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झालावाड़ में अंजुमन तरक्की उर्दू झालावाड़ राजस्थान का भव्य स्थापना समारोह सम्पन्न झालावाड़ में अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू राजस्थान की ब्रांच अंजुमन तरक्की उर्दू, झालावाड़ (राजस्थान) के स्थापना समारोह (इफ्तेताही तकरीब) का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें पहले सत्र में उद्घाटन समारोह तथा दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रकाश चंद यौवन (मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झालरापाटन) रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर हमीद अहमद ( भूगोल विभाग अध्यक्ष राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, झालावाड़), प्रोफेसर इकबाल फातिमा (इतिहास विभाग अध्यक्ष ) एवं सुरेश चंद्र निगम (अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झालावाड़) उपस्थित रहे। अतिथियों के स्वागत उपरांत, अंजुमन के अध्यक्ष डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी ने तारुफ़ी कलमात पेश करते हुए झालावाड़ रियासत में उर्दू शेर-ओ-अदब की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने महाराजा भवानी सिंह जी एवं राव राजेंद्र सिंह जी के उर्दू साहित्य के विकास में योगदान की सराहना की। साथ ही, उन्होंने रियासत काल एवं स्वतंत्रता के बाद सक्रिय रही ऐतिहासिक अंजुमनों—अंजुमन अदब, बज़्म-ए-निरंग, बज़्म-ए-शफ़ीक आदि—का उल्लेख करते हुए उनकी साहित्यिक सेवाओं को याद किया। डॉ. टोंकी ने अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू (हिंद) राजस्थान के इतिहास, उद्देश्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए झालावाड़ शाखा की स्थापना की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने संस्था के भावी कार्यक्रमों एवं कार्ययोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात अंजुमन की कार्यकारिणी की घोषणा की गई और सभी पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। प्रमुख पदाधिकारियों में सरपरस्त राकेश कुमार नायर, मुशीर-ए-आला प्रो. हमीद अहमद एवं सैयद जुबेर अली, मुशीर-ए-खास सुरेश चंद्र निगम, सदर डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी, सेक्रेटरी यूनुस खान, जॉइंट सेक्रेटरी अरमान खान, कन्वीनर कवयित्री असमा खान ‘बहार’, मीडिया एवं तर्जुमा प्रभारी आसिफ शेरवानी, एडवोकेट तनवीर, खाजिन अब्दुल गनी एवं दानिश अहमद ‘दानिश’ शामिल रहे। मुशायरा एवं कवि सम्मेलन: दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अजीम बेग अजीम ने की। मंच पर राकेश कुमार नेयर एवं प्रकाश चंद यौवन भी विराजमान रहे। कार्यक्रम की निज़ामत शायर दानिश अहमद ‘दानिश’ ने बखूबी निभाई। मुशायरे में नौजवान शायर अयान खान ने अपने अशआर से समां बांधा: नमाज़-ए-इश्क पढ़ेंगे तेरी गली के अंदर, वुज़ू करेंगे हम अपनी चश्म-ए-तर के अंदर। कवि तुलसीराम ‘तुलसी’ ने प्रेम और संवेदना पर आधारित पंक्तियां प्रस्तुत कीं: आप ही ने तो सिखाया प्यार करना भी हमें, आप तो यूँ बेवफ़ाई की न बातें कीजिए। कवि देवेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए कहा: एक सुबह की सैर में मुझको हर इंसान मिला, कोई हिंदू मिला तो कोई मुसलमान मिला, मैंने उनसे की राम-राम, सलाम—यूँ मुझको एकता में महका हुआ हिंदुस्तान मिला। कवि चेतन शर्मा जी ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी पंक्ति रही - बंदीशे जब से लगी है वफाएं भूल गए हैं। कवि धनीराम समर्थ ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी महत्वपूर्ण पंक्तियां रही- हम जलायेंगे तब, दीप जल पायेगा। बाग सींचेंगे तब, फूल खिल पायेगा।। एवं अन्य कवियों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। वरिष्ठ शायर अजीम बेग ‘अजीम’ ने अपनी ग़ज़ल से खूब वाहवाही लूटी: उनकी उल्फत में मोहब्बत में यह हालत हो जाए, आँख जब बंद करूँ उनकी ज़ियारत हो जाए। शायरा आफरीन खान ने भी अपने कलाम से श्रोताओं को प्रभावित किया: क्या हुई ख़ता, क्यों ख़फा-ख़फा से लगते हो, क्या करोगे वफ़ा, तुम बेवफ़ा से लगते हो। कवि राकेश कुमार नेयर ने अपने विचारों का प्रभावी इज़हार किया: यारों यह बस बतलाने वाली बात नहीं है, मेरा यह साया भी मेरे साथ नहीं है। कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर दार अल-अर्कम के डायरेक्टर श्रीमान सैयद जुबेर अली ने अतिथियों एवं पधारे हुए कवियों, शायरों और बुद्धिजीवियों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम में हबीब खान, जावेद खान, वजाहत अली, जगदीश सोनी, अनीस अहमद, रशीद मियां, तौकीर आलम, सादिक भाई, रेखा सक्सेना सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहेॆॆ। यह स्थापना समारोह न केवल उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि हिंदी-उर्दू की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहज़ीब को भी मजबूती प्रदान करने वाला यादगार आयोजन रहा।

3 hrs ago
user_HARI MOHAN CHUDAWAT
HARI MOHAN CHUDAWAT
Local News Reporter झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
3 hrs ago

झालावाड़ में अंजुमन तरक्की उर्दू झालावाड़ राजस्थान का भव्य स्थापना समारोह सम्पन्न झालावाड़ में अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू राजस्थान की ब्रांच अंजुमन तरक्की उर्दू, झालावाड़ (राजस्थान) के स्थापना समारोह (इफ्तेताही तकरीब) का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें पहले सत्र में उद्घाटन समारोह तथा दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रकाश चंद यौवन (मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झालरापाटन) रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर हमीद अहमद ( भूगोल विभाग अध्यक्ष राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, झालावाड़), प्रोफेसर इकबाल फातिमा (इतिहास विभाग अध्यक्ष ) एवं सुरेश चंद्र निगम (अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झालावाड़) उपस्थित रहे। अतिथियों के स्वागत उपरांत, अंजुमन के अध्यक्ष डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी ने तारुफ़ी कलमात पेश करते हुए झालावाड़ रियासत में उर्दू शेर-ओ-अदब की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने महाराजा भवानी सिंह जी एवं राव राजेंद्र सिंह जी के उर्दू साहित्य के विकास में योगदान की सराहना की। साथ ही,

उन्होंने रियासत काल एवं स्वतंत्रता के बाद सक्रिय रही ऐतिहासिक अंजुमनों—अंजुमन अदब, बज़्म-ए-निरंग, बज़्म-ए-शफ़ीक आदि—का उल्लेख करते हुए उनकी साहित्यिक सेवाओं को याद किया। डॉ. टोंकी ने अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू (हिंद) राजस्थान के इतिहास, उद्देश्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए झालावाड़ शाखा की स्थापना की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने संस्था के भावी कार्यक्रमों एवं कार्ययोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात अंजुमन की कार्यकारिणी की घोषणा की गई और सभी पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। प्रमुख पदाधिकारियों में सरपरस्त राकेश कुमार नायर, मुशीर-ए-आला प्रो. हमीद अहमद एवं सैयद जुबेर अली, मुशीर-ए-खास सुरेश चंद्र निगम, सदर डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी, सेक्रेटरी यूनुस खान, जॉइंट सेक्रेटरी अरमान खान, कन्वीनर कवयित्री असमा खान ‘बहार’, मीडिया एवं तर्जुमा प्रभारी आसिफ शेरवानी, एडवोकेट तनवीर, खाजिन अब्दुल गनी एवं दानिश अहमद ‘दानिश’ शामिल रहे। मुशायरा एवं कवि सम्मेलन: दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अजीम बेग अजीम ने की। मंच पर राकेश

कुमार नेयर एवं प्रकाश चंद यौवन भी विराजमान रहे। कार्यक्रम की निज़ामत शायर दानिश अहमद ‘दानिश’ ने बखूबी निभाई। मुशायरे में नौजवान शायर अयान खान ने अपने अशआर से समां बांधा: नमाज़-ए-इश्क पढ़ेंगे तेरी गली के अंदर, वुज़ू करेंगे हम अपनी चश्म-ए-तर के अंदर। कवि तुलसीराम ‘तुलसी’ ने प्रेम और संवेदना पर आधारित पंक्तियां प्रस्तुत कीं: आप ही ने तो सिखाया प्यार करना भी हमें, आप तो यूँ बेवफ़ाई की न बातें कीजिए। कवि देवेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए कहा: एक सुबह की सैर में मुझको हर इंसान मिला, कोई हिंदू मिला तो कोई मुसलमान मिला, मैंने उनसे की राम-राम, सलाम—यूँ मुझको एकता में महका हुआ हिंदुस्तान मिला। कवि चेतन शर्मा जी ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी पंक्ति रही - बंदीशे जब से लगी है वफाएं भूल गए हैं। कवि धनीराम समर्थ ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी महत्वपूर्ण पंक्तियां रही- हम जलायेंगे तब, दीप जल पायेगा। बाग सींचेंगे तब, फूल खिल पायेगा।। एवं अन्य कवियों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। वरिष्ठ शायर अजीम बेग ‘अजीम’ ने

अपनी ग़ज़ल से खूब वाहवाही लूटी: उनकी उल्फत में मोहब्बत में यह हालत हो जाए, आँख जब बंद करूँ उनकी ज़ियारत हो जाए। शायरा आफरीन खान ने भी अपने कलाम से श्रोताओं को प्रभावित किया: क्या हुई ख़ता, क्यों ख़फा-ख़फा से लगते हो, क्या करोगे वफ़ा, तुम बेवफ़ा से लगते हो। कवि राकेश कुमार नेयर ने अपने विचारों का प्रभावी इज़हार किया: यारों यह बस बतलाने वाली बात नहीं है, मेरा यह साया भी मेरे साथ नहीं है। कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर दार अल-अर्कम के डायरेक्टर श्रीमान सैयद जुबेर अली ने अतिथियों एवं पधारे हुए कवियों, शायरों और बुद्धिजीवियों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम में हबीब खान, जावेद खान, वजाहत अली, जगदीश सोनी, अनीस अहमद, रशीद मियां, तौकीर आलम, सादिक भाई, रेखा सक्सेना सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहेॆॆ। यह स्थापना समारोह न केवल उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि हिंदी-उर्दू की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहज़ीब को भी मजबूती प्रदान करने वाला यादगार आयोजन रहा।

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    झालावाड़ में अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू राजस्थान की ब्रांच अंजुमन तरक्की उर्दू, झालावाड़ (राजस्थान) के स्थापना समारोह (इफ्तेताही तकरीब) का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें पहले सत्र में उद्घाटन समारोह तथा दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रकाश चंद यौवन (मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झालरापाटन) रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर हमीद अहमद ( भूगोल विभाग अध्यक्ष राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, झालावाड़), प्रोफेसर इकबाल फातिमा (इतिहास विभाग अध्यक्ष ) एवं सुरेश चंद्र निगम (अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झालावाड़) उपस्थित रहे।
अतिथियों के स्वागत उपरांत, अंजुमन के अध्यक्ष डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी ने तारुफ़ी कलमात पेश करते हुए झालावाड़ रियासत में उर्दू शेर-ओ-अदब की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने महाराजा भवानी सिंह जी एवं राव राजेंद्र सिंह जी के उर्दू साहित्य के विकास में योगदान की सराहना की। साथ ही, उन्होंने रियासत काल एवं स्वतंत्रता के बाद सक्रिय रही ऐतिहासिक अंजुमनों—अंजुमन अदब, बज़्म-ए-निरंग, बज़्म-ए-शफ़ीक आदि—का उल्लेख करते हुए उनकी साहित्यिक सेवाओं को याद किया।
डॉ. टोंकी ने अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू (हिंद)
राजस्थान के इतिहास, उद्देश्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए झालावाड़ शाखा की स्थापना की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने संस्था के भावी कार्यक्रमों एवं कार्ययोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इसके पश्चात अंजुमन की कार्यकारिणी की घोषणा की गई और सभी पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। प्रमुख पदाधिकारियों में सरपरस्त राकेश कुमार नायर, मुशीर-ए-आला प्रो. हमीद अहमद एवं सैयद जुबेर अली, मुशीर-ए-खास सुरेश चंद्र निगम, सदर डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी, सेक्रेटरी यूनुस खान, जॉइंट सेक्रेटरी अरमान खान, कन्वीनर कवयित्री असमा खान ‘बहार’, मीडिया एवं तर्जुमा प्रभारी आसिफ शेरवानी, एडवोकेट तनवीर, खाजिन अब्दुल गनी एवं दानिश अहमद ‘दानिश’ शामिल रहे।
मुशायरा एवं कवि सम्मेलन:
दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अजीम बेग अजीम ने की। मंच पर राकेश कुमार नेयर एवं प्रकाश चंद यौवन भी विराजमान रहे। कार्यक्रम की निज़ामत शायर दानिश अहमद ‘दानिश’ ने बखूबी निभाई।
मुशायरे में नौजवान शायर अयान खान ने अपने अशआर से समां बांधा:
नमाज़-ए-इश्क पढ़ेंगे तेरी गली के अंदर,
वुज़ू करेंगे हम अपनी चश्म-ए-तर के अंदर।
कवि तुलसीराम ‘तुलसी’ ने प्रेम और संवेदना पर आधारित पंक्तियां प्रस्तुत कीं:
आप ही ने तो सिखाया प्यार करना भी हमें,
आप तो यूँ बेवफ़ाई की न बातें कीजिए।
कवि देवेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए कहा:
एक सुबह की सैर में मुझको हर इंसान मिला,
कोई हिंदू मिला तो कोई मुसलमान मिला,
मैंने उनसे की राम-राम, सलाम—यूँ मुझको एकता में महका हुआ हिंदुस्तान मिला।
कवि चेतन शर्मा जी ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी पंक्ति रही -
बंदीशे जब से लगी है वफाएं भूल गए
हैं।
कवि धनीराम समर्थ ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी महत्वपूर्ण पंक्तियां रही- हम जलायेंगे तब, दीप जल पायेगा।
बाग सींचेंगे तब,
फूल खिल पायेगा।।
एवं अन्य कवियों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।
वरिष्ठ शायर अजीम बेग ‘अजीम’ ने अपनी ग़ज़ल से खूब वाहवाही लूटी:
उनकी उल्फत में मोहब्बत में यह हालत हो जाए,
आँख जब बंद करूँ उनकी ज़ियारत हो जाए।
शायरा आफरीन खान ने भी अपने कलाम से श्रोताओं को प्रभावित किया:
क्या हुई ख़ता, क्यों ख़फा-ख़फा से लगते हो,
क्या करोगे वफ़ा, तुम बेवफ़ा से लगते हो।
कवि राकेश कुमार नेयर ने अपने विचारों का प्रभावी इज़हार किया:
यारों यह बस बतलाने वाली बात नहीं है,
मेरा यह साया भी मेरे साथ नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर दार अल-अर्कम के डायरेक्टर श्रीमान सैयद जुबेर अली ने अतिथियों एवं पधारे हुए कवियों, शायरों और बुद्धिजीवियों का शुक्रिया अदा किया।
कार्यक्रम में हबीब खान, जावेद खान, वजाहत अली, जगदीश सोनी, अनीस अहमद, रशीद मियां, तौकीर आलम, सादिक भाई, रेखा सक्सेना सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहेॆॆ।
यह स्थापना समारोह न केवल उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि हिंदी-उर्दू की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहज़ीब को भी मजबूती प्रदान करने वाला यादगार आयोजन रहा।
    user_HARI MOHAN CHUDAWAT
    HARI MOHAN CHUDAWAT
    Local News Reporter झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • Post by Hadoti samrat
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    Post by Hadoti samrat
    user_Hadoti samrat
    Hadoti samrat
    झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • रामगंजमंडी के खैराबाद बायपास रोड पर एक तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे बाइक सवार तीन लोग घायल हो गए। इनमें एक महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे मध्यप्रदेश के संधारा निवासी अंजू बाई, सीमा, और हेमंत शादी समारोह में शामिल होकर अपने गांव लौट रहे थे।
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    रामगंजमंडी के खैराबाद बायपास रोड पर एक तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे बाइक सवार तीन लोग घायल हो गए। इनमें एक महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे मध्यप्रदेश के संधारा निवासी अंजू बाई, सीमा, और हेमंत शादी समारोह में शामिल होकर अपने गांव लौट रहे थे।
    user_Aajam Choudhary
    Aajam Choudhary
    Riportar रामगंज मंडी, कोटा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • बपावर क्षेत्र में आज सुबह अचानक आग लगने की घटना हुई। मौके पर तुरंत दमकल टीम पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। दमकल कर्मियों की कुशल कार्रवाई से आग पर तेजी से काबू पाया गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। स्थानीय लोग भी राहत की सांस ले रहे हैं।
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    बपावर क्षेत्र में आज सुबह अचानक आग लगने की घटना हुई। मौके पर तुरंत दमकल टीम पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। दमकल कर्मियों की कुशल कार्रवाई से आग पर तेजी से काबू पाया गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। स्थानीय लोग भी राहत की सांस ले रहे हैं।
    user_Mangilal Charan
    Mangilal Charan
    Local News Reporter रामगंज मंडी, कोटा, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • अपनी बेटी के सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए आज ही नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।
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    अपनी बेटी के सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए आज ही नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।
    user_Rakesh Nagar
    Rakesh Nagar
    Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • Bhastrika Pranayam at home
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    Bhastrika Pranayam at home
    user_Jagdish Chandra Sharma
    Jagdish Chandra Sharma
    Video Creator छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    39 min ago
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत
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    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत
    user_Sanjay Kumar yati
    Sanjay Kumar yati
    गरोठ, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • झालावाड़-में सन टू ह्यूमन फाउंडेशन द्वारा आयोजित छह दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर में दूसरे दिन आज लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। हालांकि शिविर का समय आधा घंटा पहले अल सुबह 5:30 बजे कर दिया गया था, इसके बावजूद राधा रमण ग्राउंड महिला-पुरुषों और युवक-युवतियों से खचाखच भरा रहा। आयोजकों ने बताया कि आज दोपहर को परम आलय जी झालावाड़ पहुंच गए हैं। वे अगले तीन दिनों तक स्वयं ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास करवाएंगे। शिविर के दूसरे दिन फाउंडेशन से जुड़ी साधिका सहजों बाई ने 'नाभि झटका' प्रयोग के सात चरणों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने उपस्थित लोगों को जंपिंग विद ब्रीदिंग, वाइब्रेशन, क्लेपिंग, सिर थपथपाना, ताड़ासन, हडडासन और उकड़ू आसन जैसे सातों चरणों का अभ्यास भी करवाया। इसका उद्देश्य था कि प्रतिभागी शिविर के बाद भी इनका दैनिक जीवन में अभ्यास कर स्वास्थ्य लाभ ले सकें। उन्होंने बताया कि नियमित इनका अभ्यास करने से स्थूल शरीर ही नहीं बल्कि शुक्ष्म शरीर भी मजबूत होता है। साधिकाओं ने 'सम्यक आहार' के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी दी। सहजों बाई ने बताया कि भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं होता, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने जोर दिया कि सुबह उठने के बाद शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया जारी रहती है, इसलिए पहला भोजन हल्का और क्षारीय होना चाहिए। शिविर में प्रतिदिन एल्केलाइन नाश्ता परोसा जाता है, जिसमें 20 से 25 प्रकार के आइटम होते हैं। इन खाद्य पदार्थों में नमक, शकर या किसी प्रकार का तेल नहीं होता। ये सभी सीधे प्रकृति से प्राप्त होते हैं, जिससे वे सुपाच्य होते हैं और शरीर को दिन भर के लिए आवश्यक मिनरल्स भी प्रदान करता है।
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    झालावाड़-में सन टू ह्यूमन फाउंडेशन द्वारा आयोजित छह दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर में दूसरे दिन आज लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। हालांकि शिविर का समय आधा घंटा पहले अल सुबह 5:30 बजे कर दिया गया था, इसके बावजूद राधा रमण ग्राउंड महिला-पुरुषों और युवक-युवतियों से खचाखच भरा रहा।
आयोजकों ने बताया कि आज दोपहर को परम आलय जी झालावाड़ पहुंच गए हैं। वे अगले तीन दिनों तक स्वयं ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास करवाएंगे।
शिविर के दूसरे दिन फाउंडेशन से जुड़ी साधिका सहजों बाई ने 'नाभि झटका' प्रयोग के सात चरणों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने उपस्थित लोगों को जंपिंग विद ब्रीदिंग, वाइब्रेशन, क्लेपिंग, सिर थपथपाना, ताड़ासन, हडडासन और उकड़ू आसन जैसे सातों चरणों का अभ्यास भी करवाया। इसका उद्देश्य था कि प्रतिभागी शिविर के बाद भी इनका दैनिक जीवन में अभ्यास कर स्वास्थ्य लाभ ले सकें। उन्होंने बताया कि नियमित इनका अभ्यास करने से स्थूल शरीर ही नहीं बल्कि शुक्ष्म शरीर भी मजबूत होता है।
साधिकाओं ने 'सम्यक आहार' के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी दी। सहजों बाई ने बताया कि भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं होता, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने जोर दिया कि सुबह उठने के बाद शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया जारी रहती है, इसलिए पहला भोजन हल्का और क्षारीय होना चाहिए।
शिविर में प्रतिदिन एल्केलाइन नाश्ता परोसा जाता है, जिसमें 20 से 25 प्रकार के आइटम होते हैं। इन खाद्य पदार्थों में नमक, शकर या किसी प्रकार का तेल नहीं होता। ये सभी सीधे प्रकृति से प्राप्त होते हैं, जिससे वे सुपाच्य होते हैं और शरीर को दिन भर के लिए आवश्यक मिनरल्स भी प्रदान करता है।
    user_HARI MOHAN CHUDAWAT
    HARI MOHAN CHUDAWAT
    Local News Reporter झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    10 hrs ago
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