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एक हफ्ते बाद कब्र से निकला सच: संदिग्ध मौत ने खड़े किए कई सवाल? बांदा।गिरवां थाना क्षेत्र के मसुरी खेरवा गांव में एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत ने अब गंभीर सवालों का रूप ले लिया है। घटना के एक सप्ताह बाद प्रशासन द्वारा शव को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने का निर्णय न केवल इस मामले की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि उस चुप्पी को भी तोड़ता है, जो अक्सर सच को दफना देती है।बताया जाता है कि 2 और 3 अप्रैल की रात नाबालिग का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर में मिला था। किंतु आश्चर्यजनक रूप से उस समय न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही किसी प्रकार की विधिक प्रक्रिया अपनाई गई। ग्रामीणों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया—एक ऐसा कदम, जो अनजाने में या जानबूझकर, साक्ष्यों को मिटाने का कारण बन सकता है।समय बीतने के साथ जब मृतका की मां ने साहस जुटाया और जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर पोस्टमार्टम की मांग की, तब यह मामला एक निजी त्रासदी से निकलकर न्याय की मांग में परिवर्तित हो गया। प्रशासन ने भी तत्परता दिखाते हुए दफनाए गए शव को निकलवाने और पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में कब्र से शव का बाहर निकाला जाना एक असहज, किन्तु आवश्यक प्रक्रिया थी—क्योंकि न्याय की राह में सत्य की खोज सर्वोपरि होती है। प्रशासन के अनुसार पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य से समझौता न हो।यह घटना केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था और समाज दोनों के लिए एक आईना है। प्रश्न यह है कि आखिर क्यों ऐसी घटनाओं में प्रारंभिक स्तर पर पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होता? क्या यह भय, सामाजिक दबाव या किसी सच्चाई को छिपाने का प्रयास है?फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्य से पर्दा उठाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह घटना पुनः स्मरण कराती है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन उसकी दिशा में उठाया गया हर कदम समाज में विश्वास की पुनर्स्थापना करता है।

11 hrs ago
user_Amod Kumar
Amod Kumar
रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
11 hrs ago

एक हफ्ते बाद कब्र से निकला सच: संदिग्ध मौत ने खड़े किए कई सवाल? बांदा।गिरवां थाना क्षेत्र के मसुरी खेरवा गांव में एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत ने अब गंभीर सवालों का रूप ले लिया है। घटना के एक सप्ताह बाद प्रशासन द्वारा शव को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने का निर्णय न केवल इस मामले की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि उस चुप्पी को भी तोड़ता है, जो अक्सर सच को दफना देती है।बताया जाता है कि 2 और 3 अप्रैल की रात नाबालिग का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर में मिला था। किंतु आश्चर्यजनक रूप से उस समय न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही किसी प्रकार की विधिक प्रक्रिया अपनाई गई। ग्रामीणों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया—एक ऐसा कदम, जो अनजाने में या जानबूझकर, साक्ष्यों को मिटाने का कारण बन सकता है।समय बीतने के साथ जब मृतका की मां ने साहस जुटाया और जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर पोस्टमार्टम की मांग की, तब यह मामला एक निजी त्रासदी से निकलकर न्याय की मांग में परिवर्तित हो गया। प्रशासन ने भी तत्परता दिखाते हुए दफनाए गए शव को निकलवाने और पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में कब्र से शव का बाहर निकाला जाना एक असहज, किन्तु आवश्यक प्रक्रिया थी—क्योंकि न्याय की राह में सत्य की खोज सर्वोपरि होती है। प्रशासन के अनुसार पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य से समझौता न हो।यह घटना केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था और समाज दोनों के लिए एक आईना है। प्रश्न यह है कि आखिर क्यों ऐसी घटनाओं में प्रारंभिक स्तर पर पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होता? क्या यह भय, सामाजिक दबाव या किसी सच्चाई को छिपाने का प्रयास है?फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्य से पर्दा उठाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह घटना पुनः स्मरण कराती है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन उसकी दिशा में उठाया गया हर कदम समाज में विश्वास की पुनर्स्थापना करता है।

  • user_, I c. c cc 6 cc cc
    , I c. c cc 6 cc cc
    Banda, Uttar Pradesh
    👏
    8 hrs ago
  • user_, I c. c cc 6 cc cc
    , I c. c cc 6 cc cc
    Banda, Uttar Pradesh
    💣
    8 hrs ago
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • #Apkiawajdigital ​बांदा | रविवार, 12 अप्रैल 2026 ​बांदा। शहर की यातायात व्यवस्था रविवार को एक बार फिर ताश के पत्तों की तरह ढह गई। स्टेशन रोड से लेकर कम्फर्ट इन होटल तक लगे किलोमीटर लंबे जाम ने शहर की रफ्तार पर न केवल ब्रेक लगाया, बल्कि दो जिंदगियों को भी खतरे में डाल दिया। इस भीषण जाम में दो एम्बुलेंस घंटों फंसी रहीं, जिनके सायरन की गूँज लोगों की लापरवाही और प्रशासन की बेबसी के शोर में दबकर रह गई। ​ओवरब्रिज से होटल तक रेंगता रहा शहर ​जाम की स्थिति इतनी विकराल थी कि स्टेशन रोड स्थित पुल के उतरते ही वाहनों का रेला लग गया। कम्फर्ट इन होटल तक सड़क का हर कोना गाड़ियों से पटा नजर आया। मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने जाम खुलवाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन बेकाबू भीड़ और बेतरतीब खड़े वाहनों के आगे उनके भी पसीने छूट गए। ​नियमों की धज्जियां उड़ाते 'जल्दबाज' राहगीर ​वायरल हो रही वीडियो क्लिप शहर की कड़वी सच्चाई बयां कर रही है। यातायात नियमों के प्रति जागरूकता का घोर अभाव साफ देखा जा सकता है। अपनी गाड़ी को 'दो मिनट पहले' निकालने की होड़ में लोग नियमों को ताक पर रखकर कहीं से भी वाहन घुसा रहे हैं, जो अंततः महाजाम का कारण बन रहा है। ​प्रशासन के लिए चेतावनी: अब सख्ती जरूरी ​शहर की गलियां इस समय ट्रैफिक के बोझ से चरमरा रही हैं। यदि शासन-प्रशासन ने अभी शक्ति नहीं दिखाई और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया, तो वह दिन दूर नहीं जब यह जाम किसी बड़ी जनहानि का सबब बनेगा। प्रमुख जरूरतें: ​सख्त प्रवर्तन: गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग करने वालों पर भारी जुर्माना लगे। ​जागरूकता अभियान: जनता को ट्रैफिक सेंस सिखाने के लिए विशेष अभियान की आवश्यकता। ​एम्बुलेंस कॉरिडोर: आपातकालीन वाहनों के लिए प्राथमिकता के आधार पर रास्ता सुनिश्चित करने की कार्ययोजना। ​निष्कर्ष: यह जाम केवल वाहनों का नहीं, बल्कि नागरिक नैतिकता और प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव का प्रतीक है। क्या बांदा प्रशासन इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा या एम्बुलेंस में फंसी सांसें इसी तरह तड़पती रहेंगी?
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    #Apkiawajdigital
​बांदा | रविवार, 12 अप्रैल 2026
​बांदा। शहर की यातायात व्यवस्था रविवार को एक बार फिर ताश के पत्तों की तरह ढह गई। स्टेशन रोड से लेकर कम्फर्ट इन होटल तक लगे किलोमीटर लंबे जाम ने शहर की रफ्तार पर न केवल ब्रेक लगाया, बल्कि दो जिंदगियों को भी खतरे में डाल दिया। इस भीषण जाम में दो एम्बुलेंस घंटों फंसी रहीं, जिनके सायरन की गूँज लोगों की लापरवाही और प्रशासन की बेबसी के शोर में दबकर रह गई।
​ओवरब्रिज से होटल तक रेंगता रहा शहर
​जाम की स्थिति इतनी विकराल थी कि स्टेशन रोड स्थित पुल के उतरते ही वाहनों का रेला लग गया। कम्फर्ट इन होटल तक सड़क का हर कोना गाड़ियों से पटा नजर आया। मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने जाम खुलवाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन बेकाबू भीड़ और बेतरतीब खड़े वाहनों के आगे उनके भी पसीने छूट गए।
​नियमों की धज्जियां उड़ाते 'जल्दबाज' राहगीर
​वायरल हो रही वीडियो क्लिप शहर की कड़वी सच्चाई बयां कर रही है। यातायात नियमों के प्रति जागरूकता का घोर अभाव साफ देखा जा सकता है। अपनी गाड़ी को 'दो मिनट पहले' निकालने की होड़ में लोग नियमों को ताक पर रखकर कहीं से भी वाहन घुसा रहे हैं, जो अंततः महाजाम का कारण बन रहा है।
​प्रशासन के लिए चेतावनी: अब सख्ती जरूरी
​शहर की गलियां इस समय ट्रैफिक के बोझ से चरमरा रही हैं। यदि शासन-प्रशासन ने अभी शक्ति नहीं दिखाई और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया, तो वह दिन दूर नहीं जब यह जाम किसी बड़ी जनहानि का सबब बनेगा।
प्रमुख जरूरतें:
​सख्त प्रवर्तन: गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग करने वालों पर भारी जुर्माना लगे।
​जागरूकता अभियान: जनता को ट्रैफिक सेंस सिखाने के लिए विशेष अभियान की आवश्यकता।
​एम्बुलेंस कॉरिडोर: आपातकालीन वाहनों के लिए प्राथमिकता के आधार पर रास्ता सुनिश्चित करने की कार्ययोजना।
​निष्कर्ष: यह जाम केवल वाहनों का नहीं, बल्कि नागरिक नैतिकता और प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव का प्रतीक है। क्या बांदा प्रशासन इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा या एम्बुलेंस में फंसी सांसें इसी तरह तड़पती रहेंगी?
    user_ApkiAwajDigital
    ApkiAwajDigital
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • छोटे-छोटे बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और उत्साह ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में बच्चों का उत्साहवर्धन किया गया। प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस अवसर पर बच्चों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, जिसे देखकर उपस्थित सभी लोगों ने प्रसन्नता का अनुभव किया। यह कार्यक्रम न केवल बच्चों की प्रतिभा को निखारने का मंच बना, बल्कि उनके आत्मबल को बढ़ाने का भी एक सराहनीय प्रयास साबित हुआ।
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    छोटे-छोटे बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और उत्साह ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में बच्चों का उत्साहवर्धन किया गया। प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस अवसर पर बच्चों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, जिसे देखकर उपस्थित सभी लोगों ने प्रसन्नता का अनुभव किया।
यह कार्यक्रम न केवल बच्चों की प्रतिभा को निखारने का मंच बना, बल्कि उनके आत्मबल को बढ़ाने का भी एक सराहनीय प्रयास साबित हुआ।
    user_Shivam
    Shivam
    Photographer बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मारका थाना क्षेत्र के अरमार गांव में 45 वर्षीय महिला को दबंगों ने मारी गोली,मेडिकल कॉलेज बांदा में भर्ती।
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    मारका थाना क्षेत्र के अरमार
गांव में 45 वर्षीय महिला को 
दबंगों ने मारी गोली,मेडिकल
कॉलेज बांदा में भर्ती।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बांदा।गिरवां थाना क्षेत्र के मसुरी खेरवा गांव में एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत ने अब गंभीर सवालों का रूप ले लिया है। घटना के एक सप्ताह बाद प्रशासन द्वारा शव को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने का निर्णय न केवल इस मामले की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि उस चुप्पी को भी तोड़ता है, जो अक्सर सच को दफना देती है।बताया जाता है कि 2 और 3 अप्रैल की रात नाबालिग का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर में मिला था। किंतु आश्चर्यजनक रूप से उस समय न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही किसी प्रकार की विधिक प्रक्रिया अपनाई गई। ग्रामीणों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया—एक ऐसा कदम, जो अनजाने में या जानबूझकर, साक्ष्यों को मिटाने का कारण बन सकता है।समय बीतने के साथ जब मृतका की मां ने साहस जुटाया और जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर पोस्टमार्टम की मांग की, तब यह मामला एक निजी त्रासदी से निकलकर न्याय की मांग में परिवर्तित हो गया। प्रशासन ने भी तत्परता दिखाते हुए दफनाए गए शव को निकलवाने और पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में कब्र से शव का बाहर निकाला जाना एक असहज, किन्तु आवश्यक प्रक्रिया थी—क्योंकि न्याय की राह में सत्य की खोज सर्वोपरि होती है। प्रशासन के अनुसार पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य से समझौता न हो।यह घटना केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था और समाज दोनों के लिए एक आईना है। प्रश्न यह है कि आखिर क्यों ऐसी घटनाओं में प्रारंभिक स्तर पर पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होता? क्या यह भय, सामाजिक दबाव या किसी सच्चाई को छिपाने का प्रयास है?फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्य से पर्दा उठाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह घटना पुनः स्मरण कराती है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन उसकी दिशा में उठाया गया हर कदम समाज में विश्वास की पुनर्स्थापना करता है।
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    बांदा।गिरवां थाना क्षेत्र के मसुरी खेरवा गांव में एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत ने अब गंभीर सवालों का रूप ले लिया है। घटना के एक सप्ताह बाद प्रशासन द्वारा शव को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने का निर्णय न केवल इस मामले की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि उस चुप्पी को भी तोड़ता है, जो अक्सर सच को दफना देती है।बताया जाता है कि 2 और 3 अप्रैल की रात नाबालिग का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर में मिला था। किंतु आश्चर्यजनक रूप से उस समय न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही किसी प्रकार की विधिक प्रक्रिया अपनाई गई। ग्रामीणों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया—एक ऐसा कदम, जो अनजाने में या जानबूझकर, साक्ष्यों को मिटाने का कारण बन सकता है।समय बीतने के साथ जब मृतका की मां ने साहस जुटाया और जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर पोस्टमार्टम की मांग की, तब यह मामला एक निजी त्रासदी से निकलकर न्याय की मांग में परिवर्तित हो गया। प्रशासन ने भी तत्परता दिखाते हुए दफनाए गए शव को निकलवाने और पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में कब्र से शव का बाहर निकाला जाना एक असहज, किन्तु आवश्यक प्रक्रिया थी—क्योंकि न्याय की राह में सत्य की खोज सर्वोपरि होती है। प्रशासन के अनुसार पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य से समझौता न हो।यह घटना केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था और समाज दोनों के लिए एक आईना है। प्रश्न यह है कि आखिर क्यों ऐसी घटनाओं में प्रारंभिक स्तर पर पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होता? क्या यह भय, सामाजिक दबाव या किसी सच्चाई को छिपाने का प्रयास है?फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्य से पर्दा उठाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह घटना पुनः स्मरण कराती है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन उसकी दिशा में उठाया गया हर कदम समाज में विश्वास की पुनर्स्थापना करता है।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • बबेरू कस्बे के बांदा रोड निवासी अमित प्रजापति पुत्र शिव प्रसाद प्रजापति उम्र करीब 23 वर्ष व राखी देवी पुत्री रामबाबू उम्र करीब 18 वर्ष यह दोनों काफी दिनों से एक दूसरे से प्रेम करते थे। जैसे ही दोनों के परिजनों को जानकारी हुई तो पहले दोनों ही परिवार के लोगों में कहा सुनी हो गई, उसके बाद लोगों ने समझा बुझा कर एक ही बिरादरी के होने के नाते शादी करने की सहमति बन गई। जिससे शनिवार की रात्रि करीब 9:00 बजे, बबेरू कस्बे के मां मढ़ीदाई मंदिर में पहुंचकर दोनों परिवार के लोगों ने दोनों प्रेमी जोड़ा की शादी पंडित जी के मंत्र उच्चारण के साथ शादी कराई गई। जिसमें हवन बेदी के फेरे लिए वही मां मढ़ीदाई माता को साक्षी मानकर मंदिर के ही सामने एक दूसरे को वरमाला पहनाया और एक साथ जीवन यापन करने की कसमें खाई, वही मंदिर परिसर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस शादी के गवाही बने और सभी श्रद्धालुओं ने दोनों प्रेमी जोड़ा को आशीर्वाद दिया है। लड़का पक्ष व लड़की पक्ष के दोनों परिवार के लोग शामिल रहे।
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    बबेरू कस्बे के बांदा रोड निवासी अमित प्रजापति पुत्र शिव प्रसाद प्रजापति उम्र करीब 23 वर्ष व राखी देवी पुत्री रामबाबू उम्र करीब 18 वर्ष यह दोनों काफी दिनों से एक दूसरे से प्रेम करते थे। जैसे ही दोनों के परिजनों को जानकारी हुई तो पहले दोनों ही परिवार के लोगों में कहा सुनी हो गई, उसके बाद लोगों ने समझा बुझा कर एक ही बिरादरी के होने के नाते शादी करने की सहमति बन गई। जिससे शनिवार की रात्रि करीब 9:00 बजे, बबेरू कस्बे के मां मढ़ीदाई मंदिर में पहुंचकर दोनों परिवार के लोगों ने दोनों प्रेमी जोड़ा की शादी पंडित जी के मंत्र उच्चारण के साथ शादी कराई गई। जिसमें हवन बेदी के फेरे लिए वही मां मढ़ीदाई माता को साक्षी मानकर मंदिर के ही सामने एक दूसरे को वरमाला पहनाया और एक साथ जीवन यापन करने की कसमें खाई, वही मंदिर परिसर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस शादी के गवाही बने और सभी श्रद्धालुओं ने दोनों प्रेमी जोड़ा को आशीर्वाद दिया है। लड़का पक्ष व लड़की पक्ष के दोनों परिवार के लोग शामिल रहे।
    user_JSB NEWS UP
    JSB NEWS UP
    पत्रकारिता Baberu, Banda•
    24 min ago
  • हमीरपुर जनपद के मौदहा थाना क्षेत्र के सिजवाही गांव में तेज रफ्तार मौरंग (बालू) से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों ने घायल को संभाला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रैक्टर मालिक कुलदीप सिंह मौके पर पहुंचा और घायल युवक को प्राइवेट अस्पताल ले जाकर मामले को दबाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि संबंधित ट्रैक्टर पहले भी अवैध बालू खनन के मामलों में चर्चा में रहा है। घटना से नाराज ग्रामीणों में आक्रोश है और वे प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाएगा और घायल युवक को न्याय मिल पाएगा?
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    हमीरपुर जनपद के मौदहा थाना क्षेत्र के सिजवाही गांव में तेज रफ्तार मौरंग (बालू) से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों ने घायल को संभाला।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रैक्टर मालिक कुलदीप सिंह मौके पर पहुंचा और घायल युवक को प्राइवेट अस्पताल ले जाकर मामले को दबाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि संबंधित ट्रैक्टर पहले भी अवैध बालू खनन के मामलों में चर्चा में रहा है।
घटना से नाराज ग्रामीणों में आक्रोश है और वे प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाएगा और घायल युवक को न्याय मिल पाएगा?
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Banaras ki saam
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    Banaras ki saam
    user_Avaneesh shukla
    Avaneesh shukla
    Farmer बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • #Apkiawajdigital ​बांदा। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद (रजि.) की बांदा इकाई ने संगठन की मजबूती और आगामी राष्ट्रीय महाधिवेशन को ऐतिहासिक बनाने के लिए अपनी कमर कस ली है। रविवार को मंडलायुक्त कार्यालय के समीप स्थित जिला कार्यालय 'राजा भवन' में आयोजित एक महत्वपूर्ण मासिक बैठक में संगठन के विस्तार और पत्रकारों के हितों को लेकर गहन मंथन किया गया। ​सम्मान के साथ सौंपी गई जिम्मेदारी ​परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा के निर्देशन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नीरज निगम, महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष रूपा गोयल एवं युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष श्रीकांत श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आई-कार्ड वितरण रहा, जहां सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को ससम्मान पहचान पत्र पहनाकर उन्हें संगठन के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का बोध कराया गया। ​महाधिवेशन को सफल बनाने का संकल्प ​जिला महासचिव व मीडिया प्रभारी मितेश कुमार ने बताया कि बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी राष्ट्रीय महाधिवेशन की रूपरेखा तैयार करना था। जिलाध्यक्षों ने महाधिवेशन की सफलता हेतु एक विशेष कार्ययोजना प्रस्तुत की और सभी सदस्यों से एकजुट होकर राष्ट्रीय अध्यक्ष का सहयोग करने का आह्वान किया। ​बैठक के मुख्य बिंदु: ​एकजुटता पर बल: सभी सदस्यों ने परिषद को और अधिक सशक्त बनाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने की शपथ ली। ​समस्याओं का निस्तारण: बैठक में मौजूद पत्रकारों ने अपनी समस्याओं और विचारों को साझा किया, जिनका आपसी विमर्श के बाद त्वरित निस्तारण किया गया। ​भविष्य की रणनीति: संगठन की पहुंच को गांव-गांव तक ले जाने और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। ​इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति ​इस अवसर पर संगठन के प्रति निष्ठा दिखाते हुए संध्या धुरिया, आसिफ अली, गौरव सिंह चौहान, सत्यनारायण निषाद, पूरन राय, गुड्डन खान, उपेंद्र कुमार, अमर सिंह, कुलदीप मिश्रा, शुभम सिंह, जीवेश प्रकाश, धर्मेंद्र सिंह, पुष्पेंद्र कुमार रायकवार, प्रेम सिंह और घासीराम निषाद सहित भारी संख्या में पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।
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    #Apkiawajdigital
​बांदा। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद (रजि.) की बांदा इकाई ने संगठन की मजबूती और आगामी राष्ट्रीय महाधिवेशन को ऐतिहासिक बनाने के लिए अपनी कमर कस ली है। रविवार को मंडलायुक्त कार्यालय के समीप स्थित जिला कार्यालय 'राजा भवन' में आयोजित एक महत्वपूर्ण मासिक बैठक में संगठन के विस्तार और पत्रकारों के हितों को लेकर गहन मंथन किया गया।
​सम्मान के साथ सौंपी गई जिम्मेदारी
​परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा के निर्देशन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नीरज निगम, महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष रूपा गोयल एवं युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष श्रीकांत श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आई-कार्ड वितरण रहा, जहां सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को ससम्मान पहचान पत्र पहनाकर उन्हें संगठन के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का बोध कराया गया।
​महाधिवेशन को सफल बनाने का संकल्प
​जिला महासचिव व मीडिया प्रभारी मितेश कुमार ने बताया कि बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी राष्ट्रीय महाधिवेशन की रूपरेखा तैयार करना था। जिलाध्यक्षों ने महाधिवेशन की सफलता हेतु एक विशेष कार्ययोजना प्रस्तुत की और सभी सदस्यों से एकजुट होकर राष्ट्रीय अध्यक्ष का सहयोग करने का आह्वान किया।
​बैठक के मुख्य बिंदु:
​एकजुटता पर बल: सभी सदस्यों ने परिषद को और अधिक सशक्त बनाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने की शपथ ली।
​समस्याओं का निस्तारण: बैठक में मौजूद पत्रकारों ने अपनी समस्याओं और विचारों को साझा किया, जिनका आपसी विमर्श के बाद त्वरित निस्तारण किया गया।
​भविष्य की रणनीति: संगठन की पहुंच को गांव-गांव तक ले जाने और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
​इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
​इस अवसर पर संगठन के प्रति निष्ठा दिखाते हुए संध्या धुरिया, आसिफ अली, गौरव सिंह चौहान, सत्यनारायण निषाद, पूरन राय, गुड्डन खान, उपेंद्र कुमार, अमर सिंह, कुलदीप मिश्रा, शुभम सिंह, जीवेश प्रकाश, धर्मेंद्र सिंह, पुष्पेंद्र कुमार रायकवार, प्रेम सिंह और घासीराम निषाद सहित भारी संख्या में पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।
    user_ApkiAwajDigital
    ApkiAwajDigital
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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