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गाल फुला नदी पर बने पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब केवल डामर बिछाने का काम शेष है। इस काम के संपन्न होते ही पुल पर बसों, ट्रकों और अन्य गाड़ियों का आवागमन शुरू हो जाएगा।
गांव के जवान
गाल फुला नदी पर बने पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब केवल डामर बिछाने का काम शेष है। इस काम के संपन्न होते ही पुल पर बसों, ट्रकों और अन्य गाड़ियों का आवागमन शुरू हो जाएगा।
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- गाल फुला नदी पर बने पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब केवल डामर बिछाने का काम शेष है। इस काम के संपन्न होते ही पुल पर बसों, ट्रकों और अन्य गाड़ियों का आवागमन शुरू हो जाएगा।1
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहाँ पिछले एक माह के भीतर चार हाथियों की अचानक मौत हो गई है। यह घटना जिले में हाथियों के संरक्षण पर सवाल खड़े करती है।1
- महुआडांड़ स्थित सारना भवन में जनजाति सुरक्षा मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जहाँ जनजातीय समाज के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव, प्रांतीय संयोजक हिंदूवा उरांव तथा जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांतीय सदस्य शन्नी टोप्पो सहित कई गणमान्य लोग और समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक के दौरान जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, जनजातीय समूहों के संगठनात्मक विस्तार और समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की गई। उपस्थित वक्ताओं ने धर्मांतरण को समाज की पहचान पर हमला करार देते हुए जनजातीय अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में डीलिस्टिंग, बैगा, पुजार और पाहन के चुनाव संबंधी विषयों पर भी गहन चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, मुंडा और नगेसिया समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया, जिस पर सदस्यों ने सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई। यह बैठक समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान की रक्षा तथा जनजातीय हितों के संरक्षण के संकल्प के साथ समाप्त हुई।4
- बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आध्यात्मिक केंद्र 'ध्याण मंदिर' का उद्घाटन किया। यह ध्याण मंदिर राष्ट्र को समर्पित किया गया है।1
- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट के टाइगर पॉइंट से दिखने वाला नज़ारा बेहद मनमोहक है, जिसकी तुलना शिमला के ख़ूबसूरत दृश्यों से की जा सकती है। यह प्राकृतिक सुंदरता विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय के लोगों को समर्पित है, और उनसे अपील की गई है कि वे इस मनोरम दृश्य पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए लाइक और कमेंट अवश्य करें।1
- सीतापुर में नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने खुद पर लगे दुर्व्यवहार के आरोपों के बीच नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पहले उनका टेस्ट कराया जाए, फिर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो, उनकी बहन सीमा धनकी और एक अन्य महिला का नार्को टेस्ट हो, ताकि सच सामने आ सके। इस विवाद के चलते सरगुजा समेत पूरे प्रदेश के तहसीलदार और नायब तहसीलदार 1 जून से अनिश्चितकालीन कामबंद-कलमबंद हड़ताल पर हैं। यह मामला सीतापुर के राजापुर उपतहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक पर विधायक की बहन सीमा धनकी से कथित बद्तमीजी के आरोपों से जुड़ा है। वहीं, नायब तहसीलदार तुषार मानिक का आरोप है कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। दोनों ही पक्षों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज है। नायब तहसीलदार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 27 अप्रैल को विधायक की बहन सीमा धनकी, बिना पूरे दस्तावेज जमा किए, शोध क्षमता प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कह रही थीं। अपनी बात पर जोर देते हुए नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने शासन से नार्को टेस्ट की मांग दोहराई। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने किसी भी महिला या विधायक की बहन के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई है, न ही किसी को धक्का दिया है या जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। उनका दावा है कि नार्को टेस्ट से 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत और संघ की है, न कि शासन से, क्योंकि वह स्वयं भी शासन का एक अभिन्न अंग हैं और विधायक का कृत्य कहीं से भी सही नहीं है। विधायक और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर चलाए जा रहे कामबंद, कलमबंद आंदोलन के बीच नायब तहसीलदार ने विधायक से सीतापुर थाने में ही गिरफ्तारी देने और निष्पक्ष जांच के लिए आगे आने को कहा। उन्होंने उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच की मांग की है ताकि पूरा मामला सामने आ सके। नायब तहसीलदार ने चेतावनी दी है कि जब तक विधायक पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह आंदोलन प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक जारी रहेगा, जिसे सभी संगठनों का समर्थन प्राप्त है।1
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