कैनाल बाईपास पर एक गड्ढा बीच सड़क में, दूसरा किनारे; 4 से 5 फीट गहराई से हादसे का खतरा, पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल विकासनगर में सड़क पर दो मौत के गड्ढे, देहरादून जिले के विकासनगर में कैनाल बाईपास रोड पर सड़क की बदहाली ने राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्यागी फार्म हाउस से करीब 500 मीटर आगे सड़क पर एक नहीं, बल्कि दो खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। इनमें एक गड्ढा मुख्य सड़क के बीचोंबीच है, जबकि दूसरा सड़क के किनारे बना हुआ है। करीब चार से पांच फीट गहरे इन गड्ढों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि क्या लोक निर्माण विभाग किसी की जान जाने के बाद ही नींद से जागेगा? स्थानीय युवकों की सूचना पर क्राइम स्टोरी की टीम मौके पर पहुंची तो सड़क की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी। मौके पर पड़ताल के दौरान सामने आया कि सड़क के नीचे पानी निकासी की पुलिया बनी हुई है। पुलिया के ऊपर बिछाई गई सड़क की निर्माण सामग्री धंसकर नीचे गिर चुकी है, जिससे सड़क पर दो अलग-अलग स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। एक तरफ बीच सड़क में गड्ढा वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है, तो दूसरी तरफ सड़क किनारे बना गड्ढा भी दुर्घटना को निमंत्रण दे रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि रात के अंधेरे में वाहन चालक को इन गड्ढों का समय रहते अंदाजा नहीं हुआ तो दुर्घटना जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है। विभाग से पहले जागे स्थानीय युवक पहाड़ी गली निवासी मोहम्मद आमिर और मोहम्मद साकिब ने इस गंभीर खतरे को देखते हुए क्राइम स्टोरी की टीम को फोन कर मौके पर बुलाया। दोनों युवकों ने आसपास से सामग्री जुटाकर राहगीरों को खतरे से आगाह करने का प्रयास किया। स्थानीय युवकों की इस पहल ने सड़क सुरक्षा के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सामने रखा है। पीडब्ल्यूडी की निगरानी व्यवस्था पर सवाल आखिर मुख्य सड़क पर दो-दो गहरे गड्ढे बनने की नौबत कैसे आ गई? क्या सड़क के नीचे बनी पुलिया की तकनीकी जांच कभी की गई? सड़क धंसने का वास्तविक कारण क्या है? यदि सड़क का शेष हिस्सा भी कमजोर हो चुका है तो क्या वहां से गुजरने वाले वाहन सुरक्षित हैं? ये ऐसे गंभीर सवाल हैं जिनका जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए। केवल गड्ढों में मिट्टी डालकर सड़क को ऊपर से समतल कर देना पर्याप्त नहीं होगा। पुलिया की मजबूती और सड़क के नीचे की स्थिति की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है। डीएम तत्काल लें संज्ञान, हादसे से पहले हो मरम्मत जिलाधिकारी देहरादून को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करनी चाहिए। दोनों गड्ढों के आसपास मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रात में दिखाई देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। साथ ही तकनीकी टीम से जांच कराकर सड़क की स्थायी मरम्मत सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि जब मुख्य सड़क के बीच और किनारे दो-दो खतरनाक गड्ढे मौजूद हैं, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई में देरी क्यों करे? यदि कोई वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया या उसकी जान चली गई, तो आखिर जवाबदेही किसकी होगी? सड़क पर सुरक्षित सफर जनता का अधिकार है और उसे सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी।
कैनाल बाईपास पर एक गड्ढा बीच सड़क में, दूसरा किनारे; 4 से 5 फीट गहराई से हादसे का खतरा, पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल विकासनगर में सड़क पर दो मौत के गड्ढे, देहरादून जिले के विकासनगर में कैनाल बाईपास रोड पर सड़क की बदहाली ने राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्यागी फार्म हाउस से करीब 500 मीटर आगे सड़क पर एक नहीं, बल्कि दो खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। इनमें एक गड्ढा मुख्य सड़क के बीचोंबीच है, जबकि दूसरा सड़क के किनारे बना हुआ है। करीब चार से पांच फीट गहरे इन गड्ढों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि क्या लोक निर्माण विभाग किसी की जान जाने के बाद ही नींद से जागेगा? स्थानीय युवकों की सूचना पर क्राइम स्टोरी की टीम मौके पर पहुंची तो सड़क की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी। मौके पर पड़ताल के दौरान सामने आया कि सड़क के नीचे पानी निकासी की पुलिया बनी हुई है। पुलिया के ऊपर बिछाई गई सड़क की निर्माण सामग्री धंसकर नीचे गिर चुकी है, जिससे सड़क पर दो अलग-अलग स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। एक तरफ बीच सड़क में गड्ढा वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है, तो दूसरी तरफ सड़क किनारे बना गड्ढा भी दुर्घटना को निमंत्रण दे रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि रात के अंधेरे में वाहन चालक को इन गड्ढों का समय रहते अंदाजा नहीं हुआ तो दुर्घटना जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है। विभाग से पहले जागे स्थानीय युवक पहाड़ी गली निवासी मोहम्मद आमिर और मोहम्मद साकिब ने इस गंभीर खतरे को देखते हुए क्राइम स्टोरी की टीम को फोन कर मौके पर बुलाया। दोनों युवकों ने आसपास से सामग्री जुटाकर राहगीरों को खतरे से आगाह करने का प्रयास किया। स्थानीय युवकों की इस पहल ने सड़क सुरक्षा के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सामने रखा है। पीडब्ल्यूडी की निगरानी व्यवस्था पर सवाल आखिर मुख्य सड़क पर दो-दो गहरे गड्ढे बनने की नौबत कैसे आ गई? क्या सड़क के नीचे बनी पुलिया की तकनीकी जांच कभी की गई? सड़क धंसने का वास्तविक कारण क्या है? यदि सड़क का शेष हिस्सा भी कमजोर हो चुका है तो क्या वहां से गुजरने वाले वाहन सुरक्षित हैं? ये ऐसे गंभीर सवाल हैं जिनका जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए। केवल गड्ढों में मिट्टी डालकर सड़क को ऊपर से समतल कर देना पर्याप्त नहीं होगा। पुलिया की मजबूती और सड़क के नीचे की स्थिति की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है। डीएम तत्काल लें संज्ञान, हादसे से पहले हो मरम्मत जिलाधिकारी देहरादून को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करनी चाहिए। दोनों गड्ढों के आसपास मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रात में दिखाई देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। साथ ही तकनीकी टीम से जांच कराकर सड़क की स्थायी मरम्मत सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि जब मुख्य सड़क के बीच और किनारे दो-दो खतरनाक गड्ढे मौजूद हैं, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई में देरी क्यों करे? यदि कोई वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया या उसकी जान चली गई, तो आखिर जवाबदेही किसकी होगी? सड़क पर सुरक्षित सफर जनता का अधिकार है और उसे सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी।
- कैनाल बाईपास पर एक गड्ढा बीच सड़क में, दूसरा किनारे; 4 से 5 फीट गहराई से हादसे का खतरा, पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल विकासनगर में सड़क पर दो मौत के गड्ढे, देहरादून जिले के विकासनगर में कैनाल बाईपास रोड पर सड़क की बदहाली ने राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्यागी फार्म हाउस से करीब 500 मीटर आगे सड़क पर एक नहीं, बल्कि दो खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। इनमें एक गड्ढा मुख्य सड़क के बीचोंबीच है, जबकि दूसरा सड़क के किनारे बना हुआ है। करीब चार से पांच फीट गहरे इन गड्ढों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि क्या लोक निर्माण विभाग किसी की जान जाने के बाद ही नींद से जागेगा? स्थानीय युवकों की सूचना पर क्राइम स्टोरी की टीम मौके पर पहुंची तो सड़क की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी। मौके पर पड़ताल के दौरान सामने आया कि सड़क के नीचे पानी निकासी की पुलिया बनी हुई है। पुलिया के ऊपर बिछाई गई सड़क की निर्माण सामग्री धंसकर नीचे गिर चुकी है, जिससे सड़क पर दो अलग-अलग स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। एक तरफ बीच सड़क में गड्ढा वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है, तो दूसरी तरफ सड़क किनारे बना गड्ढा भी दुर्घटना को निमंत्रण दे रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि रात के अंधेरे में वाहन चालक को इन गड्ढों का समय रहते अंदाजा नहीं हुआ तो दुर्घटना जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है। विभाग से पहले जागे स्थानीय युवक पहाड़ी गली निवासी मोहम्मद आमिर और मोहम्मद साकिब ने इस गंभीर खतरे को देखते हुए क्राइम स्टोरी की टीम को फोन कर मौके पर बुलाया। दोनों युवकों ने आसपास से सामग्री जुटाकर राहगीरों को खतरे से आगाह करने का प्रयास किया। स्थानीय युवकों की इस पहल ने सड़क सुरक्षा के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सामने रखा है। पीडब्ल्यूडी की निगरानी व्यवस्था पर सवाल आखिर मुख्य सड़क पर दो-दो गहरे गड्ढे बनने की नौबत कैसे आ गई? क्या सड़क के नीचे बनी पुलिया की तकनीकी जांच कभी की गई? सड़क धंसने का वास्तविक कारण क्या है? यदि सड़क का शेष हिस्सा भी कमजोर हो चुका है तो क्या वहां से गुजरने वाले वाहन सुरक्षित हैं? ये ऐसे गंभीर सवाल हैं जिनका जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए। केवल गड्ढों में मिट्टी डालकर सड़क को ऊपर से समतल कर देना पर्याप्त नहीं होगा। पुलिया की मजबूती और सड़क के नीचे की स्थिति की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है। डीएम तत्काल लें संज्ञान, हादसे से पहले हो मरम्मत जिलाधिकारी देहरादून को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करनी चाहिए। दोनों गड्ढों के आसपास मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रात में दिखाई देने वाले संकेतक लगाए जाने चाहिए। साथ ही तकनीकी टीम से जांच कराकर सड़क की स्थायी मरम्मत सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि जब मुख्य सड़क के बीच और किनारे दो-दो खतरनाक गड्ढे मौजूद हैं, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई में देरी क्यों करे? यदि कोई वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया या उसकी जान चली गई, तो आखिर जवाबदेही किसकी होगी? सड़क पर सुरक्षित सफर जनता का अधिकार है और उसे सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी।1
- आधुनिकता पर भारी पड़ रही गिरिपार की सदियों पुरानी परंपरा! सब हेडलाइन: मिट्टी के भाट में मक्की की भुनाई, घराट में पिसाई... ऐसे तैयार होते हैं पहाड़ के पारंपरिक सत्तू। लस्सी, दही, राब और गुड़ के साथ लेते हैं स्वाद, एक बार तैयार किए सत्तू का 8 महीने तक इस्तेमाल। लोकेशन: सिरमौर, हिमाचल प्रदेश हेडलाइन: आधुनिकता पर भारी पड़ रही गिरिपार की सदियों पुरानी परंपरा! सब हेडलाइन: मिट्टी के भाट में मक्की की भुनाई, घराट में पिसाई... ऐसे तैयार होते हैं पहाड़ के पारंपरिक सत्तू। लस्सी, दही, राब और गुड़ के साथ लेते हैं स्वाद, एक बार तैयार किए सत्तू का 8 महीने तक इस्तेमाल। एंकर इंट्रो: ना कोई मशीन, ना आधुनिक तकनीक... मिट्टी का भाट, पहाड़ी मक्की और पानी से चलने वाला पारंपरिक घराट! जी हां, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के गिरिपार क्षेत्र में आज भी खानपान की सदियों पुरानी परंपरा जीवित है। यहां किसान आधुनिक बाजार के बजाय अपने पुरखों के तरीके से मक्की के सत्तू तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन सत्तुओं को एक बार तैयार करने के बाद करीब आठ महीने तक इस्तेमाल किया जाता है। लस्सी, दही, राब और गुड़ के साथ इनका स्वाद ही कुछ अलग है। आइए दिखाते हैं गिरिपार की रसोई से पहाड़ की यह अनूठी विरासत। वीओ-1: यह तस्वीरें किसी पुराने जमाने की नहीं, बल्कि आज के गिरिपार की हैं। जहां आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बावजूद ग्रामीण अपनी पारंपरिक खाद्य संस्कृति को नहीं भूले हैं। जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में मक्की के सत्तू बनाने की परंपरा आज भी कायम है। हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय डॉ. यशवंत सिंह परमार के पैतृक गांव चनालग सहित आसपास के कई गांवों में किसान आज भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वीओ-2: सत्तू बनाने की प्रक्रिया भी बेहद खास है। मक्की की फसल तैयार होते ही किसान कुछ मक्की सत्तू बनाने के लिए अलग रख लेते हैं। इसके बाद मिट्टी से बने पारंपरिक भाट में मक्की को भुना जाता है। इसी प्रक्रिया के दौरान पहाड़ी व्यंजन मुड़े के लिए खरॉवकी भी तैयार की जाती है। मक्की भूनने के बाद इसे पारंपरिक पनक्की यानी घराट में ले जाकर पीसा जाता है। इस तरह तैयार होते हैं पहाड़ के पारंपरिक मक्की के सत्तू। वीओ-3: इन सत्तुओं का असली स्वाद गर्मियों में देखने को मिलता है। ग्रामीण इन्हें लस्सी, दही, चटनी, राब और गुड़ के साथ बड़े चाव से खाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पौष्टिक पारंपरिक आहार है। एक बार मक्की भूनकर सत्तू तैयार कर लिए जाएं तो करीब आठ महीने तक इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। वीओ-4: स्थानीय किसान रुद्री दत्त शर्मा, सुरेंद्र कमल, देवेंद्र शर्मा, विजय कुमार, वलमोहन ठाकुर और रामशरण बताते हैं कि वे हर साल करीब 10 से 12 घिल्ले मक्की सत्तू बनाने के लिए अलग रखते हैं। जरूरत से अधिक भुनी हुई मक्की का इस्तेमाल पशुओं के दाने यानी फीड के रूप में भी किया जाता है। किसानों का कहना है कि यह केवल खानपान नहीं, बल्कि उनके बुजुर्गों से मिली विरासत है, जिसे वे आज भी उसी पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। बाइट: विजय कुमार – स्थानीय किसान वलमोहन ठाकुर – स्थानीय किसान वीओ-5 बाजार में भले ही आज खाने-पीने की हजारों चीजें उपलब्ध हों, लेकिन गिरिपार के इन पारंपरिक सत्तुओं का स्वाद और पहचान आज भी बरकरार है। मिट्टी के भाट से लेकर घराट की पिसाई तक... यह सिर्फ भोजन तैयार करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, मेहनत और पूर्वजों के अनुभव की कहानी है। जरूरत है कि गिरिपार की इस अनमोल खाद्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, ताकि आने वाले समय में भी पहाड़ का यह पारंपरिक स्वाद और पहचान जिंदा रहे। सिरमौर से कपिल शर्मा की खास रिपोर्ट।4
- हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के रेणुका जी विधानसभा में पवन कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य सीडब्ल्यूपी संख्या 19511 / 2026 30.10.2026 उपस्थित : याचिकाकर्ता की ओर से सुश्री सुमन ठाकुर, अधिवक्ता। प्रतिवादी-राज्य की ओर से श्री राजन कहोल, अतिरिक्त महाधिवक्ता के साथ श्री रवि चौहान व श्री अनीश बांशतू, उप महाधिवक्ता। सीडब्ल्यूपी संख्या 19511 / 2026 एवं सीएमपी संख्या 28736 / 2026 नोटिस जारी किया जाए। श्री राजन कहोल, विद्वान अतिरिक्त महाधिवक्ता, प्रतिवादी संख्या 1 से 7 की ओर से उपस्थित हुए और नोटिस की तामील स्वीकार करते हैं। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जो प्रदान किया गया। प्रतिवादी संख्या 8 से 10 को तीन दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने पर 08.12.2026 के लिए पृथक नोटिस जारी किया जाए। याचिकाकर्ता की शिकायत, जैसा कि याचिका में दर्शाया गया है और याचिकाकर्ता की विद्वान अधिवक्ता सुश्री सुमन ठाकुर द्वारा आगे रखा गया है, संक्षेप में यह है कि प्रतिवादी संख्या 9 और 10 ने अपने घरों तक जाने वाली सड़क का निर्माण ग्राम समून-कानून, तहसील ददाहू, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में वन भूमि के माध्यम से किया है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यद्यपि याचिकाकर्ता ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज की थी, परंतु सक्षम प्राधिकारी ने कोई ठोस और संतोषजनक कारण बताए बिना, निजी प्रतिवादियों द्वारा कथित रूप से किए गए अपराध का प्रशमन (कंपाउंड) कर दिया। आरोप है कि प्रतिवादी संख्या 9 और 10 द्वारा सड़क निर्माण के लिए 40 से 50 पेड़ काटे गए, लेकिन न तो उनसे उसकी लागत वसूल की गई, न ही अवैध रूप से पेड़ काटने के लिए कानून के अनुसार उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की गई। उपरोक्त के दृष्टिगत, प्रतिवादियों को अगली सुनवाई की तिथि से पहले जवाब/शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है। मामला 08.12.2026 को सूचीबद्ध किया जाए। अगली सुनवाई की तिथि तक, विवादित सड़क को पक्का (मेटलिंग) नहीं किया जाएगा, यदि वह पहले से पक्की नहीं है। (संदीप शर्मा) न्यायाधीश1
- गिरिपार क्षेत्र में अज्ञात रोग से अदरक की फसल बर्बाद, किसानों ने राज्यपाल से लगाई मुआवजे और बीज की गुहार जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में अदरक की मुख्य नकदी फसल एक अज्ञात रोग की चपेट में आने से लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और उनकी आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इसके अलावा, आगामी फसल के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध न होना भी किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। किसानों का आरोप और मांगें कृषक संघ, कफोटा उपमंडल (जिला सिरमौर) की ओर से महामहिम राज्यपाल महोदय को (उपमंडल दंडाधिकारी, कफोटा के माध्यम से) एक ज्ञापन सौंपा गया है। किसानों का कहना है कि कृषि विश्वविद्यालय एवं संबंधित विभागों द्वारा समय रहते प्रभावी अनुसंधान, रोग की पहचान तथा रोकथाम के पर्याप्त प्रयास न किए जाने के कारण स्थिति और अधिक गंभीर हुई है। ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई हैं: प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वेक्षण करवाकर किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। आगामी बुआई के लिए गुणवत्तापूर्ण अदरक बीज उपलब्ध कराने हेतु एक विशेष योजना बनाई जाए। फसल में फैले अज्ञात रोग की वैज्ञानिक जांच और रोकथाम के लिए तुरंत विशेषज्ञों का दल भेजा जाए। कृषक संघ ने उम्मीद जताई है कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में जल्द से जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री (हिमाचल प्रदेश सरकार), माननीय कृषि मंत्री (हिमाचल प्रदेश सरकार) और उपायुक्त (जिला सिरमौर) को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है।1
- कैंट से नवीन बिष्ट होंगे आप के प्रत्याशी, महेंद्र यादव व उमा सिसौदिया ने किया नाम का ऐलान, हजारों की तादाद में उमड़ी भीड़। NIU कैंट से नवीन बिष्ट होंगे आप के प्रत्याशी, महेंद्र यादव व उमा सिसौदिया ने किया नाम का ऐलान, हजारों की तादाद में उमड़ी भीड़। NIU1
- आसमान गवाही दे रहा है... ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में उमड़ा विशाल जनसैलाब इंडिया गठबंधन जिंदाबाद। कई मित्र कहते है कि देश कांग्रेस मुक्त हो रहा है,, उन्हें समझ जाना चाहिए कि देश कांग्रेस मुक्त नहीं अंध भक्त मुक्त होने वाला है और आने वाले कुछ सालों में अंध भक्तों का ऐसा हाल होगा कि कोई गली गलियारे में पूछेगा भी नहीं,,4
- SK मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 44 वर्षीय राजेंद्र की मौत, परिजनों ने किया हंगामा। The Aman Times SK मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 44 वर्षीय राजेंद्र की मौत, परिजनों ने किया हंगामा। देहरादून। SK मेमोरियल हॉस्पिटल ईसी रोड करनपुर में इलाज के दौरान 44 वर्षीय राजेंद्र की मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन देने के कारण मौत होने का आरोप लगाया है। मृतक राजेंद्र करनपुर बस्ती का निवासी बताया जा रहा है। सूचना मिलने पर दून पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस मामले की जानकारी जुटाने के साथ ही स्थिति को संभालने में जुटी है।1
- विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने पश्चिमीवाला मुख्य मार्ग के गड्ढों में भरान कार्य कराया शुरू, छोटूवाला तक जल्द बनेगी सड़क विकासनगर। 1 नवंबर 2026 को विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने स्वयं मौके पर पहुंचकर ग्राम पश्चिमीवाला के मुख्य मार्ग पर बने गड्ढों में डंपिंग भरान का कार्य शुरू करवाया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पश्चिमीवाला से छोटूवाला गांव तक सड़क निर्माण का कार्य जल्द शुरू कर पूरा कराया जाएगा। विधायक की इस पहल से ग्रामीणों को सड़क की समस्या से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान कराने की पहल के लिए विधायक का आभार व्यक्त किया।1