सीधी जिले के मड़वास थाना क्षेत्र के भदौरा गांव में तिवारी और सेन परिवारों के बीच हुई मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। यह विवाद कथित तौर पर शासकीय भूमि और सार्वजनिक हैंडपंप पर अतिक्रमण को लेकर शुरू हुआ था, जिसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। मामले की गंभीरता को देखते हुए, कुसमी एसडीएम शैलेश द्विवेदी और मड़वास थाना प्रभारी अतर सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान सरपंच पुत्र रमेश पुनाड़िया और उपसरपंच कैलाश प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद थे। एसडीएम ने मौके का निरीक्षण कर दोनों पक्षों से चर्चा की और विवादित स्थल का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित पक्षों को सार्वजनिक हैंडपंप को अतिक्रमण से मुक्त कराने और भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न करने की हिदायत दी, साथ ही गांव में शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। थाना प्रभारी अतर सिंह ने बताया कि मारपीट की घटना के संबंध में मड़वास थाने में एक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है, और दोनों पक्षों को कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा अप्रिय स्थिति से बचने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि और सार्वजनिक सुविधाओं पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और यदि दोबारा विवाद की स्थिति बनी तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने भी प्रशासन के समक्ष आपसी सौहार्द बनाए रखने और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। प्रशासन की समझाइश के बाद गांव में स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
सीधी जिले के मड़वास थाना क्षेत्र के भदौरा गांव में तिवारी और सेन परिवारों के बीच हुई मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। यह विवाद कथित तौर पर शासकीय भूमि और सार्वजनिक हैंडपंप पर अतिक्रमण को लेकर शुरू हुआ था, जिसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। मामले की गंभीरता को देखते हुए, कुसमी एसडीएम शैलेश द्विवेदी और मड़वास थाना प्रभारी अतर सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान सरपंच पुत्र रमेश पुनाड़िया और उपसरपंच कैलाश प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद थे। एसडीएम ने मौके का निरीक्षण कर दोनों पक्षों से चर्चा की और विवादित स्थल का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित पक्षों को सार्वजनिक हैंडपंप को अतिक्रमण से मुक्त कराने और भविष्य में किसी
भी प्रकार का विवाद न करने की हिदायत दी, साथ ही गांव में शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। थाना प्रभारी अतर सिंह ने बताया कि मारपीट की घटना के संबंध में मड़वास थाने में एक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है, और दोनों पक्षों को कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा अप्रिय स्थिति से बचने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि और सार्वजनिक सुविधाओं पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और यदि दोबारा विवाद की स्थिति बनी तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने भी प्रशासन के समक्ष आपसी सौहार्द बनाए रखने और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। प्रशासन की समझाइश के बाद गांव में स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
- बिहार के भोजपुर जिले में युवा समाजसेवी और क्रांतिकारी कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई संदिग्ध मौत के बाद देश भर में न्याय की मांग को लेकर भारी आक्रोश फैल गया है। परिजनों और स्थानीय लोगों द्वारा इसे 'फर्जी एनकाउंटर' करार दिए जाने के बाद बिहार सहित मध्य प्रदेश के रीवा जिले और पड़ोसी राज्यों में लगातार विरोध प्रदर्शन, कैंडल मार्च और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में सोमवार को मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक विशाल विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च निकाला गया, जो स्थानीय विवेकानंद पार्क से शुरू होकर शिल्पी प्लाजा होते हुए अग्रसेन चौक तक पहुंचा। इस दौरान आक्रोशित युवाओं ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर "भारत भूषण तिवारी अमर रहे" और "न्याय दो न्याय दो" के गगनभेदी नारे लगाए। इस मौके पर समाजसेवी सुधीर पांडेय, सतीश चौबे, मोहित चौबे और अन्य गणमान्य लोगों ने बिहार पुलिस की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। सभा को संबोधित करते हुए सुधीर पांडेय और सतीश चौबे ने कहा कि भरत भूषण तिवारी कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे जो लगातार दबे-कुचलों की लड़ाई लड़ रहे थे और प्रशासन को उसकी सोई हुई जिम्मेदारियों के प्रति जगाने का काम कर रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि उत्तेजना या आवेश में आकर भरत भूषण तिवारी ने पिस्टल जरूर उठा ली थी, लेकिन उन्होंने किसी को भी जान-माल की हानि नहीं पहुंचाई थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जब भरत तिवारी ने पुलिस के समक्ष पूर्णतः आत्मसमर्पण कर दिया था, तब पुलिस को उन पर गोली चलाने का कोई विधिक या नैतिक अधिकार नहीं था। निहत्थे और आत्मसमर्पण कर चुके व्यक्ति पर गोली चलाना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन और 'फर्जी एनकाउंटर' की श्रेणी में आता है। श्रद्धांजलि सभा के अंत में समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने बिहार सरकार और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, इस कथित 'फर्जी एनकाउंटर' में शामिल दोषी पुलिस अधिकारियों व हत्यारों पर तत्काल हत्या का मुकदमा दर्ज कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय व मुआवजा प्रदान करने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि समय रहते क्रांतिकारी भरत तिवारी के हत्यारों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो इस न्याय की लड़ाई को और उग्र किया जाएगा तथा इसके विरोध में संपूर्ण भारत बंद का आवाहन करने के लिए देशव्यापी रणनीति तैयार की जाएगी। इस कैंडल मार्च में सुधीर पांडे, सतीश चौबे, मोहित चौबे सहित सैकड़ों समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में मृत आत्मा की शांति की प्रार्थना की और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।2
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं लखनऊ में घटनास्थल पर पहुंचे।1
- लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड हादसे में दिवंगत हुए जयनिल का शव उनके पैतृक घर भालूमाड़ा पहुंच गया है। इस दुखद अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे और सभी ने नम आंखों से जयनिल को अंतिम विदाई दी।1
- आज अहमदाबाद से मिली ताजा खबर के अनुसार, शहर में एक डिवाइडर आम लोगों के लिए खतरे का सबब बन गया है। यह डिवाइडर जनता के लिए परेशानी और जोखिम बढ़ा रहा है। रिपोर्टिंग के लिए संपर्क नंबर 9424257566 दिया गया है।1
- वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक ऐसी स्थिति सामने आई जहाँ आठ रिक्त पदों के लिए मात्र एक ही अभ्यर्थी उपस्थित हुई। इस एकमात्र उम्मीदवार का वनरक्षक के पद पर चयन कर लिया गया है।1
- कोरिया कलेक्टर ने हाल ही में एक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया, बल्कि स्वयं बच्चों को पढ़ाकर उनकी पढ़ाई का स्तर भी परखा।1
- एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची। इस सनसनीखेज वारदात के खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में कोहराम फैल गया है, जिससे लोग सदमे और आक्रोश में हैं।1
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।4
- लखनऊ में हुए अग्निकांड से संबंधित एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में घटना से जुड़ी कुछ जानकारी होने की संभावना है।1