मुजफ्फरनगर में आचार्य प्रमोद कृष्णम का दावा: "2027 में मोदी-योगी की आंधी, विपक्ष तैयार नहीं" सहायक शीर्षक: आचार्य ने भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा - 'उत्तर प्रदेश एक बार फिर बनेगा रणभूमि, पूरे देश के लिए मिसाल' --- मुजफ्फरनगर, 03 जनवरी 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और भाजपा के रणनीतिकार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आज यहां कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से एक ऐसी आंधी चलेगी, जिसके आगे विपक्षी दलों के पास कोई जवाब नहीं होगा। आचार्य प्रमोद कृष्णम मुजफ्फरनगर में एक विशाल भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "2027 का चुनाव सिर्फ यूपी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीतिक दिशा तय करेगा। मोदी जी का राष्ट्रीय नेतृत्व और योगी जी का कठोर प्रशासनिक संयम - यह जोड़ी उत्तर प्रदेश में विकास और सुरक्षा की गारंटी है। विपक्ष के पास न तो कोई नेता है, न ही कोई मुद्दा। उनकी पूरी राजनीति सिर्फ 'नकारात्मकता' पर टिकी है।" उन्होंने अपने संबोधन में कई अहम बातें रखीं: 1. विकास बनाम विरोध: आचार्य ने कहा कि भाजपा 'विकास, सुरक्षा और समृद्धि' का एजेंडा लेकर चल रही है, जबकि विपक्ष के पास सिर्फ 'विरोध, आरोप और अफवाहें' हैं। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में यूपी में हुई बुनियादी विकास परियोजनाओं, सड़कों, एक्सप्रेसवे और निवेश का जिक्र किया। 2. किसान और युवा शक्ति: उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजनाओं ने ग्रामीण और युवा वर्ग में भाजपा के प्रति अभूतपूर्व विश्वास पैदा किया है। "यही वोट बैंक 2027 में फैसला करेगा," उन्होंने कहा। 3. मुजफ्फरनगर का महत्व: आचार्य ने विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उप का हर चुनाव क्षेत्र हमारे लिए 'Mission 2027' का महत्वपूर्ण किला है। 2022 में हमने यहां ऐतिहासिक सफलता पाई थी, 2027 में हम उससे भी बड़ी सफलता का इतिहास रचेंगे।" 4. कार्यकर्ताओं को निर्देश: उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से 'घर-घर जाकर सरकार की योजनाओं का श्रेय लेने' के बजाय, 'घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनने और उन्हें नेता तक पहुंचाने' का आह्वान किया। उनका कहना था कि "जनसंपर्क ही सबसे बड़ा चुनावी हथियार है।" विपक्ष की प्रतिक्रिया: समाचार एजेंसियोंद्वारा आचार्य के बयान के बारे में पूछे जाने पर सपा के एक स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "भाजपा बीते कार्यकाल की उपलब्धियों पर चुनाव लड़ने से डर रही है, इसलिए वह फिर से 'नेम-केमिस्ट्री' और भावनाओं की राजनीति पर उतर आई है। जनता बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था की समस्याओं से त्रस्त है। 2027 में उसका जवाब मिलेगा।" कांग्रेस नेता ने भी इस बयान को 'चुनावी प्रोपेगैंडा' बताया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम का यह बयान उस समय आया है जब अगले विधानसभा चुनाव में लगभग एक साल बचा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह बयान भाजपा द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति और मोर्चाबंदी को और मजबूत करने का संकेत है। अब नजर अगले कुछ महीनों में दोनों गठबंधनों की चुनावी रणनीति पर टिकी है।
मुजफ्फरनगर में आचार्य प्रमोद कृष्णम का दावा: "2027 में मोदी-योगी की आंधी, विपक्ष तैयार नहीं" सहायक शीर्षक: आचार्य ने भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा - 'उत्तर प्रदेश एक बार फिर बनेगा रणभूमि, पूरे देश के लिए मिसाल' --- मुजफ्फरनगर, 03 जनवरी 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और भाजपा के रणनीतिकार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आज यहां कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से एक ऐसी आंधी चलेगी, जिसके आगे विपक्षी दलों के पास कोई जवाब नहीं होगा। आचार्य प्रमोद कृष्णम मुजफ्फरनगर में एक विशाल भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "2027 का चुनाव सिर्फ यूपी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीतिक दिशा तय करेगा। मोदी जी का राष्ट्रीय नेतृत्व और योगी जी का कठोर प्रशासनिक संयम - यह जोड़ी उत्तर प्रदेश में विकास और सुरक्षा की गारंटी है। विपक्ष के पास न तो कोई नेता है, न ही कोई मुद्दा। उनकी पूरी राजनीति सिर्फ 'नकारात्मकता' पर टिकी है।" उन्होंने अपने संबोधन में कई अहम बातें रखीं: 1. विकास बनाम विरोध: आचार्य ने कहा कि भाजपा 'विकास, सुरक्षा और समृद्धि' का एजेंडा लेकर चल रही है, जबकि विपक्ष के पास सिर्फ 'विरोध, आरोप और अफवाहें' हैं। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में यूपी में हुई बुनियादी विकास परियोजनाओं, सड़कों, एक्सप्रेसवे और निवेश का जिक्र किया। 2. किसान और युवा शक्ति: उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजनाओं ने ग्रामीण और युवा वर्ग में भाजपा के प्रति अभूतपूर्व विश्वास पैदा किया है। "यही वोट बैंक 2027 में फैसला करेगा," उन्होंने कहा। 3. मुजफ्फरनगर का महत्व: आचार्य ने विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उप का हर चुनाव क्षेत्र हमारे लिए 'Mission 2027' का महत्वपूर्ण किला है। 2022 में हमने यहां ऐतिहासिक सफलता पाई थी, 2027 में हम उससे भी बड़ी सफलता का इतिहास रचेंगे।" 4. कार्यकर्ताओं को निर्देश: उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से 'घर-घर जाकर सरकार की योजनाओं का श्रेय लेने' के बजाय, 'घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनने और उन्हें नेता तक पहुंचाने' का आह्वान किया। उनका कहना था कि "जनसंपर्क ही सबसे बड़ा चुनावी हथियार है।" विपक्ष की प्रतिक्रिया: समाचार एजेंसियोंद्वारा आचार्य के बयान के बारे में पूछे जाने पर सपा के एक स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "भाजपा बीते कार्यकाल की उपलब्धियों पर चुनाव लड़ने से डर रही है, इसलिए वह फिर से 'नेम-केमिस्ट्री' और भावनाओं की राजनीति पर उतर आई है। जनता बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था की समस्याओं से त्रस्त है। 2027 में उसका जवाब मिलेगा।" कांग्रेस नेता ने भी इस बयान को 'चुनावी प्रोपेगैंडा' बताया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम का यह बयान उस समय आया है जब अगले विधानसभा चुनाव में लगभग एक साल बचा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह बयान भाजपा द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति और मोर्चाबंदी को और मजबूत करने का संकेत है। अब नजर अगले कुछ महीनों में दोनों गठबंधनों की चुनावी रणनीति पर टिकी है।
- भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा का विस्तार, बागपत के चौधरी रिफाकत बनाया पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मुजफ्फरनगर भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के नियाजूपरा प्रदेश कार्यालय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम के नेतृत्व में एक बैठक आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता महाराज जसवीर नाथ जी ने की और संचालन चौधरी जफरियाब ने किया आयोजित बैठक में संगठन के विस्तार के साथ किसानों की समस्याओं पर मंथन हुआ। बढ़ती लोकप्रियता से प्रभावित होकर सैकड़ों किसानों ने सदस्यता ली और चौधरी रिफाकत अली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन शनिवार दोपहर कार्यालय पर किया गया। बैठक में मौजूदा हालात में किसानों और मजदूरों को आ रही परेशानियों, उनकी समस्याओं और समाधान के संभावित रास्तों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। संगठन की बढ़ती सक्रियता और लोकप्रियता को देखते हुए इस बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। बैठक के दौरान संगठन के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों ने भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा की सदस्यता ग्रहण की। खास तौर पर बागपत जिले से आए किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। बागपत क्षेत्र से आए पूर्व प्रधान चौधरी रिफाकत अली और उनके सैकड़ों समर्थकों ने संगठन में शामिल होकर संगठन को और मजबूत किया। इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने चौधरी रिफाकत अली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की। और उनको नियुक्ति पत्र सोपा गया।नियुक्ति के बाद चौधरी रिफाकत अली ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और शोषित वर्ग की आवाज को मजबूती से उठाना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही वे संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा बताई गई विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का काम करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और मौजूदा हालात में उन्हें संगठित होकर अपने हक की लड़ाई लड़ने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में किसानों को फसलों के उचित दाम, बढ़ती लागत, सिंचाई, बिजली और अन्य बुनियादी मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में संगठन गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं को सुनेगा और उनके समाधान के लिए संघर्ष करेगा। बैठक में मौजूद किसानों ने संगठन से जुड़कर अपनी एकजुटता का संदेश दिया। उनका कहना था कि भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा किसानों और मजदूरों के हितों की लड़ाई को मजबूती से उठा रहा है, इसी कारण बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में संगठन को मजबूत करने और किसानों के हक की लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया आज की इस महत्वपूर्ण बैठक में.... मौजूद रहें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र अग्रवाल राष्ट्रीय महासचिव इंतजार राणा राष्ट्रीय मंत्री अमित कुमार राष्ट्रीय संगठन मंत्री सालिम त्यागी राष्ट्रीय महासचिव शौकत अंसारी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हाजी इंतजार उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी जुल्फिकार उत्तर प्रदेश सचिव गुफरान राणा मंडल अध्यक्ष साजिद सैफी मंडल उपाध्यक्ष चौधरी ताहिर महिला प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सुदेश महिला प्रदेश प्रभारी ललिता चौधरी मुजफ्फरनगर जिला अध्यक्ष शहीद राजा बागपत जिला अध्यक्ष मेहंदी हसन युवा प्रदेश उपाध्यक्ष शोएब राणा आदित्य सैकड़ो पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे2
- मुज़फ्फरनगर से बड़ी खबर मुज़फ्फरनगर में पुलिस ऑफिस के घेराव के दौरान भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र मलिक का बड़ा बयान सामने आया है। भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे धर्मेंद्र मलिक ने पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि “किसानों और आम जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। अगर पुलिस यह समझती है कि दबाव बनाकर हम पीछे हट जाएंगे, तो यह उनकी गलतफहमी है। भाकियू अराजनैतिक अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तर तक संघर्ष करती रहेगी।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बयान के बाद पुलिस कार्यालय के बाहर माहौल तनावपूर्ण बना रहा, हालांकि मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। 👉 अब देखना होगा कि धर्मेंद्र मलिक के इस बयान के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है।1
- रिया किन्नर ने उठाई अंकिता भंडारी केस में सीबीआई जांच की मांग –महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार के खिलाफ रिया किन्नर का तीखा ऐलान मुजफ्फरनगर। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर देशभर में उठ रही चिंताओं के बीच सामाजिक कार्यकर्ता व किन्नर समाज की चर्चित आवाज रिया किन्नर ने एक बार फिर सत्ता और सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष न्याय की मांग करते हुए रिया किन्नर ने मामले की सीबीआई जांच की जोरदार मांग की है। शनिवार को मीडिया सेंटर पर राष्ट्रीय महिला एकता संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रिया किन्नर ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि अंकिता भंडारी जैसी बेटियों के साथ हुए जघन्य अपराध सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिशें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से डगमगा रहा है। “महिलाओं की सुरक्षा में सेंध बर्दाश्त नहीं” रिया किन्नर ने महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “अगर आज हम चुप रहे तो कल कोई भी बेटी सुरक्षित नहीं रहेगी। महिलाओं की सुरक्षा में सेंध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं है, जब तक उन कानूनों को ईमानदारी से लागू नहीं किया जाएगा। पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय किए बिना अपराधों पर लगाम लगाना संभव नहीं है। सड़कों से संसद तक लड़ाई का ऐलान रिया किन्नर ने चेतावनी दी कि अगर अंकिता भंडारी केस में सीबीआई जांच नहीं हुई तो यह लड़ाई सड़कों से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी। उन्होंने किन्नर समाज सहित सभी सामाजिक संगठनों और महिलाओं से एकजुट होकर आवाज बुलंद करने की अपील की। सरकार से सीधा सवाल उन्होंने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि “आखिर कब तक बेटियों को न्याय के लिए लड़ना पड़ेगा? क्या दोषियों को सजा दिलाने के लिए जनता को हर बार सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा?” इस बयान के बाद रिया किन्नर का यह कदम सोशल मीडिया और जनआंदोलनों में चर्चा का विषय बन गया है। महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की इस लड़ाई में एक बार फिर समाज के हर वर्ग से समर्थन की उम्मीद की जा रही है।1
- मुजफ्फरनगर मीनाक्षी चौक मेरठ रोड पर दुकानदारो द्वारा नाले पर किया गया अतिक्रमण को हटाकर नाले को खोलना का काम जारी1
- गांव सिसौना में विवाहिता शिवानी पत्नी अरुण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। स्वजन ने ससुरालियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए छपार पुलिस को तहरीर दी है। इंस्पेक्टर मोहित कुमार ने जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया है।2
- मुजफ्फरनगर: जिलाधिकारी के अवकाश आदेश की धज्जियां, 'न्यू स्टेपिंग स्टोन स्कूल' खोल रहा कक्षाएं कक्षा 12 तक के सभी बोर्ड स्कूलों के लिए 5 जनवरी तक घोषित अवकाश की अनदेखी, प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार --- मुजफ्फरनगर, जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्र स्थित 'न्यू स्टेपिंग स्टोन स्कूल' अपनी मनमानी पर अड़ा हुआ है और विद्यार्थियों को बुलाकर कक्षाएं संचालित कर रहा है। जिलाधिकारी श्री उमेश मिश्रा ने मौसम परिस्थितियों व अन्य कारणों को देखते हुए जिले के सभी बोर्ड विद्यालयों (कक्षा 12 तक) को 5 जनवरी तक के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया था। लेकिन यह स्कूल इस आदेश की खुली अवहेलना करते हुए संचालित हो रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को कक्षाएं सामान्य रूप से चलने की सूचना दी गई थी। जब कुछ अभिभावकों ने आदेश के बारे में पूछा, तो स्कूल प्रबंधन ने उसे नजरअंदाज कर दिया। एक अभिभावक श्री राजेश कुमार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमें डर था कि अगर बच्चा नहीं गया तो उसकी अनुपस्थिति लगेगी या पढ़ाई पीछे छूट जाएगी, इसलिए भेजना पड़ा। स्कूल का रवैया बहुत ही मनमाना है।" पहले भी आदेशों की अवहेलना कर चुका है स्कूल: यह पहली बार नहीं है जब इस स्कूल ने प्रशासनिक आदेशों को ताक पर रखा है। पिछले कुछ वर्षों में भी शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन न करने और अन्य मामलों में मनमानी के लिए यह स्कूल सुर्खियों में रह चुका है। शिक्षा अधिकारियों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन की ऐसी हरकतें गंभीर चिंता का विषय हैं और छात्रों की सुरक्षा व कानून का सम्मान करना हर संस्थान का पहला दायित्व है। जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई: जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को जब इस मामले की जानकारी दी गई, तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामला संज्ञान में लिया गया है। "जिलाधिकारी महोदय के आदेश सभी के लिए बाध्यकारी हैं। किसी भी स्कूल द्वारा इनकी अवहेलना गंभीर अनुशासनहीनता है। हम तत्काल इसकी जांच कर रहे हैं और दोषी पाए जाने पर स्कूल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भारी आर्थिक दंड या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है," अधिकारी ने कहा। शिक्षा विभाग के मुताबिक, ऐसे मामलों में स्कूल का मान्यता प्रमाणपत्र (अफिलिएशन) रद्द किए जाने तक की नौबत आ सकती है। साथ ही, स्कूल प्रबंधन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक प्राधिकारी के आदेश का अवज्ञान) के तहत भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। अभिभावकों से अपील: प्रशासन ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे जिलाधिकारी के आदेशों का सम्मान करें और बच्चों को स्कूल न भेजें। आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की शिकायत तुरंत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय या जिला प्रशासन को दर्ज कराएं। इस समय सभी की निगाहें प्रशासन की ओर हैं, कि वह इस स्कूल के खिलाफ कितनी सख्त और त्वरित कार्रवाई करता है। इस मामले का फैसला आने वाले दिनों में जिले के अन्य स्कूलों के लिए एक मिसाल कायम करेगा।1
- बिग ब्रेकिंग न्यूज़ आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान2
- मुज़फ्फरनगर | बड़ी खबर मुज़फ्फरनगर में उस वक्त माहौल गर्मा गया जब भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के सैकड़ों कार्यकर्ता एसएसपी कार्यालय पर पहुंचकर जमकर गरजे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए और हालिया बयानों को लेकर नाराज़गी जताई। प्रदर्शन कर रहे नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा— “कौन कह रहा था कि हम राकेश टिकैत बनना चाह रहे हैं? हम किसी की नकल नहीं, किसानों की आवाज़ हैं।” भाकियू अराजनैतिक नेताओं का कहना था कि उनके संगठन और पदाधिकारियों को जानबूझकर विवादों में घसीटा जा रहा है और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रहा है और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा। चेतावनी भरे लहजे में कहा गया कि अगर उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मौके पर सिविल लाइन थाना पुलिस समेत भारी पुलिस बल तैनात रहा। स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर नजर आया, हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन भाकियू अराजनैतिक की नाराज़गी को गंभीरता से लेगा या आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा?1