श्मशान रिकॉर्ड में, अंतिम संस्कार दूसरी जगह... बारिश में तिरपाल के नीचे अंतिम विदाई को मजबूर ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम पंचायत खजूरना के उरना गांव में श्मशान घाट की सुविधा को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। गांव में वर्तमान में जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं, वहां टीनशेड, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बारिश के दौरान ग्रामीणों को तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत रिकॉर्ड में दर्ज पुराना श्मशान घाट गांव से दूर स्थित है। वहां पहुंचने के रास्ते में खाल होने और बारिश में एनिकट के कारण जलभराव होने से शव वाहन या अर्थी ले जाना मुश्किल हो जाता है। चारों ओर खेत होने से भी पहुंच बाधित रहती है। इसी कारण ग्रामीण पिछले करीब पांच वर्षों से गांव के पास स्थित दूसरी जगह पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ग्रामीण भरत गुर्जर ने बताया कि बरसात में पुराने श्मशान तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। मजबूरी में नई जगह का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन वहां किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं ग्राम विकास अधिकारी रितेश आचार्य ने बताया कि रिकॉर्ड में दर्ज पुराने श्मशान घाट पर पहले से चबूतरा और टीनशेड बने हुए हैं। ग्रामीण जिस नई जगह का उपयोग कर रहे हैं, वह चारागाह भूमि में आती है और राजस्व रिकॉर्ड में श्मशान घाट के रूप में दर्ज नहीं है। इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन आधिकारिक स्वीकृति नहीं मिलने से वहां सुविधाएं विकसित नहीं की जा सकीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्तमान में उपयोग हो रही जगह को आधिकारिक श्मशान घाट घोषित कर वहां टीनशेड, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और पहुंच मार्ग जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि लोगों को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार की सुविधा मिल सके।
श्मशान रिकॉर्ड में, अंतिम संस्कार दूसरी जगह... बारिश में तिरपाल के नीचे अंतिम विदाई को मजबूर ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम पंचायत खजूरना के उरना गांव में श्मशान घाट की सुविधा को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। गांव में वर्तमान में जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं, वहां टीनशेड, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बारिश के दौरान ग्रामीणों को तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत रिकॉर्ड में दर्ज पुराना श्मशान घाट गांव से दूर स्थित है। वहां पहुंचने के रास्ते में खाल होने और बारिश में एनिकट के कारण जलभराव होने से शव वाहन या अर्थी ले जाना मुश्किल हो जाता है। चारों ओर खेत होने से भी पहुंच बाधित रहती है। इसी कारण ग्रामीण पिछले करीब पांच वर्षों से गांव के पास स्थित दूसरी जगह पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ग्रामीण भरत गुर्जर ने बताया कि बरसात में पुराने श्मशान तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। मजबूरी में नई जगह का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन वहां किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं ग्राम विकास अधिकारी रितेश आचार्य ने बताया कि रिकॉर्ड में दर्ज पुराने श्मशान घाट पर पहले से चबूतरा और टीनशेड बने हुए हैं। ग्रामीण जिस नई जगह का उपयोग कर रहे हैं, वह चारागाह भूमि में आती है और राजस्व रिकॉर्ड में श्मशान घाट के रूप में दर्ज नहीं है। इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन आधिकारिक स्वीकृति नहीं मिलने से वहां सुविधाएं विकसित नहीं की जा सकीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्तमान में उपयोग हो रही जगह को आधिकारिक श्मशान घाट घोषित कर वहां टीनशेड, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और पहुंच मार्ग जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि लोगों को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार की सुविधा मिल सके।
- श्मशान रिकॉर्ड में, अंतिम संस्कार दूसरी जगह... बारिश में तिरपाल के नीचे अंतिम विदाई को मजबूर ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम पंचायत खजूरना के उरना गांव में श्मशान घाट की सुविधा को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। गांव में वर्तमान में जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं, वहां टीनशेड, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बारिश के दौरान ग्रामीणों को तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत रिकॉर्ड में दर्ज पुराना श्मशान घाट गांव से दूर स्थित है। वहां पहुंचने के रास्ते में खाल होने और बारिश में एनिकट के कारण जलभराव होने से शव वाहन या अर्थी ले जाना मुश्किल हो जाता है। चारों ओर खेत होने से भी पहुंच बाधित रहती है। इसी कारण ग्रामीण पिछले करीब पांच वर्षों से गांव के पास स्थित दूसरी जगह पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ग्रामीण भरत गुर्जर ने बताया कि बरसात में पुराने श्मशान तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। मजबूरी में नई जगह का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन वहां किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं ग्राम विकास अधिकारी रितेश आचार्य ने बताया कि रिकॉर्ड में दर्ज पुराने श्मशान घाट पर पहले से चबूतरा और टीनशेड बने हुए हैं। ग्रामीण जिस नई जगह का उपयोग कर रहे हैं, वह चारागाह भूमि में आती है और राजस्व रिकॉर्ड में श्मशान घाट के रूप में दर्ज नहीं है। इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन आधिकारिक स्वीकृति नहीं मिलने से वहां सुविधाएं विकसित नहीं की जा सकीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्तमान में उपयोग हो रही जगह को आधिकारिक श्मशान घाट घोषित कर वहां टीनशेड, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और पहुंच मार्ग जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि लोगों को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार की सुविधा मिल सके।1
- खानपुर में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी, प्रशासन से वार्ता बेनतीजा खरीफ-2025 की बकाया बीमा क्लेम राशि, आपदा राहत मुआवजा और गेहूं तुलाई के भुगतान की मांग को लेकर उपखंड कार्यालय के बाहर चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। मूसलाधार बारिश भी किसानों के हौसलों को नहीं डिगा पाई और वे रातभर धरना स्थल पर डटे रहे। इस दौरान उपखंड अधिकारी और तहसीलदार ने किसानों से वार्ता की, लेकिन कोई सहमति न बनने के कारण चर्चा बेनतीजा रही। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक बकाया राशि सीधे खातों में नहीं आएगी, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा और मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।1
- कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग में कोटा की अरुंधती चौधरी ने जीता स्वर्ण, इंग्लैंड की मुक्केबाज को 5-0 से हराया कोटा। ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में आयोजित कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कोटा की मुक्केबाज अरुंधती चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड की बॉक्सर चेटल रेड को एकतरफा 5-0 से हराकर भारत का तिरंगा विदेशी धरती पर लहराया। अरुंधती महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी, कोटा की खिलाड़ी हैं। उनके कोच अशोक गौतम ने बताया कि यह सीनियर वर्ग में अरुंधती का लगातार छठा अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्वर्ण पदक है। इससे पहले वह फेडरेशन कप, वर्ल्ड कप, नेशनल चैंपियनशिप, बॉक्सो कप और एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वर्तमान में भारतीय सेना में कार्यरत अरुंधती के लिए इस उपलब्धि के बाद राजस्थान सरकार की आउट ऑफ टर्न नियुक्ति नीति के तहत पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) बनने का अवसर भी खुल गया है। राज्य सरकार की नीति के अनुसार कॉमनवेल्थ या एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को डीएसपी पद पर नियुक्ति का अवसर दिया जाता है। साथ ही स्वर्ण पदक विजेता को एक करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 60 लाख रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। कोच अशोक गौतम ने बताया कि अरुंधती आगामी एशियन गेम्स में भी भाग लेना चाहती हैं, लेकिन 70 किलोग्राम भार वर्ग शामिल नहीं होने के कारण उन्हें अवसर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दूसरे भार वर्ग में खेलने की इच्छा जताई है, जिस पर अंतिम निर्णय बॉक्सिंग फेडरेशन द्वारा लिया जाएगा। अरुंधती की इस उपलब्धि पर महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी, कोटा बॉक्सिंग संघ तथा खेल जगत से जुड़े अनेक पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उनके पिता सुरेश चौधरी, माता सुनीता चौधरी, बहन डॉ. चारुलता चौधरी और भाई शिवाजी आनंद चौधरी ने भी उनकी सफलता पर खुशी जताई।2
- झालावाड़: AR नगर से रेस्क्यू कर हल्दीघाटी गौशाला में सुरक्षित छोड़ी गौमाता, गौसेवकों ने किया रेस्क्यू झालावाड़। जिले में आवारा और घायल गौवंश की सेवा के लिए एक बार फिर गौसेवकों ने मिसाल पेश की। AR नगर क्षेत्र में सड़क पर घायल अवस्था में भटक रही एक गाय को रेस्क्यू कर हल्दीघाटी गौशाला में सुरक्षित छोड़ा गया। स्थानीय लोगों ने AR नगर में घायल गौवंश को देखा और तुरंत गौसेवकों को सूचना दी। सूचना मिलते ही गौसेवकों की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने गौमाता को रेस्क्यू कर एंबुलेंस की मदद से हल्दीघाटी गौशाला पहुंचाया।1
- माँ जोगणियाँ भाग -22.......A Novel of Arawali ki lokdevi MAA JOGANIA 🙏.1
- कोटा शहर की किशोरपुरा थाना पुलिस ने सिंधी कॉलोनी में 56 वर्षीय महिला से कुंडल छीनने की वारदात का खुलासा करते हुए आरोपी महेंद्र उर्फ अनिल सरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि 3 अगस्त को महिला से झपट्टा मारकर कुंडल लूटे गए थे। महिला सुरक्षा संकल्प कार्यक्रम के तहत गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की पहचान कर उसे वारदात में प्रयुक्त बाइक सहित दबोच लिया। आरोपी से पूछताछ जारी है और लूटे गए कुंडलों की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी नयापुरा थाने में लूट का मामला दर्ज है। कोटा शहर की किशोरपुरा थाना पुलिस ने सिंधी कॉलोनी में 56 वर्षीय महिला से कुंडल छीनने की वारदात का खुलासा करते हुए आरोपी महेंद्र उर्फ अनिल सरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि 3 अगस्त को महिला से झपट्टा मारकर कुंडल लूटे गए थे। महिला सुरक्षा संकल्प कार्यक्रम के तहत गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की पहचान कर उसे वारदात में प्रयुक्त बाइक सहित दबोच लिया। आरोपी से पूछताछ जारी है और लूटे गए कुंडलों की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी नयापुरा थाने में लूट का मामला दर्ज है।1
- योजनाएं बनाने से पूर्व तय करें प्राथमिकताएं, प्रशासन से समन्वय रखते हुए दें अंतिम रूप- जिला कलक्टर ‘‘आरयूआईडीपी संवाद’’ कार्यक्रम में रखे महत्वपूर्ण सुझाव कोटा, 5 अगस्त। आरयूआईडीपी परियोजना की योजना निर्माण प्रक्रिया में प्रभावी जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला कलक्टर श्री पीयूष समारिया की अध्यक्षता में बुधवार को हितधारक परामर्श कार्यशाला ‘‘आरयूआईडीपी संवाद’’ का आयोजन कलेेक्ट्रेट सभागार में किया गया। संवाद कार्यक्रम में पांचवे चरण के तहत कोटा शहर एवं जिले के अन्य शहरों में होने वाले कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। जिला कलक्टर ने कोटा में प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि ऐसे कार्य प्राथमिकता से हाथ में लिए जाएं जो पूर्व की परियोजनाओं में नहीं हो सके। जिन क्षेत्रों में गैप बना हुआ है उन्हें पूरा किया जाए। कार्यों का निर्धारण जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ पूर्ण समन्वय रखते हुए किया जाए। उन्होंने चंबल नदी में गिरने वाले गंदे नालों की समस्या का हल प्रस्तावित परियोजना में पुख्ता तरीके से करने की बात कही। उन्होंने कहा कि गंदे नालों के पानी को उपचारित करके नदी में छोड़ने अथवा अन्य विकल्पों का अध्ययन कर कार्य योजना बनाई जाए। अर्बन मोबिलिटी के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शेल्टर बनाए जाएं। पर्यटन विकास के अंतर्गत प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के रखरखाव एवं विकास संबंधी कार्यों को सुनियोजित तरीके से करने की योजना बनाई जाए। बाढ़ नियंत्रण, ड्रेनेज, वेस्टवाटर तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इत्यादि के लिए भी क्षेत्र की आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुरूप सुविचारित तरीके से प्लान तैयार किया जाए। इसके लिए डीपीआर बनने से पूर्व ही जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय रखा जाए। नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा एवं निगम के अन्य अधिकारियों ने पूर्व की परियोजनाओं से वंचित रहे क्षेत्र एवं पूर्व के कार्यों की स्थिति की जानकारी देते हुए महत्वपूर्ण सुझाव रखे। राजस्थान पत्रिका से मुकेश शर्मा, दैनिक नवज्योति से राजकुमार शर्मा, स्वतंत्र पत्रकार एवं चंबल संसद के संयोजक बृजेश विजयवर्गीय ने भी महत्वपूर्ण सुझाव रखे। नगर निगम आयुक्त मेहरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इवेलुएशन एक्सपर्ट के के शर्मा ने कार्यक्रम के रूपरेखा प्रस्तुत की एवं अतिथियों का स्वागत किया। कार्यशाला में पुलिस,केडीए,पीएचईडी, पीडब्ल्यूडी एवं अन्य विभागों, संबंधित संगठनों एवं हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। _पांचवें चरण में कोटा में होंगे 945.45 करोड़ के कार्य_ आर यू आईडीपी के पांचवें चरण में कोटा जिले में 945.45 करोड़ की लागत के कार्य प्रस्तावित हैं जिनमें से अकेले कोटा शहर में 927.27 करोड़ लागत के कार्य कराए जाएंगे। कोटा शहर के अलावा सांगोद, रामगंज मंडी व कैथून को भी पांचवें चरण में शामिल किया गया है। आर यू आईडीपी के सहायक अभियंता कुश कुमार ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि वेस्टवाटर मैनेजमेंट कार्य 394.15 करोड की लागत से किए जाएंगे। फ्लड मैनेजमेंट अंतर्गत 57.55 करोड़ के कार्य प्रस्तावित हैं जिनमें कोटा शहर में 53.40,सांगोद में 0.97,रामगंज मंडी में 2.06 तथा कैथून में 1.12 करोड़ के कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। कमांड एंड कंट्रोलिंग सेंटर, हेरिटेज एवं टूरिज्म क्षेत्र में कोटा में 74.79, सांगोद में 1.36, रामगंजमंडी में 2.89 तथा कैथून में 1.56 करोड लागत के कार्य किए जाएंगे। अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में कोटा में 299. 17 तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत कोटा में 105.76, सांगोद में 1.92, रामगंज मंडी में 4.09 तथा कैथून में 2.21 करोड़ की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। _*प्रदेश के 84 शहरों का होगा विकास*_ राज्य सरकार प्रदेश के 84 शहरों में पांचवें चरण के कार्य जल्द ही शुरु करने की तैयारी कर रही है। इन शहरों को 9500 करोड़ रुपए की लागत से स्मार्ट व सस्टेनेबल बनाया जायेगा। पांचवे चरण में अपषिष्ट जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी यातायात सुधार, बाढ़ प्रबंधन/जल निकासी कार्य, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन, कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेंटर आदि क्षेत्रों में शहरों का विकास किया जायेगा। -3
- झालावाड़ एवं झालरापाटन में 85.48 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजनाओं पर हुआ ‘आरयूआईडीपी संवाद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं हितधारकों से लिए गए सुझाव, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर दिया गया जोर। झालावाड़,राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के पंचम चरण के अंतर्गत झालावाड़ शहर में लगभग 79.97 करोड़ रुपये तथा झालरापाटन शहर में लगभग 5.51 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित कुल 85.48 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के संबंध में जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में मिनी सचिवालय के सभागार में ‘आरयूआईडीपी संवाद’ का आयोजन किया गया। जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, प्रबुद्धजनों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों ने भाग लिया। संवाद के दौरान पंचम चरण में प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की गई तथा प्रतिभागियों से सुझाव एवं फीडबैक प्राप्त किए गए। एशियाई विकास बैंक के वित्तपोषण से झालावाड़ एवं झालरापाटन शहरों में अपशिष्ट जल प्रबंधन (सीवरेज) से संबंधित कार्य कराए जाएंगे। इस परियोजना पर लगभग 85.48 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। परियोजना का उद्देश्य दोनों शहरों में आधुनिक एवं सुव्यवस्थित सीवरेज व्यवस्था विकसित कर नागरिकों को बेहतर शहरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान आमजन को न्यूनतम असुविधा हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही झालावाड़ एवं झालरापाटन में सीवरेज कार्यों का गुणवत्तापूर्ण एवं व्यवस्थित निष्पादन किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि शहरी विकास परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए आरयूआईडीपी, स्थानीय निकायों एवं संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय निकायों के सहयोग को परियोजना की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा व नगर परिषद् के पूर्व सभापति प्रदीप सिंह राजावत सहित जनप्रतिनिधियों ने सीवरेज परियोजना को झालावाड़ एवं झालरापाटन शहरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं जनहितकारी बताते हुए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। नगर परिषद, जनप्रतिनिधियों एवं शहरवासियों की ओर से परियोजना के सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।आरयूआईडीपी, नगर परिषद एवं संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय से परियोजना का लाभ शीघ्र ही आमजन तक पहुंचेगा। जनप्रतिनिधियों ने वार्ड स्तर पर नागरिकों को योजना की जानकारी देने एवं जनसहभागिता सुनिश्चित करने की अपील भी की।4