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भोपाल के रवींद्र भवन में 10 जुलाई को आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों को शिक्षा के पावन मंदिर का पुजारी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस दिशा में एक समिति का गठन भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य का मॉडल लागू करने का प्रस्ताव मांगा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब काम को अटकाने या लटकाने का समय बीत चुका है और सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नवाचार, संवेदना और नैतिक मूल्यों के साथ मजबूत करने पर है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के लिए किए गए निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश, प्रसूति अवकाश और वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन की सुविधा शामिल है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में 117 और 2024 में 48 अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की जा चुकी है, साथ ही लोक सेवा आयोग की भर्ती में 25 प्रतिशत पद आरक्षित करते हुए 10 वर्ष की छूट दी गई है। डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार आगे बढ़ रही है और नक्सलियों के सफाए के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में 2029 तक देश-प्रदेश को नशा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए पांच कल्याणकारी निर्णय लिए हैं। इनमें फॉल-आउट होने पर हर महीने दोबारा काम करने के दो अवसर और उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के अध्ययन के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन प्रमुख हैं। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।

7 hrs ago
user_खमोद चंदेल
खमोद चंदेल
डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago

भोपाल के रवींद्र भवन में 10 जुलाई को आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों को शिक्षा के पावन मंदिर का पुजारी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस दिशा में एक समिति का गठन भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य का मॉडल लागू करने का प्रस्ताव मांगा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब काम को अटकाने या लटकाने का समय बीत चुका है और सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नवाचार, संवेदना और नैतिक मूल्यों के साथ मजबूत करने पर है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के लिए किए गए निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश, प्रसूति अवकाश और वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन की सुविधा शामिल है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में 117 और 2024 में 48 अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की जा चुकी है, साथ ही लोक सेवा आयोग की भर्ती में 25 प्रतिशत पद आरक्षित करते हुए 10 वर्ष की छूट दी गई है। डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार आगे बढ़ रही है और नक्सलियों के सफाए के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में 2029 तक देश-प्रदेश को नशा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए पांच कल्याणकारी निर्णय लिए हैं। इनमें फॉल-आउट होने पर हर महीने दोबारा काम करने के दो अवसर और उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के अध्ययन के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन प्रमुख हैं। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।

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  • भोपाल के रवींद्र भवन में 10 जुलाई को आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों को शिक्षा के पावन मंदिर का पुजारी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस दिशा में एक समिति का गठन भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य का मॉडल लागू करने का प्रस्ताव मांगा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब काम को अटकाने या लटकाने का समय बीत चुका है और सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नवाचार, संवेदना और नैतिक मूल्यों के साथ मजबूत करने पर है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के लिए किए गए निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश, प्रसूति अवकाश और वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन की सुविधा शामिल है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में 117 और 2024 में 48 अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की जा चुकी है, साथ ही लोक सेवा आयोग की भर्ती में 25 प्रतिशत पद आरक्षित करते हुए 10 वर्ष की छूट दी गई है। डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार आगे बढ़ रही है और नक्सलियों के सफाए के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में 2029 तक देश-प्रदेश को नशा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए पांच कल्याणकारी निर्णय लिए हैं। इनमें फॉल-आउट होने पर हर महीने दोबारा काम करने के दो अवसर और उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के अध्ययन के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन प्रमुख हैं। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।
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    भोपाल के रवींद्र भवन में 10 जुलाई को आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों को शिक्षा के पावन मंदिर का पुजारी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस दिशा में एक समिति का गठन भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य का मॉडल लागू करने का प्रस्ताव मांगा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब काम को अटकाने या लटकाने का समय बीत चुका है और सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नवाचार, संवेदना और नैतिक मूल्यों के साथ मजबूत करने पर है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के लिए किए गए निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश, प्रसूति अवकाश और वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन की सुविधा शामिल है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में 117 और 2024 में 48 अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की जा चुकी है, साथ ही लोक सेवा आयोग की भर्ती में 25 प्रतिशत पद आरक्षित करते हुए 10 वर्ष की छूट दी गई है। डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार आगे बढ़ रही है और नक्सलियों के सफाए के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में 2029 तक देश-प्रदेश को नशा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए पांच कल्याणकारी निर्णय लिए हैं। इनमें फॉल-आउट होने पर हर महीने दोबारा काम करने के दो अवसर और उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के अध्ययन के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन प्रमुख हैं। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।
    user_खमोद चंदेल
    खमोद चंदेल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • डिंडोरी जिले के बजाग में साइबर ठगी की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साइबर अपराधों से बचाव के लिए नागरिकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ मोबाइल कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस, क्यूआर कोड लिंक और ओटीपी जैसी बैंक से संबंधित कोई भी गोपनीय जानकारी साझा न करें। इस सुरक्षा संदेश का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोटवारों की मदद ली जा रही है। गाँव-गाँव जाकर कोटवारों के माध्यम से लोगों को साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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    डिंडोरी जिले के बजाग में साइबर ठगी की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साइबर अपराधों से बचाव के लिए नागरिकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ मोबाइल कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस, क्यूआर कोड लिंक और ओटीपी जैसी बैंक से संबंधित कोई भी गोपनीय जानकारी साझा न करें।

इस सुरक्षा संदेश का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोटवारों की मदद ली जा रही है। गाँव-गाँव जाकर कोटवारों के माध्यम से लोगों को साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
    user_राजेश कुमार मरावी
    राजेश कुमार मरावी
    Voice of people बजाग, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • उमरिया जिले की मानपुर जनपद पंचायत के ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल का अभाव बारिश के मौसम में एक बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का संपर्क टूट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इस स्थिति से सबसे अधिक जूझना छात्र-छात्राओं को पड़ रहा है, जो पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। सामान्य दिनों में विद्यालय की दूरी 4 से 5 किलोमीटर है, लेकिन बरसात में नदी उफान पर होने के कारण उन्हें अमरपुर होकर 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और कई बार स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध के कारण जलभराव की समस्या और बढ़ गई है, जिससे न केवल आवागमन प्रभावित है बल्कि किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी हो रहा है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि वे वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) या अन्य योजनाओं के माध्यम से पुल निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में अपनी पढ़ाई और पुल की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई तो की, लेकिन पुल के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से बरसात के दौरान मौके का निरीक्षण करने और पुल निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे क्षेत्रीय नागरिकों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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    उमरिया जिले की मानपुर जनपद पंचायत के ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल का अभाव बारिश के मौसम में एक बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का संपर्क टूट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।

इस स्थिति से सबसे अधिक जूझना छात्र-छात्राओं को पड़ रहा है, जो पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। सामान्य दिनों में विद्यालय की दूरी 4 से 5 किलोमीटर है, लेकिन बरसात में नदी उफान पर होने के कारण उन्हें अमरपुर होकर 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और कई बार स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध के कारण जलभराव की समस्या और बढ़ गई है, जिससे न केवल आवागमन प्रभावित है बल्कि किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी हो रहा है।

ग्रामीणों ने शिकायत की है कि वे वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) या अन्य योजनाओं के माध्यम से पुल निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में अपनी पढ़ाई और पुल की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई तो की, लेकिन पुल के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से बरसात के दौरान मौके का निरीक्षण करने और पुल निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे क्षेत्रीय नागरिकों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
    user_सतीश पांडे मध्य प्रदेश
    सतीश पांडे मध्य प्रदेश
    Newspaper publisher पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • शहडोल जिले के सोहागपुर में सरपंच संघ ने जिला पंचायत सीईओ पर अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस व्यवहार से नाराज सरपंच संघ ने अब सख्त रुख अपनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
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    शहडोल जिले के सोहागपुर में सरपंच संघ ने जिला पंचायत सीईओ पर अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस व्यवहार से नाराज सरपंच संघ ने अब सख्त रुख अपनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
    user_अजय कुमार केवट
    अजय कुमार केवट
    Photographer सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • शहडोल जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 26 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की पुरजोर मांग उठाई। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर बार-बार एक ही काम कराए जाने से बढ़ रहे अतिरिक्त बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के चलते समय पर जानकारी अपलोड न हो पाने के कारण मानदेय में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के आदेश को वापस लेने और आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी के रूप में विकसित करने की बात कही है। अपनी मांगों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी, परिवहन व्यय, पक्का भवन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने बीएलओ सहित अन्य विभागीय कार्यों से मुक्त किए जाने की भी मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
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    शहडोल जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 26 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की पुरजोर मांग उठाई।

ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर बार-बार एक ही काम कराए जाने से बढ़ रहे अतिरिक्त बोझ पर नाराजगी जताई। उन्होंने नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं के चलते समय पर जानकारी अपलोड न हो पाने के कारण मानदेय में की जा रही कटौती का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के आदेश को वापस लेने और आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी के रूप में विकसित करने की बात कही है।

अपनी मांगों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में वृद्धि, ग्रेच्युटी, परिवहन व्यय, पक्का भवन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने बीएलओ सहित अन्य विभागीय कार्यों से मुक्त किए जाने की भी मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
    user_सुधीर यादव
    सुधीर यादव
    Local News Reporter सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत के सब-इंजीनियर सतीश समेले ने एक नया जनजागरण अभियान शुरू किया है। सतीश समेले वही अधिकारी हैं जो कुछ समय पहले सड़क निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चर्चा में आए थे, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। अब अपने इस अभियान के जरिए वे लोगों को सरकारी कामों में होने वाली कमीशनखोरी के बारे में खुलकर बता रहे हैं। वे चिल्ला-चिल्लाकर काम कराने वाले लोगों को कमीशन की पूरी 'रेट लिस्ट' समझा रहे हैं, जिसके अनुसार सरपंच का 10%, सचिव का 5%, रोजगार सहायक का 3%, सब-इंजीनियर का 5%, सहायक अभियंता का 2% और सीईओ का 2-3% हिस्सा निर्धारित है।
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    मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत के सब-इंजीनियर सतीश समेले ने एक नया जनजागरण अभियान शुरू किया है। सतीश समेले वही अधिकारी हैं जो कुछ समय पहले सड़क निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चर्चा में आए थे, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।

अब अपने इस अभियान के जरिए वे लोगों को सरकारी कामों में होने वाली कमीशनखोरी के बारे में खुलकर बता रहे हैं। वे चिल्ला-चिल्लाकर काम कराने वाले लोगों को कमीशन की पूरी 'रेट लिस्ट' समझा रहे हैं, जिसके अनुसार सरपंच का 10%, सचिव का 5%, रोजगार सहायक का 3%, सब-इंजीनियर का 5%, सहायक अभियंता का 2% और सीईओ का 2-3% हिस्सा निर्धारित है।
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Insurance Agent सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • शहडोल जिले में जनपद पंचायत सोहागपुर की ग्राम पंचायत बोडरी की आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई के साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने का मामला सामने आया है। सरपंच का आरोप है कि उनकी पंचायत में पिछले चार माह से सचिव का पद रिक्त होने के कारण विकास कार्य और ग्रामीणों के काम ठप पड़े हैं, इसी समस्या को लेकर वह 6 जुलाई को जिला पंचायत सीईओ से मिलने गई थीं। सरपंच संघ का कहना है कि सीईओ ने उनकी समस्या सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया। इस घटना के विरोध में जिला सरपंच संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित सीईओ के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सीईओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला पंचायत कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और जिलेभर के सरपंच अपने आंदोलन को तेज करेंगे।
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    शहडोल जिले में जनपद पंचायत सोहागपुर की ग्राम पंचायत बोडरी की आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई के साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने का मामला सामने आया है। सरपंच का आरोप है कि उनकी पंचायत में पिछले चार माह से सचिव का पद रिक्त होने के कारण विकास कार्य और ग्रामीणों के काम ठप पड़े हैं, इसी समस्या को लेकर वह 6 जुलाई को जिला पंचायत सीईओ से मिलने गई थीं।

सरपंच संघ का कहना है कि सीईओ ने उनकी समस्या सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया। इस घटना के विरोध में जिला सरपंच संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित सीईओ के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सीईओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला पंचायत कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और जिलेभर के सरपंच अपने आंदोलन को तेज करेंगे।
    user_सुधीर यादव
    सुधीर यादव
    Local News Reporter सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • डिंडोरी जिले के मालपुर क्षेत्र में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक तेज रफ्तार बस और ऑटो की आमने-सामने जबरदस्त भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय ऑटो में करीब 10 यात्री सवार थे, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में मालपुर निवासी बजरंग मरावी का पैर टूट गया है, जबकि कलगी टोला निवासी एक अन्य व्यक्ति के पैर में भी गंभीर चोट आई है। स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा पहुँचाया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है। अन्य यात्री इस घटना में बाल-बाल बच गए। सूचना मिलने पर पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार या लापरवाही को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
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    डिंडोरी जिले के मालपुर क्षेत्र में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक तेज रफ्तार बस और ऑटो की आमने-सामने जबरदस्त भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय ऑटो में करीब 10 यात्री सवार थे, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

इस हादसे में मालपुर निवासी बजरंग मरावी का पैर टूट गया है, जबकि कलगी टोला निवासी एक अन्य व्यक्ति के पैर में भी गंभीर चोट आई है। स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा पहुँचाया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है। अन्य यात्री इस घटना में बाल-बाल बच गए।

सूचना मिलने पर पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार या लापरवाही को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
    user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
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