पन्ना में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा— “तिरंगा देश की आन-बान-शान, राष्ट्र निर्माण में युवा निभाएं अपनी जिम्मेदारी” छत्रसाल पार्क से शुरू हुई यात्रा ने शहर के प्रमुख मार्गों का किया भ्रमण, तिरंगे से सजा पन्ना और देशभक्ति के नारों से गूंजा शहर पन्ना। स्वतंत्रता और राष्ट्र गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को पन्ना शहर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में छत्रसाल पार्क से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की संख्या में स्कूली एवं कॉलेज के छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर निकले लोगों के उत्साह और देशभक्ति के नारों से पूरा पन्ना शहर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।सुबह से ही छत्रसाल पार्क में विद्यार्थियों और नागरिकों का पहुंचना शुरू हो गया था। निर्धारित समय पर तिरंगा यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा छत्रसाल पार्क से कोतवाली चौराहा, गांधी चौक, महेंद्र भवन, अजयगढ़ चौराहा, बड़ा बाजार चौराहा, गोविंदजी मंदिर और बलदेवजी मंदिर होते हुए पुनः छत्रसाल पार्क पहुंची।यात्रा के दौरान 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' और अन्य देशभक्ति नारों से शहर की गलियां गूंजती रहीं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी ने यात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया। विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने दिलाया राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प तिरंगा यात्रा के अवसर पर पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा हमारे लिए केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, गौरव, त्याग और बलिदान की पहचान है। इसके सम्मान की जिम्मेदारी देश के प्रत्येक नागरिक की है।उन्होंने कहा कि आजादी हमें अनेक वीरों के संघर्ष और बलिदान से मिली है। देश की युवा पीढ़ी को उन बलिदानों को याद रखते हुए अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे मन लगाकर शिक्षा प्राप्त करें, अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं और अपनी प्रतिभा का उपयोग देश एवं समाज की प्रगति के लिए करें।विधायक ने कहा कि राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि देश के भीतर एकता, भाईचारे, अनुशासन और जिम्मेदार नागरिक भावना से भी होती है। जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएगा, तभी भारत को और अधिक मजबूत एवं विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार होगा। उन्होंने तिरंगे के सम्मान को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज के गौरव को हमेशा बनाए रखना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों में भी राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना चाहिए। अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक भी हुए शामिल तिरंगा यात्रा में नगर पालिका अध्यक्ष मीना विष्णु पांडे, भाजपा जिला अध्यक्ष बृजेंद्र मिश्रा, पन्ना कलेक्टर उषा राजे परमार सहित प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। यात्रा के पूरे मार्ग में लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर नागरिकों ने तिरंगा यात्रा का स्वागत किया। हजारों लोगों की सहभागिता ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। तिरंगे के रंग में नजर आया पूरा शहर तिरंगा यात्रा के दौरान पन्ना की सड़कों पर देशभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। विद्यार्थियों के हाथों में लहराते तिरंगे, देशभक्ति के नारों और राष्ट्रगान की भावना से पूरा वातावरण ओत-प्रोत रहा। यात्रा के समापन पर छत्रसाल पार्क में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इस भव्य आयोजन ने पन्ना में राष्ट्रप्रेम, एकता और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया। तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि पन्ना के नागरिकों के दिल में देश और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना कितनी गहरी है।
पन्ना में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा— “तिरंगा देश की आन-बान-शान, राष्ट्र निर्माण में युवा निभाएं अपनी जिम्मेदारी” छत्रसाल पार्क से शुरू हुई यात्रा ने शहर के प्रमुख मार्गों का किया भ्रमण, तिरंगे से सजा पन्ना और देशभक्ति के नारों से गूंजा शहर पन्ना। स्वतंत्रता और राष्ट्र गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को पन्ना शहर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में छत्रसाल पार्क से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की संख्या में स्कूली एवं कॉलेज के छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर निकले लोगों के उत्साह और देशभक्ति के नारों से पूरा पन्ना शहर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।सुबह से ही छत्रसाल पार्क में विद्यार्थियों और नागरिकों का पहुंचना शुरू हो गया था। निर्धारित समय
पर तिरंगा यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा छत्रसाल पार्क से कोतवाली चौराहा, गांधी चौक, महेंद्र भवन, अजयगढ़ चौराहा, बड़ा बाजार चौराहा, गोविंदजी मंदिर और बलदेवजी मंदिर होते हुए पुनः छत्रसाल पार्क पहुंची।यात्रा के दौरान 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' और अन्य देशभक्ति नारों से शहर की गलियां गूंजती रहीं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी ने यात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया। विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने दिलाया राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प तिरंगा यात्रा के अवसर पर पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा हमारे लिए केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, गौरव, त्याग और बलिदान की पहचान है। इसके सम्मान की जिम्मेदारी देश के प्रत्येक नागरिक की है।उन्होंने कहा कि आजादी हमें अनेक वीरों के संघर्ष और बलिदान से मिली है। देश की युवा पीढ़ी को उन बलिदानों को याद रखते हुए अपने कर्तव्यों
के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे मन लगाकर शिक्षा प्राप्त करें, अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं और अपनी प्रतिभा का उपयोग देश एवं समाज की प्रगति के लिए करें।विधायक ने कहा कि राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि देश के भीतर एकता, भाईचारे, अनुशासन और जिम्मेदार नागरिक भावना से भी होती है। जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएगा, तभी भारत को और अधिक मजबूत एवं विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार होगा। उन्होंने तिरंगे के सम्मान को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज के गौरव को हमेशा बनाए रखना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों में भी राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना चाहिए। अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक भी हुए शामिल तिरंगा यात्रा में नगर पालिका अध्यक्ष मीना विष्णु पांडे, भाजपा जिला अध्यक्ष बृजेंद्र मिश्रा, पन्ना कलेक्टर उषा राजे परमार
सहित प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। यात्रा के पूरे मार्ग में लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर नागरिकों ने तिरंगा यात्रा का स्वागत किया। हजारों लोगों की सहभागिता ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। तिरंगे के रंग में नजर आया पूरा शहर तिरंगा यात्रा के दौरान पन्ना की सड़कों पर देशभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। विद्यार्थियों के हाथों में लहराते तिरंगे, देशभक्ति के नारों और राष्ट्रगान की भावना से पूरा वातावरण ओत-प्रोत रहा। यात्रा के समापन पर छत्रसाल पार्क में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इस भव्य आयोजन ने पन्ना में राष्ट्रप्रेम, एकता और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया। तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि पन्ना के नागरिकों के दिल में देश और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना कितनी गहरी है।
- पन्ना में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा— “तिरंगा देश की आन-बान-शान, राष्ट्र निर्माण में युवा निभाएं अपनी जिम्मेदारी” छत्रसाल पार्क से शुरू हुई यात्रा ने शहर के प्रमुख मार्गों का किया भ्रमण, तिरंगे से सजा पन्ना और देशभक्ति के नारों से गूंजा शहर पन्ना। स्वतंत्रता और राष्ट्र गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को पन्ना शहर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में छत्रसाल पार्क से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की संख्या में स्कूली एवं कॉलेज के छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर निकले लोगों के उत्साह और देशभक्ति के नारों से पूरा पन्ना शहर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।सुबह से ही छत्रसाल पार्क में विद्यार्थियों और नागरिकों का पहुंचना शुरू हो गया था। निर्धारित समय पर तिरंगा यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा छत्रसाल पार्क से कोतवाली चौराहा, गांधी चौक, महेंद्र भवन, अजयगढ़ चौराहा, बड़ा बाजार चौराहा, गोविंदजी मंदिर और बलदेवजी मंदिर होते हुए पुनः छत्रसाल पार्क पहुंची।यात्रा के दौरान 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' और अन्य देशभक्ति नारों से शहर की गलियां गूंजती रहीं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी ने यात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया। विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने दिलाया राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प तिरंगा यात्रा के अवसर पर पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा हमारे लिए केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, गौरव, त्याग और बलिदान की पहचान है। इसके सम्मान की जिम्मेदारी देश के प्रत्येक नागरिक की है।उन्होंने कहा कि आजादी हमें अनेक वीरों के संघर्ष और बलिदान से मिली है। देश की युवा पीढ़ी को उन बलिदानों को याद रखते हुए अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे मन लगाकर शिक्षा प्राप्त करें, अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं और अपनी प्रतिभा का उपयोग देश एवं समाज की प्रगति के लिए करें।विधायक ने कहा कि राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि देश के भीतर एकता, भाईचारे, अनुशासन और जिम्मेदार नागरिक भावना से भी होती है। जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएगा, तभी भारत को और अधिक मजबूत एवं विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार होगा। उन्होंने तिरंगे के सम्मान को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज के गौरव को हमेशा बनाए रखना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों में भी राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना चाहिए। अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक भी हुए शामिल तिरंगा यात्रा में नगर पालिका अध्यक्ष मीना विष्णु पांडे, भाजपा जिला अध्यक्ष बृजेंद्र मिश्रा, पन्ना कलेक्टर उषा राजे परमार सहित प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। यात्रा के पूरे मार्ग में लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर नागरिकों ने तिरंगा यात्रा का स्वागत किया। हजारों लोगों की सहभागिता ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। तिरंगे के रंग में नजर आया पूरा शहर तिरंगा यात्रा के दौरान पन्ना की सड़कों पर देशभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। विद्यार्थियों के हाथों में लहराते तिरंगे, देशभक्ति के नारों और राष्ट्रगान की भावना से पूरा वातावरण ओत-प्रोत रहा। यात्रा के समापन पर छत्रसाल पार्क में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इस भव्य आयोजन ने पन्ना में राष्ट्रप्रेम, एकता और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया। तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि पन्ना के नागरिकों के दिल में देश और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना कितनी गहरी है।4
- *क्रांति दिवस पर पन्ना के गुनौर में गूंजा 'वंदे मातरम': कांग्रेस सेवादल ने निकाली विशाल तिरंगा यात्रा, एकजुट दिखा कांग्रेस परिवार*।। *क्रांति दिवस पर पन्ना के गुनौर में गूंजा 'वंदे मातरम': कांग्रेस सेवादल ने निकाली विशाल तिरंगा यात्रा, एकजुट दिखा कांग्रेस परिवार*।। पन्ना/गुनौर: शीर्ष नेतृत्व के आह्वान, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी एवं प्रदेश सेवादल अध्यक्ष अवनीश भार्गव के निर्देशानुसार 9 अगस्त (रविवार) को 'अगस्त क्रांति दिवस' के अवसर पर पन्ना जिले की गुनौर विधानसभा (59) में कांग्रेस सेवादल द्वारा भव्य तिरंगा यात्रा (पैदल मार्च) का सफल आयोजन किया गया। सेवादल जिला अध्यक्ष रामबहादुर द्विवेदी एवं गुनौर ब्लॉक अध्यक्ष धर्मराज कश्यप के नेतृत्व में निकली यह तिरंगा यात्रा सुबह 11 बजे गुनौर के सिली तिराहे से प्रारंभ हुई। अपने तय मार्ग के अनुसार, सेवादल कार्यकर्ता गणवेश (यूनीफॉर्म) में अनुशासित ढंग से देशभक्ति के गगनभेदी नारों और हाथों में तिरंगा लिए मुख्य बाजार से होते हुए हरद्वाही मोड़ पहुंचे, जहां यात्रा का गरिमामय समापन हुआ। मुख्य अतिथि और वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी मौजूदगी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला कांग्रेस कमेटी पन्ना के अध्यक्ष अनीश खान उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति में कांग्रेस परिवार के विभिन्न मोर्चा संगठनों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। इन प्रमुख पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने दर्ज कराई उपस्थिति कार्यक्रम को सफल बनाने में सेवादल, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, अल्पसंख्यक विभाग सहित ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की बड़ी भूमिका रही। रैली में मुख्य रूप से ममता शर्मा, अनंत शुक्ला, भभूत सिंह, हिम्मत सिंह, बादरी केसरी, अहिरवार संतोष लोधी, सेवालाल पटेल, अरुण कुमार गौतम, सुदीप कुशवाहा, लाल साहब, संजय तिवारी, राजाजी बुंदेला और कुलदीप सिंह सहित जिले के कई वरिष्ठ नेता एवं सेवादल के पदाधिकारी मौजूद रहे। समापन अवसर पर सभी उपस्थित जनों ने 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' के उद्घोष के साथ देश के अमर शहीदों को नमन किया और संगठन को धरातल पर और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया।4
- शुभ शनिवार।। मिनी वृंदावन धाम पन्ना भगवान जुगल किशोर महाराज के दर्शन शुभ शनिवार।। श्रावण मास में मिनी वृंदावन धाम पन्ना भगवान जुगल किशोर महाराज जी के दर्शन प्राप्त करें जय श्री कृष्णा 🚩1
- बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से जुड़ी कृषि शिक्षा में छात्रों की रुचि बनी हुई है। UPCATET 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया के तहत सीट अलॉटमेंट और प्रवेश से जुड़ी गतिविधियां जारी हैं। कृषि शिक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण समय है। अभ्यर्थियों को अपने प्रवेश और काउंसलिंग से संबंधित जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर जरूर जांचनी चाहिए।1
- *ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई के दावों के बीच उठे सवाल, वायरल टीपी ने खोली पोल* जब टीपी में माल की मात्रा स्पष्ट है, लोडिंग स्थल की जानकारी उपलब्ध है और मामला सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हो चुका है, तो संबंधित वाहन, लोडिंग स्थल और जिम्मेदार व्यक्ति की जांच कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? *क्या नियम सभी के लिए समान हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल चुनिंदा वाहनों को ही निशाना बनाया जा रहा है?* *अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल* मामला सार्वजनिक होने के बाद अब निगाहें परिवहन और खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। यदि वायरल टीपी और वाहन की वास्तविक स्थिति में ओवरलोडिंग की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि वायरल दस्तावेज में कोई तथ्य गलत है तो संबंधित विभाग को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अब सवाल सिर्फ ओवरलोड ट्रकों का नहीं, बल्कि कार्रवाई में कथित पक्षपात का है। जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट करें कि ओवरलोडिंग के खिलाफ उनकी कार्रवाई की कसौटी क्या है और वायरल मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई? मैहर। जिले में ओवरलोडिंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड ट्रकों की तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। कार्रवाई के बावजूद धड़ल्ले से ओवरलोड ट्रकों का संचालन जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कुछ मामलों में कार्रवाई करता है और कुछ मामलों में चुप्पी क्यों साध लेता है?हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक खबर ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। वायरल मामले में सामने आई टीपी में ही वाहन में लोड माल की मात्रा दर्ज बताई जा रही है, साथ ही जिस व्यक्ति/स्थान से माल लोड किया गया, उसका विवरण भी टीपी में अंकित बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जब दस्तावेज ही कथित तौर पर ओवरलोडिंग की ओर इशारा कर रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों को कार्रवाई करने में आखिर किस बात की परेशानी है? टीपी सामने, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? ओवरलोड वाहन केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं करते, बल्कि सड़क सुरक्षा और सड़क की गुणवत्ता पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं। यदि किसी वाहन के दस्तावेज में निर्धारित क्षमता से अधिक माल दर्ज है, तो संबंधित विभागों के पास मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई करने का आधार मौजूद होना चाहिए। इसके बावजूद यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होती तो यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई भी चयनात्मक तरीके से की जा रही है?1
- कामिका एकादशी का व्रत आज ************************* व्रत रख कर सुनें कथा, होंगी मनोकामनाएं पूर्ण =========== कामिका एकादशी का व्रत आज ************************* व्रत रख कर सुनें कथा, होंगी मनोकामनाएं पूर्ण ============================== आज यानी 9 अगस्त को कामिका एकादशी है। सावन के महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी का व्रत पूजन किया जाता है। कामिका एकादशी के दिन पीले रंग का काफी बड़ा महत्व बताया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पीले फल-फूल से की जाती है। सभी एकादशी व्रतों में से कामिका एकादशी को भगवान विष्णु का उत्तम व्रत माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव के पावन महीने श्रावण में आता है। कामिका एकादशी का व्रत विधान करके सभी लोग अपने कष्टों से मुक्त हो सकते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति के मन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। कामिका एकादशी का व्रत करते समय बरतें ये सावधानियां ========================== - कामिका एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनें। - घर में प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का बिल्कुल भी प्रयोग ना करेंं। - सुबह और शाम एकादशी की पूजा पाठ में साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही व्रत कथा सुनें। - एकादशी की पूजा में हर तरीके से परिवार में शांतिपूर्वक माहौल बनाए रखेंं। - कामिका एकादशी पर एक आसन पर बैठकर ? नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बाहर जाप जरूर करेंं। घर में होगी बरकत- ---------------------- - कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा उससे एक दिन पहले दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत नियम को लेकर शुरू हो जाती हैं। - दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण न करें केवल फलों का ही सेवन करेंं। - दशमी तिथि की रात को अगर संभव हो तो भगवान विष्णु के ओम नमो नारायणाय आदि मंत्रों का जाप अवश्य करें। - सुबह सूर्योदय से पहले उठकर अपने स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेना चाहिए. पूजा करते समय साफ कपड़े पहनकर विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए। - पूर्व दिशा की तरफ एक पटरे पर पीला रेशमी कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो को स्थापित करेंं। - धूप-दीप जलाएं और कलश स्थापित करेंं। - भगवान विष्णु को अपने सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग आदि अर्पण करें और स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएंं। - अपने दाएं हाथ में जल लेकर घर मे धन धान्य की बरकत के लिए भगवान विष्णु के सामने संकल्प लेंं। - यदि सम्भव हो तो पूरा दिन निराहार रहकर शाम के समय कामिका एकादशी की व्रत कथा सुनें और फलाहार करेंं। - शाम के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाएंं। - अब दूसरे दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा दक्षिणा देकर उसके बाद स्वयं खाना खाना चाहिएं। ये महाउपाय करने से मिलेगा मनचाहा वरदान- ============================ - कामिका एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठे और स्नान करके हलके पीले रंग के कपड़े पहनें। - 5 सफेद जनेऊ को केसर से रंगे और 5 स्वच्छ पीले फल लेंं। - तुलसी की माला से पीले आसन पर बैठकर 'नमो भगवते वासुदेवायमंत्र का तीन माला का जाप करेंं। - जाप के बाद पांचों जनेऊ और पीले फल भगवान विष्णु के मंदिर में अर्पण कर दें और मन की इच्छा भगवान विष्णु के सामने जरूर कहेंं। - स्वयं प्रसाद के रूप में एक केला घर पर ले आएं और परिवार के सभी सदस्यों को देंं। कामिका एकादशी की कथा ********************** कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन, कृपा करके श्रावण कृष्ण एकादशी का महत्व क्या है, सो बताइए। श्रीकृष्ण भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका माहात्म्य क्या है, सो कृपा करके कहिए। नारदजी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! लोकों के हित के लिए तुमने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। श्रावण मास की कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख, चक्र, गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन होता है, जिनके नाम श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव, मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से मिलता है, वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, समुद्र, वन सहित पृथ्वी दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी प्राप्त नहीं होता वह भगवान विष्णु के पूजन से मिलता है। जो मनुष्य श्रावण में भगवान का पूजन करते हैं, उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अत: पापों से डरने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्यमेव करना चाहिए। पापरूपी कीचड़ में फँसे हुए और संसाररूपी समुद्र में डूबे मनुष्यों के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। हे नारद! स्वयं भगवान ने यही कहा है कि कामिका व्रत से जीव कुयोनि को प्राप्त नहीं होता। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी दल से। तुलसी दल पूजन का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएँ नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भू्रण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढऩे वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है। कामिका एकादशी : एक अन्य कथा ======================= प्राचीन काल में किसी गांव में एक ठाकुर जी थे। क्रोधी ठाकुर का एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर से ब्राह्मण का खून हो जाता है। अत: अपने अपराध की क्षमा याचना के लिए ब्राह्मण की क्रिया उसे करनी चाहिए परन्तु पंडितों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रह्म हत्या का दोषी बन गया। परिणामस्वरूप ब्राह्मणों ने भोजन करने से इनकार कर दिया। तब उन्होंने एक मुनि से निवेदन किया कि हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है। इस पर मुनि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने की प्रेरणा दी। ठाकुर ने वैसा ही किया जैसा मुनि ने उसे करने को कहा था, जब रात्रि में भगवान की मूर्ति के पास जब वह शयन कर रहा था तभी उसे स्वपन में प्रभु दर्शन देते हैं और उसके पापों को दूर करके उसे क्षमा दान देते हैं। राजेन्द्र गुप्ता, ज्योतिषी और हस्तरेखाविद मो. 9116089175 नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए कामिका एकादशी का व्रत आज ************************* व्रत रख कर सुनें कथा, होंगी मनोकामनाएं पूर्ण ============================== आज यानी 9 अगस्त को कामिका एकादशी है। सावन के महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी का व्रत पूजन किया जाता है। कामिका एकादशी के दिन पीले रंग का काफी बड़ा महत्व बताया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पीले फल-फूल से की जाती है। सभी एकादशी व्रतों में से कामिका एकादशी को भगवान विष्णु का उत्तम व्रत माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव के पावन महीने श्रावण में आता है। कामिका एकादशी का व्रत विधान करके सभी लोग अपने कष्टों से मुक्त हो सकते हैं। यह व्रत रखने से व्यक्ति के मन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। कामिका एकादशी का व्रत करते समय बरतें ये सावधानियां ========================== - कामिका एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनें। - घर में प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का बिल्कुल भी प्रयोग ना करेंं। - सुबह और शाम एकादशी की पूजा पाठ में साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही व्रत कथा सुनें। - एकादशी की पूजा में हर तरीके से परिवार में शांतिपूर्वक माहौल बनाए रखेंं। - कामिका एकादशी पर एक आसन पर बैठकर ? नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बाहर जाप जरूर करेंं। घर में होगी बरकत- ---------------------- - कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा उससे एक दिन पहले दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत नियम को लेकर शुरू हो जाती हैं। - दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण न करें केवल फलों का ही सेवन करेंं। - दशमी तिथि की रात को अगर संभव हो तो भगवान विष्णु के ओम नमो नारायणाय आदि मंत्रों का जाप अवश्य करें। - सुबह सूर्योदय से पहले उठकर अपने स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेना चाहिए. पूजा करते समय साफ कपड़े पहनकर विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए। - पूर्व दिशा की तरफ एक पटरे पर पीला रेशमी कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो को स्थापित करेंं। - धूप-दीप जलाएं और कलश स्थापित करेंं। - भगवान विष्णु को अपने सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग आदि अर्पण करें और स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएंं। - अपने दाएं हाथ में जल लेकर घर मे धन धान्य की बरकत के लिए भगवान विष्णु के सामने संकल्प लेंं। - यदि सम्भव हो तो पूरा दिन निराहार रहकर शाम के समय कामिका एकादशी की व्रत कथा सुनें और फलाहार करेंं। - शाम के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाएंं। - अब दूसरे दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा दक्षिणा देकर उसके बाद स्वयं खाना खाना चाहिएं। ये महाउपाय करने से मिलेगा मनचाहा वरदान- ============================ - कामिका एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठे और स्नान करके हलके पीले रंग के कपड़े पहनें। - 5 सफेद जनेऊ को केसर से रंगे और 5 स्वच्छ पीले फल लेंं। - तुलसी की माला से पीले आसन पर बैठकर 'नमो भगवते वासुदेवायमंत्र का तीन माला का जाप करेंं। - जाप के बाद पांचों जनेऊ और पीले फल भगवान विष्णु के मंदिर में अर्पण कर दें और मन की इच्छा भगवान विष्णु के सामने जरूर कहेंं। - स्वयं प्रसाद के रूप में एक केला घर पर ले आएं और परिवार के सभी सदस्यों को देंं। कामिका एकादशी की कथा ********************** कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन, कृपा करके श्रावण कृष्ण एकादशी का महत्व क्या है, सो बताइए। श्रीकृष्ण भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका माहात्म्य क्या है, सो कृपा करके कहिए। नारदजी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! लोकों के हित के लिए तुमने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। श्रावण मास की कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख, चक्र, गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन होता है, जिनके नाम श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव, मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से मिलता है, वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, समुद्र, वन सहित पृथ्वी दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी प्राप्त नहीं होता वह भगवान विष्णु के पूजन से मिलता है। जो मनुष्य श्रावण में भगवान का पूजन करते हैं, उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अत: पापों से डरने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्यमेव करना चाहिए। पापरूपी कीचड़ में फँसे हुए और संसाररूपी समुद्र में डूबे मनुष्यों के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। हे नारद! स्वयं भगवान ने यही कहा है कि कामिका व्रत से जीव कुयोनि को प्राप्त नहीं होता। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी दल से। तुलसी दल पूजन का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएँ नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भू्रण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढऩे वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है। कामिका एकादशी : एक अन्य कथा ======================= प्राचीन काल में किसी गांव में एक ठाकुर जी थे। क्रोधी ठाकुर का एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर से ब्राह्मण का खून हो जाता है। अत: अपने अपराध की क्षमा याचना के लिए ब्राह्मण की क्रिया उसे करनी चाहिए परन्तु पंडितों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रह्म हत्या का दोषी बन गया। परिणामस्वरूप ब्राह्मणों ने भोजन करने से इनकार कर दिया। तब उन्होंने एक मुनि से निवेदन किया कि हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है। इस पर मुनि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने की प्रेरणा दी। ठाकुर ने वैसा ही किया जैसा मुनि ने उसे करने को कहा था, जब रात्रि में भगवान की मूर्ति के पास जब वह शयन कर रहा था तभी उसे स्वपन में प्रभु दर्शन देते हैं और उसके पापों को दूर करके उसे क्षमा दान देते हैं।1
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