर्याप्त संदेह वाले मामलों की गहन जांच की जाए। प्रत्येक संदिग्ध मामले में BLO/ERO द्वारा जांच के आधार पर इसका स्पीकिंग ऑर्डर पारित करते हुए इसका निष्पादन करें। श्री के रवि कुमार ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में जन्म स्थान, माता-पिता, भाई-बहन एवं अन्य पारिवारिक अभिलेखों के माध्यम से तथ्यों के सत्यापन तथा आवश्यकता पड़ने पर घर जाकर स्थानीय स्तर पर जानकारी प्राप्त करने को कहा गया। विवाह के बाद महिलाओं के मामलों में मायके के खतियान, परिवारिक विवरण एवं अन्य वैध दस्तावेजों को भी सत्यापन के आधार के रूप में देखने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि SIR के नाम पर कोई नया प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जाता है। साथ ही नए एवं युवा पात्र भारतीय नागरिकों द्वारा भरे गए फॉर्म 6 के डिजिटाईजेशन के कार्य में तेजी लाएं इसके साथ साथ डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दें।1
- बगीचा/जशपुर: बगीचा के सन्ना क्षेत्र में बीती रात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को निशाना बनाकर तोड़ दिया गया। अज्ञात उपद्रवियों ने बापू की मूर्ति पर अपनी वीरगाथा लिखते हुए यह साबित कर दिया कि एक सीमेंट और प्लास्टर की मूर्ति से आज भी कुछ बुजदिलों की रूह कांपती है। घटना की खबर फैलते ही इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। पुलिस-प्रशासन हमेशा की तरह "जांच जारी है" और "दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा" वाला पुराना टेप बजा रहा है। अहिंसा के आगे फिर हारा 'कायरता का हथौड़ा' महात्मा गांधी ने लाठी के बल पर ब्रिटिश हुकूमत उखाड़ फेंकी थी, लेकिन सन्ना के इन 'शूरवीरों' ने अंधेरे का फायदा उठाकर एक बेज़ुबान मूर्ति पर अपना पराक्रम दिखाया है। जरा सोचिए, जिस इंसान ने पूरी जिंदगी अहिंसा का पाठ पढ़ाया, उसकी मूर्ति तोड़ने के लिए भी उपद्रवियों को हथौड़े और अंधेरे का सहारा लेना पड़ा! यह घटना सिर्फ एक मूर्ति का टूटना नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि गांधी के विचार आज भी कुछ लोगों के दिमाग में इतनी जोर से चुभते हैं कि वे रात के अंधेरे में पत्थर तोड़ने को अपनी बड़ी कामयाबी मान बैठते हैं। व्यंग्य: मूर्ति तो तोड़ दी, जरा विचार तोड़कर दिखाओ! गांधी जी की मूर्ति तोड़ने वाले महानुभावों को शायद लगता होगा कि मूर्ति का सिर या हाथ खंडित कर देने से बापू का वजूद खत्म हो जाएगा। एक सुझाव उपद्रवियों के लिए: मूर्ति तोड़ना तो बहुत आसान और कायरतापूर्ण काम है। अगर वाकई दम है, तो गांधी के 'सत्य', 'अहिंसा' और 'सद्भाव' के विचारों को तोड़कर दिखाइए। बधाई हो समाज को: हम उस दौर में जी रहे हैं जहां जिंदा इंसान को रोजगार और सुरक्षा मिले न मिले, लेकिन लोहे और पत्थर के पुतलों से हमारी "महान राष्ट्रीय भावनाएं" आहत भी होती हैं और तुष्ट भी होती हैं। पुलिस विभाग को राहत: चलिए, कम से कम प्रशासन को दो-चार दिन मुस्तैद दिखने, शांति समिति की बैठकें करने और चाय-समोसे के साथ "कड़ी निंदा" करने का एक और मौका मिल गया। बड़ा सवाल: नफरत का यह जहर कब तक? सन्ना की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। यह उस नफरती सोच का नतीजा है जो पिछले कुछ समय से समाज की जड़ों में घोली जा रही है। किसी की मूर्ति पर हमला करना असल में हमारी लोकतांत्रिक सोच और सामाजिक ताने-बाने पर हमला है। अगर पुलिस प्रशासन वाकई इस मामले में गंभीर है, तो सिर्फ केस दर्ज करने का औपचारिक खेल न खेले। उन कायरों को ढूंढकर बेनकाब करे, जिन्होंने रात के अंधेरे में अपनी घटिया मानसिकता का प्रदर्शन किया है। बापू की मूर्ति तो कल फिर नई बन जाएगी, लेकिन समाज के दिमाग में जो नफरत का दरार आया है, उसे मरम्मत करने में सदियां लग जाएंगी।1
- *मधुमक्खियों के हमले में कई लोग घायल,एक की इलाज के दौरान मौत बरवाडीह। बरवाडीह थाना क्षेत्र के खुरा पंचायत अंतर्गत खुरा गांव में शनिवार की शाम करीब साढ़े तीन बजे मधुमक्खियों के झुंड ने कई लोगों पर हमला कर दिया। हमले में दिनेश प्रसाद, वीरेंद्र प्रसाद, सुदेश्वर साव, रौशन गुप्ता, रितिक कुमार समेत कई लोग घायल हो गए।घटना खुरा गांव के शिव मंदिर के समीप नदी के उस पार हुई। सभी घायलों को एंबुलेंस की मदद से बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल में तीन घायलों का इलाज चल रहा है, जबकि गंभीर रूप से घायल सुदेश्वर साव को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।परिजन उनके साथ गए हैं।प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनुपमा एक्का, डॉ. अमित कुमार सिंह, एएनएम, ड्रेसर समेत स्वास्थ्यकर्मियों ने घायलों का इलाज किया। घटना की जानकारी मिलने पर बरवाडीह भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद ,खुरा ग्राम प्रधान सुरजमल प्रसाद भी अस्पताल पहुंचे और घायलों एवं उनके परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली।इलाज के दौरान एक कि मौत1
- लातेहार स्टेशन नवरंग चौक फुटबॉल टूर्नामेंट 25 सितम्बर से शुरू1
- खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में गुमला में झामुमो का जोरदार धरना! गुमला में खान एवं खनिज संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इसमें गुमला विधायक भूषण तिर्की समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। झामुमो ने विधेयक को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। विधायक भूषण तिर्की ने कहा कि इससे झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।1