जिला हमीरपुर के तहत तरक्वाड़ी से संबधित एक दंपत्ति के साथ बेरहमी से मारपीट करने का मामला सामने आया जिला हमीरपुर के तहत तरक्वाड़ी से संबधित एक दंपत्ति के साथ बेरहमी से मारपीट करने का मामला सामने आया है। इस मारपीट की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। लेकिन इस दंपत्ति ने हमीरपुर जिला की पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पीडि़त का कहना है कि एक ओर वह घायल अवस्था में लदरौर पुलिस चौकी पहुंचे लेकिन यहां पर इन्हें कोई सहयोग नहीं मिला बल्कि भोरंज थाना भेजा गया तो वहां पर भी उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। पांच दिन तक मैडिकल ही हो पाया। अब इस पीडि़त दंपत्ति ने प्रदेश सरकार, प्रशासन, पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। शनिवार को बिलासपुर सर्किट हाऊस में पीडि़त सुनील कुमार व उसकी पत्नी मीना कुमारी ने प्रेसवार्ता की। इस दौरान इनके साथ बेटी साक्षी ठाकुर, सुनील कुमार, राजेश कुमार भी मौजूद रहे। पीडि़त सुनील कुमार ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान के सामने हर रोज शराब की खाली बोतलें रखी जाती थी, जिसका उन्होंने विरोध किया और उनके ऊपर कुछ लोगों की ओर से जानलेवा हमला किया गया। इस बारे में पुलिस प्रशासन की ओर से भी उनके साथ कोई भी सहयोग नहीं कियाा गया, बल्कि उन्हें उलझाए रखा। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान बिलासपुर जिला के तहत है। उनके साथ मारपीट होने के बाद वह तुरंत लदरौर पुलिस चौकी पहुंचे। पुलिस प्रशासन से उन्होंने भराड़ी पुलिस थाना भेजने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनीं। भोरंज पुलिस थाना भेजा गया। इसके अलावा बस्सी अस्पताल में भेजा गया लेकिन कोई मैडिकल नहीं करवाया गया। उक्त लोगों ने आरोप लगाया कि रसूखदार की शह पर यह रवैया अपनाया गया है, जिसके चलते इस मामले को लेकर सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि मारपीट की घटना को बीते सात दिन तक का समय बीत चुका है। अब यह मामला भराड़ी थाना में भेजा गया है और भराड़ी पुलिस द्वारा मामले को लेकर आगामी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर पुलिस की ओर से उनके हितों की अनदेखी की गई है। पुलिस को इस मामले को लेकर उचित कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन उन्हें पुलिस का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन के साथ ही मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में तैनात चिकित्सक की ओर से भी कोताही की गई है और उनकी सहमति के बिना ही उन्हें डिस्चार्ज ऑन रिक्केस्ट (डीओआर) लिख दिया गया। सुनील कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी की हालत अभी भी गंभीर है। वहीं, उन्हें अब जान का खतरा बना हुआ है। जिसके चलते उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए। वहीं उन्होंने आग्रह किया है कि इस मामले को लेकर सख्त कदम उठाए जाएं। ताकि भविष्य में इस तरह की कोई भी घटना सामने ना आए।
जिला हमीरपुर के तहत तरक्वाड़ी से संबधित एक दंपत्ति के साथ बेरहमी से मारपीट करने का मामला सामने आया जिला हमीरपुर के तहत तरक्वाड़ी से संबधित एक दंपत्ति के साथ बेरहमी से मारपीट करने का मामला सामने आया है। इस मारपीट की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। लेकिन इस दंपत्ति ने हमीरपुर जिला की पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पीडि़त का कहना है कि एक ओर वह घायल अवस्था में लदरौर पुलिस चौकी पहुंचे लेकिन यहां पर इन्हें कोई सहयोग नहीं मिला बल्कि भोरंज थाना भेजा गया तो वहां पर भी उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। पांच दिन तक मैडिकल ही हो पाया। अब इस पीडि़त दंपत्ति ने प्रदेश सरकार, प्रशासन, पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। शनिवार को बिलासपुर सर्किट हाऊस में पीडि़त सुनील कुमार व उसकी पत्नी मीना कुमारी ने प्रेसवार्ता की। इस दौरान इनके साथ बेटी साक्षी ठाकुर, सुनील कुमार, राजेश कुमार भी मौजूद रहे। पीडि़त सुनील कुमार ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान के सामने हर रोज शराब की खाली बोतलें रखी जाती थी, जिसका उन्होंने विरोध किया और उनके ऊपर कुछ लोगों की ओर से जानलेवा हमला किया गया। इस बारे में पुलिस प्रशासन की ओर से भी उनके साथ कोई भी सहयोग नहीं कियाा गया, बल्कि उन्हें उलझाए रखा। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान बिलासपुर जिला के तहत है। उनके साथ मारपीट होने के बाद वह तुरंत लदरौर पुलिस चौकी
पहुंचे। पुलिस प्रशासन से उन्होंने भराड़ी पुलिस थाना भेजने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनीं। भोरंज पुलिस थाना भेजा गया। इसके अलावा बस्सी अस्पताल में भेजा गया लेकिन कोई मैडिकल नहीं करवाया गया। उक्त लोगों ने आरोप लगाया कि रसूखदार की शह पर यह रवैया अपनाया गया है, जिसके चलते इस मामले को लेकर सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि मारपीट की घटना को बीते सात दिन तक का समय बीत चुका है। अब यह मामला भराड़ी थाना में भेजा गया है और भराड़ी पुलिस द्वारा मामले को लेकर आगामी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर पुलिस की ओर से उनके हितों की अनदेखी की गई है। पुलिस को इस मामले को लेकर उचित कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन उन्हें पुलिस का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन के साथ ही मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में तैनात चिकित्सक की ओर से भी कोताही की गई है और उनकी सहमति के बिना ही उन्हें डिस्चार्ज ऑन रिक्केस्ट (डीओआर) लिख दिया गया। सुनील कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी की हालत अभी भी गंभीर है। वहीं, उन्हें अब जान का खतरा बना हुआ है। जिसके चलते उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए। वहीं उन्होंने आग्रह किया है कि इस मामले को लेकर सख्त कदम उठाए जाएं। ताकि भविष्य में इस तरह की कोई भी घटना सामने ना आए।
- जिला हमीरपुर के तहत तरक्वाड़ी से संबधित एक दंपत्ति के साथ बेरहमी से मारपीट करने का मामला सामने आया है। इस मारपीट की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। लेकिन इस दंपत्ति ने हमीरपुर जिला की पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पीडि़त का कहना है कि एक ओर वह घायल अवस्था में लदरौर पुलिस चौकी पहुंचे लेकिन यहां पर इन्हें कोई सहयोग नहीं मिला बल्कि भोरंज थाना भेजा गया तो वहां पर भी उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। पांच दिन तक मैडिकल ही हो पाया। अब इस पीडि़त दंपत्ति ने प्रदेश सरकार, प्रशासन, पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। शनिवार को बिलासपुर सर्किट हाऊस में पीडि़त सुनील कुमार व उसकी पत्नी मीना कुमारी ने प्रेसवार्ता की। इस दौरान इनके साथ बेटी साक्षी ठाकुर, सुनील कुमार, राजेश कुमार भी मौजूद रहे। पीडि़त सुनील कुमार ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान के सामने हर रोज शराब की खाली बोतलें रखी जाती थी, जिसका उन्होंने विरोध किया और उनके ऊपर कुछ लोगों की ओर से जानलेवा हमला किया गया। इस बारे में पुलिस प्रशासन की ओर से भी उनके साथ कोई भी सहयोग नहीं कियाा गया, बल्कि उन्हें उलझाए रखा। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान बिलासपुर जिला के तहत है। उनके साथ मारपीट होने के बाद वह तुरंत लदरौर पुलिस चौकी पहुंचे। पुलिस प्रशासन से उन्होंने भराड़ी पुलिस थाना भेजने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनीं। भोरंज पुलिस थाना भेजा गया। इसके अलावा बस्सी अस्पताल में भेजा गया लेकिन कोई मैडिकल नहीं करवाया गया। उक्त लोगों ने आरोप लगाया कि रसूखदार की शह पर यह रवैया अपनाया गया है, जिसके चलते इस मामले को लेकर सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि मारपीट की घटना को बीते सात दिन तक का समय बीत चुका है। अब यह मामला भराड़ी थाना में भेजा गया है और भराड़ी पुलिस द्वारा मामले को लेकर आगामी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर पुलिस की ओर से उनके हितों की अनदेखी की गई है। पुलिस को इस मामले को लेकर उचित कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन उन्हें पुलिस का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन के साथ ही मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में तैनात चिकित्सक की ओर से भी कोताही की गई है और उनकी सहमति के बिना ही उन्हें डिस्चार्ज ऑन रिक्केस्ट (डीओआर) लिख दिया गया। सुनील कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी की हालत अभी भी गंभीर है। वहीं, उन्हें अब जान का खतरा बना हुआ है। जिसके चलते उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए। वहीं उन्होंने आग्रह किया है कि इस मामले को लेकर सख्त कदम उठाए जाएं। ताकि भविष्य में इस तरह की कोई भी घटना सामने ना आए।2
- हमीरपुर हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार जानबूझकर पंचायत चुनावों को टालकर लोकतंत्र के मूल ढांचे को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के बीच जाने से घबरा रही है, इसलिए पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही है। आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि पंचायती राज लोकतंत्र की नींव है, लेकिन सुक्खू सरकार इस नींव को ही हिलाने में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव कराने की बजाय सरकार कानूनी पैंतरेबाजी कर रही है, जिससे स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार को अपनी जनविरोधी नीतियों का डर सता रहा है। उन्होंने कहा कि तीन साल के शासनकाल में सरकार ने हर वर्ग—किसान, कर्मचारी, युवा, महिलाएं और व्यापारी—सभी को केवल झूठी गारंटियों और खोखले वादों का झुनझुना पकड़ा दिया। सत्ता में आने के बाद एक भी बड़ी गारंटी धरातल पर उतरती दिखाई नहीं दी। राणा ने डिजास्टर एक्ट का हवाला देकर चुनाव टालने को केवल बहाना करार देते हुए सवाल उठाया कि ट्राइबल क्षेत्रों को छोड़कर प्रदेश के अन्य हिस्सों में कहां ऐसी आपदा है, जहां सड़कें बंद हों या सामान्य जनजीवन ठप हो। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में वास्तव में आपदा की स्थिति है तो मुख्यमंत्री राहत कार्यों में नजर क्यों नहीं आते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार दिल्ली के दौरे और फाइव स्टार होटलों में ठहरने में व्यस्त हैं, जो आपदा का रोना रोने वाली सरकार के दावों पर सवाल खड़ा करता है। जनता मुश्किल में है और सरकार आराम फरमा रही है। राणा ने कहा कि पंचायत चुनावों से बचना इस बात का प्रमाण है कि सरकार को अपनी हार साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देगी और समय पर चुनाव करवाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि जनता अब जवाब मांग रही है और कांग्रेस सरकार को अपने वादाखिलाफी का हिसाब देना ही होगा।1
- हिमाचल के बागवानों को अब एमआईएस का पैसा सीधे खातों में मिलेगा। एचपीएमसी सेब खरीद के बाद बागवानों को उसके बदले दवाई खाद अन्य औजार देते थे लेकिन अब सीधे खाते में पैसा देने का फैसला सरकार ने लिया है।एमआईएस के तहत 115 करोड़ अभी एचपीएमसी द्वारा बागवानों का देना है। बागवानी मंत्री जगत कहा कि प्रदेश में एमआईएस स्कीम के तहत केश के बदले दवाईयां या औजार देते आया है लेकिन अब डीबीटी के माध्यम से बागवानों को सेब का भुगतान किया जाएगा। पहले छोटे बागवानों को प्राथमिकता दी जाएगी उसके बाद बड़े बागवानों को भुगतना किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एमआईएस योजना केंद्र सरकार की थी लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा इस योजना को खत्म कर दिया जिससे हिमाचल को काफी नुक्सान हुआ है। इस योजना के तहत 154 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है और 115 करोड़ की देनदारी रही है जिसे जल्द भुगतान किया जाएगा। वही विदेशों से सेब पर आयात शुल्क बढाने को लेकर भी जगत नेगी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा ओर कहा कि भाजपा सरकार कुछ बोलती है और करती कुछ है।पीएम मोदी हिमाचल जब जब हिमाचल आते है तो हिमाचल के सेब की बात करते है और सेब पर आयात शुल्क बढाने की बाते करते है लेकिन आयात शुल्क बढाने के बजाय केंद्र सरकार शुल्क बढाने का काम कर रही है। न्यूजीलैंड के साथ करार कर आयात शुल्क कम कर दिया और अब ट्रम्प के दवाब में आ कर आयात शुल्क जीरो कर दिया इससे हिमाचल की आर्थिकी पर काफी असर पड़ेगा। और आने वाले समय मे सेब बागवान कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा। बाईट। जगत नेगी। बागवानी मंत्री1
- ज़हर युक्त खेती छोड़ प्राकृतिक खेती और बढ़ रहे किसान1
- Post by Manish Rajput1
- हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ज्वांइट एक्शन कमेटी जिला हमीरपुर की मीटिंग संयोजक, कामेश्वर दत्त शर्मा की अध्यक्षता में हमीरपुर में सम्पन हुई। इस मीटिंग में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली संषोधन विधेयक, 2025 व उसके प्रावधानों को लागू करने के लिए की जा रही स्मार्ट मीटरिंग के संदर्भ में चर्चा की गई, क्योंकि बिजली क्षेत्र देश की बुनियादी सार्वजनिक सेवा है जिसका सीधा संबंध हर घर, किसान, छोटे व्यापारी, उद्योग कर्मचारी और आम नागरिक के जीवन से है। प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक में ऐसे कई प्रावधान शामिल है, जिनसे बिजली कंपनियों का निजीकरण कर उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढने तथा कर्मचारियों, पेंशनर्ज की सेवा व समाजिक सुरक्षा प्रभावित होगी। प्रदेश के बिजली कर्मचारी व अभियंताओं द्वारा इस संशोधन विधेयक व इसमें निहित निजीकरण के प्रावधानो को लागू करने के लिए की जा रही स्मार्ट मीटरिंग के खिलाफ एनसीसीओईईई के राष्ट्रीय अवाहन पर 12 फरवरी, 2026 को समूचे प्रदेश में पेन डाउन, टूल डाउन की हड़ताल व भोजना अवकाश के दौरान बोर्ड कार्यलयों के बाहर पेंशनर्ज व आम जनता का सहयोग लेते हुए विरोध प्रदर्षन करने का फैसला लिया है।1
- ऊना। हिमाचल पथ परिवहन निगम से सेवानिवृत्त पेंशनर्स ने शनिवार को ऊना जिला मुख्यालय के पुराने बस अड्डा परिसर में प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हिमाचल पथ परिवहन निगम सेवानिवृत कर्मचारी कल्याण संगठन की बैठक के दौरान पेंशनर्स ने समय पर पेंशन जारी न होने पर रोष व्यक्त करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। संगठन के अध्यक्ष किशोरी लाल ने कहा कि वर्तमान में सरकार द्वारा पेंशन को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर जारी किया जा रहा है। 75 वर्ष, 65 वर्ष, 63 वर्ष और 58 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के पेंशनर्स के लिए अलग-अलग भुगतान व्यवस्था बनाई गई है, जिससे असमानता और भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने मांग की कि सभी पेंशनर्स को एक समान और एकमुश्त पेंशन दी जाए। किशोरी लाल ने कहा कि कड़ाके की ठंड में बुजुर्ग पेंशनर्स को प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम कार्यालयों में पेंशनर्स के मेडिकल और अन्य बिल लंबे समय से लंबित पड़े हैं और अधिकारी इस ओर कोई सहानुभूतिपूर्ण रवैया नहीं अपना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि जहां निगम में कार्यरत कर्मचारियों को सरकार द्वारा तीन फीसदी महंगाई भत्ता (डीए) की किश्त जारी कर दी गई है, वहीं पेंशनर्स को इससे वंचित रखा गया है। पेंशनर्स ने चेतावनी दी कि यदि उनकी पेंशन हर माह पहली तारीख को जारी करने की व्यवस्था शीघ्र नहीं की गई तो सेवानिवृत कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह पेंशनर्स को महीने के अंत में जाकर किश्तों में पेंशन दी जा रही है, उसी तरह मंत्री विधायक भी अपनी सैलरी इसी तरह किस्तों में और महीने के अंतिम दिनों में जाकर ले।1
- जिला बिलासपुर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक जिला मुख्यालय स्थित बचत भवन में अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर ओम कांत ठाकुर की अध्यक्षता में नेशनल/स्टेट एक्शन प्लान फॉर सीनियर सिटिज़न्स एवं प्रोटेक्टिव एजिंग प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित की गई। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि वरिष्ठ नागरिक संघ एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने भी बैठक में सहभागिता की। बैठक में प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक आयोजित गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा यह आकलन किया गया कि कार्यक्रम निर्धारित योजना के अनुरूप संचालित हो रहा है या नहीं। साथ ही आगामी वर्कशॉप्स को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी बनाने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनके सम्मानजनक, सुरक्षित एवं सक्रिय जीवन को सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के लिए आजीविका संवर्धन, स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सहभागिता तथा भावनात्मक सशक्तीकरण से जुड़ी गतिविधियों को सुदृढ़ किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि 4 फरवरी को सदर उपमंडल के ओल्ड एज होम दियोली में आयोजित वर्कशॉप अत्यंत सफल रही। इसके उपरांत 7 फरवरी को घुमारवीं डिग्री कॉलेज परिसर में तथा 10 फरवरी को श्री नैना देवी जी उपमंडल के झंडूता ब्लॉक कार्यालय में वर्कशॉप्स का आयोजन किया जाएगा। इन ब्लॉक स्तरीय वर्कशॉप्स के पश्चात जिला स्तर पर तीन दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए लाइवलीहुड सिक्योरिटी, हेल्थ सपोर्ट, सामाजिक, भावनात्मक एवं डिजिटल सशक्तीकरण से संबंधित विषयों पर विस्तृत विमर्श किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सरकारी एवं गैर-सरकारी क्षेत्रों में उच्च पदों से सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक अपने अनुभव स्कूलों एवं कॉलेजों में विद्यार्थियों के साथ साझा करेंगे। इस पहल को टॉक एक्सचेंज नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य पीढ़ियों के बीच संवाद को मजबूत करना और बच्चों में जीवन मूल्यों, अनुभवों एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में विभिन्न कम्युनिटी-बेस्ड गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा। नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए सेल्फी विद ग्रैंडपेरेंट थीम पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें उत्कृष्ट प्रविष्टियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। छठी से आठवीं कक्षा तक एजिंग विद डिग्निटी विषय पर ड्राइंग प्रतियोगिता तथा नौवीं से बारहवीं कक्षा तक सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड एजिंग विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त बैग फ्री डे के अवसर पर बच्चों को नैतिक शिक्षा, सड़क सुरक्षा एवं एंटी चिट्टा जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी जागरूक किया जाएगा। अतिरिक्त उपायुक्त ने सभी विभागों से आह्वान किया कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाएं और वरिष्ठ नागरिकों को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में अपना सक्रिय योगदान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का अनुभव समाज की अमूल्य धरोहर है और उनके सम्मान, सुरक्षा एवं सशक्तीकरण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।1